Monday, December 27, 2021

येस्टी - लाल परी ( भोयरी बोली )

येस्टी - लाल परी
( भोयरी कविता )


गाव खेडा नगर स्यहर
धाये दादा लाल परी
आवन जावन को साधन
येस्टी को च आजवरी ।१।

स्यारा का पोटुबाटूना
बिह्या बजार की वारी
माया ममता की येस्टी
बाई सी लेकुरवारी ।२।

हालटिंग की पाव्हनी
मुक्काम सकार वरी
जास धुड्डो उडावत
सडक सोनपिवरी ।३।

नान्हा मोठा संग नातो
येस्टी सबन की प्यारी
इस्ट्यांड को ठिकानो
अयरावत सवारी ।४।

हडताल को हो हल्लो
आयी बिपदा जी भारी
चाक थांबेस येस्टी को
दुखी स जनता सारी ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, December 23, 2021

माती माय को पोरग्यो. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माती माय को पोरग्यो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली


गाना म भरतुहरी
मन म मांडव - धार
माती माय को पोरग्यो
म्हरो भोरो कास्तकार ।१।

कास्तकारी वो की पूंजा
खेत वो को दरबार
बाराई कार झिजस
झेल कन् सारो मार ।२।

सरकार को तितंबो
पावूस पानी की मार
डोरा म स बरसाद
पर गडी दिलदार ।३।

कोनी पोटी नी देत जी
देख कन् कास्तकार
राज आयो गुलाम को
राजो भयेस बेकार ।४।

दवाखाना म भरती
तब्येत म नी सुधार
खेत बासन गहान
सारो खटलो उधार ।५।

वोला डायेस येकटो
कुनी को च नी आधार
घास देस सबन ला
वो क पेट म अंधार ।६।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, December 22, 2021

अजब गजब - ८४ : श्री सिहडदेवजी सांखला पंवार. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८४ : श्री सिहडदेवजी सांखला ( पंवार )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गज थके नि गजकेसरी , मर्द थके न मजबूत
शेर थके नि सांखलो ,  रणबांकुरो रजपूत ।

