अजब गजब - ८४ : श्री सिहडदेवजी सांखला ( पंवार )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
गज थके नि गजकेसरी , मर्द थके न मजबूत
शेर थके नि सांखलो , रणबांकुरो रजपूत ।
राजस्थान क नागौर जिला म रूण गांव ( रूणगढ़ ) स . नागौर पासिन ४७ कि.मी. दूर रूण गांव को ताम्बावति अन् कोयला पाखण इ पुरानो नाव .
परमार की सांखला पंवार या येक स्याखा स . ' शंख कुल ' का मतलब ' सांखला '. रूण गांव सांखला पंवार की राजधानी होती . रूण गांव की सांखला पंवार खानदान म विक्रम संवत १२७१ ला सोम्मार क दिन सीरी सिहडदेव जी सांखला को जलम भये . सीरी सिहडदेव जी सांखला ' सीरी भोमिया जी महाराज ' क नाव कन् परसिध्द भया . भोमिया को मतलब भूमि पति ! भूमि पति को मतलब राजो .
भोयर इ स्यबद बी भूमि पति ( राजा ) क मतलब संग च जुड्यो स .
नान्हपन पासिन च सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार , सीरी भोमिया जी महाराज वीर पराक्रमी होता . माय चामुंडा देवी का वूई मोठा भगत होता . माय चामुंडा देवी क सेवा म वून न आपरो सिर ( शिश ) काट कन् अरपन कऱ्यो . माय चामुंडा देवी परसन्न भयी आन् देवी माय न भोमिया जी महाराज ला वरदान देये क कार ( काल ) बी तुमार रस्ता पासिन दूर रहेन .
सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार भोमिया जी महाराज जी का पाच बिह्या भया . पाच की पाच रानीना सरग म क अपसरा वानी देखन ला साजरी होती .
सीरी भोमिया जी महाराज क बेरा दिल्ली को राजो अलाउद्दीन खिलजी होतो . जुलुम जबरदस्ती , मनमानी आन् अधर्म को राज होतो . येन पापी राजा की पापी नजर लोगना क बू - बेटी पर रव्हत होती . वोन येक साठी कानून च बनायतो . जहान बी बिह्या होत होतो , वहान क लाडी को डोलो पापी अलाउद्दीन खिलजी क हरम म पठावन लागत होतो . वोको मन भऱ्या बास्त च वू लाडी ला वापिस धाडत होतो .
अलाउद्दीन खिलजी ला मालूम भये क सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) की पाच बी लाडीना सरग क अपसरा सरिखी साजरी स . वोन सरदार बद्रुद्दिन ला बलाये आन् वोला सांगे क रूण गढ़ ला इतल्ला पठावो . सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ला बोलो क येक रानी ( लाडी ) को डोलो हरम म पठावो . सरदार बद्रुद्दिन न कह्ये क म्हरी रिस्तेदारी रूण गांव म स . असो करनो बेस वाटेन का ?
बद्रुद्दिन न रूण गांव ला खबर पठाई . सीरी भोमिया जी महाराज न येक दासी ला सजाय धजाय कन् डोली म बसाडी आन् डोलो पुग्यो अलाउद्दीन खिलजी क हरम म . वा दासी पेट सिन रही , पर वोला लय तकलीफ होय रहीती . सारा हकीम बैद भया पर आराम नि पड्यो . तब रानी बनी दासी न कह्ये क मोला रूण गांव क सिवकुंड को पानी पाज देव , वोकन च आराम पडेन . अलाउद्दीन न सिवकुंड को पानी ल्यावन साठी मानूस पठाया . रात भयीती . द्वारपाल न गांव को दरुजो नि खोल्यो आन् वून ला बाहिर क नाली को पानी देयो अन् कह्ये क येम सिवकुंड सिन पानी आवस . दासी ला आराम पड्यो . वोन अलाउद्दीन ला सांगे क वा रूण गढ़ की रानी नहाय त् दासी होय . अलाउद्दीन न रूण गढ़ ला असली रानी को डोलो पठावन को धाड्यो . सीरी भोमिया जी महाराज न नाकबूल कऱ्यो. तब अलाउद्दीन न वापिस निरोप पठायो क सिरफ रानी क रूप को च दरस्यन त बी करावो . सीरी भोमिया जी महाराज न कह्ये क रूप त सोडो , तू न रानी की छाया बी देखन की कोसिस करी त तोरी दाढी मिसी भादर कन् बंगडी पह्यनाय कन् वापिस पठावून . या बात आयक कन् अलाउद्दीन खिलजी को डोकसो फिऱ्यो . वोन लढाई की तैयारी करी . सरदार बद्रुद्दिन संग वोकी बातचीत चाल रहीती . या बातचीत अलाउद्दीन खिलजी की पोटी ' शहजादी ' आइक रहीती . वा बी वहान आई आन् बाप ला कह्ये क सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ( सीरी भोमिया जी महाराज ) खूब साजरो सोभाव को स . वू सुख स्यांती कन् आपरो राज चलाय रह्येस . वोला माय चंडिका देवी को वरदान भेटेस . वू मोठो वीर स . स्यहजादी मंझार म बोली तेकन राजा न वोला दपटे . आन् कह्ये क तोला बी मरन की खूसी होयेन त् सरदार संग तू बी रूण गढ़ ला जा .
सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी थोडाबूत सैनिक लेय कन रूण गढ़ ला , सीरी भोमिया जी महाराज ला ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) समझावन साठी आया .
सीरी भोमिया जी महाराज गरज्या क ,
लागे कुल में दाग
दिल्ली डोला भेजता
अरे सिंग खाल मडदर मणि
नही कुनि जिंदा लेवता .....
अलाउद्दीन खिलजी की २२ लाख की फऊज नान्ह स रूण गढ़ संग लढाई करन ला आई . सीरी भोमिया जी महाराज का भाई बंद , फऊज न लढाई साठी मना करी . पर दुस्मन को सरदार बद्रुद्दिन आन् स्यहजादी सीरी भोमिया जी महाराज किथिन संग रह्या . सीरी भोमिया जी महाराज न आपली पाच रानी को सिर तलवार कन् कलम कऱ्यो . तब सह्यजादी न कह्ये क मु न मन क मन म तुमाला आपलो भरतार मानेतो . म्हरो बी सिर काट डावो . सीरी भोमिया जी महाराज न सह्यजादी को भी सिर कलम कऱ्यो आन् पाच रानी क हात क निस्यान संग च सहज्यादी क हात को निस्यान बी दिवाल पर मांड्यो . वासिन सीरी भोमिया जी महाराज चंडिका माय क दरस्यन साठी गया आन् आपरो सिर माय ला अरपन कऱ्यो . कट्यो सिर माय जवर देये अन् सरदार बद्रुद्दिन संग लढाई क मयदान म आया . २२ लाख की फऊज क आघ सिरफ दुय झना . बिना सिर क सीरी भोमिया जी महाराज न असी मारकाट मचाई क अलाउद्दीन खिलजी की अरधी फऊज काट डायी . अलाउद्दीन खिलजी ला पकड्यो आन् वकी दाढी मिसी काट कन् वोला बंगडीना पह्यनायी . अलाउद्दीन खिलजी जीव बाचाड कन् दिल्ली ला आयो . सरदार बद्रुद्दिन लढाई म काम आया .
विक्रम संवत १३११ ला सीरी भोमिया जी महाराज ( सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार ) ला वीरगति भेटी .
पवार वंस को सीरी सिहडदेव जी सांखला पंवार इ रनबांकुरो महा पराक्रमी वीर सीरी भोमिया जी महाराज क नाव कन् परसिध्द भयो .
पवार तीरथस्थली रूण गांव सीरी भोमिया जी महाराज को भव्य देऊर स , जहान वून क मस्तक ( सिर ) की पूंजा होस . आन् रूण गांव पासिन ३२ कि.मी. दूर गौवा गांव म वून क धड की पूंजा होस .
* अखाडी ला रूण गांव आन् गौवा गांव म सीरी भोमिया जी महाराज को मेलो लागस .
दो दो मेला नित भरे , पूजे दो दो थोर
शिश कटियो जिण थोर पर
धड जुझयो जिण थोर .......
जय सीरी भोमिया जी महाराज की...
( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढ़ा , जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अद्भुत इतिहासिक जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
Deletekhup sajri jankari
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
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