Friday, May 29, 2020

येन् साल का हिसका

⚜ येनं साल का हिसका ⚜

कबं तपे सन्नाटानं
कबं पानी मं मह्यके
करोना ला लायकन्
असो उनारो बह्यके

        रागो भरे सूर्व्यदेव
        कबं पानी का बी ठेंब
        काम धंदो भये बंद
        आबं बारा गाडा बोंब

लोग घरना मं बंद
काम धंदाला मनाई
चिंता कास्तकारयला
भरन की गा बिजाई

       केता आया केता गया
       पर येन् साल चितंबो
       करोना को यी उनारो
       नही झाड ला बी आंबो

गयी लगनसराई
बांध्या मुंडाला मुसका
खलं वरतं दचडे
येनं साल का हिसका

©️✒ सुरेश महादेवराव
            देशमुख , नागपूर

Monday, May 25, 2020

राग लोभ भोयरी कविता

⚜ राग लोभ ⚜

मन खाकस को दानो
मन पहाड कं वानी
राग लोभ झुलापर
वोकी बदले कहानी

        असो माया को जंजार
        नही उखलत ग्यानी
        बुने जारो कातिन को
        वोतरीच जिनगानी

कबं इतं कब उतं
झलकस चित् पानी
खेल देवाजी को न्यारो
निरी आपलीच बानी

        सुदं सादं बिचार ला
        लय कंगोरा की अनी
        धरे जोगड्या को फेर
        मन बायंडर वानी

सत् असत् झगडो
दुय दिन जिनगानी
उटारेटा कं माट्यानं
करी येतरी धूरधानी

✒©️ सुरेश महादेवराव
           देशमुख , नागपूर

राग लोभ

राग - लोभ

ग्यानी लोगना कव्हस क् मानुस क् स्वभाव ला दवाई नहाय. भगवान नं हर मानुस ला बेगरा बेगरा बनायास. रूप , रंग , स्वभाव सबन अलग. जलम भयापर मानुस को जीव येनं दुनिया मं गुतत जास. राग लोभ इ बोलनो सिकन कर पह्यलेच आपन सिकजे. बोलनो , हावभाव कन् आपनला चटकन् राग लोभ समजस.
आबं राग आन् लोभ इ येकच सिक्का की दुय विरुध्द बाजू. लोभ माया कन् आपन येकमेक मं गुत्या रव्हस. .... जगन को बाह्यनो बनस. जास्त मतलब कं लोभ ला हाव कव्हस. येकं उलटो राग सं. आपलो कोनी आयके नही , आपलं मनमुताबिक वागे नही , नुकसान - झगडो करे तं आपनला राग आवस. उसो देख्या जाय त् राग आन् लोभ बिना आकार उकार का सं. जेपर बितस वोकं अनुसार उनको नापजोख ठह्यरस. 
माय बाप कं ममता को लोभ अनमोल. भाई भाई , भाई बहिन , लाडा लाडी क् प्यार को लोभ खट्टो - मिठो.... आबच झगडेन आन् बातच मिरेन बी ! गनगोत , सखी - सोबती कं लोभ को गुताडो जिनगानीभर पुरकन् उरस. पर लोभ जब धन पर जास त् वू हाव म् बदलस.
येक मानुसला देव परसन्न भयो. देव न् वरदान देया क् सूर्व्यनारायन निकरन क् पह्यले तू जेतरी जागा म् जायेन वोतरी तोरी. मंग का देखन को होतो... पठ्ठ्यानं लगायी दौड.... भागत रहे...भागत रहे... रातभर भागत रह्यो..थककन् चूर पन् थांबन को नाव नहाय.. येतरो भागे.. येतरो भागे क् सूर्व्य निकरन क् पह्यलेच धाडकन् जमीन पर पड्यो. वहानच वोको जीव गयो. कहान थांबन को सं , आपली मरयादा - हक केतरो सं ; येला जाननो जरुरी होतो. 
आबं राग को कव्हनो त् अजून भारी सं. राग प्यार - दुलार को बी रव्हस आन् दुस्मनी को बी रव्हस. जेला राग नही आवत होयेन वोला त् देवच समझो ! बिना रागतम को त् मानुसच नहाय. सिस्त , अनुस्यासन साठी बी राग की जरुरत रव्हसच. जब अपमान होयेन , उसुल की यैसी तैसी होयेन , लापरवाही - कामचोरपनो होयेन , गलत काम होयेन वहान त् राग जरुरीच सं. तुमी जिता होयेन त् राग दिसनलाच पाह्यजे. राग लोभ सरन परच सरस. पर कोनीला सरनपर पोहोचन जोगती बी राग घातक सं. मानमरयादा को ख्याल नही राखेन वू राग भी सजालायक सं. 
बिना राग लोभ जीवन चलेच नही. वूइ आपलं दुय खांदापर बसकन् रव्हस. ..... हिरदा आन् डोक्सा कं मझार. 
जेनं राग लोभ ला बस मं करे
वोको जीवन सुधरे.....

           ____ इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर.

Saturday, May 23, 2020

भोयरी बोली

⚜ भोयराई बोली ⚜

कन् कन् जमायकन्
असी स्यहद मं घोली
माय सरोसती करी
दान भोयराई बोली

        घुम्या जागा जागा पर
        पेये घाट घाट पानी
        अनपड रह्या पर
        भूल गयास निस्यानी

आबं सिक्या पढ्या सारा
काहे बिसरस माय
वोकं आंगपर चिंधी
तोरो सुट बुट टाय

        माय बाप मायबोली
        भेटसच येकडाव
        वुई गयापर बापू
        चले ना कोई उपाव

मायबोली मोयरज
वकी स्यहद की गोडी
असी पायना घासस
बची जिंदगानी थोडी

©️✒ सुरेश महादेवराव
            देशमुख , नागपूर

बोरी - म्हरो गाव

बोरी - म्हरो गाव
वर्धा जिला कं कारंजा तहसील मं कारंजा - काटोल सडक पर ६ नंबर कं हायवे परीन दुय कि. मी. दूर म्हरो गाव बोरी सं.
म्हरं गाव ला दुय - ढाई हजार बरस की मानव सभ्यता की परंपरा सं . इ. स. पु. १००० पासून इ. स. पु. ७००/८०० बरस मं यहान लोहयुग ( बृहदाश्म युग ) का अवसेस इजबड्डी कं रूप मं सं. पटवारी रिकार्ड मं वू रिठो सं. पुरानं जमाना को खोंड्या ( खोंडे ) पटवारी नं गाव वाला किथिन वरगनी जमा करकन् उघडं हनुमान साठी पक्को मंदिर बनायो. बाह्यरं मातामाय सं. वोको मुनं संसोधन कऱ्यापर अउर येक अचंबो आघं आयो. इजबड्डी को मु जब मोजमाप कर रह्यो थो , तबं बड्डी पर पक्की इटना को सातरोच मला दिसे. वहान खंदकन मोठं आकार की इट साठी मुनं जब प्रयास कऱ्यो तब सह्यगी इट तं नै पन् अरधी - पाउन आकार की इट सापडी. वा पतली , चवडी आन् हलकी सं. मनसर कं खुदाई मं ज्या इटना निकरीस ; बराबर उसीच या इटना सं.
१) पह्यली संस्कृती : लोहयुग ( बृहदाश्म युग ) ___ ज्यान दगडना का गोल घेराना दिसन तब समज जावो कं इ लोहयुग काल की होयेन. या कुटुंब की दफन की जागा रव्हस . वको आकार ( घेरा को ) १० फुट पासीन ५० फुट पावतर रव्हस ; आनं उचाई ३ फुट पासीन ५ फुट पावतर रव्हस. अचरज की गोस्टं सं कं घेरा को आकार केतरो बी रव्हन देव ... दगडना ४० च रव्हस. पर इजबड्डी को घेरो १००० फुट आन् उचाई ३० फुट सं नाप को परमान १० कोच सं . बुड पर मोठाला दगड को घेरो. जसा जसा वरतं जायेन उसा उसा घेरा आन् दगड को आकार लहान होत जास. रचना पायरी सरखी. आबं पावतर जेता सिलावर्तुल सापड्यास वो मं को इजबड्डी इ सबन मं मोठो सं. 
काल : २५००/ ३००० बरस .
२) दुसरी संस्कृती : थेन - लोहयुग कं बाद मं या संस्कृती नांदी. माती की भुंजी इटना को बापर येनं संस्कृती की वरख. येनं इट मं मंझार की माती आन् बाहिर कं आवरन की माती बेगरी बेगरी सं. इ इंजिनीअरिंग को खास तंतर इट ला मजबूत आन् हलकी बनावस. 
काल : १५०० / २००० बरस.
३) यान गवरी लोगना की बस्ती होती आन् वुई लोग घोडदेव मं गवूर सिरवत होता , असा बुजरुक लोगना सांगस. घोडाई मं तलाव बी होतो , असा जानकार सांगस. उनकी येक बरात घोडदेव डोह मं सपीस , असी बी कथा सं. 
काल : ६०० / १००० बरस
