Saturday, May 29, 2021

फायदा को कायदो : भाग - २. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

फायदा को कायदो : भाग - २
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गुनवंता ला घर म बसकन् च ३ मानुस की मजूरी रोज भेटन ला लागी . वोकऽ जवर खूब अनाज जमा भयो . गुनवंतो घर म च होतो पर वू नवी नवी आयडिया सोचत रवतो . कब खाती - बाडी क घर जायकन् वून की कारागीरी ला ध्यान कन् देखतो . 
गाव म झुंझुरका च उठकन् बाईलोगना पह्यले घटी प दरन दरत होती . वून को येक - अरधो घंटो दरन क च काम म साठी लागत होतो . अनाज दरेन तब च रांधेन ! गुनवंता क डोकसा म या बात आई . गड्डा म पानी वरतीन आवस . पानी की ताकत बापरकन् घटी फिरवन को जुगाड करे त , फायदा को येक गनित अनखिन बसस , असी बात गुनवंता न सोची . गुनवंता न खाती संग बात करी . खाती न कह्ये क , मुनऽ त असी मसीन नी देखी . जवर क मोठऽ गाव म मसीन को दुकान स , वहान जाय कन् चवकसी करो , असो खाती न गुनवंता ला सांगे . गुनवंता न वूसोच करन को सोच्यो . 
दुसरऽ दिन गुनवंतो वोनऽ मोठऽ गाव गयो . खाती न सांगेतो ती दुकान  बजार म ढुंढ्यो . गुनवंता न दुकानदार ला आपली गोस्टऽ सांगी . दुकान म वूसी मसीन नी होती . दुकानदार ला बी गुनवंता को नवल च वाटे . दुकानदार न इतऽ उतऽ चवकसी करकन् सांगे क , दुय हप्ता म तुमारी मसीन आयेन . वोकऽ फिटिंग साठी येक मिसतरी आयेन , वोकी मजूरी बेगरी लागेन . गुनवंता भायी च खुस भयो . वोनऽ अनाज बिककन् ज्या रकम भेटीती वोला याडवांस मून दुकानदार ला देयी . 
गुनवंता खाती कितऽ गयो , आन् वोला सारी हकीकत सांगी . गुनवंतो जवर क गाव म गयो आन् वहान क येक बंडी कोई भाडो ठह्यरायकन् घर आयो . आबऽ वोला खान पेन को बी होस नी होतो . दिन भर पानी क नाली नाली न फिरकन् वोला साफ करतो आन् रात कन् सपना म मसीन की घटी ला देखतो . 
येक दिन गुनवंतो वोनऽ मोठऽ गाव ला घटी की जानकारी लेन ला गयो . मसीन की घटी नी आयीती . अनमनऽ भाव कन् गुनवंतो वापिस गाव आयो . पुरो हप्तो असोच गयो . येक दिन सकारी च खाती वोकऽ घर आयो . 
' का बात स ? आज सकारी सकारी च दरस्यन देयो .' गुनवंता न खाती ला पुसे . 
' काल मु दुकान म गयतो . तुमारी मसीन आयीस , येको इतल्लो देन साठी च आयो गुनवंता भाऊ .' खाती न कह्ये . 
' व्वा.. खुसी की गोस्ट सांगीस गा . चाल येनऽ बात पर दुनन चाय पेबो . ' गुनवंता न खुसी कन् कह्ये . 
आंग धोयकन् गुनवंतो जवर क गाव म गयो आन् बंडीवाला ला सकारकन चालन को सांगे . 
गुनवंता न घर को सारो अनाज बंडी म भरे आन् सिदोरी लेयकन्  मोठऽ गाव साठी रवाना भया . पह्यले अनाज बिक्यो , वोक बास्त मसीन क दुकान आघ बंडी सोडी . दुकानदार ला पयसा देया . हमाल , धुरकरी संग गुनवंतो बी भिड्यो आन् मसीन क घटी को सारो सामान बंडी म भऱ्यो . झालपड्या वूई गाव आया . 
दुसरऽ दिन मसीन बसाडन ला मिसतरी आयो . गड्डा म वरतीन पानी आवत होतो वोकऽ बाजू ला च मसीन बसाडी . खाती बी संग च होतोच . गाव का पोटुबाटूना दिनभर मसीन ला च देखत होता . गुनवंता न बाडी बी बलायो . मिसतरी न बाडी ला मसीन क वरतऽ कसो छत बनावन को स ती समझायकन् सांगे . दिनभर ठोकाठाकी चालू होती . मसीन क वरत क आंग ला सिमिट कन् नानो परतन बनायकन् वोमऽ पाईप बसाडे . तमाम काम भया बास्त मिसतरी न अनाज मांगे . पाईप को वाल चालू करे , वूसी घटी फिरन ला लागी . मिसतरी न घटी म अनाज डाये आन् खलतऽ पिपा म पीठ गरन ला लाग्ये . सबन न मसीन की पूंजा करी . गुनवंता न नारेल फोड्यो . सबन ला सेरनी बाटी . 
गुनवंता न गाववालाना ला कह्ये क  आयतो पीठ दरकन् पायजे होयेन त् तुमाला १५ मिनिट क रोजी को अनाज देनो पडेन . गाववाला राजीखुसी तयार भया . 
आब गुनवंता ला घर म बसकन् च ६ मानुस की मजूरी रोज भेटन ला लागी . ( क्रमशः )

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, May 26, 2021

डोरा मिरुग सपन ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

डोरा मिरुग सपन
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नातो भूई अगास को
रहे माय बाप वानी
जीव जंतू को आसरो
वोकनच जिंदगानी ।१।

पंचमहाभूत सार
घर दार आबादानी
भेदे तमाम असार
भारे तन मन पानी ।२।

डोरा मिरुग सपन
जिंदगानी की कहानी
झड भावना की लागी
मन आये ना बरानी ।३।

भूई कुस उजयेन
नवो जीव धरे बानी
ढेलो माती को धकाडे
दुय हात जोडस्यानी ।४।

ठेंब ठेंब अमरीत
तिस समिंदर वानी
उबडाये हिरदा ला
असो मिरुग गा दानी ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, May 25, 2021

फायदा को कायदो - भाग १. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

फायदा को कायदो - भाग १
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

धंदो पानी , बेपार , सेवा , चाकरी यको गनित ' फायदा - नफा ' क मंतर बिगर पुरो नी होत . पर कई लोगना ला ' नफो - फायदो ' ( दुसरा को ) इ पाप सरिखो वाटस . आपन न कमाया पायजेन पर दुसरा न आपलो काम बेगार प कऱ्या पायजेन , असी बी सोच कुचित परमान म दिसस . 
परमार्थ ला उच्ची जागा स , पर मह्यनत कन् कमाये फायदा ला मोह माया क पंगत म बसाडस . 
कोनतऽ न कोनतऽ स्वार्थ , मतलब कन , प्रेमभाव कन , नातागोता कन येक मानुस दुसरऽ मानुस सिन जुडस , येमऽ का गलत स ?
' जहान अति वहान माती ' या कहावत हरेक गोस्ट ला लागू होस , मंग वा चांगली रहो क वांगली !
दुसरा को कोनतो बी नुकसान कऱ्या बिगर जी नफो - फायदो कोनी कमावस , वोमऽ गलत का स ?