राजस्थान क नागौर जिला म रूण गांव ( रूणगढ़ ) स . नागौर पासिन ४७ कि.मी. दूर रूण गांव को ताम्बावति अन् कोयला पाखण इ पुरानो नाव . 
परमार की सांखला पंवार या येक स्याखा स . ' शंख कुल ' का मतलब ' सांखला '. रूण गांव सांखला पंवार की राजधानी होती . रूण गांव की सांखला पंवार खानदान म विक्रम संवत १२७१ ला सोम्मार क दिन सीरी सिहडदेव जी सांखला को जलम भये . सीरी सिहडदेव जी सांखला ' सीरी भोमिया जी महाराज ' क नाव कन् परसिध्द भया . भोमिया को मतलब भूमि पति ! भूमि पति को मतलब राजो . 
भोयर इ स्यबद बी भूमि पति ( राजा )  क मतलब संग च जुड्यो स . 
नान्हपन पासिन च सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार , सीरी भोमिया जी महाराज वीर पराक्रमी होता . माय चामुंडा देवी का वूई मोठा भगत होता . माय चामुंडा देवी क सेवा म वून न आपरो सिर ( शिश ) काट कन् अरपन कऱ्यो . माय चामुंडा देवी परसन्न भयी आन् देवी माय न भोमिया जी महाराज ला वरदान देये क कार ( काल ) बी तुमार रस्ता पासिन दूर रहेन . 
सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार भोमिया जी महाराज जी का पाच बिह्या भया . पाच की पाच रानीना सरग म क अपसरा वानी देखन ला साजरी होती . 
सीरी भोमिया जी महाराज क बेरा दिल्ली को राजो अलाउद्दीन खिलजी होतो . जुलुम जबरदस्ती , मनमानी आन् अधर्म को राज होतो . येन पापी राजा की पापी नजर लोगना क बू - बेटी पर रव्हत होती . वोन येक साठी कानून च बनायतो . जहान बी बिह्या होत होतो , वहान क लाडी को डोलो पापी अलाउद्दीन खिलजी क हरम म पठावन लागत होतो . वोको मन भऱ्या बास्त च वू लाडी ला वापिस धाडत होतो . 
अलाउद्दीन खिलजी ला मालूम भये क सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) की पाच बी लाडीना सरग क अपसरा सरिखी साजरी स . वोन सरदार बद्रुद्दिन ला बलाये आन् वोला सांगे क रूण गढ़ ला इतल्ला पठावो . सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ला बोलो क येक रानी ( लाडी ) को डोलो हरम म पठावो . सरदार बद्रुद्दिन न कह्ये क म्हरी रिस्तेदारी रूण गांव म स . असो करनो बेस वाटेन का ? 
बद्रुद्दिन न रूण गांव ला खबर पठाई . सीरी भोमिया जी महाराज न येक दासी ला सजाय धजाय कन् डोली म बसाडी आन् डोलो पुग्यो अलाउद्दीन खिलजी क हरम म . वा दासी पेट सिन रही , पर वोला लय तकलीफ होय रहीती . सारा हकीम बैद भया पर आराम नि पड्यो . तब रानी बनी दासी न कह्ये क मोला रूण गांव क सिवकुंड को पानी पाज देव , वोकन च आराम पडेन . अलाउद्दीन न सिवकुंड को पानी ल्यावन साठी मानूस पठाया . रात भयीती . द्वारपाल न गांव को दरुजो नि खोल्यो आन् वून ला बाहिर क नाली को पानी देयो अन् कह्ये क येम सिवकुंड सिन पानी आवस . दासी ला आराम पड्यो . वोन अलाउद्दीन ला सांगे क वा रूण गढ़ की रानी नहाय त् दासी होय . अलाउद्दीन न रूण गढ़ ला असली रानी को डोलो पठावन को धाड्यो .  सीरी भोमिया जी महाराज न नाकबूल कऱ्यो. तब अलाउद्दीन न वापिस निरोप पठायो क सिरफ रानी क रूप को च दरस्यन त बी करावो . सीरी भोमिया जी महाराज न कह्ये क रूप त सोडो , तू न रानी की छाया बी देखन की कोसिस करी त तोरी दाढी मिसी भादर कन् बंगडी पह्यनाय कन् वापिस पठावून . या बात आयक कन् अलाउद्दीन खिलजी को डोकसो फिऱ्यो . वोन लढाई की तैयारी करी . सरदार बद्रुद्दिन संग वोकी बातचीत चाल रहीती . या बातचीत अलाउद्दीन खिलजी की पोटी ' शहजादी ' आइक रहीती . वा बी वहान आई आन् बाप ला कह्ये क सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ( सीरी भोमिया जी महाराज ) खूब साजरो सोभाव को स . वू सुख स्यांती कन् आपरो राज चलाय रह्येस . वोला माय चंडिका देवी को वरदान भेटेस . वू मोठो वीर स . स्यहजादी मंझार म बोली तेकन राजा न वोला दपटे . आन् कह्ये क तोला बी मरन की खूसी होयेन त् सरदार संग तू बी रूण गढ़ ला जा . 
सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी थोडाबूत सैनिक लेय कन रूण गढ़ ला , सीरी भोमिया जी महाराज ला ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) समझावन साठी आया . 
सीरी भोमिया जी महाराज गरज्या क , 
लागे कुल में दाग
दिल्ली डोला भेजता
अरे सिंग खाल मडदर मणि
नही कुनि जिंदा लेवता .....
अलाउद्दीन खिलजी की २२ लाख की फऊज नान्ह स रूण गढ़ संग लढाई करन ला आई . सीरी भोमिया जी महाराज का भाई बंद , फऊज न लढाई साठी मना करी . पर दुस्मन को सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी सीरी भोमिया जी महाराज किथिन संग रह्या . सीरी भोमिया जी महाराज न आपली पाच रानी को सिर  तलवार कन् कलम कऱ्यो . तब सह्यजादी न कह्ये क मु न मन क मन म तुमाला आपलो भरतार मानेतो . म्हरो बी सिर काट डावो . सीरी भोमिया जी महाराज न सह्यजादी को भी सिर कलम कऱ्यो आन् पाच रानी क हात क निस्यान संग च सहज्यादी क हात को निस्यान बी दिवाल पर मांड्यो . वासिन सीरी भोमिया जी महाराज चंडिका माय क दरस्यन साठी गया आन् आपरो सिर माय ला अरपन कऱ्यो . कट्यो सिर माय जवर देये अन् सरदार बद्रुद्दिन संग लढाई क मयदान म आया . २२ लाख की फऊज क आघ सिरफ दुय झना . बिना सिर क सीरी भोमिया जी महाराज न असी मारकाट मचाई क अलाउद्दीन खिलजी की अरधी फऊज काट डायी . अलाउद्दीन खिलजी ला पकड्यो आन् वकी दाढी मिसी काट कन् वोला बंगडीना पह्यनायी . अलाउद्दीन खिलजी जीव बाचाड कन् दिल्ली ला आयो . सरदार बद्रुद्दिन लढाई म काम आया . 
विक्रम संवत १३११ ला सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) ला वीरगति भेटी . 
पवार वंस को सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार इ रनबांकुरो महा पराक्रमी वीर सीरी भोमिया जी महाराज क नाव कन् परसिध्द भयो . 
पवार तीरथस्थली रूण गांव सीरी भोमिया जी महाराज को भव्य देऊर स , जहान वून क मस्तक ( सिर ) की पूंजा होस . आन् रूण गांव पासिन ३२ कि.मी. दूर गौवा गांव म वून क धड की पूंजा होस . 
* अखाडी ला रूण गांव आन् गौवा गांव म सीरी भोमिया जी महाराज को मेलो लागस . 
दो दो मेला नित भरे , पूजे दो दो थोर
शिश कटियो जिण थोर पर
धड जुझयो जिण थोर .......
जय सीरी भोमिया जी महाराज की...

( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढ़ा , जोधपुर ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, December 18, 2021

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८३ : इगास पर्व
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बारह ए गैनी बग्वाली मेरो माधो नि आई
सोलह ऐनी श्राद्ध मेरो माधो नि आई ।

उत्तराखंड गढवाल म दिवारी ला बग्वाल कोस . बग्वाल ( दिवारी ) क बाद ११ व  दिन ' इगास पर्व ' मनावस . इ दिन येकादसी को रव्हस , तेकन येन दिवारी ला ' इगास बग्वाल ' इ नाव पड्यो . 
इगास क दिन गोड कारला आन् लाल बासमती चऊर को भात बनावस . 
भैलू : भैलू को मतलब स उजारो करनी वालो . भैलू ला च अंध्या बी कोस . अंध्या को मतलब अंधारो दूर करनी वालो . इगास पर्व प भैलू खेलनो इ मुख्य रिवाज स . चीड क झाड की लकडी को भैलू बनायकन् , वोला बार कन् भैलू खेलस . उत्तराखंड को इगास तिवार असो अनोखो स . 
इतिहास अन् मान्यता : * ४०० बरस पह्यलऽ , १७ वी सदी म गढवाल इलाखा क टिहरी पर पवार राजो महीपति स्याह को राज होतो . आन् येन राज को सेनापति होतो वीर भड़ माधो सिंह भंडारी . ( गढवाल की काला - भंडारी जाति परमार की च स्याखा स . सबन भंडारी सरनेम परमार नि हय . ) राजा न सेनापति वीर भड माधो सिंह ला तिब्बत प लढाई साठी पठायो . तिब्बत क द्वापाघाट क राजा संग वीर माधो सिंह की भयंकर लढाई भयी . येन युद्ध म द्वापाघाट को राजो हारे . वीर माधो सिंह न तिब्बत क जीत्या इलाखा क हद पर मुनारा गाड्या . येम का कयी मुनारा आब बी स . मैकमोहन हद की लाइन ठह्यरावन क बेरा येन च मुनाराना ला हद मानी . 
जंग त जीती पर वापसी आवन को वांधो भयो . वहान बरफ पडन ला लागी . रस्ता बंद भय गया . मोठऽ मुसकिल कन् वीर माधो सिंह अन् वून का सैनिक , रस्तो खोजत खोजत गढवाल क दुसांत इलाखा म पहुंच्या . 
येन बखत च दिवारी को तिवार बी आय कन् गयो . राजा आन् लोगना ला वाटे क माधो सिंह अन् वून का सैनिक जंग म काम आया होयेन . तमाम लोग दुखी होता . पूरऽ राज म कोनी न च दिवारी नी मनाई . दिवारी क बाद ११ व दिन माधो सिंह अन् सैनिक गढवाल म आया . आपलो सेनापति जीत कन् आयो , यकी राज्या ला अन् लोगना ला घाडी खूसी भयी . लोगना न दिवा बार कन् दिवारी को तिवार मनायो . आन् येन दिन ला च इगास बग्वाल कोस !
* भगवान सिरी राम लंका परीन अजुध्या आया . पर यकी खबर ११ दिन बास्त गढवाल म आई , तेकन लोगना न येन दिन दिवारी मनाई , असी बी येक मान्यता स . 
* भीम की येक राकस संग लय दिन वरी लढाई भयी . भीम न या लढाई दिवारी क ११ दिन बाद जीती , तेकन पांडव न दिवारी मनाई , असी बी इगास की येक मान्यता स . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर