Sunday, November 28, 2021

मह्यंगाई की हूर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मह्यंगाई की  हूर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

हीत भर पेट साठी
पड्ये जलम नपूर
महामारी कोरोना की
संग मह्यंगाई हूर ।१।

इत उत चितंबो च
बिघडेस ताल सुर
घर न्हाय दार दानो
येम कोको स कसूर ।२।

भूकीज्यास पोटुबाटू
देख्ये टुकुर टुकुर
ज्याम भयो गावगाडो
चक्को रोवे कुर कुर ।३।

इंधन नी वंगन नी
बिना बयील की धुर
कसो धकावनो गाडो
जान को स लय दूर ।४।

जोत सरी उम्मीद की
मान भयो चूर चूर
आस मरी जिंदगी की
कहान लुकेस नूर ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, November 18, 2021

अजब गजब - ८२ : अरथुना का देऊर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८१ : अरथुना का देऊर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान क बांसवाडा जिला म अरथुना या नानीसी पेठ स . बांसवाडा - अहमदाबाद रस्ता प बांसवाडा पासीन ३८ कि.मी. दूर अरथुना स . अरथुना ला ११ वी , १२ वी अन् १५ वी सदी सीन जुड्या खंडारा भया देऊरना साठी वरखस . ११ वी सदी म यहान वागड क परमार राजाना को राज होतो अन् अरथुना वोन राज की राजधानी होती . 
हनुमान गढ़ी नाव कन् परसिध्द देऊर क येक समूह म नीलकंठ महादेव मंदिर स . बाकी देऊरना क जवर येक कुंड अन् तीन सिवमंदिर स . हनुमान अन् बिस्नु देव को देऊर पह्यलऽ कार को स . येन च इलाखा म चवसठ योगिनि मंदिर बी स . 
इतिहास : * वागड इलाखा म ८ वी सदी म मालवा क परमार राजा उपेन्द्र न ' परमार राज ' की मेढ़ गाडी . बाद म येनच परमार वंस की डंगालना चंद्रावती , भीमनाल , किराडू , वागड म फयली . 
* मालवा क परमार राजा ' पुण्डरिक ' न पूरानी उमरावती / उत्थुनक ( अरथुना ) की थापना करीती . यहान क खुदाई म कितिक मूरतीना अन् ३० परीस बी जास्त देऊरना सापड्यास . 
* परमार राजो ' चामुंडा राजा ' क सिलालेख म लिख्योस क वून न ' मंदालेसा ' नाव क सिव मंदिर ला इ.स. १०७९ म आपलऽ पिताजी ' मण्डलिक ' क याद म बांध्येतो . तेकन येन देऊर को नाव ' मण्डलेश्वर मंदिर ' पड्यो . अरथुना क खुदाई म कयी दुरलभ देऊरना अन् मूरतीना निकरीस . अरथुना को पुरानो ' मण्डलेश्वर शिवालय ' मुख्य स . येकऽ सिवा यहान भगवान बिस्नु देव , भगवान बरमाजी इन का बी देऊरना स . ' मण्डलेश्वर शिवालय ' को बांधकाम महाराष्ट्र क हेमाडपंथी देऊर सरीखो स . सभामंडप सीन गाभारो लय खलतऽ स , जे म २ फीट उच्ची सिवलिंग अन् ३ फीट गोलाई की जलाधारी स . 
* इ.स. १०८० क येक सिलालेख म लिख्येस क , अनंतपाल नाव क वून क अधिकारी पोरग्या न बी सिवमंदिर की थापना करीती . 
# इतिहासकार न यहान क मूरतीना ला सात भाग म बाटेस . १. शैव संप्रदाय २. वैष्णव संप्रदाय ३. दुसरऽ दरजा की देवी देवताना ४. प्रतीकात्मक शिल्प ५. देवी की मूरतीना ६ . जैन मूरतीना ७. बाकी मूरती . 
# अथुरना का देऊर : 
१. मण्डलेश्वर महादेव 
२. चवसठ योगिनि मंदिर / पिपलिया महादेव मंदिर ( १२ वी सदी ) 
३. सोमेश्वर मंदिर 
४. हनुमान मंदिर - येन देऊर म हनुमान जी की सिवस्वरूप मूरती स . येकी थापना परमार राजो विजयराज न इ.स. ११०७ म करीती . 
५. हनुमान गढ़ी मंदिर समूह - यहान कारऽ पास्यान म बनी हनुमान जी की खूब मोठ्ठी मूरती स . यहान च नीलकंठ महादेव मंदिर स . 
६. कुम्भेश्वर मंदिर - इ देऊर इ.स. १०८० म बन्येतो . 
७. शैवाचार्य मंदिर - कानफाट्यो साधु क नाव कन् परसिध्द इ देऊर ११ वी सदी म बन्येस . इ देऊर नाथ संप्रदाय सीन संबंधित स . 
८. जैन मंदिर
९. कन्धार डेरा मंदिर - उच्ची टेकडा प दुइ देऊरना स , जिन ला ' कन्धार डेरा ' क नाव कन् वरखस . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर