Monday, December 27, 2021

येस्टी - लाल परी ( भोयरी बोली )

येस्टी - लाल परी
( भोयरी कविता )


गाव खेडा नगर स्यहर
धाये दादा लाल परी
आवन जावन को साधन
येस्टी को च आजवरी ।१।

स्यारा का पोटुबाटूना
बिह्या बजार की वारी
माया ममता की येस्टी
बाई सी लेकुरवारी ।२।

हालटिंग की पाव्हनी
मुक्काम सकार वरी
जास धुड्डो उडावत
सडक सोनपिवरी ।३।

नान्हा मोठा संग नातो
येस्टी सबन की प्यारी
इस्ट्यांड को ठिकानो
अयरावत सवारी ।४।

हडताल को हो हल्लो
आयी बिपदा जी भारी
चाक थांबेस येस्टी को
दुखी स जनता सारी ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, December 23, 2021

माती माय को पोरग्यो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माती माय को पोरग्यो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली


गाना म भरतुहरी
मन म मांडव - धार
माती माय को पोरग्यो
म्हरो भोरो कास्तकार ।१।

कास्तकारी वो की पूंजा
खेत वो को दरबार
बाराई कार झिजस
झेल कन् सारो मार ।२।

सरकार को तितंबो
पावूस पानी की मार
डोरा म स बरसाद
पर गडी दिलदार ।३।

कोनी पोटी नी देत जी
देख कन् कास्तकार
राज आयो गुलाम को
राजो भयेस बेकार ।४।

दवाखाना म भरती
तब्येत म नी सुधार
खेत बासन गहान
सारो खटलो उधार ।५।

वोला डायेस येकटो
कुनी को च नी आधार
घास देस सबन ला
वो क पेट म अंधार ।६।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, December 22, 2021

अजब गजब - ८४ : श्री सिहडदेवजी सांखला पंवार. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८४ : श्री सिहडदेवजी सांखला ( पंवार )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गज थके नि गजकेसरी , मर्द थके न मजबूत
शेर थके नि सांखलो ,  रणबांकुरो रजपूत ।

राजस्थान क नागौर जिला म रूण गांव ( रूणगढ़ ) स . नागौर पासिन ४७ कि.मी. दूर रूण गांव को ताम्बावति अन् कोयला पाखण इ पुरानो नाव . 
परमार की सांखला पंवार या येक स्याखा स . ' शंख कुल ' का मतलब ' सांखला '. रूण गांव सांखला पंवार की राजधानी होती . रूण गांव की सांखला पंवार खानदान म विक्रम संवत १२७१ ला सोम्मार क दिन सीरी सिहडदेव जी सांखला को जलम भये . सीरी सिहडदेव जी सांखला ' सीरी भोमिया जी महाराज ' क नाव कन् परसिध्द भया . भोमिया को मतलब भूमि पति ! भूमि पति को मतलब राजो . 
भोयर इ स्यबद बी भूमि पति ( राजा )  क मतलब संग च जुड्यो स . 
नान्हपन पासिन च सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार , सीरी भोमिया जी महाराज वीर पराक्रमी होता . माय चामुंडा देवी का वूई मोठा भगत होता . माय चामुंडा देवी क सेवा म वून न आपरो सिर ( शिश ) काट कन् अरपन कऱ्यो . माय चामुंडा देवी परसन्न भयी आन् देवी माय न भोमिया जी महाराज ला वरदान देये क कार ( काल ) बी तुमार रस्ता पासिन दूर रहेन . 
सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार भोमिया जी महाराज जी का पाच बिह्या भया . पाच की पाच रानीना सरग म क अपसरा वानी देखन ला साजरी होती . 
सीरी भोमिया जी महाराज क बेरा दिल्ली को राजो अलाउद्दीन खिलजी होतो . जुलुम जबरदस्ती , मनमानी आन् अधर्म को राज होतो . येन पापी राजा की पापी नजर लोगना क बू - बेटी पर रव्हत होती . वोन येक साठी कानून च बनायतो . जहान बी बिह्या होत होतो , वहान क लाडी को डोलो पापी अलाउद्दीन खिलजी क हरम म पठावन लागत होतो . वोको मन भऱ्या बास्त च वू लाडी ला वापिस धाडत होतो . 
अलाउद्दीन खिलजी ला मालूम भये क सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) की पाच बी लाडीना सरग क अपसरा सरिखी साजरी स . वोन सरदार बद्रुद्दिन ला बलाये आन् वोला सांगे क रूण गढ़ ला इतल्ला पठावो . सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ला बोलो क येक रानी ( लाडी ) को डोलो हरम म पठावो . सरदार बद्रुद्दिन न कह्ये क म्हरी रिस्तेदारी रूण गांव म स . असो करनो बेस वाटेन का ? 
बद्रुद्दिन न रूण गांव ला खबर पठाई . सीरी भोमिया जी महाराज न येक दासी ला सजाय धजाय कन् डोली म बसाडी आन् डोलो पुग्यो अलाउद्दीन खिलजी क हरम म . वा दासी पेट सिन रही , पर वोला लय तकलीफ होय रहीती . सारा हकीम बैद भया पर आराम नि पड्यो . तब रानी बनी दासी न कह्ये क मोला रूण गांव क सिवकुंड को पानी पाज देव , वोकन च आराम पडेन . अलाउद्दीन न सिवकुंड को पानी ल्यावन साठी मानूस पठाया . रात भयीती . द्वारपाल न गांव को दरुजो नि खोल्यो आन् वून ला बाहिर क नाली को पानी देयो अन् कह्ये क येम सिवकुंड सिन पानी आवस . दासी ला आराम पड्यो . वोन अलाउद्दीन ला सांगे क वा रूण गढ़ की रानी नहाय त् दासी होय . अलाउद्दीन न रूण गढ़ ला असली रानी को डोलो पठावन को धाड्यो .  सीरी भोमिया जी महाराज न नाकबूल कऱ्यो. तब अलाउद्दीन न वापिस निरोप पठायो क सिरफ रानी क रूप को च दरस्यन त बी करावो . सीरी भोमिया जी महाराज न कह्ये क रूप त सोडो , तू न रानी की छाया बी देखन की कोसिस करी त तोरी दाढी मिसी भादर कन् बंगडी पह्यनाय कन् वापिस पठावून . या बात आयक कन् अलाउद्दीन खिलजी को डोकसो फिऱ्यो . वोन लढाई की तैयारी करी . सरदार बद्रुद्दिन संग वोकी बातचीत चाल रहीती . या बातचीत अलाउद्दीन खिलजी की पोटी ' शहजादी ' आइक रहीती . वा बी वहान आई आन् बाप ला कह्ये क सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ( सीरी भोमिया जी महाराज ) खूब साजरो सोभाव को स . वू सुख स्यांती कन् आपरो राज चलाय रह्येस . वोला माय चंडिका देवी को वरदान भेटेस . वू मोठो वीर स . स्यहजादी मंझार म बोली तेकन राजा न वोला दपटे . आन् कह्ये क तोला बी मरन की खूसी होयेन त् सरदार संग तू बी रूण गढ़ ला जा . 
सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी थोडाबूत सैनिक लेय कन रूण गढ़ ला , सीरी भोमिया जी महाराज ला ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) समझावन साठी आया . 
सीरी भोमिया जी महाराज गरज्या क , 
लागे कुल में दाग
दिल्ली डोला भेजता
अरे सिंग खाल मडदर मणि
नही कुनि जिंदा लेवता .....
अलाउद्दीन खिलजी की २२ लाख की फऊज नान्ह स रूण गढ़ संग लढाई करन ला आई . सीरी भोमिया जी महाराज का भाई बंद , फऊज न लढाई साठी मना करी . पर दुस्मन को सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी सीरी भोमिया जी महाराज किथिन संग रह्या . सीरी भोमिया जी महाराज न आपली पाच रानी को सिर  तलवार कन् कलम कऱ्यो . तब सह्यजादी न कह्ये क मु न मन क मन म तुमाला आपलो भरतार मानेतो . म्हरो बी सिर काट डावो . सीरी भोमिया जी महाराज न सह्यजादी को भी सिर कलम कऱ्यो आन् पाच रानी क हात क निस्यान संग च सहज्यादी क हात को निस्यान बी दिवाल पर मांड्यो . वासिन सीरी भोमिया जी महाराज चंडिका माय क दरस्यन साठी गया आन् आपरो सिर माय ला अरपन कऱ्यो . कट्यो सिर माय जवर देये अन् सरदार बद्रुद्दिन संग लढाई क मयदान म आया . २२ लाख की फऊज क आघ सिरफ दुय झना . बिना सिर क सीरी भोमिया जी महाराज न असी मारकाट मचाई क अलाउद्दीन खिलजी की अरधी फऊज काट डायी . अलाउद्दीन खिलजी ला पकड्यो आन् वकी दाढी मिसी काट कन् वोला बंगडीना पह्यनायी . अलाउद्दीन खिलजी जीव बाचाड कन् दिल्ली ला आयो . सरदार बद्रुद्दिन लढाई म काम आया . 
विक्रम संवत १३११ ला सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) ला वीरगति भेटी . 
पवार वंस को सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार इ रनबांकुरो महा पराक्रमी वीर सीरी भोमिया जी महाराज क नाव कन् परसिध्द भयो . 
पवार तीरथस्थली रूण गांव सीरी भोमिया जी महाराज को भव्य देऊर स , जहान वून क मस्तक ( सिर ) की पूंजा होस . आन् रूण गांव पासिन ३२ कि.मी. दूर गौवा गांव म वून क धड की पूंजा होस . 
* अखाडी ला रूण गांव आन् गौवा गांव म सीरी भोमिया जी महाराज को मेलो लागस . 
दो दो मेला नित भरे , पूजे दो दो थोर
शिश कटियो जिण थोर पर
धड जुझयो जिण थोर .......
जय सीरी भोमिया जी महाराज की...

( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढ़ा , जोधपुर ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, December 18, 2021

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बारह ए गैनी बग्वाली मेरो माधो नि आई
सोलह ऐनी श्राद्ध मेरो माधो नि आई ।

उत्तराखंड गढवाल म दिवारी ला बग्वाल कोस . बग्वाल ( दिवारी ) क बाद ११ व  दिन ' इगास पर्व ' मनावस . इ दिन येकादसी को रव्हस , तेकन येन दिवारी ला ' इगास बग्वाल ' इ नाव पड्यो . 
इगास क दिन गोड कारला आन् लाल बासमती चऊर को भात बनावस . 
भैलू : भैलू को मतलब स उजारो करनी वालो . भैलू ला च अंध्या बी कोस . अंध्या को मतलब अंधारो दूर करनी वालो . इगास पर्व प भैलू खेलनो इ मुख्य रिवाज स . चीड क झाड की लकडी को भैलू बनायकन् , वोला बार कन् भैलू खेलस . उत्तराखंड को इगास तिवार असो अनोखो स . 
इतिहास अन् मान्यता : * ४०० बरस पह्यलऽ , १७ वी सदी म गढवाल इलाखा क टिहरी पर पवार राजो महीपति स्याह को राज होतो . आन् येन राज को सेनापति होतो वीर भड़ माधो सिंह भंडारी . ( गढवाल की काला - भंडारी जाति परमार की च स्याखा स . सबन भंडारी सरनेम परमार नि हय . ) राजा न सेनापति वीर भड माधो सिंह ला तिब्बत प लढाई साठी पठायो . तिब्बत क द्वापाघाट क राजा संग वीर माधो सिंह की भयंकर लढाई भयी . येन युद्ध म द्वापाघाट को राजो हारे . वीर माधो सिंह न तिब्बत क जीत्या इलाखा क हद पर मुनारा गाड्या . येम का कयी मुनारा आब बी स . मैकमोहन हद की लाइन ठह्यरावन क बेरा येन च मुनाराना ला हद मानी . 
जंग त जीती पर वापसी आवन को वांधो भयो . वहान बरफ पडन ला लागी . रस्ता बंद भय गया . मोठऽ मुसकिल कन् वीर माधो सिंह अन् वून का सैनिक , रस्तो खोजत खोजत गढवाल क दुसांत इलाखा म पहुंच्या . 
येन बखत च दिवारी को तिवार बी आय कन् गयो . राजा आन् लोगना ला वाटे क माधो सिंह अन् वून का सैनिक जंग म काम आया होयेन . तमाम लोग दुखी होता . पूरऽ राज म कोनी न च दिवारी नी मनाई . दिवारी क बाद ११ व दिन माधो सिंह अन् सैनिक गढवाल म आया . आपलो सेनापति जीत कन् आयो , यकी राज्या ला अन् लोगना ला घाडी खूसी भयी . लोगना न दिवा बार कन् दिवारी को तिवार मनायो . आन् येन दिन ला च इगास बग्वाल कोस !
* भगवान सिरी राम लंका परीन अजुध्या आया . पर यकी खबर ११ दिन बास्त गढवाल म आई , तेकन लोगना न येन दिन दिवारी मनाई , असी बी येक मान्यता स . 
* भीम की येक राकस संग लय दिन वरी लढाई भयी . भीम न या लढाई दिवारी क ११ दिन बाद जीती , तेकन पांडव न दिवारी मनाई , असी बी इगास की येक मान्यता स . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, November 28, 2021

मह्यंगाई की हूर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मह्यंगाई की  हूर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

हीत भर पेट साठी
पड्ये जलम नपूर
महामारी कोरोना की
संग मह्यंगाई हूर ।१।

इत उत चितंबो च
बिघडेस ताल सुर
घर न्हाय दार दानो
येम कोको स कसूर ।२।

भूकीज्यास पोटुबाटू
देख्ये टुकुर टुकुर
ज्याम भयो गावगाडो
चक्को रोवे कुर कुर ।३।

इंधन नी वंगन नी
बिना बयील की धुर
कसो धकावनो गाडो
जान को स लय दूर ।४।

जोत सरी उम्मीद की
मान भयो चूर चूर
आस मरी जिंदगी की
कहान लुकेस नूर ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, November 18, 2021

अजब गजब - ८२ : अरथुना का देऊर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८१ : अरथुना का देऊर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान क बांसवाडा जिला म अरथुना या नानीसी पेठ स . बांसवाडा - अहमदाबाद रस्ता प बांसवाडा पासीन ३८ कि.मी. दूर अरथुना स . अरथुना ला ११ वी , १२ वी अन् १५ वी सदी सीन जुड्या खंडारा भया देऊरना साठी वरखस . ११ वी सदी म यहान वागड क परमार राजाना को राज होतो अन् अरथुना वोन राज की राजधानी होती . 
हनुमान गढ़ी नाव कन् परसिध्द देऊर क येक समूह म नीलकंठ महादेव मंदिर स . बाकी देऊरना क जवर येक कुंड अन् तीन सिवमंदिर स . हनुमान अन् बिस्नु देव को देऊर पह्यलऽ कार को स . येन च इलाखा म चवसठ योगिनि मंदिर बी स . 
इतिहास : * वागड इलाखा म ८ वी सदी म मालवा क परमार राजा उपेन्द्र न ' परमार राज ' की मेढ़ गाडी . बाद म येनच परमार वंस की डंगालना चंद्रावती , भीमनाल , किराडू , वागड म फयली . 
* मालवा क परमार राजा ' पुण्डरिक ' न पूरानी उमरावती / उत्थुनक ( अरथुना ) की थापना करीती . यहान क खुदाई म कितिक मूरतीना अन् ३० परीस बी जास्त देऊरना सापड्यास . 
* परमार राजो ' चामुंडा राजा ' क सिलालेख म लिख्योस क वून न ' मंदालेसा ' नाव क सिव मंदिर ला इ.स. १०७९ म आपलऽ पिताजी ' मण्डलिक ' क याद म बांध्येतो . तेकन येन देऊर को नाव ' मण्डलेश्वर मंदिर ' पड्यो . अरथुना क खुदाई म कयी दुरलभ देऊरना अन् मूरतीना निकरीस . अरथुना को पुरानो ' मण्डलेश्वर शिवालय ' मुख्य स . येकऽ सिवा यहान भगवान बिस्नु देव , भगवान बरमाजी इन का बी देऊरना स . ' मण्डलेश्वर शिवालय ' को बांधकाम महाराष्ट्र क हेमाडपंथी देऊर सरीखो स . सभामंडप सीन गाभारो लय खलतऽ स , जे म २ फीट उच्ची सिवलिंग अन् ३ फीट गोलाई की जलाधारी स . 
* इ.स. १०८० क येक सिलालेख म लिख्येस क , अनंतपाल नाव क वून क अधिकारी पोरग्या न बी सिवमंदिर की थापना करीती . 
# इतिहासकार न यहान क मूरतीना ला सात भाग म बाटेस . १. शैव संप्रदाय २. वैष्णव संप्रदाय ३. दुसरऽ दरजा की देवी देवताना ४. प्रतीकात्मक शिल्प ५. देवी की मूरतीना ६ . जैन मूरतीना ७. बाकी मूरती . 
# अथुरना का देऊर : 
१. मण्डलेश्वर महादेव 
२. चवसठ योगिनि मंदिर / पिपलिया महादेव मंदिर ( १२ वी सदी ) 
३. सोमेश्वर मंदिर 
४. हनुमान मंदिर - येन देऊर म हनुमान जी की सिवस्वरूप मूरती स . येकी थापना परमार राजो विजयराज न इ.स. ११०७ म करीती . 
५. हनुमान गढ़ी मंदिर समूह - यहान कारऽ पास्यान म बनी हनुमान जी की खूब मोठ्ठी मूरती स . यहान च नीलकंठ महादेव मंदिर स . 
६. कुम्भेश्वर मंदिर - इ देऊर इ.स. १०८० म बन्येतो . 
७. शैवाचार्य मंदिर - कानफाट्यो साधु क नाव कन् परसिध्द इ देऊर ११ वी सदी म बन्येस . इ देऊर नाथ संप्रदाय सीन संबंधित स . 
८. जैन मंदिर
९. कन्धार डेरा मंदिर - उच्ची टेकडा प दुइ देऊरना स , जिन ला ' कन्धार डेरा ' क नाव कन् वरखस . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, October 29, 2021

काली अमावस रात. Hindi Language _ हिंदी भाषा

काली अमावस रात 
Hindi Language _ हिंदी भाषा

काली अमावस रात
रहे भरी दिखे खाली
सोंख लेती बरसात
जैसे जमीन रेतीली ।१।

काली अमावस रात
चंदा को भी निगली
छाया छोड गयी साथ
करे चांदनी चुगली ।२।

काली अमावस रात
कर बगावत डाली
दीप संग दीप साथ
खोज रोशनी निकाली ।३।

काली अमावस रात
पकवान सजी थाली
महल कुटीया साथ
खुशीयां बजाएं ताली ।४।

काली अमावस रात
जगमगाई दिवाली
सपनों भरी सौगात
आशा करें रखवाली ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, October 27, 2021

अजब गजब - ८० : मनी आर्डर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मनी आर्डर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भारतीय डाक विभाग न इ.स. १८८० म मनी आर्डर की सेवा चालू करी . मनी आर्डर क माध्यम कन् देस भर क १,५५,००० डाकखाना मिन देस भर कोना कोन्टा वरी लोगना ला घर बस्या आपलऽ सगा - सोयराना ला नगदी रुप्या पठावन की सुबिधा होती . 
मनी आर्डर पोस्ट आफिस किथिन जारी कऱ्यो ती असो आर्डर रव्हस , जी कोनी ला रुप्या क भुगतान साठी जारी करस , जेक नाव प पोस्ट आफिस क माध्यम कन् मनी आर्डर धाडस . पयसा वोला च भेटस , जे को नाव मनी आर्डर प लिख्यो रव्हस . मनी आर्डर को येक फायदो असो स क पयसा जे क नाव पर पठावस , वोला वूई घर पोसता भेटस . 
टेलिग्राम क वानी १३५ बरस पुरानी मनी आर्डर की  सेवा बंद भयी . 
आब मनी आर्डर को इलेक्ट्रॉनिक रूप चालू भयेस , EMO अन् IMO . 
EMO अन् IMO नाव की मनी आर्डर सरीखी सुबिधा डाक विभाग न चालू करीस , जेकन पयसा तुरुत पठावता आवस . 
EMO म १ रुप्या पासिन ५००० रुप्या पठावता आवस .
IMO म १००० रुप्या पासिन ५०, ०००/ रुप्या वरी रकम पठावता आवस . 
१९८६ म ५ देस संग IEMO सुबिधा चालू भयीती . आब ९७ देस म या सुबिधा स . 
भारत की २७ देस संग IEMO की सेवा येवस्था स . येम क नेपाल अन् भूटान संग दुय तरफा मनी आर्डर की सुबिधा स . बाकी २५ देस संग सिरफ आवन वाली च सुबिधा स . 
* मनी आर्डर की गोस्ट याद आईस खास कारन कन् ! भोयरी संस्कृति की दुय किताब वर्धा क अशोक पाठे साहेब न मंगाइती . येन दुय की रु. ३००/ की सहयोग रकम पाठे साहेब न EMO की सेवा बापर कन् धाडी . 
आब क मोबाइल बँकिंग , नेट बँकिंग क जमाना म बी डाक विभाग की १६० पुरानी मनी आर्डर की सेवा नवीन इलेक्ट्रॉनिक रूप म जिती स ! 
जय हो भारतीय डाक विभाग....
धन्यवाद पाठे साहेब....

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, October 26, 2021

घर - भाग ७. Hindi Language _ हिंदी भाषा

घर - भाग ७
Hindi language _ हिंदी भाषा

रातभर किसी को नींद नही आई . अजय की पत्नी भी मुंह फुला के बैठी थी . ससुरजी ऐसा कुछ बोलेंगे या करेंगे इस की उसे उम्मीद ही नही थी . अजय के सर पर हथौडे चल रहे थे . सिंधू यहि अनपेक्षित वातावरण सह न सकी . उसे तेज बुखार चढ़ गया . मनोहरराव ने सिंधू को टैबलेट दी और माथे पर ठंडे पानी की पट्टीयां रखने लगे . आज किसी ने खाना नही खाया था . घर रणभूमी मे तब्दिल हो चुका था . 
सुबह सुबह सिंधू का बुखार कुछ कम हुआ और उसे गहरी नींद लगी . 
अजय आज जीम नही गया . मनोहरराव उठे और किचन मे आए . चाय और बिस्कुट लेकर टेरेस पर बैठे . सर भारी लग रहा था . चाय पिने से थोडी राहत मिली . उनका फोन बज उठा . वे तुरंत अपना वैलेट लेकर पार्किंग मे आए और कार लेकर निकल पडे . 
आज सुबह कुछ ज्यादा ही अस्तव्यस्त थी . बहुत कुछ बिखरा पडा था ...... यादें , सपने और रिश्तों के मतलब भी ! घर की दिवारें सहमी थी .... इटें कांप रही थी किसी अनामिक भय से ! 
अजय बेडरूम से किचन मे आया . डायनिंग टेबल पर चाय की खाली प्याली थी . खिडकी से देखा तो टेरेस पर कोई नही था . उसने हौले से पापा की बेडरूम का दरवाजा खटखटाया . सिंधू की नींद खुल गई ; देखा तो मनोहरराव नही थे . दरवाजा खोला तो सामने अजय खडा था . 
' बोलो बेटा .' सिंधू ने कहा .
' कुछ नही.... पापा कहां है ? ' अजय ने धीरे से पुछा . 
' पता नही... कमरे मे तो नही है ..' सिंधू ने बताया . 
अजय किचन मे गया और पिने के लिए पानी गर्म करने लगा . उदासी की हवा बह रही थी घर मे . अजय ने पत्नी को आवाज लगाई और . वह आई और चाय - नाश्ता बनाने लगी . 
सिंधू ने मनोहरराव को फोन किया . 
' हैल्लो... ' सिंधू ने कहा .
' हा सिंधू... जल्दी बोलो . ' मनोहरराव ने कहा .
' इतनी सुबह सुबह बिना बताए कहां गये हो ? ' सिंधू ने पुछा . 
' कुछ जरूरी काम है... दोपहर के भोजन तक घर आता हू और सब बताता भी हू.. चिंता न करो .' मनोहरराव ने जवाब दिया . 
अजय ने मॉं को आवाज लगाई . सिंधू किचन मे आई. 
' बैठो मॉं...' अजय ने गर्म पानी का ग्लास डायनिंग टेबल पर रखते हुए कहा . 
बहु चाय और नाश्ता लेकर आई . तीनों नाश्ता कर रहे थे , लेकिन ध्यान पापा की कुर्सी पर था . 
दोपहर मे मनोहरराव आए . सिंधू बेडरूम मे आराम कर रही थी . 
' तबीयत कैसी है अब ? ' मनोहरराव ने आते ही सिंधू के माथे को छु कर कहा . 
' ठीक है... कहां थे आप ?' सिंधू ने चिंता से पुछा .
' बताता हू बाबा...  जगदीश राव के बेटे का ऐक्सिडेंट हुआ है . उसे अस्पताल मे भर्ति कराया है. अभी जगदीश राव गांव से अस्पताल पहुंचे और मै घर आया हू...' मनोहरराव ने कहा . 
' क्या ?? आपने मुझे बताया भी नहीं ... अभी चलो अस्पताल ..' सिंधू ने सुबकते हुए कहा . 
' रोना नही सिंधू... हम भोजन करते है और तुरंत अस्पताल जाते है... चलो , उठो .' मनोहरराव ने सिंधू के आंसू पोंछ कर थपथपाते हुए कहा . 
जगदीश राव सिंधू का छोटा भाई था . उनका बेटा पुना मे होस्टेल मे रह कर इंजिनिअरिंग की पढ़ाई कर रहा था . सुबह क्लास जाते समय एक वाहन ने उस के मोटरसाईकिल को टक्कर मारी . हेल्मेट की वजह से सर तो बच गया था लेकिन दाहिने हाथ और पैर मे काफी चोंटे थी ‌. पैर मे सूजन थी . एक सज्जन ने उसे अस्पताल पहुंचाया . अस्पताल से ही उस ने मनोहरराव को किया था , और मनोहरराव तुरंत ही वहां पहुंचे थे . 
अजय बाहर गया था और बहु लैपटाप पर अपना काम कर रही थी . 
दोनों किचन मे आए . किचन मे हलचल सुन कर बहू आई . मनोहरराव को देख कर ठिठकी . 
' खाना गर्म कर दू ? ' बहू ने सिंधू स पुछा . 
' रहने दो बेटा ... मै कर लूंगा .' मनोहरराव ने बीच में बोला . 
' वह कर रही है ना... आप आइएं इधर ...' सिंधू ने कहा . 
भोजन पश्चात दोनों बाहर निकले .
' कही बाहर जा रहे है ? ' बहू ने पुछा .
' हां... अस्पताल जा रहे है ..' सिंधू ने जवाब दिया . 
दोनों अस्पताल पहुंचे . बहन को देख कर जगदीश राव उठे और सिंधू के पैर छुएं . 
' साहब ने बचा लिया आज बेटे को...' जगदीश राव रुआंसे स्वर मे हाथ जोड कर कहा . 
' अरे वह भी मेरे बेटे जैसा ही है...सब ठीक हो जाएगा , चिंता ना करो... चलो बेटे के पास .' मनोहरराव ने जगदीश राव के कंधे पर हाथ रख कर कहा .     ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, October 21, 2021

अजब गजब - ७९ : हीरई माता. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७९ : हीरई माता 
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नमः ।
कल्याणै कामदायै च वृध्दयै सिध्दयै नमो नमः ।।


मध्यप्रदेस क खरगोन जिला म भीकनगांव पासीन सनावद सडक प २५ कि.मी. दूर हीरापुर स . यहान मन्नत पूरी करनी वाली कुलदेवी ' हीरई माता ' को देऊर स . 
देऊर म हीरई माता अन् भगवान शिवजी की थापना स . 
हिरई माता क नाव परीन च यहान बसे गाव ला ' हीरापुर ' इ नाव पड्यो . येन हजार बरस पुरानऽ देऊर को आवार खूब मोठो स . हिरई माय क देऊर म चवसठ योगिनि को बास स . आवार म भगवान गनेस, बिस्नु देव , दुरगा माय , हनुमान जी , लक्षुमी नारायन असी कयी मूरतीना स . इ देऊर पुरातत्त्व विभाग क अखत्यारी म स . सार आवार म परमार कार की दुरलभ मूरतीना स . 
हीरापुर क इलाखा म अंबा , बेडिया , भूलगांव , बांगरदा , बांसवा , कोटल्याखेडी , धरगांव , मालखेडा , नूरीयाखेडी म आब बी पंवार वंस क लोगना की बस्ती स . येन निमाड क इलाखा पर पंवार वंस न राज करेस . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * यहान का पंवार सांगस क वूई माऊंट अबू परीन धार आया . वहान महाकाली देऊर जवर भयरव जी की थापना करी . वहा सिन अमझेरा आया . अमझेरा म अमका - झुमका माता को देऊर आन् बावडी बांधी . ११ वी / १२ वी सदी म अमझेरा सिन हीरापुर आया . यहान कुलदेवी हीरई माता को देऊर बांध्ये आन् हीरापुर गाव बसाडे . 
* नि:संतान की मनोकामना हीरई माता पूरी करस , असी मान्यता स . 
* येन इलाखा का पंवार हीरई माता की कुलदेवी क रूप म पूंजा करस . 
* इ.स. १९७२ म यहान की परमार कार की दुरलभ ४ मूरतीना की चोरी भयी . ( येम भगवान भोलेनाथ क कोरा म बसी पाराबती अन् दूध पेता भगवान गनेस की अति दुरलभ मूरतीना बी सामिल स .) 

२. पूजा / पर्व : * उसो त साल भर भगत लोगना को यहान आनो जानो चालूच रव्हस . पर नवरातरी म हीरई माता की खास पूंजापाती आन् अनुस्ठान होस . 
' जय हो हीरई माय ' 

( सहयोग : इंजि. जालमसिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, October 20, 2021

गलती. Hindi Language _ हिंदी भाषा

गलती
Hindi Language _ हिंदी भाषा

सभी चाहते थे हमें बदलना
अपने मनमुताबिक.....
हम गढ़ते , ढ़लते गये उनकी चाहत अनुरूप
नखशिखान्त बदल गयी हस्ती !
अंत में झेलते है उलाहना --
आप काफी बदल गये , पहले तो ऐसे न थे...
अब हम सदमे मे , गलती किसकी ????

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, October 18, 2021

रोज सूर्व्यदेव नवो ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रोज सूर्व्यदेव नवो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पत्तो सकारकन को
पुसे नी कोनी ला कोनी
गड्या मुर्दाना उखाडे
पास जावन की बानी ।१।

नाव कुर को गुताडो
वोकी रमाईस धुनी
धुव्वो फुक फुक कन
डोरा चुरचुऱ्या ग्यानी ।२।

खंती खांद खांद कन
काय भेटे कोनजानी
घाव कुरुप बाहाडे
होस आमारी च हानी ।३।

भागादौडी देस देस
भरनला पेटपानी
सपी केतरी पीढीना
सरी गनती निस्यानी ।४।

गयो उनारो हिवारो
बरसाद को गा पानी
मन सदसद्यो असो
कब आयेन बरानी ।५।

जीव आये जीव जाये
दुय दिन जिंदगानी
रागलोभ को झमेलो
सतावस मनमानी ।६।

रोज सूर्व्यदेव नवो
रोज नवीन कहानी
लिखो खुद क पाना प 
गीता रामायन मानी ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, October 16, 2021

घर - भाग ६. Hindi Language _ हिंदी भाषा

घर - भाग ६
Hindi language _ हिंदी भाषा

रास्ते मे मार्केट से कुछ सामान लेकर दोनों पुना पहुंच रहे थे . सिंधू सुकून महसूस कर रही थी . मोहनराव एफ एम के गानों पर इशारें कर कर सिंधू को सता रहे थे... मस्ती में थे .
दोपहर हुई थी . मनोहरराव ने सडक किनारे एक रेस्टॉरंट के आगे कार खडी की . दोनों खाना खाकर निकल पडे . 
पार्किंग मे कार आते ही चौकीदार ने बडे अदब से नमस्कार किया . मनोहरराव ने डिकी से बैग और गांव से दिया हुआ सामान बाहर निकाला . सिंधू कुछ सामान लेकर लिफ्ट मे गई . चौकीदार कार के पास आया . मनोहरराव और चौकीदार बाकी सामान लेकर फ्लैट मे आये . अजय बाहर था और बहू अपने कमरे मे ऑफिस के कार्य में व्यस्त थी . सिंधू किचन से चाय लेकर आई . मनोहरराव और चौकीदार हॉल मे बैठे थे . सिंधू ने चाय रखी और एक कप लेकर बहू के कमरे मे गई . 
'  आपने क्यो तकलिफ की.... मै ने अभी अभी चाय ली थी...' बहू ने लैपटाप हटाते हुए कहा . 
' और ले लो...' सिंधू ने मुस्कुरा कर कहा और वापिस मुडी . 
' अरे सिंधू , गांव से सामान आया है , उस में से कुछ इसे भी दे दो..' मनोहरराव ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा . 
' रहने दिजीए साहब... ' चौकीदार ने सकुचाते हुए कहा . 
' नही , दो मिनट रूको... गांव की चीजें बार- बार थोडे ही मिलती है...' सिंधू ने कहा .
कुछ संतरे , सब्जीयां एक थैली मे भर कर सिंधू ने चौकीदार को दी . 
शाम को अजय आया . मनोहरराव बाहर ओपन टेरेस मे बैठे थे . अजय पापा के पास गया . दोनों बातचीत कर रहे थे . दोनों को सिंधू किचन से देख रही थी . 
दुसरे दिन अजय शाम को लौटा तो कम्पाउंड पर लगी तख्ती पढ़ कर सकते मे आ गया . वह तेजी से उपर आया . मनोहरराव और सिंधू टहलने गये थे . अजय ने तख्ती वाली बात पत्नी को बताई . उसका भी माथा ठनका ! मनोहरराव और सिंधू घर आए और टेरेस मे बैठे . अजय तमतमाते हुए आया . 
' यह क्या चल रहा है पापा ?' अजय ने बगल की कुर्सी पर बैठते हुए कहा . 
' क्या हुआ ?' सिंधू ने पुछा . 
' बाहर ' पेईंग गेस्ट ' की तख्ती लगी है . हमारे पास जगह कहां है और परायों को हम घर मे क्यों रखेंगे ? वैसे जरूरत भी क्या है ?' अजय ने गुस्से से कहा . 
' बात जरूरत की नही है बेटा , समय की है . तुमने जो फ्लैट लिया है , वह किराये से चढ़ाया है . अगर तुम्हे यहाँ कुछ असुविधा महसूस होती है तो तुम वहां रहने के लिए जा सकते हो . नही तो वहां का किराया घर मे घरखर्चे के लिए उपयोग में लाओ . अभी एक बेडरूम खाली पडा है , उस मे पेईंग गेस्ट रखेंगे तो क्या दिक्कत है ?' मनोहरराव ने कहा . 
' यह क्या बात हुई ! हम उधर रहने गये तो आपकी देखभाल कौन करेगा ? और पेईंग गेस्ट रखा तो हमारी प्रायव्हसी का क्या होगा ? आपके पास तो इतने पैसे है.... यह सब करने की क्या जरूरत है ?' अजय ने सवालों की झडी लगा दी . 
' देखभाल ! यह बात तो रहने दो . मैने जो पर्याय बताए है, उन में से तुम्हे कौनसा ठीक लगता है , यह बताओ . ' मनोहरराव ने कहा .
' आप क्या बोल रहे है , मेरी समझ के बाहर है.... इसे सठीयाना कहते है..' अजय बुदबुदाया . 
' क्या बोल रहे हो अजय ? अपनी मर्यादा में रहो...' सिंधू ने डांटते हुए कहा . 
' क्या बोला ?..' मनोहरराव ने पुछा . 
' कुछ नही... आप शांत रहो..' सिंधू ने कहा . 
अजय जाने के लिए उठा . 
' रूको.. यह मेरा घर है... और तुम बेटे जैसे रहोगे तो ही यह घर तुम्हारा है... बदतमीज का हरगीज नही... ' मनोहरराव ने गुस्से से कहा . 
सिंधू उन्हे शांत करने की कोशिश करने लगी.... अजय तेजी से अंदर गया .    ( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, October 11, 2021

घर - भाग ५. Hindi Language _ हिंदी भाषा

घर - भाग ५
Hindi language _ हिंदी भाषा

क्षितीज पर निली बैंगनी पर्वतमाला की लहरदार लकीर निले आकाश को प्राकृतिक तोरन प्रदान कर रही थी . अचानक मोहनराव ने कार की गति कम की और धीरे धीरे एक बडे होर्डिंग्ज के पास रोक दी . डैशबोर्ड से मोबाइल उठा कर होर्डिंग की तस्वीर खिंची . ... वहां बडे बडे अक्षरों में लिखा था , ' ज्येष्ठ सहनिवास कालोनी ' !
थर्मस से गरम पानी का एक घुंट लेकर मोहनराव ने इशारें से सिंधू को बोर्ड दिखाया . सिंधू के चेहरे पर बडा सा प्रश्नचिन्ह उलझन लिए खडा था !
' कुछ नहीं... ' मोहनराव बुदबुदाएं और इग्निशन स्टार्ट किया . 
कार थरथरा कर सडक पर आई और फिर हवा से बातें करने लगी . विविध भारती पर सुरीले नग्में बज रहे थे . 
' वैसे हम कहां जा रहे है ? ' सिंधू ने हौले से पूछा . 
' पहले गांव चलते है... फिर आगे की आगे...' मनोहरराव ने मजाकिया अंदाज में कहा . 
' गांव जा रहे है तो पहले बताना था ना.... इतने दिनों बाद जा रहे है , वह भी खाली हाथ ! ' सिंधू ने नाराज होते हुए कहा . 
' ओके बाबा... रास्ते मे कही रुक जाएंगे... ठीक ...' मनोहरराव ने अपनी ही मस्ती में जवाब दिया .
तभी मोबाइल की घंटी बजने लगी . मोहनराव ने ध्यान नही दिया . सिंधू ने मोबाइल उठाया और स्पिकर चालू किया . अजय का फोन था...
' हैल्लो ऽ... ' सिंधू ने कहा .
' कहां हो मॉं आप ? बिना बताएं कहां गये हो आप लोग ?' अजय ने नाराज होते हुए पुछा . 
' गांव जा रहे है बेटा...' सिंधू ने बताया .
' क्यों तुम्हारे परमिशन की जरूरत है क्या ?' मोहनराव ने डांटते हुए बोला . 
' नही पापा.... लेकिन बताते तो अच्छा होता...' अजय ने धीरे से कहां .
' अच्छे बुरे की समझ है हमें ... तुम बेवजह चिंता ना करो..' मोहनराव ने कहा और फोन काट दिया . 
सिंधू को कल से ही अटपटा लग रहा था . पर उसका मोहनराव पर इतना भरोंसा था की वह आंख मुंद कर उनकी बातें मान लेती थी . बेपनाह मुहब्बत करते थे मोहनराव सिंधू से ! सिंधू के एक एक आंसूओं को मोतीयों से तौला था उन्होंने ! वे सिंधू को कभी भी शोक , पीडा में नही देख सकते थे . सिंधू की घर की बताई बातों से उनका दिमाग घुम गया था ..... पर वह भाव उन्होंने चेहरे पर नही दिखने दिए . सदा हल्की मुस्कान लिए खडे रहते थे सिंधू के आगे . 
रास्ते मे छोटासा शहर आया . मनोहरराव ने मार्केट लाईन में कार पार्क की और सिंधू के दुकान मे गये . सिंधू ने कुछ कपडे और भेंटवस्तूएं ली .
हायवे से दाये हाथ पे छोटी सडक पर कार मुडी . कार अब धीमी गति से चल रही थी और मनोहरराव की यादें तेज रफ्तार से ! 
घर मे पहुंचते ही बाडे मे रौनक आ गयी . पुरा कुनबा इकठ्ठा हो गया... त्योहार सा माहौल ! रसोई की खुशबू ने मोहनराव की भूख बढ़ा दी . शाम के पहले दोनों और बच्चें खेत में टहलने गये. कितने वर्षों बाद वे खेत में आए थे....
रात देर तक गपशप चलती रही . 
सुबह मनोहरराव और सिंधू ने गांव से प्रस्थान किया . 
' अब कहां ? ' सिंधू ने पुछा . 
' वापिस पुना ..' मनोहरराव ने हंसते हुए कहा .
' आप भी अजीब है.. कह रहे थे ८-१० दिन के लिए जाना है.. आपको नही लगता यह अस्वाभाविक है !' सिंधू ने मोहनराव को गौर से देखते हुए कहा . 
मनोहरराव ने कार हायवे किनारे एक बडे से पेड की छाया मे खडी की . सिंधू को बाहर आने के लिए इशारा किया . सिंधू थर्मस लेकर आई . दोनों ठंडी छांव मे बैठे... मनोहरराव ने सिंधू का हाथ अपने हाथ मे लिया...
' कुछ कहना चाहते हो..' सिंधू ने पल्लू से मनोहरराव का चेहरा पोंछते हुए कहा .
' हां... बहुत कुछ... बहू का तुम्हारे साथ अभद्र व्यवहार मुझे कतई पसंद नही आया ... तू बहुत भोली है सिंधू . रिटायर्डमेंट के बाद भी बडी रकम घर मे आई थी , लेकिन उस वक्त इतनी उथल पुथल नही मची थी . अभी खेत के पैसे आने के बाद तो भूकंप ही आया.. घर मे तणाव महसूस कर रहा हूं . तुम्हारे साथ जो हो रहा है , वह मेरे साथ भी हो रहा है.. मैने तुम्हें बताया नही बस ! बच्चों के हिसाब से अब हमारी जिंदगी समाप्त हो चुकी है . क्या हम डुबते हुए सूरज को अपना जीवन अपने मनमुताबिक जीने का हक नही है ? उम्र निकल गयी नौकरी करते करते.. तुम्हारे साथ पल भर बैठ कर दिल की बात भी नही कर सका मै... घर , रिश्तेदारी , बेटे को तुमने अकेले संभाला... कभी कोई अपनी ख्वाहिश साझा नही की हम ने... बचपन में मुझे मॉं बाप ने संभाला... विवाहोपरांत तुमने मुझे ही नही , मेरी जिम्मेदारीयों को भी संभाला . हमारे सहजीवन मे मै ने कितना साथ दिया तुम्हारा ?... कुछ भी नहीं...' मनोहरराव ने भावुक स्वर मे कहा . 
सिंधू की आंखे भी छलछला उठी .
' ऐसा नही बोलते . आपने बहुत प्यार और सुख दिया है मुझे ... मुझे आपसे ना कभी शिकायत थी , ना रहेगी ... आप सोचते बहुत है . मै तो खुशनसीब मानती हूं अपने आप को , जो आप जैसा जीवनसाथी मुझे मिला ; और हर जनम में आप ही मेरे जीवनसाथी रहोगे . ' सिंधू ने मनोहरराव के कंधे पर सर रख कर कहा . 
मनोहरराव ने सिंधू का कपाल चुमा और आंसू पोंछने लगे .... दोनों के आंसू बह रहे थे.. अविरत ! दोनों एक दुसरे को नये सिरे से खोज रहे थे... बडे प्यार से !
' चलो चलते है... लोगबाग क्या सोचेंगे हमें देख कर..' सिंधू ने संयत होते हुए कहा और उठने लगी . 
' अरे बैठो... किसी को नही पडी है हमें देखने की... बस्स हमें ही ऐसा लगता है.. पानी दो जरा . ' मनोहरराव ने कहा . 
मनोहरराव ने पानी पीया . सिंधू सडक की ओर देख रही थी . 
' एक बात बोलू सिंधू ? ' मनोहरराव ने गंभीर स्वर मे कहा . 
' हां...' सिंधू ने कहा .
' तुमने मुझे पति कम और बच्चे जैसे ही जादा संभाला है ...' मनोहरराव ने कहा . 
' आप भी योग पति कम और बच्चे जैसे ही जादा हो ...' सिंधू ने मुस्कुरा कर कहा . 
दोनों के आंसू बह कर अब माटी का सुगंध लिए मासूम हंसी बिखर रही थी फ़िजा में ...दोनों मासूम बच्चों की तरह लिपट कर बैठे थे घनी छांव मे.. अब हायवे की ट्रैफिक भी उन्हें महसूस नही हो रही थी ... खोये थे अपनी ही दुनिया मे . 
- तभी एक ट्रक की हिंदी गाने के धून की हॉर्न बजने लगी...
' गोरी तेरा गांव बडा प्यारा ऽऽऽ.......'
' चलो अभी .' सिंधू ने झेंपते हुए कहा .
दोनों कार की ओर बढ़े .....( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, October 10, 2021

अजब गजब - ७८ : बीसहथ माता. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७८ : बीसहथ माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

यदुचितमत्र भवत्युररी कुरुतादुरुता पमपाकुरुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।

राजस्थान क जालौर किल्ला को नाव ' स्वर्णगिरी ' , अन् यहान परमार वंस को राज रह्ये . तब येन किल्ला म बीसहथ माता की थापना भयी . या बात स ८४३ बरस पह्यले की ! 
बीसहथ माता जैन समाज म कोचर , राजपूत समाज म परमार अन् राजपुरोहित समाज म सेवड़ गोत्र की कुलदेवी स . 
आब बीसहथ माता की ( जालौर किल्ला वाली ) मूरती जोधपुर क भैरूबाग जैन तीर्थ परिसर म बिराजमान स . 
बीसहथ माता सिंव्ह पर बसी स आन् दुय आंग भयरव की मूरतीना स . जेवनहाथ प पांढरो ( गोरो ) भयरव न डाख हाथ प कारो भयरव स . 
बीसहथ माता ला बीस हाथ स , तेकन नाव पड्यो , " बीसहथ माय " ! बीसहथ माय क हाथ म अक्षमाला , कुऱ्हाड , गदा , बाण , वज्र , कमल फुल , धनुस , कुंडिका , दंडस्यक्ति , तलवार , ढाल , स्यंख , घंटा , मधुपात्र , शूल , पाश , चक्र स . 
बीसहथ माय की सेवा - पूंजा पुजारी करस . पर माय को आंग धोवन को  , कपडा पेहरवन को काम बाई लोग च  करस . 

१. इतिहास अन् मान्यता : * जालौर पर परमार राज होतो . परमार राजो मदन ब्रम्हदेव न बि . संवत् १२३५ ( इ.स. ११७८ ) म किल्ला पर " बीसहथ माय " की थापना करी . परमार राज क बास्त यहान चौहान वंस को राज आयो . 
* इ.स. १३११ म जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी न हमलो कऱ्यो . तब वहान कान्हडदेव राजो होतो . राजा कान्हडदेव को पोरग्यो वीरमदेव रावल मोठो बाह्यदूर होतो . वीरमदेव ला बीसहथ माय को वरदान भेटेत्यो . जब लढाई होयेन तब वोका अस्तर स्यस्तर कब बी खतम नी होयेन ! माय बीसहथ वोला तलवार देती रहेन . पर येम येक बचन होतो.... वीरमदेव कब बी पास बीसहथ माय ला नी देखेन . आरपार की लढाई चाल रहीथी . वीरमदेव जीतन क काठा पर च होतो... तब वोन पास देख लियो... बस , बचनभंग भयो ! बीसहथ माय गुप्त भयी . अन् वीरमदेव ला वीरगति भेटी . 

* पृथ्वीराज रासो पोथी म बीसहथ माय को जिकर स . सम्राट पृथ्वीराज चौहान को परसिध्द दरबारी कवि चंद वरदाई न बीसहथ माय क सम्मान म स्तुति छंद लिख्यो स . 

* चौहान वंस क बास्त यहान राठौड वंस को राज आयो . बि. संवत् १८६० म राजा मानसिंग ला जोधपुर को राज भेट्यो . तब वून को सहयोगी मूथा सवाईराम कोचर न जालौर परीन बीसहथ माय की मूरती जोधपुर ला ल्याई . इ.स. १९३० म बीसहथ माय की जोधपुर म दुनन थापना भयी . 

२. पर्व : * नवरात म रोज माय को खास अभिसेक होस . 
* हरेक चयीत चांदनी ( उजरी ) अस्टमी ला हवन पूजन होस . 
* जेठ चांदनी ( उजरी ) पंचमी ला अभिसेक होस आन् झ्यंडो चढस . 

' जय जय बीसहथ माय '

( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, October 9, 2021

उपहार. Hindi Language _ हिंदी भाषा

उपहार 
Hindi language _ हिंदी भाषा

रास्ता भटक जाऊ मै
राह सही दिखलाना
भूल जाऊ धर्म कर्म
याद बलात् दिलाना ।

टूट कर बिखरा तो
कण कण जोड देना
हारे तन मन जब
उर्जा कृपा बरसाना ।

जिस कर्म से हो ग्लानि
दूर उससे रखना
घेर ले तम निराशा
आशा के दीप जलाना ।

जाऊ किसी भी दिशा में
पैर माटी के रखना
रहे लिखती कलम
यही उपहार देना ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

पहचान ( हिंदी कविता ). Hindi language _ हिंदी भाषा

पहचान
Hindi language _ हिंदी भाषा

पुण्यभूमी हिंदुस्थान
हम उसकी संतान
कहे सब हिंदुस्थानी
मेरी यही पहचान ।

नर रूप मिला हमें
मातापिता भगवान
परमात्मा की कृपा ने
तन मन किया प्रदान ।

जिस देश , वेश में हो
सागर या आसमान
सत्कर्म की राह पर
हम बनेंगे इन्सान ।

राम सीता कृष्ण राधा
शिव सति कृपा निधान
गंगा यमुना सरस्वती
हम जलबिंदू समान ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, September 29, 2021

लक्ष्य ( कविता ). Hindi Language _ हिंदी भाषा

लक्ष्य ( कविता )
Hindi language _ हिंदी भाषा

जिंदगी का लक्ष्य सामने
रास्तें नित नये आजमाना ।

तपना श्रम की भट्टी मे
व कुंदनसा चमकना ।

धर्म अर्थ काम मोक्ष के
चारों पुरुषार्थ निभाना ।

खोज लेना अपने हिस्से की
जमीं , आसमां , आशियाना ।

काल के भाल पट पर
कुछ निशान छोड जाना ।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, September 28, 2021

टप्या रस्ता पर काटा ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

टप्या रस्ता पर काटा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दिठ लागेन वो तोला
तूच म्हरी जिंदगानी
आये आंग पर काटा
जब लह्यराये बेनी ।१।

देख कसो रुत्यो काटो 
डोरा म झलके पानी
तोर काटा क सल की 
म्हर आंग झनझनी ।२।

रुत्यो काटो बोराटी को
म्हरी सकवार रानी
तोर नाजूक पाय ला
भूली काटा की च अनी ।३।

धर मांडी पर पाय
वोकी देखूस निस्यानी
काटा कन च काढूस
पुस डोरा म को पानी ।४।

रोय रोय कन् मुंडो
तोरो गांजर क वानी
पापनी क केस कन
वोला अध्धर टांगनी ।५।

सोस उलीसो चटको
म्हरी हिरदा की रानी
न्हाय कुरूप को धोखो
डाग बिब्बा को कारनी ।६।

तोरी मखमाली काया
तोर चाल म हरनी
टप्या रस्ता पर काटा
बोर भराटी क वानी ।७।

म्हर पाडुकल्या बस
काहे लाजस दिवानी
तोर दुख ला झेलून
या स म्हरी वाली बानी ।८।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, September 26, 2021

अजब गजब - ७७ : माय माल्हण बाई. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७७ : माल्हण बाई
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

देवी दूलाईह , सुरराई शग त्यां शिरै ।
मालण मंहमाईह , वसै विराई विसहय ।।
( डिंगळ बोली - दोहा )
राजपूतां मां राजवी प्रबल वंश परमार 
म्हालण धरा माड री आय लियो अवतार ।
धिन हो परमारां धीवडी , रंग हो जानरै राय 
वेरू घर वीस हाथी , अवतरी म्हालण माय ।

राजस्थान क जयसलमेर वालऽ इलाखा ला पह्यल ' माड देस ' कवत होता . १२ व सदी क सुरवात पासिन यहान राजा वेरू ( बेरीसाल ) परमार को राज होतो . आन् माड देस क राज की राजधानी होती ' जानरा '!
* उसो त जानरा कयी नाव कन् परसिध्द स : जानरागढ़ , जानरा पाटण , जूना जानरा , जूनागढ़ . 
* बेरीसाल परमार राजा का दुय पोटूना परसिध्द भया . १. जागा २. वरण . 
जागाजी का वंसज जानरा का राज संभालता आन् वरण जी का वंसज वरणागांव का राज संभालत होता . जागाजी का वंसज हरया जागाजी न वि.स. १४५५ म धाट ( पाकिस्तान ) म ' हरयार ' नाव की जागीर की स्थापना करी . 
हरयो हरयाणै , अमराणै अवतार 
दो घर धज बंधी , पृथ्वी बडा परमार ।
* असा राजा वेरू ( बेरीसाल ) क  कुर म म्हालण बाई क रूप म माय जगदम्बा न अवतार लेयो . जागा , वरण की बहिन ' माय म्हालण बाई '! म्हालण स्यबद डिंगल बोली को होय . म्हालण को मतलब होस :  खुसी , बरकत , मंगल !
* म्हालण बाई का कयी नाव परचलित स : मालू म्हालण बाई , म्हालण आई , वेराई म्हालण माई , मुगटाली , माडेची , तलैरी धणियाली , चंवरै री धणियाणी , पटोला परमार , नवलाख लोहडीयाली , हरयारराय , म्हालण सरराय , जानरैराय , धोळा मढ़ धणियाणी . हरयार धाम ( पाकिस्तान ) म म्हालण बाई की पूंजा म्हालण आई क नाव कन् करस . 
* म्हालण बाई का मूलधाम : १. जानरागढ़ २. हरयार धाट ( पाकिस्तान ) ३. धोळा मढ़ ( वरणा ) . 
* जगदम्बा अवतार म्हालण बाई न नाना लीला अन् आसिरवाद  कन्  लोगना को उध्दार करे आन् समाज म धरम नीति , न्याव की थापना करी . लोगना को भरम आन् भेव निकार कन् धरम उन को धरम म बिसवास पयदा करे . म्हालण बाई क वंसजना को भक्तिभाव म झुकाव जास्त स . 
* राजा वेरू ( बेरीसाल ) का वंसज राज करन साठी जहान बी गया , वहान वून न म्हालण बाई ला कुर देवी मान कन् पह्यल माय का ठाना  बनाया  ! 
* म्हालण बाई क गवरव गाथा को यसगान जयसलमेर , बाढ़मेर , बिकानेर , जोधपुर , गुजरात , धाट ( सिंध ) आन् कयी इलाखा म गावस . हर जागा प म्हालण बाई का भव्य देवरा ( देऊर ) , मंदिर स . येकऽ बास्त रोहिडाला ( हरसाणी ) , हरसाणी , मगरा ( कोठाधाम ) , दवाडा , म्हालणसर ( बिकानेर ) , संतोसनगर ( बिकानेर ) , जयसलमेर , बाडमेर , जोधपुर , झिनझिनयाली , लापूदडा यहान बी म्हालण बाई का परसिध्द देऊर स . 
१. मेलो : * जानरागढ़ : भादवा सुदी १४ , हरयार : माघ सुदी १४ . 
२. पेई की महिमा : हरयार धाट ( पाकिस्तान ) क धाम म आब बी म्हालण बाई को भाई जागाजी का वंसज सेवा करस . म्हालण बाई माताजी की मूरती चंवरा ( झोपडा ) म येक काठ ( लकडी ) क संदूक म बिराजस . संदूक ( पेटी ) ला सिंधी भास्या म " पेई " कोस ! या पेई ( पेटी ) हर तीसरऽ साल खुलस , तब च मातेस्वरी का दरस्यन होस . येन संदूक ला तालो लाग्येस पर वोकी चाबी ( किल्ली ) नहाय . तीन बरस बाद इ तालो ( कुलूप ) आपरंग च उघडस . येला ' पेई खुलना ' कोस . 
* या बंद पेटी जगा कुम्भार ला सापडी . तब पासिन ( ९०० बरस पासिन ) या परंपरा स . 
३. म्हालण बाई की ओरण : म्हालण बाई का जहान जहान देऊरना ( ठाना ) स , वहान देऊर क भवताल मोठो पडित ( गायरान )  अन् जंगल स . ( महाराष्ट्र म जसी देऊर की ' देवराई ' रव्हस उसी .) येन गायरान ( गोचर भूमि ) अन् रमनिक रान ला ' ओरण ' कोस . यहान गाय , बकरी , ढोर डंगर संगच हरन , ससा , सांबर , निलगाय सरखा जीव जनावर आन् मोर , बगला , चिरैय्या असा केतरा क पाखरूना रव्हस / चरस . येन देऊर क ओरण ला चवकीदार नी रवत . माय माल्हण बाई क नाव क महिमा कन् च झाड झडुला , ढोर जनावर , जीव जंतू , पाखरूना को बचाव होस . 
* मुख्य ओरण : जानरा , हरयार धाट ( पाकिस्तान ) , रोहिडाला , मगरा ओरण .
🚩 माता म्हालण बाई की जय .🚩

( सहयोग : इंजि. जालिमसिंह जी सोढा जोधपुर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


Saturday, September 25, 2021

यादें ( कविता ). Hindi language _ हिंदी भाषा

यादें
Hindi language _ हिंदी भाषा

स्वाती नक्षत्र मे सीप में बस जाती
रंगीन पलों के इंद्रधनुष में रच जाती
सावन की फुहार , फुलों की बहार
रोम रोम में यादें रच बस जाती ।

रोज उगता सूरज सुनहरी यादें लिए
रोज नींद की आगोश मे सोती है यादें
सुहाने ख्वाबों की सुरदीर्घिका मे 
दुधीया रोशनी मे जगमगाती है यादें ।

बेहद प्रिय सभी यादों के हिरे मोती
याद नहीं , यादों का खजाना है
दिल में संजोये है हर पल को
यादों के संग संग ही जीना है ।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, September 23, 2021

यादें. Hindi Language _ हिंदी भाषा

यादें
Hindi language _ हिंदी भाषा

स्वाती नक्षत्र मे सीप में बस जाती
रंगीन पलों के इंद्रधनुष में रच जाती
सावन की फुहार , फुलों की बहार
रोम रोम में यादें रच बस जाती ।

रोज उगता सूरज सुनहरी यादें लिए
रोज नींद की आगोश मे सोती है यादें
सुहाने ख्वाबों की सुरदीर्घिका मे 
दुधीया रोशनी मे जगमगाती है यादें ।

बेहद प्रिय सभी यादों के हिरे मोती
याद नहीं , यादों का खजाना है
दिल में संजोये है हर पल को
यादों के संग संग ही जीना है ।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, September 18, 2021

भोयरी संस्कृति ४५ : खेंडो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति ४५ : खेंडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सिंधू नदी माय क कोरा म भोयर खेल्या... नाना का मोठा भया . ४५०० बरस पह्यलऽ पासिन सिंधू संस्कृति म पराटी ( कापूस / कपास ) की खूब खेती होत होती.. कापूस को मोठो बेपार होत होतो . कपडा साठी कापूस ,  ऊन अन् रेसम को बापर होत होतो . सुती कपडा प पक्को रंग चढावन की कला बी मालूम होती . वासिन दुनिया म कपडा को मोठो बेपार होतो . सिंधू संस्कृति क पतन क बाद बी कपडा को बेपार होत च होतो . 
कपडा पेहरन को परकार जाति , भूगोल , हवा पानी , संस्कृति परंपरा क हिसाब कन् रव्हस ‌.
१ . इतिहास : * उत्तर वयदिक कार म पेहराव का निवी , वास अन् अधिवास इ भाग होता . 
* ' शतपथ ब्राह्मण ' म रेसम अन् ऊन क बापर को उल्लेख स .
* रामायन कार म लाडा -  लाडी बिह्या म रेसम का कपडा च पेहरत होता . 
* बौद्ध साहित्य म कपडा का नाव : सन का कपडो = खोमन , सूती कपडो = कप्पासीकम , रेसमी कपडो = कोस्सेयम . 
* इजिप्त देस क ' ममी ' ला भारत क मलमल क कपडा म लपेटत होता ‌ .
* २७०० बरस पह्यले आयो चीनी भिकसू यातरी ह्युन सियांग न लिख्येस क भारत देस म पांढरा कपडा च जास्त पेहरस . 
* गृत्समद रिसी न कपास पासिन कपडो बनावन की कला सिखाई , असी मान्यता स . 
* राज क हिसाब कन् पेहराव म बदलाव भयो . मौर्य , कुस्यान , गुप्त , सातवाहन राज म पेहराव को तरीको बदल्यो . पेहराव प मंगोल , यूनानी , अफगानी , मध्य आसिया क तरीका को बी असर पड्यो . 
२. पीतांबर : * पीतांबर को मतलब कोसा को ( रेसम ) धोतर . धारमिक विधी म अन् मंगल काज म रेसमी धोतर पेहरस . जेन कोसा क धोतर ला जरी काठ रव्हस , वोला ' पीतांबर ' कोस . पीतांबर  मानुस अन् बाई बी पेहरस . मानुस को साडे पाच वार को  ' मरदाना पीतांबर ' अन् बाई को आठ वार को  ' जनाना पीतांबर ' ! 
* पीतांबर ला पवितर मानस . कोसो ( रेसम ) बिगर धोये पानी सिपडकन् सुध्द होस , असी धारना स . बिह्या क बेरा ससरो नवरदेव ला पीतांबर को आहेर करन को रिवाज होतो . बिह्या साठी मामो भासी ला ( लाडी ला ) पीतांबरी साडी देत होतो , नी त खेंडो ( पिवरी साडी ) देत होतो . सब सिन सस्ती पिवरी साडी मनजे हरद कन् पिवरी करी ती पांढरी साडी ! येला मराठी म ' अष्टपुत्री ' कोस . हिंदी म येला ' पियरी ' कोस . पीतांबरी रवो क खेंडो रवो , लाडी क डोकसा पर अकसिदना येन पिवरी साडी म च पड्या पायजेन , येको नेम होतो . उत्तर भारत म बी बिह्या क बेरा लाडी पिवरी साडी च पेहरत होती . 
* पिवरो रंग देवी -  देवता क पसंद को रंग स . भगवान बिस्नु देव बी पीतांबर च पेहरस . पिवरऽ रंग ला सूर्व्य देव , मंगल - बृहस्पती गिऱ्या को रंग मानस . पिवरो रंग मनजे ' उजिड ' को रंग ! पिवरो रंग मनजे सादगी अन् निरमलता को रंग ! 
* बिह्या भया बास्त लाडी ला प्यार अन् माय ला दुत्कार साठी कहावत स , ' माय क लुगडा ला बारा गाठी , लाडी ला पीतांबर धट्टी ' . 
📝 असो इ भुल्यो बिसऱ्यौ ' खेंडा ' को पुरान ! 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


Thursday, September 9, 2021

वर्धा माय , खैरवानी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

वर्धा माय , खैरवानी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

9 सितंबर 2021, दिन बुधवार ला धनगवरी ( नांगदेव ) , खैरवानी दरस्यन को मोह्यतूर निकरे ! संगऽ सुरेश मानमोडे , प्रकाशजी आन् विकास बी होता . आभार कारोकिटाड होतो . दुय तीन दिन पासिन झड लागीती . मानमोडे जी न कार की पूंजा करी , अन् मुनऽ इस्टेरिंग संभाल्यो . सकारी 8 बज्या नागपूर सिन निकऱ्या . बरसाद कन् सारोळा सद् सद् होतो आन् ठंडी बी बाजत होती . नागपूर परीन पांढुरना पुग्या . काल च यहान परसिध्द ' गोटमार मेलोइ ' भयेतो . नदी क दुय आंग गोटा का ढीग पड्याता . येक JCB अन् ट्र्याक्टर गोटाना सावडकन् फेक रह्याता . नदी काठ क देऊर ला टट्टाना कन् झाकेतो . 
पांढुरना पार करकन् मल्हारा पंखा पासिन जेवनहात ला नानी सडक प पलट्या आन् धनगवरी को रस्तो पकड्यो . चिखलीकला पासिन ' मुलताई - छिंदवाडा ' सडक वलांडकन् डाखऽ हात प पलट्या . झमाझम बारिस होय रह्यीती . गोस्टीमाता करता करता धनगवरी आयो . देऊर ला टालो लाग्येतो . बाह्यरीन च पूंजापाती करी आन् हात जोड्या . धनगवरी जवर क नदी पर च डोमनसेस को देऊर स . 
धनगवरी जवर च ढाकरबाडी ला मानमोडेजी की आतोबहिन रव्हस . नारायण देशमुख कितऽ खानोपेनो भयो . इत उत की बातचीत भयी . 
नागद्वार , पचमढी यातरा की ' धनगवरी ' ला पह्यली पायरी मानस , यासिन जुन्नारदेव ला जास . 
ढाकरबाडी परिन मोरनढाना ला आया . मानमोडेजी को परिवार यहान को च स . चारी कितऽ खेत म मका च मका ! ( भुट्टा ). येक क पास येक दुय चार घर च्या पानी भयो . वहान ' भोयरी संस्कृति ' किताब बाटी . मुलताई - दुनावा को पट्टो खोवा साठी परसिध्द स . वासिन चार पाच किलो खोवो लेयो . 
आब वापसी म खैरवानी ला जान को होतो . मध्य परदेस क बयतूल जिला म क मुलताई तहसील म खैरवानी गाव जवर वर्धा नदी को उद्गम स . ८११ मीटर उचाई को वरधन सिखर वर्धा माय को जलमस्थान . मध्य परदेस म ३२ कि.मी. को सफर कर कन् वर्धा नदी मोवाड जवरीन महाराष्ट्र म आवस . घुग्घुस जवर ( वढा संगम ) वर्धा नदी ला पैनगंगा नदी मिरस . आघ वैनगंगा नदी ला वर्धा नदी मिरस आन् या दुय नदीना गोदावरी नदी ला भेटकन् प्राणहिता म समाहित होय जास . 
सतपुडा परबत क साजरपन म वर्धा अन् सूर्व्यपुत्री ताप्ती चार चांद लगाय देस . वर्धा माय आन् ताप्ती नदी ( मुलताई ) को उद्गम मेक दुसरा पासिन सिरफ ११ कि.मी. दूर स. 
वर्धा नदी क उद्गम स्थल पर कपिल मुनी न जप तप करेतो , असी मान्यता स . वर देन क कारन नदी को नाव ' वरदा ' पड्यो ; जी कालांतर म वरधा... वर्धा भयो . 
भूदान आंदोलन क बखत यहान विनोबा भावे जी आयाता . महात्मा गांधी जी बी यहान आयाता . 
खैरवानी गाव क सरकारी दवाखाना पासिन वर्धा नदी उद्गम स्धल वरी कच्ची सडक बनीस . किचड कादा क डर कन् आमी न कार दवाखाना जवर च उभी करी . वासिन १ कि.मी. पयदल गया . आमारो डर बेकार च होतो . कार उद्गम स्थल वरी आराम कन् आई रह्यीती . पर आब इलाज नी होतो . रस्ता पासिन उच्ची जागा प वर्धा माय को पक्को चवकोनी बांध्ये  पवितर कुंड स . येन कुंड म पाच गह्यरा भीर सरखा कुंड स . वून मिन कब कब पानी को उबाल आवस . कुंड क वरतऽ क बाजू वर्धा माय की नानीसी मूरती आन् देऊर स . कुंड क काठा प आब भगवान भोल्यानाथ की साजरी अन् उच्ची मूरती बनाईस . कुंड क येक सेला प ' श्री वर्ध्यश्वर महादेव मंदिर ' स . वर्धा माय देऊर क येक आंग कपिल मुनी की मूरती स . कुंड आन् देऊरना सवान रफाड म स . कुंड पासिन येक दुय खेत दूर बंधारो स . रस्ता क काठा पर च खैरवानी क कसलीकर कोई कोठो स . वून कोई दूय चार येकट खेत पानी म गयेस . 
वर्धा माय क उद्गम स्थल प तीर संगरात ला तीन दिन को मेलो लागस ‌. कलस यातरा आन् ' पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ ' बी होस . 
वापसी म पानी को जोर बाहाडे . कार पावतर आवत वरी आमी वला भया . झाक पडीती . दिनबुड्या आमी नागपूर ला आवन साठी निकऱ्या . वर्धा माय क उद्गम स्थल ( खैरवानी ) का दरस्यन कर कन् आमी धन्य भया . 

वर्धा माय की आरती 

ॐ जय वर्धा माता , श्री वर्धा गंगा माता
जी बी आया स्यरन म , दुख वून का हरता ।धृ।

गाव खैरवानी नाव , गढ वरधन माता
बिस्नु देव अवतार , पानी वराह भरता ।१।

तप कपिल मुनी को , भयेस सफल माता
रिसी वसिस्ठ भगत , होम कोटी न करता ।२।

सुभ पावन मंगल , टारै अमंगल माता
तोरऽ कोरा म आसरो , माय बुध्दी सिध्दी दाता ।३।

कुर भोयर संभाले , रिन नी फिटेय माता 
आमी पोटुबाटूना की , तुमी च स माता पिता ।४।

देवी मायना निबजी , तोर पानी कन् माता
करू तुमारी आरती , गावूस किरती माता ।५।

वरदा वरदायिनी , राम किस्न की वीरता
बोलु हर हर गंगे , बेद पुरान की गाथा ।६ ।

पानी तोरो अमरित , नाद कलकल गीता 
जोत चंदर तुमारी , मन भाये सितलता ।७।

गाये सुरेस नित् दिन , तुमारी किरपा कथा
पावू परमगती ला , पाय तुमार च माथा ।८।

लेखक / रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, September 7, 2021

घर - भाग २. Hindi language _ हिंदी भाषा

घर - भाग २
Hindi language _ हिंदी भाषा

मोहनराव ने चौंककर सिंधू की तरफ देखा . सिंधू की नम आंखों को देख कर मोहनराव उलझन में पड गये . 
' बहु और अजय बेटा हमसे क्यो कटे कटे रहेंगे भला ; मुझे तो ऐसा कुछ भी महसूस नही हुआ ...' मोहनराव ने सिंधू का हाथ अपने हाथ मे लेते हुए कहा . 
सिंधू ने बात तो छेड दी थी पर मोहनराव कोई कैसे बताना यह उस के समझ मे नही आ रहा था . मोहनराव जितने स्वाभिमानी थे , उतने ही संवेदनशील भी थे ! सिंधू को लगा की , बहु बेटे की सोच जानकर मोहनराव बिखर न जाए . उन्हे विश्वास भी होगा की नही , यह भी बात थी .
' चुप क्यो हो ? क्या सोच रही हो ? ' मोहनराव ने चिंतायुक्त स्वर मे कहा . 
' बात तो कुछ नही , लेकिन लेनदेन के मामले में बच्चों की भी राय ले लेनी चाहिए , ऐसा मुझे लगता है .' सिंधू ने भूमिका बांधते हूये कहा . 
' साफ साफ कहो सिंधू ... कौनसे लेनदेन की बात कर रही हो ?' मोहनराव ने अधीरता से पुछा . 
' आपने अभी जो खेत बेचा है , उसके बारे में कह रही हूं .' सिंधू ने आहिस्ता से कहा . 
' उसमे क्या पुछने वाली बात थी ?' मोहनराव ने तपाक् से कहा . 
सिंधू वापिस चुप हो गयी . मोहनराव गुस्से से बरसेंगे या अपने आप को कोसेंगे , यह समय के गर्भ मे था . लेकिन कुछ भी होगा , वह बुरा ही होगा , यह आशंका सिंधू के मन मे थी . 
' अरे बताओ तो सही ....' मोहनराव ने संयत भाव से कहा .
वह जानते थे की , सिंधू ने कभी भी गलत बात नहीं कही थी . जब कभी गुस्से में मोहनराव उत्तेजीत हो जाते थे , तो सिंधू ही बडे प्यार से उनको संभालती थी . मोहनराव भी मासूम बच्चे की भांति समझ जाते थे .
' बहु कह रही थी की , अजय कुछ नया काम करना चाहता है , जिसके लिए उसे पैसे की जरुरत है . आप खेत के पैसों में से आधे भी दे देते तो शायद उसे आसान हो जाता था . ' सिंधू ने मोहनराव का हाथ सहलाते हूए कहा . 
' कैसी बात करती हो सिंधू ? दोनों की दो - ढ़ाई लाख की सेलेरी महिने की आती है . अभी तक तो काफी रकम जमा हो चुकी होगी . घरखर्चा तो मेरे ही पेंशन से चलता है..' मोहनराव ने सोचते हूये कहा .
' पैसे पानी का हिसाब तो आप दोनो जानो... बेटे की होगी कुछ इच्छाएं....' सिंधू ने कहा .
' सिंधू , उसकी कुछ योजना है तो उसने मुझसे कुछ बात तो करना चाहिए . मुझे अगर सबकुछ सही लगता तो , आधे ही क्यो ... सारे पैसे देने में भी क्या दिक्कत हो सकती थी . बातचीत तो करें .. ऐसे आपस में ही कुढ़ने से क्या हासिल होगा ... यह सारी संपत्ती तो अजय की ही है ना . इकलौता बेटा है वो हमारा ! लेकिन तुम बता रही हो , ऐसा बर्ताव मै कतई बर्दाश्त नही करूंगा . इस रविवार को मै बात करता हू अजय से . तुम चिंता ना करो . ' मोहनराव ने सिंधू के गालों को थपथपाते हुए कहा .  ( क्रमशः )

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, September 3, 2021

अजब गजब - ७६ : लोद्रवा. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७६ : लोद्रवा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

काली रे काली काजळिये रे रीख दूर
ओ जी रे कोई मोरिये रे बाखर में चमके बिजली रे
ढोले रे मूमल हाजी रे पिया रे प्यारे रे मूमल
हाले हाले रे ले चालू ओन्दा थारे देस में ।

हा दो टेड मूमल रा आडा मियल रे
ओ जी रे कोई होठ मूमल रा कसमूल डोर रा
ढोले रे मूमल हाजी रे पिया रे प्यारे रे मूमल
हाले हाले रे ले चालू ओन्दा थारे देस में ।

लोद्रवा क इलाखा ला मांढ ( मांड ) कव्हत होता , आन् मांढ इलाखा क बोली ला बी मांढ बोली च कव्हत होता . जयसलमेर क येन इलाखा क गाव गाव म गुंजस लोद्रवा की राजकुमारी ' मूमल ' अन् अमरकोट क राजकुमार ' महेंद्र ' की अमर प्रेम कथा लोकगीत मिन !
राजस्थान म जयसलमेर पासिन १५ कि.मी. दूर स लोद्रवा गाव , जहान कबऽ नांदत होतो परमार वंस को वयभवस्याली राज !!
सरस्वती नदी की उपनदी ' काक ' नदी , आन् वोक काठा प बसेतो लोद्रवा ! लोद्रवा पुरानऽ बेपारी रस्ता पर को मुख्य ठानो होतो. १० मयील फयलाव वालऽ येन नगर ला १२ दरुजा होता .वोन जमाना म  खेती कास्तकारी कन् पुरो इलाखो हिवरो हिवरो होतो . आब रेत क खलतऽ दबे इ लोद्रवापुर  ,  वोन बेरा को मोठो धनसंपन राज होतो . जब जयसलमेर बने बी नी होतो , वोक पह्यले पासिन लोद्रवा को मोठो आसकारो होतो !
१. इतिहास अन् मान्यता : * धारानगरी क परमार राजा धंधमार को पोरग्यो ' राजा भाण ' ( नृपभान / भानुप्रताप ) न बिकरम संवत् ६७५ म ' लोद्रवा नगर अन् राज ' की थापना करीती . या परमार वंस की लोढा / लोद्रवा पाती बनी .  तब जयसलमेर को नावनिस्यान बी नी होतो . 
* आघ क पीढी म राजा लोद्र भयो . वोन लोद्रवा म सिवमंदिर बांध्ये . 
राजा लोद्र ला चार पोटूना होता . सागर , परताप , राज अन् लोद्र ( दुसरो ). राजा लोद्र क बास्त , मोठो पोरग्यो सागर राजो बन्यो . 
* राजा सागर परमार ला ११ पोटूना भया . पर बयीद क पकड नी आवनी वाली बिमारी कन् वोम का ८ पोटूना देव घर गया . बाच्या तीन पोटूना की तब्येत बी तोरा मासा च होती , वूई बाचेन क नी बाचेन यको भरोसो नी होतो . 
तेकन राजा सागर परमार हरदम दुखी रवत होता . तब राजधानी म जैन संत सिरी जिनदत्त सूरी आपलऽ दलबादल सगट आया . येन संत की मोठी महिमा गाज रयीती . राजा न बिचार करे क , संत क आसिरवाद कन् बाच्या तीन पोटूना की तब्येत ठीक होय जायेन . संत न कह्ये क तुमारा पोटूना बिमारी काहाडूस परि तुमाला जैन धरम लेनो पडेन . पोटूना की तब्येत आन् राज साठी राजो राजी भये . संत न आपलऽ स्यक्ति कन् सबन पोटूना की तब्येत चांगली करी . राजा सागर परमार न मोठो पोरग्यो कुलधर ला राजपाट देये आन् सिरीधर , राजधर येन पोटूना संग जैन धरम लेयो . लोद्रवा म जैन देऊर बांध्या . 
* आघ क पीढी म राजो नृपभानु सिंह बन्यो . वोपर यदु वंसी देवराज भाटी न धोखा कन् हमलो कऱ्यो , आन् परमार वंस क राज ला खतम कऱ्यो . बाद म लोद्रवा प मुसलमान का हमला बी भया . येन दुय हमला कन् लोढा / लोद्रवा वंस ला राजस्थान सोडनो पड्यो . वून न आपरी पह्यच्यान / वरख लुकावन साठी दलवी ( दलपति ) इ नाव धऱ्यो . वासिन वूई गुजरात , महाराष्ट्र अन् मध्य परदेस म फयल्या . 
* १२ व सदी म दलवी देवगीरी क यादव राज म दलपति ( सेनाप्रमुख ) बन्या . 
* १३ व सदी म यादव राज को मुसलमान हमलावर न नास करे . तब दलवी बहामनी राज घोडादल का परमुख बन्या . 
* १७ व सदी म दलवी छत्रपती सिवाजी महाराज क फऊज म भरती भया . येन कार म वून ला ' देसमुखी ' भेटी . तब पासिन वून की वरख ' दलवी देशमुख ' पडी . 

( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर




Saturday, August 14, 2021

अजब गजब - ७५ : मुजावर सिवमंदिर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७५ : मुजावर सिव मंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम् ।
विरूपाक्षमिन्द्वर्कवन्हित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम् ।।

भोयर समाज सिवभगत स ; महादेव पाराबती की पूंजा साल भर कोनतऽ न कोनतऽ रूप म करस च ! पुराना जमाना पासिन या परंपरा आय रहिस . आपरऽ पुरखाना न देस भर म सिवमंदिर बनायास . वोम को च येक देऊर स , " मुजावर सिव मंदिर " ! 
मध्यपरदेस क छिंदवाडा पासिन ३४ कि.मी. दूर मोहखेड विकासखंड को मुजावर गाव पुरानी बसाहटी म सामिल स . छिंदवाडा - बयतूल रस्ता प २५ कि.मी. दूर सांवरी बजार - मोरडोंगरी सडक स . सांवरी पासिन ९ कि.मी. दूर मुजावर गाव स . परासिया अन् जुन्नारदेव सिन उमरेठ - मोरडोंगरी होय कन् बी मुजावर गाव ला जाता आवस . 
मुजावर गाव क येक सेला पर सिवमंदिर अन् तलाव दिसस , जी इतिहास कालीन स . 
१ . इतिहास अन् मान्यता : * इतिहासकार सांगस क , इ देऊर १२०० बरस सिन बी पुरानो स . परमार वंसी महाराजा मुंज न येन देऊर ला बांध्येस , असा बी वूई सांगस ! 
* इ.स. १८७१ क ' सेंट्रल प्रोविंसेस गजेटियर ' अन् इ.स. १९०९ क ' इंपिरियल गजेटियर आफ इंडिया ' म मुजावर सिवमंदिर की जानकारी स . 
* आजादी क बास्त लिखे ' छिंदवाडा जिला गजेटियर ' म मुजावर सिवमंदिर क खरऽ इतिहास की नोंद स . 
 
२. बांधकाम : * मुजावर सिवमंदिर ला सिरफ पत्थर कन् बांध्येस . वोकी दिवालना ३ फूट सिन बी जास्त चवडी स . देऊर ला सूर्व्यामुखी अन् महादेव मुखी दरुजा स . देऊर को बांधकाम अन् कारागीरी अनुठो स . 
* असोच येक देऊर ओंकारेश्वर ला अन् येक देऊर  देवगढ़ क पायथा जवर क तलाव क काठऽ स . 

३. उत्सव , मेला : * सरावन मह्यना म मुजावर सिवमंदिर म भगवान भोलेनाथ ला रोज अभिसेक होस . मह्यना भर अखंड रामायण , होम हवन रव्हस . 
* कारतिक मह्यना म देऊर जवर क तलाव क काठऽ मोठी यातरा भरस.. मेलो लागस . 

( सहयोग : इजि. जालमसिंह जी सोढा जोधपुर ) 
लेखक : इजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, August 5, 2021

भोयरी संस्कृती - ४४ : पठौनी, पिठौरा. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - ४४ : पठौनी , पिठौरा
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

म्हरो कारजा को टुकडो बाई म्हरी पोटी
सुखी रवजे वो माय म्हरी बाई मयना
पठावूस वो पिठौरो , पठौनी की बाई रोटी ।
भाई बहिन येकच घर जलम लेस ... खेलस - कुदस - सीकस .. मोठा होस . येक दिन बिह्या क बाद बहिन - पोटी ला ससुराल म जायकन् आपरी नवी जिंदगानी चालू करनो पडस . भोयरी संस्कृती म बिह्या क बाद बी बहिन - पोटी को नातो मायका सिन खतम नी होत . नार काट्या पर बी जसो माय को नातो पोटी सिन कटत नी , वूसोच बिह्या क बाद बी बहिन - पोटी को मायका सिन टुटत नी ! 
भोयरी संस्कृती म असा कयी दस्तुर - रिवाज स , जेकन पोटी मायका सिन जुडी रव्हस . वोम को च येक मोठो साजरो रिवाज , " पठौनी - पिठौरो " !
* पठौनी : भोयरी संस्कृती म ब्याही बहिन - पोटी क घर नारेल , रेसमी करदोडो पठावन को रिवाज स , जेला ' पठौनी ' कोस . 
नागपंचमी ला गुंजा , पापडी अन् पकवान को फुलोरो धरस . आगलऽ दिन बहुड्डो ( भुजलिया / कजलिया ) बोवस . येन बखत पकवान संगच नारेल , रेसमी करदोडो पोटी क घर पठावन को रिवाज स . पठौनी पठावन क पासऽ को हेतू असो रव्हस क , नाती पोती निरोगी , सुखी अन् धनवान रह्या पायजेन ! 
* पिठौरो : पोरा क दिन भाई आन् कुटुंब क भला साठी बाईलोग उपास धरस , येलाच पिठोरो कोस . 
माय क घरीन पोटी क उपास साठी फरार पठावस . पिठोरा क पूंजा म माय क घरीन आयो नारेल चढावस अन् रेसमी करदोडो सुरक्स्या बंधन सरिखो काम म ल्यावस . 
* हर तीज - तिवार ला बहिन - पोटी की रोटी माय क घरीन जानो , इ पोटी ला मायका सिन जोड कन् धरस . रोटी माय अन् माय क माया ममता को रूप दिखाडस . जब माय क घरीन रोटी जास तब सिरफ रोटी च नी जाति त पुरो मायको , वोकी याद संग लेकन जास . घर - परिवार , गली - येटार , खेत - खल्यान , सखी - सोबतीन , हासी खुसी , खेल खिलोना सबन जिता होय जास रोटी क रूप म ! माय क घर की रोटी , पोटी ला हर सुखदुख म संग रव्हन की हिम्मत देस . जब पोटी मायका क रोटी ला देखस तब वोला वाटस क या सिरफ रोटीच नहाय त् या माय को कोरो स , माय की ममता स , आसू पुसनीवालो माय को हात स , डोकसा पर को बाप को हात स , हिम्मत देनी वाली मायबोली स ! 
मायका क रोटी को येक घास पुरी करस वोकी ममता की भूक , वोक नस नस म फुलस चयतन , बरस वोक उम्मीद को दिवो , आवस वोक निरास मन म खुसी की लह्यर , झलारस वोक मन को आंगनो दिवारी सरखो !
पठौनी , पिठौरो , राखी ला पौची पठावन की परंपरा , रिवाज आब बी भोयरी संस्कृती म स . अन् याच भोयरी संस्कृती की महानता स !

( साभार : सुखवाडा इ मासिक , भोपाल - वल्लभ जी डोंगरे )
अनुवाद : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, August 1, 2021

ध्वज. Hindi language _ हिंदी भाषा

ध्वज
Hindi language _ हिंदी भाषा

सुवर्णमयी धूप खिली सुबह की ठंड में
बच्चों की चहचहाहट गौरेय्या जैसी...
ध्वज के चबुतरे का सूर्ख रंग भी ताजा !
चबुतरे के चारों ओर सजाई रंगोली ; 
महकते फुलों से....
भुरे मैदान में सफेद चुनें की लकिरें
कंकड पत्थर , कचरा सब साफ
घर के आंगन जैसा... अपना सा ! 
ध्वज के पिछे शिक्षक वृंद , 
लेकिन पी.टी. के शिक्षक ध्वज के समीप...
सब बच्चें खडे कतार में . 
हेडमास्टर जी ने खोली ध्वज की धवल रस्सी 
तिरंगा सर सर चढा़ आसमाॅं पर 
और लहरा समुंदर के लहरों की तरह....
वहॉं से हुई पुष्पवृष्टी !
निले आसमॉं मे फैला तिरंगे का इंद्रधनुष !!
बहती हवा ने पकडा सूर..
... जन गण मन अधिनायक जय हे...
अब तिरंगे पर राष्ट्रगीत की धुन बह रही थी , 
गंगा समान पावन !
अपने परिवार की ओर देखा तिरंगे ने , 
अशोक चक्र की आंख से...
फडऽ..... फडऽ... फडऽऽ.....
ध्वज फडफडाने लगा जोरशोर से , 
अपने बच्चों के सर पर हाथ फेरने के लिए !
तिरंगे से निकले सारे रंग और , 
हरेक के सांसों में घुल गये , 
माटी की खुशबू जैसे !
विश्वास के अंतरिक्ष से आवाज गुंजा...
जय हेऽ.... जय हेऽ... जय हेऽ....
तिरंगे का हृदय भर आया ममता से 
उस की लहर से निले आकाश का समुंदर झलका...
टप्... टप्.... टप्.....!!

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


Thursday, July 29, 2021

अजब गजब - ७४ : रतनगढ़ वाली माता. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७४ : रतनगढ़ वाली माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

ॐ जय अम्बे मैय्या , जय जगदम्बे मैय्या 
माता रतनगढ़ वाली , पार करो नैय्या 
जय माडुला मैय्या ।

मध्य परदेस म रामपुरा गाव पासिन ५ कि.मी. आन् दतिया पासिन ५५ कि.मी. प रतनगढ़ वाली माता को परसिध्द मंदिर स , उसो च माता को भाई ' कुंवर महाराज ' को मंदिर स . मध्य परदेस , राजस्थान , उत्तर परदेस अन् देसभर  म माता जी ला माननी वाला लाखो भगत स . 
जंगल मंझार येक उच्ची पहाडी पर रतनगढ़ वाली माता को मंदिर स , पर वहान आब कोई गाव नहाय . यहान रतनगढ़ किल्ला को खंडारो स . रतनगढ़ क पहाडी ला तीन आंग कन् सिंध नदी न घेरेस . किल्लो बांधन साठी या साजरी जागा होती . गढ़ को बांधकाम पत्थर कन् करेतो . येक येक दिवाल १२ फीट चवडी ! 
यासिन ८ मयील दूर देवगढ़ को किल्लो स , जेकी हालत आब बी ठीकठाक स . 
१ . इतिहास : * आज पासिन ४०० बरस पह्यले यहान परमार राजो रतनसिंग महाराज को राज होतो . वून ला ७ पोटू अन् येक पोटी होती . राजकुमारी मांडुला ( माडुला ) खूबसुरत अन् गुनवान होती . 
* अलाउद्दीन खिलजी की पापी नजर रतनगढ़ पर पडी . वोनऽ पह्यले सेंवढा सिन रतनगढ़ आवनी वालो पानी बंद कऱ्यो . राजकुमारी मांडुला अन् राजकुमार कुंवर गंगाराम देव न येपर नाराजगी जताई अन् विरोध कऱ्यो . अलाउद्दीन खिलजी की नजर रतनगढ़ रियासत अन् राजकुमारी मांडुला प होती . वोन रतनगढ़ प भारी फऊज लेकन हमलो कऱ्यो . रतनगढ़ नानी सी रियासत होती पर परमार वीर देस साठी जीव देन ला आघ पासऽ नी देखत होता . घनघोर लढाई सुरू भयी . येनऽ लढाई म ६ राजकुमार ला वीरमरण आयो . राजकुमारी मांडुला न ७ वो राजकुमार कुंवर गंगाराम देव तिलक कर लढाई म पठायो . दुसमन की फऊज खूब मोठी होती . आखरी उपाव सोच कन् राजकुमारी मांडुला अन् राजकुमार कुंवर गंगाराम देव न खाई म कुद कन् इज्जत बाचाडी . 
* रतनगढ़ बरबाद भयो . रतनगढ़ बाद म नांद्यो च नी . रात कन् वहान कोनी च ठह्यरत नी होता . रतनगढ़ प राजकुमारी मांडुला अन् राजकुमार कुंवर गंगाराम देव जी की समाधी बांधी , आन् रतनगढ़ सिध्दपीठ बन्यो . राजकुमार कुंवर गंगाराम देव जी क चबुतरा ला  ' कुंवर साहब को चबुतरो ' कोस .
जवर च स्मारक हजीरा स . यहान हजारों मुसलमान ला गाडेस . 
* छत्रपती सिवाजी महाराज ला जब अवरंगजेब न आगरा म बंदी बनायाता , तब रामदास स्वामी रतनगढ़ वाली माता क दरबार म आयाता . वून नि नवस ( मन्नत ) कऱ्यो . रतनगढ़ वाली माता क आसिरवाद कन् छत्रपती सिवाजी महाराज आगरा परिन महाराष्ट्र म आया . नवस ( मन्नत ) कबुल्योतो अन् रतनगढ़ वाली माता को आसिरवाद बी भेट्येतो , तेकन छत्रपती सिवाजी महाराज न इ भव्य मंदिर बनायो . मुसलमान पर विजय की या निस्यानी होय ! 
* १६ अक्तुबर २०१५ ला यहान १९३५ कि.ग्र. की पितरी घंटी लगाइस . या देस म सब सिन भारी - वजनी घंटा स ! येन घंटी की येक खासियत स क , वोला ४ बरस पोटू पासिन ८० बरस क बुजरूक वरी कोनी ला बी बजावता आवस . 

२. मान्यता : * राजकुमार कुंवर गंगाराम देव जी सिध्दपुरूस होतो . जब वूई जंगल मिन जात होता तब जह्यरी जनावर आपरो जह्यर बाहर निकार कन् धरता . जेन मानुस - बाई , जनावर ला सरप बिचू डसस , वून ला कुंवर साहब क नाव कन् बंध लगावस . बंध लगाया कन् जह्यर  फयलत नी अन् जीव बाचस . इ बंध धागा को नी रव्हत , सिरफ कुंवर साहब की आन देय कन् डस्या जागा क भवताल उंगल फेर देस , येला च ' बंध ' कव्हस . 
* राजकुमारी मांडुला अन् राजकुमार कुंवर गंगाराम देव जी म खूब आपसी माया होती . रतनगढ़ म कारतिक उजरी दूज ( भाईदूज) ला यातरा भरस . उसो त नवरातरी पासिन च भगत लोग रतनगढ़ ला आवनी चालू होस . नवरातरी म नव दिन मातारानी की सेवा होस . नवस ( मन्नत ) का बोया ती जवारा अन् परसाद मातारानी ला चढावस . नवरातरी पासिन इ पर्व चालू होस . भाई दूज , पांडव पंचमी पासिन खूब भीड बाहाडस . २५ लाख लोगना रतनगढ़ क दरबार म आवस . 
* कुंवर साहब का जिन ला बंध लगायतो ती तमाम मानुस - जनावर भाईदूज क दिन बंध काटन ला रतनगढ़ आवस . इ बंध जब पुजारी काटस तब बंध वाला ला झ्येंडू ( मूर्च्छा ) आवस . लोगना पकडकन् वून ला कुंवर साहब क चबुतरा की परदकसिना करावस . वोक बास्त वूई ठीक होस आन् वून ला घर जान देस . 
* बुंदेलखंड क हर गाव म येक चबुतरो रव्हस , जेपर दुय इटना धरस . येला कुंवर साहब को चबुतरो कोस . बुंदेलखंड म कुंवर साहब की लोक देवता क रूप म पूंजा होस . 
* रतनगढ़ को भाई दूज को मेलो ( यातरा ) बहिन भाई क अमर आपसी प्रेम की निस्यानी स !
* ८२ बरस उमर का पं. धनीराम कटारे मातारानी क दरबार म पुजारी स . आब वून की या ५ वी पीढी स . 

ॐ जय रतनगढ़ वाली माता की 
ॐ जय कुंवर साहब की..

( सहयोग : इंजि. जालमसिंह जी सोढा , जोधपुर ) 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर



Monday, July 26, 2021

अजब गजब - ७३ : वीर कुंवर चैन सिंह जी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७३ : वीर कुंवर चैन सिंह
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
शहिदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ,
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशॉं होगा ।

मध्य परदेस क राजगढ़ जिला म ३०० बरस पुरानो अन् भोपाल पासिन ८३ कि.मी. दूर नरसिंहगढ़ स . दीवान परसराम म इ.स. १६८१ म यकी स्थापना करीती . नरसिंहगढ़ रियासत पर उमठ परमार वंस को राज होतो . 
* शहीद वीर कुंवर चैन सिंह जी उमठ परमार वंस क नरसिंहगढ़ रियासत का राजकुमार होता . भोपाल पासिन ३५ कि.मी. दूर पसचिम म भोपाल - इंदौर सडक प अंगरेज की फऊज छावनी होती . वूई अगल बगल क रियासत ला घाडाच तरास देत होता अन् पेंसन क बदला म रियासत सोडन ला कव्हत होता . नरसिंहगढ़ रियासत वून को आयकत नी होती . जनरल मैडॉक अन् जानसन न नरसिंहगढ़ ला कयी डाव इतल्लो पठायतो  . तब नरसिंहगढ़ का युवराज वीर कुंवर चैन सिंह जी भेटन ला गया . वून क संग हरदम हिम्मत खान , बहादुर खान अन् लाडलो सेरू नाव को कुतरो रव्हत च होता . हिम्मत खान अन् बहादुर खान इ सारंगपुर जवर क गाव धनौरा का सग्गा भाई होता . बयठक भयी पर कोनतोच नतिजो नी निकऱ्यो . 
* अंगरेज न अऊर निरोप धाड्यो . तब वीर कुंवर चैन सिंह जी न वून सिन टक्कर लेन की सोची . तब वीर कुंवर चैन सिंह जी की उमर सिरफ २३ बरस होती . वीर कुंवर चैन सिंह जी कायी जागीरदार , हिम्मत खान - बहादुर खान , सेरू अन् ४३ सयनिक लेकन चाल पड्या देस क दुसमन सिन बगावत करन साठी ! जिन को वंस आघ नी बाहाडेतो , वून ला वीर कुंवर चैन सिंह जी न पासऽ धाडे . वून ला मालूम होतो क लढाई म बाचन की गुंजाईस नहाय ... वून ला लढाई म मरनो कबुल होतो पर अंगरेज की गुलामी कबुल नी होती . अंगरेज क फऊज क आघ वूई चिंटी सरखा होता पर देसभक्ती को जजबो हत्ती सरखो होतो ! 
* २४ जुलाई १८२४ ला वीर कुंवर चैन सिंह जी अंगरेज क छावनी कितऽ रवाना भया . लाला भागीरथ क हाथ कन् इतल्लो पठायो . वीर कुंवर चैन सिंह जी अन् जनरल मैडॉक की भेट भयी . जनरल मैडॉक न वून क तलवार की तारीफ कर कन् येक तलवार लेय डाली . वोन अऊर दुसरऽ तलवार की तारीफ करी . वीर कुंवर चैन सिंह जी समझ गया क जनरल मैडॉक क मन म खोट स . वीर कुंवर चैन सिंह जी न बिजली क फुरती कन् वोपर हमलो कऱ्यो . अंगरेजी फऊज पह्यले पासिन च लढाई साठी तयार होती . घनघोर लढाई भयी . या लढाई दिवा अन् तुफान को मुकाबलो होतो ! वीर कुंवर चैन सिंह जी न अंगरेज क अस्टधातु कन् बनी तोप प तलवार कन् वार कऱ्यो . तलवार कन् तोप त कटी पर वून की तलवार वोम फस गयी . आन् यहान च घात भयो . तोपची न सीधऽ वीर कुंवर चैन सिंह जी क गरदन प वार कऱ्यो . वून को मुंडो वहान च कट कन पड्यो . वून को घोडो वीर कुंवर चैन सिंह जी क धड ला लेकन नरसिंहगढ़ आयो . वीर कुंवर चैन सिंह जी का सबन संगी साथी ला  वीरगती भेटी , येम सेरू बी आयो ! 
* वीर कुंवर चैन सिंह जी स्यहीद भया , असी खबर कुंवरानी जी ( राजावत जी ठिकाना मुवालिया )  ला भेटी . वून न तब पासिन अन्नत्याग कऱ्यो . सारऽ जिंदगी भर वून न झाडपत्ती अन् कंदमुर - फर पर च गुजारो कऱ्यो . परसुराम सागर जवर वून न देऊर बनायो , जेला कुंवरानी मंदिर कोस . 
* वीर कुंवर चैन सिंह जी की येक समाधी सीहोर - इंदौर सडक प लोटिया नदी काठऽ दसरा वाला मयदान पासिन २ कि.मी. दूर स . ( यहान लढाई भयीती .)  दुसरी समाधी नरसिंहगढ म स . स्यहीद वीर कुंवर चैन सिंह जी की देव रूप म पूंजा होस . वून क समाधी प कंकड धर कन् नवस मानस . 
* आमाला इ.स. १८५७ की अंगरेज सिन की लढाई मालुम स . पर वोक ३३ बरस पह्यले च वीर कुंवर चैन सिंह जी न स्वतंत्रता क होम म आपली आहुति देयीती . अंगरेज क खिलाफ स्वराज साठी , देस साठी पह्यलो स्यहीद , वीर कुंवर चैन सिंह जी स . 
* इ.स. २०१५ पासिन सिहोर क छतरी ( समाधी ) प सरकार किथीन ' गार्ड ऑफ ऑनर ' सुरू भयो . 
२४ जुलाई ला सिहोर अन् नरसिंहगढ़ क छतरी प हर साल सरकार किथीन ' गार्ड ऑफ ऑनर ' देना म आवस . 
२४ जुलाई ला ' बलिदान दिवस ' क रूप म मनावस . 
' जय स्यहीद वीर कुंवर चैन सिंह महाराज जी की ..'

( सहयोग : इंजि . जालमसिंह सोढा जी जोधपुर ) 
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

Tuesday, July 20, 2021

भोयरी संस्कृति - ४३ : वाघाटा की भाजी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - ४३ : वाघाटा की भाजी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आस्याढक क मह्यना म खेत क धुरा प , कुप प येक काटावाली येल ( बेल ) दिसस . वोला लिंबू येतरा मोठा फर ( फल ) आवस . वका फोतराना ठोकर रव्हस अन् मंझार म बी रव्हस ; येलाच वाघाटा कोस . या येक परकार की रानभाजी च स . पर येको बी बेगरो च महिमो स ! 
* वाघाटा को स्यास्तर को नाव ' Capparis zeylanica ' स . वाघाटा ला ' गोविंद फर (फल ) ' बी कोस . संस्कृत म यको नाव व्याघ्रनखी , कराम्भा , तपसप्रिय स . येला गुलाबी फुलना आवस . 
* वाघाटा म दवाई गुन स . थायराईड , चमडी की बिमारी , कफ , वात , पित्त , भगंदर , पेटदुखी , आसुक , हागी , सूजन पर वाघाटा की पत्ती , मुर आन् फर दवाई को काम करस . 
* वाघाटा की भाजी करन साठी पह्यले वका बीज निकारस . मंग ठोकर फोतरना ला वाफाय लेस नी त उकड लेस . मंग वून ला बघारकन् मोकरी भाजी करस . 
* आब येन भाजी म नवल की बात का स ? .....
_ आस्याढी येकादसी को उपास रव्हस . आन् दुसरऽ दिन बारस ला उपास सोडस . त बारस क दिन आस्याढी येकादसी को उपास सोडन साठी पाची पकवान संग च ' वाघाटा क भाजी ' को बी नेम होतो . आब की येक दुय पिढी ला त या भाजी बी मालूम नहाय ; आन् कोनी आंगुन कन् खात बी नही . 
( बेगबेगरऽ जिला म वाघाटा क भाजी को नाव बी बेगबेगरो होयेन . वूसाच नेम नियम बी बेगरा होयेन . या वरधा अन् नागपूर जिला पुरती मला मालूम स . ) 

( सहयोग : सौ. पार्वतीबाई देशमुख ) 
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

दिंडी चालली पंढरी. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

दिंडी चालली पंढरी
 Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

दिंडी चालली पंढरी
दरस्यनाले आतुर
दुमदुमली पांढरी
वारा सुवासे कापूर ।१।

परपंचाचे झमेले
आता राह्यले गा दूर
झाले येव्हारात येले
मांगं सरले काहूर ।२।

येड्या बांगड्याची सेवा
साधेसुधे गा दस्तुर
गोड मानून घे देवा
आला भरूनिया ऊर ।३।

तीर भिवरेचा लाल
सारे भजनात चूर
नभी अबीर गुलाल
तुका ग्यानबाचे सूर ।४।

माथा टेकू दे पायासी
रुनझुनु दे नुपूर
बोल बोल रे माह्यासी
मुक्या स्यबद नुपुर ।५।

भावभगतीचा पूर
मनामंदी हुरहुर
रूप गोजिरे इठूचे
काय वरनू मी नूर ।६।

रुंजगुंजते मनात
धुंद बासरीचे सूर
आमी जित्रब रानात
नादावतो चवखुर ।७।

हर हरी येकरूप
तालासुराचा तंबूर
रूप देवा अपरूक
काटे काढाया आंबूर ।८।

पुंडलिका पांडुरंगा
आभा गाभ्याची टिपूर
भुलवसी सीरीरंगा
रंग रंगाले फितूर ।९।

इठुमाई रखुमाई
जीवा सिवाचे गा धूर
मायमावली इठाई
नाम हिरद्या मधुर ।१०।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, July 17, 2021

माह्या वावराची माती. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

माह्या वावराची माती
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

तिच्या आंगोपांगी फुले
दादा अनाजाचे मोती
साऱ्या जगाले पोसते
माह्या वावराची माती ।१।

उन वाऱ्या पान्यामंदी
होये धडधड छाती
घास देये लेकराले
माह्या वावराची माती ।२।

बरसादीत लक्सुमी
मंग लंका पाराबती
उन सावलीत खेले
माह्या वावराची माती ।३।

तिच्या आंगचा सुगंध
दिवऱ्याची उदबत्ती
आस सासात रुजते
माह्या वावराची माती ।४।

मोठा हरीखे वावर
भाऊ पेरणीच्या घाती
लडे उघाड पडल्या
माह्या वावराची माती ।५।

पोट ज्याच्याच्यानं भरे
त्याची दूरदस्या किती
नाही डागेल डुगेल
माह्या वावराची माती ।६।

झिजे भागाच्या रेघोट्या
नाही खडकू बी हाती
भिजे घामा आसवानं
माह्या वावराची माती ।७।

किती पिढ्या जगवल्या
आता इझल्या गा वाती
बेइमानीनं लुटली
माह्या वावराची माती ।८।

साध्या वावराले भोये
बेपाऱ्याच्या कुरापती
किती फाकन फाकन
माह्या वावराची माती ।९।

तुमी गनिताचे पक्के
सुद्या मांगं साडेसाती
इठु मावलीचा गंध
माह्या वावराची माती ।१०।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, July 16, 2021

अजब गजब - ७२ : महारानी सईबाई. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७२ : महाराणी सईबाई
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब  गजब ७० म फलटन रियासत की जानकारी लिखीती . निंबराज ( पह्यलो ) परमार ( पवार ) न मालवा मिन आय कन् फलटन रियासत की इ.स. १२८४ म  स्थापना करी . येन राज कुर ला ' नाईक निंबाळकर ' , ' फलटनकर ' नाव कन् वरखस . 
येन राज कुर क १२ व पिढी म का ' वणगोजी नाईक / जगपाल राव ' न ४० बरस राज कऱ्यो . इन को येतरो आसकारो होतो क मराठी म येक कहावत पडी , " राव वणंगपाल , बारा वजीर को काल "! महापराक्रमी वणगोजी नाईक को पोरग्यो ' मुधोजी नाईक ( दुसरो ) ' . 
* मुधोजी राजे नाईक निंबाळकर की येकली येक पोटी ' सईबाई ' . सईबाई क माय को नाव , रेऊबाई . 
२९ अक्तुबर १६३३ म सईबाई को जलम भयो . 
* फलटन रियासत क नाईक निंबाळकर घराना को भोसला घरानासिन पुरानोच नातो होतो . मायसाहेब जिजाबाई की माय म्हालसाबाई अन् सासुबाई उमाबाई या फलटन क च नाईक निंबाळकर घराना म की होती . 
* येक डाव राजे मुधोजी नाईक रियासत क काम सिन राजगड ला गयाता . संग सईबाई अन् दुसरा पोटुबाटूना बी होता . राजे मुधोजी की मायसाहेब जिजाबाई संग गोस्टीमाताना भयी , आवबिचार भयो . वोक बास्त राजे मुधोजी आराम करन ला गया . मायसाहेब जिजाबाई न आंगना म खेल रह्या पोटुना ला देखे . वोम येक पोटी खूबच साजरी अन् गुनवान दिस रहीती . वून न जानकारी काढी त वा  राजे मुधोजी की पोटी सईबाई निकरी . वून न राजे मुधोजी ला बलावनो धाड्यो . राजे मुधोजी ला अचंबो वाटे . आब च त मिर कन् आया , अनखिन कोनतो काम होयेन बटो ! राजे मुधोजी वापिस भेटन ला गया . 
' आमारऽ तुमारऽ खानदान को लय लेनोदेनो चलस . आब मु येक गोस्ट मांगूस .' मायसाहेब जिजाबाई न कह्ये .
' मु न कब मना करी . .... सांगो जी .' राजे मुधोजी न कह्ये . 
' हव कोवन क बास्त मुकरनो नी . मंजूर स ? ' मायसाहेब जिजाबाई न पुसे .
' मंजूर स जी...' राजे मुधोजी न ताडकन् कह्ये . 
' आमारऽ घर पोटी नहाय . आमारऽ सिवबा साठी सईबाई देवो जी .' मायसाहेब जिजाबाई न कह्ये . 
' मला मंजूर स .... बिह्या की तारीख निकारो...' राजे मुधोजी न खुसी कन् कह्ये . 
* स्यहाजी महाराज दकसिन क लढाई म गुत्याता . वून न उमाबाई ला पठायो . मायसाहेब जिजाबाई की माताजी म्हालसाबाई बी पुगी . मायसाहेब जिजाबाई को लय भार कम भयो . १६ मई १९४० ला पुना क लालमहाल म सिवबा अन् सईबाई को बिह्या भयो . बिह्या क बेरा सईबाई की उमर ७ बरस आन् सिवबा की उमर १० बरस होती . सईबाई लक्षुमी वानी साजरी , गुनवान होती . तलवार बाजी म त चांगला चांगला ला  पानी पाजन की कुवत होती . 
तत्कालीन कवी परमानंद क ' सिवभारत ' पोथी म येन बिह्या को वरनन स .
सईबाई निंबाळकर आब सईबाई भोसले बनी !
* महारानी सईबाई मायसाहेब जिजाबाई क मोठऽ लाड की होती . छत्रपती सिवाजी महाराज साठी त साकस्यात लक्षुमी ! वून ला हरदम वाटे क महारानी सईबाई क पायगुन कनच आपन ला यस भेट रह्येस . 
* महारानी सईबाई ला पह्यले तीन पोटीना भयी . १४ मई १६५७ म राजे संभाजी को जलम भयो . 
* संभाजी महाराज क जलम क बाद महारानी सईबाई बिमार पडी . हवापालट साठी मायसाहेब जिजाबाई संग महारानी सईबाई राजगड परीन परतापगड प आई , पर आराम नी लाग्यो . राजगड की हवा मानत नी तेकन , वून साठी छत्रपती सिवाजी महाराज न सिवापाटन ला बाडो बांध्यो . दवाई पानी भयी , वयीद हकीम भया , देवधरम कऱ्यो पर महारानी सईबाई क तब्येत ला आराम नी पड्यो . पुरा दुय बरस भया . बिमारी बाहाडत च गयी . 
* ५ सितंबर १६५९ ला महारानी सईबाई देव क घर गयी . तान्ह संभाजी महाराज ला मायसाहेब जिजाबाई न संभारे . छत्रपती सिवाजी महाराज क दुख ला त हद च नी रह्यी . 
असी मान्यता स क जब छत्रपती सिवाजी महाराज जी की आखरी सास चाल रहीती तब वून क मुंडा मिन ' सई ' स्यबद निकऱ्योतो . 
* महारानी सईबाई की दुय समाधीना स . येक पदमावती देऊर क आघ आन् येक राजगड क पायथा जवर क पाल खुर्द गाव ला गुंजवने नदी काठऽ . 
* छत्रपती सिवाजी महाराज जी आन् महारानी सईबाई को १९ बरस को संसार रह्ये . स्वराज को जोतो वून न संगमंग बांध्ये . 
# पवार वंस की पोटी महारानी सईबाई ला कोटी कोटी प्रणाम !

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, July 12, 2021

अजब गजब - ७१ : छतरपुर रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७१ : छतरपुर रियासत
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली


छतरपुर रियासत या बुंदेलखंड म होती . भोयरी बोली म क्रियापद क भूतकालीन रूप प बुंदेलखंड क बुंदेली बोली को असर सपस्ट दिसस . जसो : थो , हट्यो , भयो , गयो . वूसोच ' तृतीय पुरूस ' सर्वनाम प बी बुंदेली को असर दिसस . जसो : वू , वा , वुई ...
भोयरी बोली प इ बुंदेली बोली को असर त दिसस च , पर आमारऽ कयी तिवार प बी बुंदेलखंड को सपस्ट असर स . बहुड्डा ,  भुजलिया को तिवार , आठवी को तिवार इ मुख्य स ! 
* बुंदेलखंड बोल्या प ' महाराजा छत्रसाल बुंदेला ' को नाव आपरंग च आवस . 
तोडादार घोडादार
वीरनि सों प्रीति करी
साहस सों जीति जंग
खेत ते न चालियौ
होय जो नरेस देस
रैहे न कलेस रेस
मेरो कह्यो पालियौ ।
महाराजा छत्रसाल बुंदेला साठी या वरना परसिध्द स !
* इ.स. १६७१/७२ म दिलेरखान क छावनी मिन , बुरानपुर सिन महाराजा छत्रसाल बुंदेला छत्रपती शिवाजी महाराज ला भेटन साठी लुक कन् आया . येक मह्यना संग रह्या . तब छत्रपती शिवाजी महाराज न वून ला सांगे क , चाकरी सोडो अन् बुंदेलखंड म आपरो राज चलावो . 
* महाराजा छत्रसाल बुंदेला न बुंदेलखंड प इ.स. १७३१ वरी राज कऱ्यो . वून क वंसज को राज इ.स. १७८५ वरी टिक्यो . इ.स. १७७५ म वून न महाराजा छत्रसाल बुंदेला क नाव पर ' छतरपुर ' बस्याडो , आन् छतरपुर ला राजधानी करी . 
* इ.स. १८०६ म कुंवर सोने सिंह पवार ( सौनेजू )  न छतरपुर राज जित्यो . आन् छतरपुर राज ला ' पवार राज ' बनायो . 
* कुंवर सोने सिंह : इ.स. १७८५ - १८१६
* परताब सिंह : इ.स. १८१६ - १८५४ . इन ला राजा की उपाधी भेटी . 
* जगतराज : इ.स. १८५४ - १८६७ . परताब सिंह को पोरग्यो जगतराज जब ८ बरस को होता , तब वूई राजगादी प बस्या . जगतराज जी नाना होता , तेकन राजपाट को काम , परताब सिंह की दुसरी लाडी ( रानी ) न देख्यो .
* विश्वनाथ सिंह : इ.स. १८६७ - १८९५ .
* विश्वनाथ सिंह ( दुसरो ) : इ.स. १८९५ - १९३२ 
* भवानी सिंह : इ.स. १९३२ - १९४७ .
# इ.स. १९४७ म छतरपुर रियासत को बुंदेलखंड क संग विंध्य परदेस म विलय भयो . 
# इ.स. १९५६ म विंध्य परदेस को मध्यपरदेस म विलय भयो . 
# छतरपुर रियासत २९०० वर्ग किमी की होती . इ.स. १९०१ क सिरगनती क नुसार छतरपुर रियासत की आबादी १,५६,१३९ होती . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
 . 

Saturday, July 10, 2021

अजब गजब - ७० : फलटन रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७० : फलटन संस्थान
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

९ वऽ सदी म धारानगरी म परमार राज की मेढ़ गडी . ११ वऽ सदी पासिन मुसलमान राजायनऽ मारकाट मचाई . कयी पुराना राज दानोफान भया . येनऽ धामधूम म इ.स. १२४० म निंबराज ( पह्यलो ) परमार मालवा परीन महाराष्ट्र म फलटन जवर क भगवान महादेव क जंगल म आया . निंबराज ( पह्यलो ) परमार जेन गाव म रह्यो , वको नाव ' निंबळक ' . इ.स. १२७० पासिन वून न ११ बरस घोर तप कऱ्यो . वून पर देवी माय परसन्न भयी अन् वून ला ' मोरवेल ' को हार वरदान म देयो . इ.स. १२८४ म निंबराज (पह्यलो ) परमार न ' फलटन राज ' की स्थापना करी . वून न इ.स. १२९१ वरी राज कऱ्यो . 
* निंबराज (पह्यलो ) परमार इ फलटन क निंबाळकर / नाईक घराना को मूल पुरुस !
१. निंबाळकर / नाईक वंस 
* निंबराज (पह्यलो ) को पोरग्यो पोखडला जगदेवराव उर्फ धारावत राव :  १२९१ - १३२७
* निंबराज ( दुसरो ) : इ.स. १३२७ - १३४९ . पदवी नाईक . 
* वणंगभूपाल : इ.स. १३४९ - १३७४ 
* वणंगपाल : इ.स. १३७४ - १३९४
* वणगोजी : इ.स. १३९४ - १४०९ . इन क डोरा की पापनीना लंबी होती , तेकन नाव पड्यो , ' पलख वणगोजी '! इन क राज म १२ बरस को दुरगादेवी को अकाल पड्यो . वणगोजी न अकाल म आपलऽ लोगना की साजरी देखभाल करी . अकाल खतम होन क येक साल बास्त वून को सर्गवास भयो . 
* मालोजी ( पह्यलो ) : १४०९ - १४२०
* बाजी साहेब : १४२० - १४४५
* पवारराव नाईक : १४४५ - १४७० .
* बाजी साहेब नाईक ( दुसरो ) : १४७० - १५१२
* मुधोजी नाईक ( पह्यलो ) : इ.स. १५१२ - १५२७ 
* बाजी धारराव : इ.स. १५२७ - १५६०
* मालोजी ( दुसरो ) : इ.स. १५६० - १५७०
* वणगोजी ( दुसरो ) नाईक उर्फ जगपाल राव : इ.स. १५७० - १६३० .  वणगोजी बीस बरस क उमर म राजगादी प बस्या . इ.स. १५९०/९२ म इन न आदिलस्याहा संग लढाई बी करीती . 
* मुधोजी नाईक ( दुसरो ) : इ.स. १६३० - १६४४ . इन की पोटी ' सईबाई निंबाळकर ' को बिह्या इ.स. १६३९ म बिजापूर यहान छत्रपति शिवाजी महाराज संग भयो . 
* बजाजी नाईक ( पह्यलो ) : इ.स. १६४४ - १६७६ . इन क नानो पोरग्यो महादजी को बिह्या , छत्रपति शिवाजी महाराज की पोटी सखुबाई संग भयो . 
* वणगोजी ( तीसरो ) : इ.स. १६७६ - १६९३ 
* जानोजी नाईक ( पह्यलो ) : इ.स. १६९३ - १७४८
* मुधोजी नाईक ( तीसरो ) : इ.स. १७४८ - १७६५
* मालोजी नाईक ( तीसरो ) : इ.स. १७७४ - १७७७
* जानराव नाईक उर्फ जानोजी ( दुसरो ) : इ.स. १७७७ - १८२५ . २२ येपरिल १८२० म जानोजी न अंगरेज कंपनी सरकार संग तयनाती फऊज को करार कऱ्यो . 
* साहेबजी बाई निंबाळकर : इ.स. १८२५ - १८५३ . साहेबजी बाई जानोजी की लाडी . जानोजी को सर्गवास भया बास्त इन न राजपाट चलाये . 
* मुधोजी राव उर्फ बापूसाहेब नाईक निंबाळकर : इ.स. १८५३ - १९१६
* मालोजी राव उर्फ नानासाहेब निंबाळकर : इ.स. १९१६ - १९४७ . पदवी ' राजा '.
* इ.स. १९४८ म स्वतंत्र भारत म विलिनीकरन की पह्यली घोसना फलटन रियासत न करीती . 
# निंबळक गाव परीन येन वंस को नाव ' निंबाळकर ' पड्यो . ' नाईक ' या पदवी भेटीती . 
# फलटन रियासत की आराजी ९३६ . ३२ चौ.कि.मी. होती . इ.स. १९४१ म येन रियासत की आबादी ७१ , ४७३ अन् सालाना कमाई १५ लाख रुपया होती . फलटन रियासत क महादेव मुखी पुनो , पसचिम दकसिन म सातारा , पूरब म सोलापूर होतो . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


Thursday, July 8, 2021

अजब गजब - ६९ : राजगढ़ रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६९ : राजगढ़
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मध्यप्रदेस म नेवाज अन् पारबती नदी क मंझार , मान्यागढ़ पहाडी क तलहटी बसेस राजगढ़ को किल्लो . छतरपुर पासिन राजगढ़ ५९ कि.मी. दूर स . 
१. इतिहास : * राजगढ़ को पुरानो नाव झंझनीपुर / झंडेपुर होतो . वोला उमाठवारा बी कव्हत होता . राजगढ़ ला इ.स. १६४० म  रावत मोहन सिंह क कार म बसायतो . तब वकी आबादी ३००० होती . 
* रावत छतरसिंह को वंस परमार अन् उपवंस उमठ होतो . उमठ परमार को पहलो राज ' उमावाडा ' होतो . इ.स. १४८८ म इन ला रावत उपाधी भेटीती . 
* राजधानी पह्यले दुपारिया ( शाजापुर जिलो )  , बाद म डुंगरपुर , बाद म रतनपुर अन् बाद म राजगढ़ बनी . 
रावत छतरसिंह ला मोहन सिंह अन् परसरामजी असा दुय पोटुना होता . ( कयी जागा प तीन पोटुना जिकर आवस . 
* इ.स. १६४५ म राजमाता ( रावत छतरसिंह जी की रानी ) क अनुमती कन् दीवान अजबसिंह महाल बनायो , जेला पाच दरुजा होता . इतवारिया , भुडवारिया , सूरज पोल , पनराडिया , नवो दरवाजो ; असा नाव का इ पाच दरुजा . राजगढ़ म राजेश्वर मंदिर , चतुर्भुज नाथजी मंदिर अन् नरसिंह मंदिर असा तीन पुराना देऊर स . 
* राजगढ़ का दुय हिस्सा स , येक ला बडामहल अन् दुसरा ला राजमहल कोस . बडा महल को बांधकाम इ.स. १६४५ म चालू भयो त् राजमहाल को बांधकाम इ.. १९३१ म चालू भयो . 
* ३०० बरस पुरानऽ राजगढ़ किला की राजपुर , मुगल , मालवा ' शैली ' स !
* रावत छतरसिंह क बाद रावत मोहन सिंह ( मोठो पोरग्यो ) राजो बन्यो . रावत मोहन सिंह को राज इ.स. १६३८ पासिन १६९७ वरी होतो . इ.स. १६८१ म  रावत मोहन सिंह ला राजगढ़ रियासत अन् रावत परसराम ला नरसिंगगढ़ रियासत भेटी . 
* १ जनवरी १८८६ , रावत बलभद्र सिंह क जमाना म , " राजा " या उपाधी भेटी . 
* रावत विरेंद्र सिंह को सर्गवास २६ अक्तुबर १९३६ म भयो . वून क बाद राजा विक्रमादित्य न १४ जनवरी १९३७ पासिन राज कऱ्यो . 
* इ.स. १९४८ म राजगढ़ रियासत को भारत देस म विलय भयो . वोन बेरा राजगढ़ की आबादी  ८८ , ३७६ होती . ११ तोफ की सलामी होती . राजस्व रु . ४५०००० अन् प्रिवीपर्स  रु. १४०००० होतो . 

( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढा जी , जोधपुर )

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, July 4, 2021

उघाड. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

उघाड
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

आला जी मिरुग , हासला आखाड
झाला जी बह्याड , अरदडा ।१।

इत्तुकले जीव , धकवे पहाड 
दोनी हात जोड , अकुरले ।२।

हिरवे चऊक , वावरा रफाड 
येई लय लाड , देखुनिया ।३।

गेला पुक कोड्डा , पडली उघाड 
नसीब गोट्याड , का लिवले ।४।

मुलमुल पाह्ये , चिम्ले माल झाड 
दोन ठेंब धाड , त्हानेसाठी ।५।

हमेस्या आमच्या , नसीबी उघाड
रिकामे भदाड , सपनाचे ।६।

सपे आस सास , वावर उजाड
हालाचे पहाड , सिरावरी ।७।

भर बरसादी , कोड्डे नाले आड
डोरे बी म्याहाड , बिना आसू ।८।

कसा वाचवू रे , फसलीचा गड 
टपले गिधाड , चारी आंग ।९।

इज चमकव , करि कडकड
आता तरी पाड , पानी बाप्पा ।१०।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

उघाड ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

उघाड ( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बरसे मिरुग , हासस आखाड
भयेस बह्याड , अरदडा ।१।

नाना नाना जीव , माती ला धकाड
दुय हात जोड , अकुऱ्यास ।२।

हिवरा चऊक , खेत क रफाड
मन आये लाड , देखकन् ।३।

गयो पुक कोड्डो , पडीस उघाड
नसीब गोट्याड , काहे लिखे ।४।

मुलमुल देखे , चिम्या माल झाड
दुय ठेंब धाड , तिसा साठी ।५।

हमेस्या आमारऽ , भाग म उघाड 
रिकामा भदाड , सपना का ।६।

भर बरसादऽ , कोड्डी भीर आड 
डोरा बी म्याहाड , बिना आसू ।७।

टुटी आस सास , खेत बी उजाड
बिपदा पहाड , डोकसा प ।८।

कसो बाचाडनो , फसल को गड 
टप्यास गिधाड , चारी कितऽ ।९।

इज चमकाव , कर कड कड 
आब तरी पाड , पानी बाप्पा ।१०।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, July 3, 2021

भोयरी संस्कृति - ४२ : घोंगडो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - ४२ : घोंगडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

घोंगडो पुरानऽ जमाना पासिन हाथरन , पांघरन क काम म आवस . घोंगडा ला मराठी म घोंगडी कोस . पुरान काल पासिन रुसी , मुनी , संत , महात्मा न घोंगडा की महती सांगीस . 
घोंगडा ला हिंदू धरम म पवितर मानेस . येला विधी पूर्वक सुध्द मानेस ... अन् घोंगडा ला राजवस्त्र , देववस्त्र की जागा भेटीस ! 
१. घोंगडा की महिमा :
* रुगवेद म घोंगडा की महिमा स... 
रुगवेद : १०/२६
प्रत्यधिंयद्ण्यानाम श्वहयोरथानाम ।
ऋषी: स योमनुहिंतो विप्रस्य यावत्सख : ।
आधीषमानाया : पति: शुचायाश्च शुचस्यच ।
वासोवायो विनां वासांसिमम्रजत ।।
* संत ग्यानेसर महाराज क अभंग ( मराठी ) म घोंगडा को रूपक स . 
तुझे घोंगडे येकचि चोख । दुजेपणाच वोळख अमंगळ ।।
दे धडुत न घोंगडे मोठे । खिरपटे जळो देवा ।।
रखुमादेविवरु उदार झाला । घडौता केला ज्ञानदेवो ।।
* संत तुकाराम महाराज क अभंग ( मराठी ) म घोंगडा को रूपक देखो ..
खेळो लागलों सुरकवडी । माझी घोंगडी हारपली ।।
कान्होबा तो मीच दिसे । लाविलें पिसे संवंगडीया ।।
* नवनाथ भक्तीसागर : काळी कांबळी गुंतून बुंथी . 
* छत्रपती सिवाजी महाराज क दरबार म घोंगडो अहेर करन को रिवाज होतो . 
* घोंगडा की महती आयुरवेद म बी सांगीस . कई बिमारीना घोंगडो बापऱ्याकन् दूर होस , असो आयुरवेद म सांगेस . 
* सनतिवार , महापूजा , पारायन , भंडारो , जागरन , गोंधर ( गोंधळ ) , सत्यनारायन अन् कयी देवधरम क पूंजा म / विधी म घोंगडा को मान स . बिह्या , साखरपुडा की बयठक घोंगडा पर करनो , येला मान समजत होता . वूसोच तब्येत पानी साठी बी घोगडो फायदा को मानेस . घर म आया पयी पावना ला बसन साठी घोंगडो देन की पुरानी परंपरा होती . 
** घोंगडा की अऊर येक खास खासियत स . घोंगडो बाराई काल बापरता आवस . उनारा म ठंढो , हिवारा म गरम ( तातो ) , बरसाद म जलरोधक असो घोंगडो बहुगुनी स . घोंगडा कन् सरप , बिचू , मोह्यरज की मासी , खटमल जवर नी आवत .  येतरो पवितर अन् बहुगुनी दुसरो कोनतोच कपडो नहाय . 

२. घोंगडा का रूप : 
* घोंगडो ' खड्डा माग ' प बुनस . येक घोंगडा ला तीन किलो क जवरपास मेंढरा की लोकर ( उन ) लागस . येक घोंगडो बुनन ला ३ दिन पासिन त् १२ दिन लागस . गाव म येक जागा प रह्यकन् घोंगडा बुननी वाला ला ' खुटेकर ' कोस . आन् जी मेंढरा संग घुमस वून ला ' हटकर ' कोस . 
* सबसिन मह्यंगो घोंगडो मेंढरा क बछडा क जावरा पासिन बनावस . इ घोंगडो मुलाम रव्हस . 
* येकेरी घोंगडा ला ' झुगुर ' कोस . दुय घोंगडाना ला जोडकन सिवस वोला ' कांबळी ' कोस . आठ घोंगडा नी त् चार ' कांबळी ' क जोड ला ' बोद ' कोस . दुय पट्टा को नी त् चवरस घोंगडा ला ' चवाळे ' ( चवारो ) कोस , जेपर पूंजा मांडस . जुना येकेरी घोंगडा ला पटकूर / फटकूर कोस . 
बरसाद म घोंगडा की खोर डोकसा परिन लेस , वोला घोंगतो / घोंगडगुंची कोस . नाना पोटुना नानऽ घोंगडा की खोर डोकसा परिन लेस , वोला ' घोंगसी ' कोस . 
घोंगडा की थयली / झोरो बनावस , वोला गलंगती कोस . 
गडी मानुस ला जेवनी ( पोरो , दिवारी ला )  जेनऽ घोंगडा म  देस , वोला ' खोर ' कोस . 

३. बोली भास्या म घोंगडा परिन वाक्प्रचार : 
* घोंगडा प डायो - मरन क आखरी बेरा प मानुस ला गादी परिन खलतऽ घोंगडा प डावनो .
* घोंगडो गरा म पड्यो - लचांड पास लाग्ये .
* गरीब का गया घोंगडा , गरीब पड्या उघडा - मानुस पुरो च कंगाल होनो . 

# कयी काम म आवनी वालो , मजबूत टिकाऊ लाख मोल क घोंगडा को इ ' घोंगडो पुरान ' !!

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, July 1, 2021

अजब गजब - ६८ : अर्की. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६८ : अर्की
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

हिमाचल परदेस क सोलन जिला म ' अर्की ' इ तहसील को ठिकानो स . अर्की सिमला पासिन ३८ कि.मी. दूर स . अर्की इ पहाडी राज बाघल की राजधानी होती . 
१ . इतिहास : * बाघल रियासत की स्थापना १३/१४ वी सदी म अजयदेव परमार न  करीती . तब वकी राजधानी धुन्धन अन् दाडला म होती . 
* अर्की प पह्यलो राज साहबसिंह परमार न करे . इनकी स्याखा वराह होती . येन स्याखा को राज पंजाब ( बाघल ) म बी होतो . 
* इ.स. १६४३ म सभाचंद परमार न अर्की नगर बस्याड्यो . 
* इ.स. १६५० म राणा सभाचंद परमार न अर्की ला बाघल राज की राजधानी घोसित करी . 
* इ.स. १८०० - १८०५ मंझार राणा सभाचंद परमार को वंसज राणा पृथ्वी सिंह परमार न अर्की को किल्लो ( गढ़ ) बांध्यो . 
* इ.स. १८०६ म येन राज प गोरखा फऊज न कब्जो कऱ्यो . राणा जगत सिंह न नालागढ़ म आसरो लेयो . 
* इ.स. १८१५/१६ म राणा जगत सिंह जी न , अंगरेज फऊज क सहारा कन् आपलो राज अन् अर्की गोरखा सिन वापिस लेयो . 
* इ.स. १८३० म राणा शिवशरण सिंह जी न ' दीवाने खास ' बांध्यो . 
* इ.स. १८४० पासिन १८६७ वरी राजो किशन सिंह न यहान राज कऱ्यो . वून न अर्की की ढंग कन् उन्नती करी . सडकना बांधी . वून ला ' राजा ' की उपाधी बी भेटी . 
* १५ येपरिल १९४८ म या रियासत हिमाचल परदेस म सामिल भयी . 

२. वास्तुकला : * अर्की किल्ला, महल क बांधकाम म राजपूत - मुगलई कारागीरी को मिसरो दिसस . भित पर का चितरंगना कांगडा सैली का दिसस . 

३. वर्तमान : * अर्की जवर च बातल गाव स , जेला नानी कासी कोस . अर्की जवर च दुरगा माता , लुटरू महादेव , शाखनी महादेव का परसिध्द देऊरना स . 
* आब अर्की गढ खंडारा मिन जी चांगलो भाग बाचेस , वोमऽ हेरिटेज होटल स . आन् राजाना का वंसज बी वहान च रव्हस . वर्तमान म इ होटल न गढ राजा राजेंद्र सिंह येन वंसज की इस्टेट स . 

# आमारऽ राज क जुनऽ गवरव की निस्यानी आन् वयभव की कथा - गाथा बाचिस . वून को जतन अन् दरस्यन करनु , इ आपरो काम स . 

( सहयोग : इंजि. जालमसिंह सोढा जी जोधपुर ) 
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, June 29, 2021

महाराणी अजबदे बाई पंवार. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार को जलम मेवाड क बिजौलिया ठिकाना म इ.स. १५४२ म भयो . अजबदे बाई क माय को नाव हंसाबाई अन् पिताजी को नाव राव मामरख ( रामरख ) सिंह पंवार होतो . अजबदे बाई का गुरू मथुरा का विठ्ठल राय होता . 
अजबदे बाई को बिह्या इ.स. १५५७ म भयो . अजबदे बाई वीर महाराणा प्रताप जी ला परन्याईती . बिह्या क बखत अजबदे बाई की उमर १५ बरस अन् महाराणा प्रताप जी की उमर १७ बरस होती . 
१६ मार्च १५५९ इसवी सन  म अजबदे बाई न भंवर अमरसिंह ला जलम देयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह क पिताजी को नाव महाराणा उदयसिंह अन् माय को नाव जयवंता बाई होतो . 
महाराणा प्रतापसिंह ला अजबदे बाई म आपली माय जयवंता बाई की च छाया दिसत होती . अजबदे बाई महाराणी जयवंता बाई क मोठऽ लाड की होती . 
महाराणा प्रतापसिंह जी का अनखिन् १० बिह्या भया . पर हर घडी वून ला अजबदे बाई को कप्पो साथ होतो . घर पासिन राजकारन वरी अजबदे बाई महाराणा प्रतापसिंह जी क खांदा ला खांदो लगायकन् उभी रही . 
इ.स. १५६७ म अकबर न चितौडगढ पर हमलो कऱ्यो . तब ४ मह्यना अजबदे बाई राजपिपला रही . 
इ.स. १५७२ म महाराणा उदय सिंह जी को स्वर्गवास भयो . तब महाराणा प्रतापसिंह को राजतिलक भयो अन् अजबदे बाई महाराणी / पटरानी बनी . 
इ.स. १५७२ पासिन १५७६ वरी महाराणी अजबदे बाई गोगुन्दा म रही . 
इ.स. १५७६ म परसिध्द हल्दिघाटी की लढाई भयी . येन लढाई म महाराणी अजबदे बाई का पिताजी महाराजा रामरख पंवार , भाई कुंवर डुंगरसिंह पंवार अन् दुसरो भाई पहाड सिंह पंवार ला वीरमरण आयो . 
महाराणा प्रतापसिंह जी न आब जंगल म रह्यकन् छापामार लढाई करन को बिचार कऱ्यो . आपलऽ राज ला दुसमान क येढा मिन निकारन को होतो... इ मुसकिल अन् तकलिफ वालो फयसलो होतो . 
महाराणी अजबदे बाई न कह्ये क , ' जसी सीता माय भगवान राम संग १४ बरस बनवास म रही ... जसी दरोपदी माय पांडव संग १२ बरस बनवास म रही , उसी च मु बी तुमारऽ संग जंगल म च रवून . जहान तुमी रवजेन , वहान च मु बी संग रवून .' 
महाराणा प्रतापसिंह जी न महाराणी अजबदे बाई ला लय समझाये , पर महाराणी अजबदे बाई आपलऽ फयसला पर अटल रही . महाराणी को भाई ' शुभकरण पंवार ' आखरी वरी संग रह्यो . 
धन्य वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , धन्य महाराणी अजबदे बाई अन् धन्य महाराणी अजबदे बाई का भाईना न् पिताजी ! 
जब  राजपुतानो दुसमान क घर पानी भर रहेतो , तब वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , महाराणी अजबदे बाई , भाई शुभकरण पंवार दुसमान ला आपली तलवार - भाला - तिरकमठा कन् पानी पाज रह्याता . आपल ऽ जलमभूमी पर आई पापी बिपदा ला जवर खतम नी करून तवर मु जमीन पर च सोवून , असी आन आपलऽ जलमभूमी का सपुत वीर महाराणा प्रतापसिंह जी न लेयीती . 
इ.स. १५८५ म महाराणा प्रतापसिंह जी न ' चावंड ' ला आपली राजधानी बनाई . 
इ.स. १५९० म वीर महाराणा प्रतापसिंह जी की पटरानी अजबदे बाई को चावंड म च देहांत भयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह जी अन् महाराणी अजबदे बाई पंवार ला कोटी कोटी प्रणाम 🙏🙏.

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, June 27, 2021

भया आउट डेटेड. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भया आउट डेटेड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भया आउट डेटेड
गाव खेडा खेती माती
खसे गावगाडो चाक
कितऽ ढुंढू बाडी खाती ।१।

भया आउट डेटेड
जुनऽ बिचार का मोती
न्हाय पानी को भरोसो 
लाग जायेन सवाती ।२।

भयी आउट डेटेड
पुरखा की ग्यानजोती
जुना ला लाग्या रुन्या
आब गूगल सोबती ।३।

भयी आउट डेटेड
सांज की बी दिवाबाती
दिन रात येकसार
मनऽ फयली भरांती ।४।

भया आउट डेटेड
नेग दस्तुर आरती
देखा देखी दुनिया की
तिराईत की किरती ।५।

भया आउट डेटेड
पहाडा की बी गिनती
मोबाइल , ल्यापटाप
इचकस नानी पाती ।६।

भयी आउट डेटेड
फेटो टोपी बांडी धोती
उपी चोरी लुगडा की
आंगभर की महती ।७।

भयी आउट डेटेड
बोलचाल की संगती
डाये कान म गा ठेपू
असी भयी भानामती ।८।

भयी आउट डेटेड
माय बाप की जी मती
बंद मुंडो पोटू आघ
उरफाटी काल गती ।९।

भयी आउट डेटेड
उमर की साडेसाती
दान जवानी को मांगे
बुजरुक जी ययाती ।१०।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, June 26, 2021

अजब गजब - ६७ : हडबू जी सांखला. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६७ : हडबूजी सांखला
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान म नागौर जिलो स . नागौर जवर च भूंडेल गाव का मेहराज सांखला जागिरदार होता . राजा मेहराज सांखला क घर ' हडबूजी ' न जलम लेयो . माय को नाव ' सौभाग ' . 
स्यंख की पूंजा करनीवाली पवार राजपूत की येक पाती ला ' सांखला ' कोस .  
मेहराज सांखला भाटी राणगदे क संग कोडमदे क लढाई म काम आयो . बाबा हडबू जी आपलो गाव भूंडेल ला सोडकन् ' हरभमजाळ ' म आया . बाबा हडबू जी को येक नाव ' हरभम ' बी स . जाळ / जाल येक परकार क झाड को नाव स . यहान आयकन् बाबा हडबू जी जाळ क झाड खलतऽ घोर तपस्या करी . तेकन येनऽ गाव / जागा को नाव ' हरभनजाळ पड्यो , आन् परसिध्द भयो ! 
जालौर गाव को नाव बी जाळ / जाल झाड परीन च पड्यो !
बाबा हडबू जी सगुन ( शकुन ) विचारक , दयालु , संत अन् रणबांकुरा होता . राजस्थान क परसिध्द बाबा रामदेव का बाबा हडबू जी मावस भाई होय . बाबा रामदेव क गुरू न बाबा हडबू जी ला गंडो बांध्यो . बाबा रामदेव अन् वून क गुरू क परभाव कन् बाबा हडबू जी न अवजार - हत्यार को त्याग कऱ्यो . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * राव जोधा जी क राज पर दुसरऽ राजा न कब्जो करेतो . राव जोधा जी इतऽ उतऽ सहारा साठी घूम रह्याता . येक दिन राव जोधा जी बाबा हडबू जी ला भेटन ला आया . बाबा हडबू जी न रात क खाना प राव जोधा जी संगच आपलो भासो ' जैसा भाटी ' ला बी बलायो . जैसा भाटी जैसलमेर को राजो रावल केहर क येक राजकुमार , कलिकरन को पोरग्यो होतो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला आसिरवाद देयो क , तुमारो राज तुमाला वापिस भेटेन . पर तुमी म्हरो भासो जैसा भाटी ला संग लेयकन् जावो . तुमाला वकी मदद होयेन . 
बाबा हडबू जी न जसो कह्येतो , वूसोच भयो . राव जोधा जी ला आपलो राजपाट भेट्यो . जोधपुर म जैसा भाटी को वून ला घाडो सहारो भेट्यो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला कट्यार देयीती . राव जोधा जी न बी बाबा हडबू जी ला बावन बीघा जमीन दान करी . येलाच ' बावनी जागीर ' कोस . बाबा हडबू जी न यहान ' बैंगहटी ' गाव बसाड्यो , जी जोधपुर जिला म स . बैंगहटी म बाबा हडबू जी को मुख्य देऊर स . पर येनऽ देऊर म बाबा हडबू जी क मूरती की पूंजा नी होत . यहान बाबा हडबू जी को मोठो गाडो स . येनऽ गाडा म बाजरो , कडबा अन् दुसरो अनाज लेकन बाबा हडबू जी गाव गाव क गरीबगुदाला बाटत होता . कोनी बी  मानूस , जनावर भुको नी निज्या पायजे , तेक साठी वूई येन गाडा कन् अनाज , चारो बाटत होता . वू गाडो आब बी देऊर म धरेस आन् वकीच पूंजा करस ! येन गाडा को नाव ' सिया ' स . यहान का पुजारी सांखला राजपूत स . 

* येक डाव बाबा हडबू जी दुसरऽ कितऽ गयाता . तबच वून क पोटी ला पोटी भयी . जोतिस न वोन पोटी ला असुभ सांगे . घरवाला न वोनऽ नानसऽ जीव ला जंगल म मरन साठी फेक्यो . बाबा हडबू जी जंगल मिनि घर कितऽ आय रह्याता तब वून ला पोटू क रोवन की आवाज आई . बाबा हडबू जी न वोला घर ल्यायो आन् रावळा म ( ठाकुर को जनाना आवास ) देयो . वोन पोटी ला देख कन् रावळा म कोहराम मच्यो . बाबा हडबू जी ला सारी करमकहानी मालुम भयी . बाबा हडबू जी न भविस्यबानी करी क , म्हरी नातीन ' राजरानी ' बनेन ! वून न आपलऽ नातीन को बिह्या राव जोधा को पोरग्यो ' राजकुमार सूजा ' संग कऱ्यो . राव जोधा जी क बास्त राजकुमार सूजा ( सुजान ) को राजतिलक भयो . अन् नातीन लिखमी ( लकसुमी ) राजरानी बनी . 

# बाबा हडबू जी को येक देऊर मंडोर ( जोधपुर ) म स , जहान बाबा हडबू जी की मुरती स . इ देऊर राजा अजितसिंह न वि.सं. १७७१ म बनायो . 

दूजा पीर सांखला हडबू , नही किसी के आया काबू ।
भूखों को भोजन पहुंचाता , उसे बांटने घर - घर जाता ।
उन के मंदिर में वह गाडा , पूजा करने जन - जन आता ।
सांखला हडबू लोक देवता , ' दयालुता ' जग आज सेवता ।।

( सहयोग : इंजि . जालमसिंह सोढा जी , जोधपुर )
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर