अजब गजब - ६४ : ज्वाला मंदिर ( आतेशगाह )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
माय भगवती ज्वाला देवी का भारत , नेपाल आन् मारिसस म देऊरना स . पर येक ज्वाला मंदिर मुस्लिम देस म बी स , जेकी आमाला मालुमात नहाय . मध्यकाल क पुरातन रेसम रस्ता प , पूरबी योरोप आन् पसचिम आसिया क हद पर , क्यासपियन समुंदर ला चिपक कन् ' अज़रबैजान ' देस स . येनऽ मुस्लिम देस की राजधानी ' बाकू ' स . यहान क जमिन म तेल आन् ग्यास को भंडार स .
इ.स. १९१८ म ' लोकतान्त्रिक गणराज्य ' बन्यो इ देस इ.स. १९९१ वरी सोवियेत संघ - रसीया क हुकुमत खलतऽ होतो . इ.स. १९९१ म इ देस स्वतंत्र भयो .
क्यासपियन समुंदर क काठ प अज़रबैजान देस की राजधानी बाकू इ रेसम रस्ता को येक मोठो बजार / ठानो होतो . यासीन पूरबी योरोप को धंदोपानी , बेपार होत होतो . येनऽ बेपार म हिंदुस्तानी लोगना जबर आन् घाडा होता ! बाकू ला हिंदुस्तानी बेपारी लोगना आन् जहाज क बाडी काम साठी का हिंदुस्तानी कारागीर लोगना को खूब च राबतो होतो . आब येतरऽ लोगना को आवनो जावनो , रव्हनो जहान रहेन , वहान आपलऽ संस्कृती की निस्यानी आन् धरमस्याला / सराय त बांधेन च !
अज़रबैजान की राजधानी बाकू जवर च क्यासपियन समुंदर क काठ सुराखानी गाव म चमत्कारी सात जोत को भगवती रूप अग्निकुंड स , जेला हिंदुस्तानी ज्वाला मंदिर / आतेशगाह कोस .
३० येकड को येनऽ देऊर को आवार पाचभुजा आकार को स .आवार क मंझार म मुख्य देऊर स . वोक बगल म च हिंदुस्तानी लोगना क आखरी विधी साठी वटलो बनेस . वोकऽ जवर च येक वट्टो स जेपर बी हरदम ज्वाला बरत रव्हस . मुख्य देऊर ला चारी आंग दरुजा स . मंझार म पवितर अखंड सात जोत को ज्वाला माय को रूप स . देऊर क करसा प भगवान भोलेनाथ को तिरसूल बिराजेस . आवार क दिवाल ला लाग कनच रव्हन साठी , आराम करन साठी कमरा बन्यास . वहान बेपारी , कारागीर , पुजारी , भगत , साधक लोगना रव्हत होता . यहान पूंजापाती करनी वाला लोग स्याकाहारी , गाय पूजनी वाला अन् तिलक लगावनी वाला होता .
१. इतिहास अन् मान्यता : * यहान की जोत त ४००० बरस पासिन बर रह्यीस , असी मान्यता स .
* देस को नाव अज़रबैजान को मतलब , ज्वाला / जोत न संभाले ती देस , असो स .
* मध्ययुग म पुरातन रेसम मारग पर हिंदुस्तानी बेपारी को बेपार बाहाडे.. जहाज बांधनी वाला हिंदुस्तानी खाती बाडी को काम बाहाडे , तब रव्हन खान क सुबिधा साठी इ ज्वाला माय को देऊर अन् सराय हरयाना क माजदा गाव क बुद्धदेव न बाध्ये , असो सिलालेख यहान लागेस . वूसो च उत्तमचंद आन् शोभराज न भी येनऽ देऊर क बांधकाम साठी खूब हातभार लगायेस , असो येक सिलालेख स , जेपर बिकरम संवत् १७८३ लिख्येस . यहान क हर कोठी पर देवनागरी अन् गुरूमुखी लिपी म संस्कृत अन् पंजाबी भास्या का सिलालेख स ! सिरफ येक च सिलालेख फारसी भास्या म स .
* येनऽ देऊर अन् सराय म हिंदुस्तानी अन् फारसी ( पारसी ) बेपारी अन् भगत आवत होता . हिंदू , पारसी अन् सिख धरम म अग्नी देवता ला घाडो महत्त्व स . तेकन वूई यहान संगऽमंगऽ रव्हत बी होता अन् पूंजापाठ बी करत होता .
* अज़रबैजान देस को ' राष्ट्र वाक्य ' Odlar yurdu ( सनातन अग्नि की भूमी ) स .
* इ.स. १८६० पासीन यहान को पुजारी गयो . इ.स. १८८३ पासीन यहान की पूंजापाती बंद भयी .
* इ.स. १९६९ ला देऊर खलतऽ की ग्यास खतम भयी . आब बाकू परीन पाइपलाइन कन् यहान ग्यास आवस .
* इ.स. १९७५ ला अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर ला जतन कर कन् स्मारक बनाये .
* इ.स. १९९८ म युनेस्को न ज्वाला मंदिर ला world heritage site घोसित करी .
* इ.स. २००७ म अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर ला ' historical architecture reserve ' घोसित कऱ्यो .
* ज्वाला मंदिर म अग्नी , वायु , सिव , गनपती , राम , किस्न , हनुमान भगवान की पूंजा होत होती .
* अज़रबैजान सरकार न ज्वाला मंदिर प डाक टिकिट बी निकारीस .
# अज़रबैजान मुस्लिम देस होय कन् बी वहान क सरकार न ज्वाला मंदिर ला जसो होतो , वूसो च जतन करेस . ज्वाला मंदिर म अखंड गायत्री मंतर चालू रव्हस आन् गनपती क देऊर म ' ॐ गणपत्ये नमो नमः ' इ जाप चालू रव्हस . सराय / धरमस्याला क कमरा म ' संग्रहालय ' बनायेस . हिंदू , पारसी , सिख बेपारी कसा रव्हत होता , पूंजापाती करत होता यका फटुना आन् पुतला लगायास . येक कमरा म भगवान सिव जी की ' नटराज ' मूरती स . आवार , देऊर को साजरो रखरखाव स . साफसफाई बी दिसस .
सालाना १५ ,००० भगत ज्वाला मंदिर म आवस .
# आब अज़रबैजान देस म १३०० आन् लाग कन् च आरमिनिया देस म ३००० हिंदुस्तानी लोग रव्हस .
जय जोता वाली की !
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
जय माता दी 🙏🙏🙏
ReplyDeleteखूब साजरी रचना
धन्यवाद जी 🙏
Deleteखूप साजरी रचना
ReplyDelete