येक गोस्ट सांगूस ....कोनऽ टाईम पहाड क पायथा जवर येक नानोसो गाव होतो . वहान क लोगना ला आठ घंटा काम कऱ्या बास्त येक दिन क खान लाईक अनाज की मजूरी भेटत होती . गाव क लोगना ला पानी ल्यावन साठी पहाड क सांदी म की येक जागा प जान लागत होतो . वहान नानोसो तलाव सरखो होतो . हरेक मानुस को अरधो घंटो पानी साठी खरच होत होतो . वहान क गुनवंता येनऽ गुनी पोरग्या न यको गनित मांड्यो . १६ लोगना को पानी साठी अरधो घंटो मनजे पुरी येक दिन की हजरी बनत होती . 
गुनवंता न पानी क जागा पासिन गाव पावतर क जागा ला साजरो देख्यो . पानी पासिन गाव पावतर सुलूप होतो . वोकऽ डोकसा म भन्नाट आयडिया आई . जर पानी क जागा परिन गाव पावतर पानी ल्यावन को जुगाड करे त , गाववालाना को रोज अरधो घंटो बाचेन आन् वोमिन फायदा को गनित बी बसेन !
दुसरऽ दिन गुनवंतो काम प नी गयो . आपलो पावडो , टिकास , घमिलो लेकन वू पानी वालऽ जागा प गयो . गाव कित की पार ला वू खंदन ला लाग्यो . वहान वरतऽ वरतऽ च माती होती , खलतऽ मुरूम अन् पास्यान होतो . पह्यलऽ दिन गुनवंता न वरतऽ क माती म ३०/४० फुट की नाली खांदी . दुसरऽ दिन वोला काम पर जानो भाग होतो . आज को त निभेत्यो . बिना भाकर को वू काम प गयो . आंग म त जोर नी बाचेतो पर पानी पेय पेय कन् पुरो दिन काम कऱ्यो . रात म बी गुनवंतो उलिसो खाय कन् सोयो . आब वोक जवर येक दिन को अनाज होतो . भुको रवकन् काम करनो तकलीफ वालो होतो . आज वोन दिनभर नाली खंदी . येकडाव च जेये . दुसरऽ दिन पासिन अरधो दिन मजूरी आन् अरधऽ दिन नाली खंदत रह्यो . मंझार म वोनऽ कई उपास कऱ्या आन् अनाज बाचाडे . वोनऽ अनाज ला खाती ला देकन छिन्नी अन् घन खरिद्यो .
 गाव का लोगना वोला हासत होता . गुनवंता क डोकसा म फरक पड्यो , असो लोगना ला वाटे . पर गुनवंतो आपल च धुन म होतो . साल भर गुनवंता न असोच काम कऱ्यो . तलाव कित दुय जागा प नानी खाई होती . गुनवंता न जंगल मिन ठोकर ठोकर बास तोडकन् ल्याया . गरम सराक कन् बास ला पोकर कऱ्यो . असा वोनऽ बास का पाईप बनाया . 
दुसरऽ साल वोनऽ खाई म बास को मच्यांग बनायकन् वोपरिन बास का पाईप सेलमेल डाया . गाव पावतर ज्यान वोन नाली खंदीती , वहान वू मोठो भीर सरखो गड्डो खंदन ला लाग्यो . लोगना न समजे क गुनवंता म्याहाड भयो . गुनवंतो भुको तिसो आपलऽ काम म मगन होतो . साल भर म गुनवंता न गड्डो खांद्यो . दुय बरस अरधो पेट जेय कन् , मजूरी , खंती को काम कर कर कन् वू रोड भयो . वोक आंग की हड्डीना च दिसत होती . कई डाव काम करता करता वोला चक्कर आवत होतो . पर गुनवंतो आपलऽ बानी पर अड्यो रह्यो . 
आब वोन तलाव आन् नाली क मंझार खंदन ला सुरवात करी . जसी पानी की टोंडी फुटी वूसो पानी गुनवंता क नाली मिन , बास क पाईप मिन गाव जवर क मोठऽ गड्डा म जमा होन ला लाग्यो . गुनवंता ला भगिरथ सरखो हरीक भयो . 
तीन साल क मह्यनत ला ... कस्ट ला सफलता को झरो फुट्योतो . 
गुनवंता न गड्डा जवर च आपली झोपडी बांधी आन् गड्डा ला कुप भऱ्यो . 
गुनवंता न गाववालाना ला कह्ये क तुमाला पानी भरन को होयेन त १५ मिनिट क रोजी को अनाज देनो पडेन . गाववाला राजीखुसी तयार भया . वून को बी १५ मिनिट को फायदो होतो अन् पयदल वोतरऽ दूर जान की तकलीफ बी बाचीती . 
आब गुनवंता ला मजूरी प जान की जरूरत नयीती . घर म रव कन् च वोला येक दिन म तीन दिन क मजूरी को अनाज भेटन ला लागेतो .... ( क्रमशः ) 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, May 23, 2021

मायबोली भोयरी साहित्य मंच को येक साल. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मायबोली भोयरी साहित्य मंच को येक साल
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तारीख ५ मई २०२१ ला ' मायबोली भोयरी साहित्य मंच ' क स्थापना ला १ बरस पुरो भयो . येनऽ येक साल म ४३ निबंध / कविता स्पर्धा को आयोजन भयो . मायबोली भोयरी क सबन हिरा सरखऽ रचनाकार न / पोटु पोटीना न भोयरी बोली की अनमोल रचना कर कन् मायबोली ला गह्यना कन् सजायो . .... वको मान बाहाडायो . 
' मायबोली भोयरी साहित्य मंच ' न बोली को इ अनमोल खजानो ' मायबोली व्हाटस्याप गृप ', मायबोली भोयरी फेसबुक , प्रतिलिपी ( हिंदी , मराठी - २३४ रचना ) , मायबोली भोयरी यूट्यूब च्यानल असा तमाम माध्यम प जतन कर कन् धरेस .
येकऽ आघ बी नवऽ नवऽ आन् आधुनिक तंतरग्यान बापर कन् इ भोयरी बोली को अनमोल खजानो जतन कर कन् , मायबोली भोयरी की सेवा कर कन् सबन भोयरी बोली को पुरानो वयभव वापिस ल्यायेन , वोक साठी कोसिस करेन , असी उम्मीद स . 
येनऽ येक साल क समुंदर मंथन मिन " भोयरी मराठी शब्दकोश आणि भाषा विज्ञान " इ किताब परगट भयो . ' भोयरी बोली ' अलम साहित्य जगत म लिखित रूप म आई . नासिक म होनी वालऽ ' अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन - २०२१ ' क कवीकट्टा साठी मायबोली भोयरी की रचना की निवड भयी . 
सिंधू , नरबदा , ताप्ति , वरधा , सिपरा , पूरना नदीमाय क गोदी म खेली भोयरी बोली ला अखिल भारतीय मंच पर पह्यच्यान / वरख भेटी . गुगल प ' भोयरी ' लिख कन् खोज्या पर , वू मायबोली भोयरी को खजानो तमाम दुनिया ला दिखाडस . 
आबऽ मायबोली भोयरी क समुंदर मंथन को दुसरो साल चल रह्येस . येमिन भोयरी बोली की रचना का कई रतन आन्  पुरी भोयरी बोली म लिखी पह्यली किताब ' भोयरी संस्कृति ' निकरेन . मायबोली भोयरी को पह्यलो साहित्य संमेलन करन की बी तयारी चालू स . 
मायबोली भोयरी क मान सन्मान साठी सबन रचनाकार अन् बाचनीवाला ( बाचक ) न घाडी मह्यनत करीस , वून सबन को मायबोली भोयरी साहित्य मंच आभारी स . आघ बी भोयरी बोली की अनखिन  उन्नती भयी पायजेन , येकऽ साठी माय सरोसती , माय गढकालिका , भरतरी , समराट विक्रमादित्य , राजा भोज ला नमन करुस . 
जय मायबोली भोयरी.....

॰ आयोजक समिती ॰
इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर ( संस्थापक / परीक्षक ) 
संजय ढोले ( काटोल ) , रामेश्वर गोरे ( इंदौर ) , मनोज गोरे ( कोंढाली )

Wednesday, May 19, 2021

दुनिया घुमी चाल बदली ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दुनिया घुमी चाल बदली
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सव येकड को खेत जोत्यो
सव रेंगी की बरात काढी
सव लोग क खटला साठी
आजा न बांधी महाल माडी ।१।

खंडी खंडी का पेव बी खंद्या 
खेत म चालती पाच जोडी
कुंई कुंई कर जाये मोट
वल्लीचिप जी भीर की फाडी ।२।

कठानकाडी बगिच्यो वोल्यो
खरा साठी मेरू मेढ गाडी 
गनगन भवरी गोल फिरी
मोठी नहानी बयीलजोडी ।३।

डाला डाला न अनाज बाटे
आयकरीना की भीड घाडी
पोरा दिवारी को मान मोठो
सिरपाव की जी चाल पडी ।४।

सीधा येव्हार का भोरा लोग
बू बहिन ला लुगडो साडी
आम्बा का पाव्हना करन ला 
दुय आतो साठी रेंगी धाडी ।५।

दुनिया घुमी चाल बदली
थ्रेसर ट्याक्टर आई गाडी
काम्बरकी को राज बदल्यो
नगद मोल का खाती बाडी ।६।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, May 18, 2021

मन ला भरांती ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मन ला भरांती
( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

घुप अंधारा म , बिघड्यो तंतर  
उजिड मंतर , जीव साठी ।१।

राग तम माया , जीव को जंजार
पावन घंगार , न्हावन ला ।२।

गाडो जिंदगानी , जोड को जंतर 
सास को अंतर , वोकऽ पाई ।३।

चित की च बानी , नहाय गंतर 
रोवस अंतर , हरमेस ।४।

मन ला भरांती , दिसस संतर 
लिंबू को अंतर , चिन्हे नही ।५।

ताल बिघडेस , डोरा म अंगार
सपना भंगार , वांझोटा च ।६।

आस को अकाल , उपाव खंगार 
अडी को अंबार , काटा कुटा ।७।

धाय धाय कन् , हारपी मातर 
सुख क खातर , भागादौडी ।८।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

Saturday, May 15, 2021

तनखारा की नथनी. ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तनखारा की नथनी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पाय तोरा मखमाली
छुम छुम पयजन
रंगी माहुर की लाली
दंग सजिलो साजन ।१।

लाजे हिरोंदी जोडवा
तनखारा की नथनी
चाली आखाड की हवा
गर्जी इज करधनी ।२।

सिंव्ह कम्बर लचिली
खाये झकोला मेखलो
रुत जवानी नसीली
चान्नी सुकीर दाखलो ।३।

सेव फिफोली कदर 
हास हमेल साकरी
बाजे काकन बिल्लोर
झलारस गरसोरी ।४।

चिट्टऽ हात प मयदी
झुल्यो मन सकवार 
चार आनी बोटऽ मुंदी
भुल्यो सखो भरतार ।५।

भारी कान म की बिरी
आंगऽ हिवरो गोंदन
नव गाव की जागीरी
तोरो बिह्या को आंदन ।६।

बोल पाखरू क वानी 
माये खोपा म अगास
सिक्कासल्ला येकदानी
तोरऽ हिरदा का दास ।७।

चाल तोरी मसतानी
खानदानी नजाकत
झिगे आरसी को पानी 
सूर्व्य कुकू की ताकत ।८।

तेज मुंडा प दिवा को 
मन बरसाद पानी
छवका बिनदिया को 
ताज कपार प मानी ।९।

गरा कारलो डोरलो
चांद सूर्व्या की बाटी
मोठो चलावे खटलो
जसी कुप की च काटी ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर



Thursday, May 13, 2021

अजब गजब - ६५ : राजपिपला रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६५ : राजपिपला रियासत
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गुजरात क सरदार सरोवर पासीन ३६ कि.मी. दूर राजपिपला रियासत को ठिकानो स . सरदार बांध बन्या कन् राजपिपला रियासत की कयी धरोहर पानी म डुब गयी . नरबदा जिला की या रियासत आब लोगना न भुलाय दिस . 
१३ वी सदी पासिन मालवा पर मुसलमान राज का खुनी पंजा रुतत गया , आन् परमार राज का लोगना बारबन भया ... तितर बितर भया.. १४ वी सदी म चक्रवर्ती राजा भोज क सम्बन्ध म का ' चौकराना परमार ' मालवा परीन गुजरात क नरबदा काठऽ आया आन् इ.स. १३४० म नंदीपुर गाव ला आपलऽ राज की राजधानी बनाई . नंदीपुर गाव ला च नानदोड बी कव्हस . राजपिपला रियासत नरबदा अन् ताप्ती नदी मंझार होती . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * इ.स. १३४० म चौकराना परमार न नंदीपुर ( नानदोड ) राजपिपला रियासत की थापना करी . सतपुडा क दकसिन भाग म या रियासत पहाडी जंगल म बसीती . येनऽ रियासत ला जंगल मिन लकडी की कमाई होत होती . राजा चौकराना परमार को मालवा सुट्येतो पर राजा भोज वून का इष्ट होता . वून न राजा भोज क सिंगासन सरखो ३२ परियों वालो बनायतो . 
* राजा चौकराना परमार ला येक च पोटी होती . वून न वको बिह्या घोघा ( गुजरात ) रियासत क मोखदाजी रानोजी ( गोहिल राजपूत ) संग कऱ्यो . राजपिपला रियासत क सिंगासन साठी राजा चौकराना परमार न आपलो नाती ( राजा मोखदाजी रानोजी को नानो पोरग्यो ) समरसिंह ला गोद लियो . गोद लिया बाद समरसिंह को नाव अरजुनसिंह धऱ्यो . 
* अवरंगजेब संग महारानी ताराबाई की लढाई चालू होती . सेनापती संताजी , धनाजी न अवरंगजेब क फवूज ला पानी पाज्येतो . येनऽ लढाई म मराठा किथिन राजपिपला रियासत बी संग होती . 
* इ.स. १७२८ म राजपिपला रियासत बडौदा क गायकवाड राजा क छतरछाया म होती . 
* राजपिपला रियासत की राजधानी जुनाराज , नानदोड असी बदलत रही .
* इ.स. १८५७ क स्वतंत्रता संगराम म राजपिपला रियासत न भाग लेयेतो . 
* इ.स. १८६० म राजपिपला रियासत को ३५ वो राजो महाराज छतरसिंह बन्यो . महाराज छतरसिंह आधुनिक बिचारवाला होता . वून न राजपिपला रियासत की खूब उन्नती करी . राज म रेलवे लाईन बी बनायी . वून क बाद गादी पर वून को पोरग्यो महाराज विजय सिंह आयो . वून न बी राजपिपला रियासत ला आधुनिक बनायो . राज म हवाईपट्टी बी बनाई . 
* इ.स. १९४८ म राजपिपला रियासत को भारत देस म विलय भयो . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

Tuesday, May 11, 2021

अजब गजब - ६४ : ज्वाला मंदिर ( आतेशगाह ) bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६४ : ज्वाला मंदिर ( आतेशगाह ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय भगवती ज्वाला देवी का भारत , नेपाल आन् मारिसस म देऊरना स . पर येक ज्वाला मंदिर मुस्लिम देस म बी स , जेकी आमाला मालुमात नहाय . मध्यकाल क पुरातन रेसम रस्ता प , पूरबी योरोप आन् पसचिम आसिया क हद पर , क्यासपियन समुंदर ला चिपक कन् ' अज़रबैजान ' देस स . येनऽ मुस्लिम देस की राजधानी ' बाकू ' स . यहान क जमिन म तेल आन् ग्यास को भंडार स . 
इ.स. १९१८ म '  लोकतान्त्रिक गणराज्य ' बन्यो इ देस इ.स. १९९१ वरी सोवियेत संघ - रसीया क हुकुमत खलतऽ होतो . इ.स. १९९१ म इ देस स्वतंत्र भयो . 
क्यासपियन समुंदर क काठ प अज़रबैजान देस की राजधानी बाकू इ रेसम रस्ता को येक मोठो बजार / ठानो होतो . यासीन पूरबी योरोप को धंदोपानी , बेपार होत होतो . येनऽ बेपार म हिंदुस्तानी लोगना जबर आन् घाडा होता ! बाकू ला हिंदुस्तानी बेपारी लोगना आन् जहाज क बाडी काम साठी का हिंदुस्तानी कारागीर लोगना को खूब च राबतो होतो . आब येतरऽ लोगना को आवनो जावनो , रव्हनो जहान रहेन , वहान आपलऽ संस्कृती की निस्यानी आन् धरमस्याला / सराय त बांधेन च ! 
अज़रबैजान की राजधानी बाकू जवर च क्यासपियन समुंदर क काठ सुराखानी गाव म चमत्कारी सात जोत को भगवती रूप अग्निकुंड स , जेला हिंदुस्तानी ज्वाला मंदिर / आतेशगाह कोस . 
३० येकड को येनऽ देऊर को आवार पाचभुजा आकार को स .आवार क मंझार म मुख्य देऊर स . वोक बगल म च हिंदुस्तानी लोगना क आखरी विधी साठी वटलो बनेस . वोकऽ जवर च येक वट्टो स जेपर बी हरदम ज्वाला  बरत रव्हस . मुख्य देऊर ला चारी आंग दरुजा स . मंझार म पवितर अखंड सात जोत को ज्वाला माय को रूप स . देऊर क करसा प भगवान भोलेनाथ को तिरसूल बिराजेस . आवार क दिवाल ला लाग कनच रव्हन साठी , आराम करन साठी कमरा बन्यास . वहान बेपारी , कारागीर , पुजारी , भगत , साधक लोगना रव्हत होता . यहान पूंजापाती करनी वाला लोग स्याकाहारी , गाय पूजनी वाला अन् तिलक लगावनी वाला होता . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * यहान की जोत त ४००० बरस पासिन बर रह्यीस , असी मान्यता स . 
* देस को नाव अज़रबैजान को मतलब , ज्वाला / जोत न संभाले ती देस , असो स . 
* मध्ययुग म पुरातन रेसम मारग पर हिंदुस्तानी बेपारी को बेपार बाहाडे.. जहाज बांधनी वाला हिंदुस्तानी खाती बाडी को काम बाहाडे , तब रव्हन खान क सुबिधा साठी इ ज्वाला माय को देऊर अन् सराय हरयाना क माजदा गाव क बुद्धदेव न बाध्ये , असो सिलालेख यहान लागेस . वूसो च उत्तमचंद आन् शोभराज न भी येनऽ देऊर क बांधकाम साठी खूब हातभार लगायेस , असो येक सिलालेख स , जेपर बिकरम संवत् १७८३ लिख्येस . यहान क हर कोठी पर देवनागरी अन् गुरूमुखी लिपी म संस्कृत अन् पंजाबी भास्या का सिलालेख स ! सिरफ येक च सिलालेख फारसी भास्या म स . 
* येनऽ देऊर अन् सराय म हिंदुस्तानी अन् फारसी ( पारसी ) बेपारी अन् भगत आवत होता . हिंदू , पारसी अन् सिख धरम म अग्नी देवता ला घाडो महत्त्व स . तेकन वूई यहान संगऽमंगऽ रव्हत बी होता अन् पूंजापाठ बी करत होता . 
* अज़रबैजान देस को ' राष्ट्र वाक्य ' Odlar yurdu ( सनातन अग्नि की भूमी ) स . 
* इ.स. १८६० पासीन यहान को पुजारी गयो . इ.स. १८८३ पासीन यहान की पूंजापाती बंद भयी . 
* इ.स. १९६९ ला देऊर खलतऽ की ग्यास खतम भयी . आब बाकू परीन पाइपलाइन कन् यहान ग्यास आवस . 
* इ.स. १९७५ ला अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर ला जतन कर कन् स्मारक बनाये . 
* इ.स. १९९८ म युनेस्को न ज्वाला मंदिर ला world heritage site घोसित करी . 
* इ.स. २००७ म अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर ला ' historical architecture reserve ' घोसित कऱ्यो . 
* ज्वाला मंदिर म अग्नी , वायु , सिव , गनपती , राम , किस्न , हनुमान भगवान की पूंजा होत होती . 
* अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर प डाक टिकिट बी निकारीस . 
# अज़रबैजान मुस्लिम देस होय कन् बी वहान क सरकार न ज्वाला मंदिर ला जसो होतो , वूसो च जतन करेस . ज्वाला मंदिर म अखंड गायत्री मंतर चालू रव्हस आन् गनपती क देऊर म ' ॐ गणपत्ये नमो नमः ' इ जाप चालू रव्हस . सराय / धरमस्याला क कमरा म ' संग्रहालय ' बनायेस . हिंदू , पारसी , सिख बेपारी कसा रव्हत होता , पूंजापाती करत होता यका फटुना आन् पुतला लगायास . येक कमरा म भगवान सिव जी की ' नटराज ' मूरती स . आवार , देऊर को साजरो रखरखाव स . साफसफाई बी दिसस . 
सालाना १५ ,००० भगत ज्वाला मंदिर म आवस . 
# आब अज़रबैजान देस म १३०० आन् लाग कन् च आरमिनिया देस म ३००० हिंदुस्तानी लोग रव्हस . 
जय जोता वाली की !

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, May 9, 2021

माय त् माय रव्हस. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय त् माय रव्हस 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय त् माय रव्हस , केती आरती गावनो
देस जलम वा माय , केती किरती गावनो 
पर रिवाज ला देखो , बिह्या म बदले नाव
माय बनन साठी वा , सोडस आपलो गाव ।धृ।

माय त् माय रव्हस , जीव को कुप रव्हस 
आतो , भाऊज , मावसी , सास , चुलती , मामी , जीजी
बू , लाडी न् सेजारीन , माय को रूप रव्हस 
गार आमारऽ मुंडा की , वोमऽ काह्ये माय को नाव ? ।१।

जास लेकन दायजो , घर को मानसन्मान
सोनो नानो खानो पेनो , येमऽ स का माय को मान
वोको चित मन देखो , काहे लगावो जी भाव ।२।

रात दिन मरमर , वोला किंमत नहाय
वोकऽ काम की गिनती , पैसा म कही नहाय 
वोकी सास - आस देखो , वोला बी लागस झाव ।३।

तोरी धन दवलत , वोको मोठो अभिमान
माय जिमिन की माती , भारी तुरसी को पान 
दुय बोल स्यहद का , तुमी बोलो येक डाव ।४।

नको करू पूंजापाती , वा तऽ दिवा की बाती 
येक कोरा दुय डोरा , रस्तो दिखाडस जोती
तुमारी तकलिफ करे , वोकऽ हिरदा म घाव ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, May 7, 2021

लागे लाक डाउन जी. ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लागे लाक डाउन जी 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लागे लाक डाउन जी
काय करनु नी करनु
भयी मानुसकी दूर
केता नियम पारनु ।१।

भेव डोकसा म रह्ये
सपी हासी खुसी सारी 
रत्ति नहाय भरोसो
कोकी सकार कन् बारी ।२।

काम धंदा ला मनाई
घर बन गयो जेल
भयो जलम मरन
बिह्या लगन को खेल ।३।

असी बाप क राज म
देखी नही महामारी
बांध्या मुंडा ला मुसका
कपार प मुंडावरी ।४।

बाद भया मानमोरा
हारपीस सवासीन
दुय चार की बरात
संगऽ इथिन उथिन ।५।

बिह्या लाक डाउन को
दिखाडेस नवो ताल
अकसिद बी रुस्यास
सगा सोयरा बेहाल ।६।

भयो चुपचाप बिह्या
लागे जसो करे पाप
कोड्डी डोरा की भीर
उदास्यास मायबाप ।७।

जपो तन ला मन ला
धरो खुद प भरोसो
नेग दस्तुर क बिना
गाडजोडा ला जी कसो ।८।

सोडो अंगत पंगत
दुय थाटी दुय घास
जब पलटेन दिन
फेड लेजेन हवूस ।९।

जर आसुक भगावो
साफ सफाई धरम
दवादारु कसरत
इच दस्तुर नियम ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, May 2, 2021

अजब गजब - ६३ : जगनेर गढ़. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६३ : जगनेर गढ़ 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पसचिमी उत्तर परदेस म आगरा परीन ५० किमी. दूर राजस्थान क हद ला सट कन् राजा जगन को जगनेर गढ़ स . अरावली क उच्ची पहाडी प लाल पत्थर कन् बने येनऽ गढ़ ला पह्यले ' उंचाखेडा ' कवत होता .
जगनेर गढ़ की बनावट चितौडगढ़ सरीखी स . जगनेर क भवताल धौलपुर , भरतपुर , आगरा पट्टा म १४६८ परमार गाव स . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * जगनेर किल्ला ला १० वी सदी म आल्हा उदल क सग्गऽ मामा न बनायेस , असी मान्यता स . आल्हा उदल मनजे आल्हा सिंह अन् उदय सिंह . वूई मोठा पराक्रमी वीर होता . आल्हा उदल को मामो महोबा नरेस राजा जयपाल सिंह होतो . येक डाव सिकार खेलन साठी राजा जयपाल सिंह ग्वालियर परीन आगरा जवर आयेतो . वोला यहान की आबोहवा घाडी रुची . आन् वोनऽ जगनेर ला किल्लो बांध्ये , जेला जयगढ़ कोत होता . 
* जगनेर गढ़ ला समराट विक्रमादित्य न बनाये , असी बी मान्यता स . 
* १३ व सदी म मालवा पर मुसलमान लोगना को कब्जो भया कन् वहान का परमार चार कितऽ फयल्या . वोम की येक पाती का बंसज असोक मेवाड म आया . वून की च येक पाती न जगनेर पर राज कऱ्यो . महाराणा सांगा न येक परमार पाती ला बिजौलिया की जागीर देयी , असी मान्यता स . 
* असोक को नानो भाई स्यंभू सिंह महाराष्ट्र म पूना , अहमदनगर इलाखा म आयो . 
* यादव बंस , चंदेल बंस क बाद यहान परमार बंस को राज रह्ये .  ' आल्हा खंड ' का रचयिता , राजा जगन सिंह न राज करे . वोकऽ राज म येनऽ गढ़ आन् बसती को नाव ' जगनेर '  पड्यो . जगनेर क सिवमंदिर म जगन राजो हररोज पूंजापाती करत होतो . 
* जगन सिंह राजा को राज मोठो आसकाऱ्योतो . इ.स. १६०३ म जगनेर पर मुसलमान राज्या को हमलो भयो . येनऽ लढाई म राजा जगन सिंह ला वीरगती भेटी . तब रानी जमुना कंवर न सती जान को हठ धरे . पर दरबार क लोगना न कह्ये क , तुमी पेटसीन स . तुमी सती गया त गरभ क जीव क हत्या को पाप लागेन . लढाई चालूच रही . जब आखरी म कोनतो च रस्तो नी बाच्ये त रानी जमुना कंवर न आपलो धरम बाचाडन साठी पेट म खंजर खुपसकन् जीव देयो . 
* राजो जगन सिंह ग्वालियर क गुरू रिसी गालव को मोठो भगत होतो . रिसी गालव ला जब राजा जगन सिंह क लढाई की खबर मालूम पडी त वूई गायकी को रूप धर कन् जगनेर ला आया . वून न जगनेर ला च आपलो ठानो बनायो आन् मरत पावतर वहान च रह्या . जगनेर गढ़ म वून को देऊर स . वूई गायकी का रूप धर कन् आयाता , तेकन लोगना म वूई ' ग्वाल बाबा ' क नाव कन् परसिध्द भया . साल म येक डाव पुनव ला जगनेर म यातरा भरस , जेला लखी मेला कोस . हर पुनव आन् इतवार ला ग्वाल बाबा क देऊर म मोठी पूंजा रवस . 

( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढा जी , जोधपुर ) 
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर