मन ला भरांती
( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
घुप अंधारा म , बिघड्यो तंतर
उजिड मंतर , जीव साठी ।१।
राग तम माया , जीव को जंजार
पावन घंगार , न्हावन ला ।२।
गाडो जिंदगानी , जोड को जंतर
सास को अंतर , वोकऽ पाई ।३।
चित की च बानी , नहाय गंतर
रोवस अंतर , हरमेस ।४।
मन ला भरांती , दिसस संतर
लिंबू को अंतर , चिन्हे नही ।५।
ताल बिघडेस , डोरा म अंगार
सपना भंगार , वांझोटा च ।६।
आस को अकाल , उपाव खंगार
अडी को अंबार , काटा कुटा ।७।
धाय धाय कन् , हारपी मातर
सुख क खातर , भागादौडी ।८।
रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
मोरो तोरो सब मन को भरम। खूब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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