महामारी , अकाल , इज पडनो , स्थलांतर , राजकारन असा कारनकन् यी तीन संस्कृती को नास भयो होयेन. म्हरो इ संसोधन अरुणा प्रकाशन , लातुर कं " शोध यात्रा " नाव कं संसोधन किताब मं २०१३ ला प्रकासित भयेस. 
४) बोरी गाव मं भोयरना आया ३०० - २०० बरस कं मंझार. यान की मालगुजारी बोरगाव ( कोंढाली कं जवर को ) कं देसकर बामन ला भेटी . पह्यले वको घर - कोठो बन्ये. मंग बयंगन्या , बारंगा , चोपड्या , कडवा ना आया. घोडाई , कासाडी , बामनीन वालो , आंब्यावालो , खोसो इ भारी जमीन को सिवार.. कारी भरार माती . गाव सं मुरुम कं टेकडापर.. रेंदा चिक्खल को नाव नही. गाव ला नदी नहाय. नालाना सं ; जी कार नदीमं मं जास. गांधी वध कं बेरा मं मालगुजार बामन गाव मीस्यिन भाग्या. वकी बेगार बी खतम भयी.
आमारं कुर का करनुजी देसमुख यहान १०० साल पह्यले येकारजून परीन आया. बोरी का कडवा ना नाता मं होता तेकन आया होयेन. मु पाचवी पीढी मं को. येकारजून का देसमुखना चिचोली परीन आयास. आमारो वाघोबा भालेवाडी मं सं.
गाव की लोकसंख्या अंदाजकन् देढ हजार. कुनबी , गवारी , गोंड , सुनार , चंभार , बानी , बाडी , म्हाली , लवार को येक येकच कुर - घर. बाकी तेली आन् नवबौद्ध ( मांग नं महार ) . ८०% भोयरना. म्हरं नानंपनं सारा लोगना ( कोई बी जात का ) भोयरी मं च बोलत होता.
पह्यले संतरा , जवारी , उडिद , भुईमुंग खूब पिकत होता. आबं रोही डुक्कर कं उबद्रा कन् भुईमुंग गायब भयी. कोरसी कं बिमारीपासून संतरा खतम होन कं रस्ता पर सं. जवारी - उडिद तं दवाई साठी बी नही होत. आबं सोयाबीन , कापूस , तोर , गहू की फसल होस. दुय चार झना सब्जीभाजी की फसल लेस. पर आबं बी पारंपारिक खेतीच होस.पह्यले लोगना कं जवर खूब गाय , मयीसना रव्हत होती. आबं परमान लयच कमी भयेस. 
सबनच लोगना सिक्या सवऱ्या सं. नवकरी , धंदोपानी मं बी म्हरं गाव का लोगना सं.म्हरं गाव कं महादेव मुखं वर्धा जिला को आखरी गाव धर्ती आन् कार नदी दुय कि. मी. संग. सोम्मारं ठानेगाव , इतवारं कारंजा आन् मंगरवारं काटोल को बजार लोगना करस. पेन कं पानी की लाईन घोडदेव आन् कार धरन मिसिन आयीस. ८ वी पावतर स्यारा सं . सारा सन - तिवार धुमधाम कन् मनावस . 
पारंपारिक खेती किरसानी , ढोर जनावर की कमी , संतरा बगिच्या को नास कं कारन लोगना की आर्थिक परिस्थिती पर खूबच असर पड रह्येस.

©️✒ सुरेश महादेवराव
            देशमुख

भोयरी कविता

⚜ राग लोभ ⚜

मन खाकस को दानो
मन पहाड कं वानी
राग लोभ झुलापर
वोकी बदले कहानी

        असो माया को जंजार
        नही उखलत ग्यानी
        बुने जारो कातिन को
        वोतरीच जिनगानी

कबं इतं कब उतं
झलकस चित् पानी
खेल देवाजी को न्यारो
निरी आपलीच बानी

        सुदं सादं बिचार ला
        लय कंगोरा की अनी
        धरे जोगड्या को फेर
        मन बायंडर वानी

सत् असत् झगडो
दुय दिन जिनगानी
उटारेटा कं माट्यानं
करी येतरी धूरधानी

✒©️ सुरेश महादेवराव
           देशमुख , नागपूर