निर्माण : भाग ६
क्वार्टर्स के निर्माण कार्य के साथ ही बाहरी sanitary work भी प्रारंभ करने के बारे में मै सोच रहा था . संबंधित विभाग के अभियंता से विचार विमर्श किया . मैने साइट के हिसाब से working drawings बनाई . अब ढलान के हिसाब से किधर , कितने और कितने capacity के सेप्टिक टैंक बनाने है , इसका निर्णय लेना था . यह निर्णय अधिक्षक अभियंता ही ले सकते थे . उन्होंने ढलान की ओर खाली पडी जगह दो टैंक के लिए मुकर्रर की .
खुदाई काम करने वाली मजदूर की एक टोली को काम पर लगाया . काली मिट्टी की जमीन थी . साइट के एक बाजू मे ऊॅंची जगह थी , और उस जगह की विरुद्ध बाजू की ढलान पर भी निर्माण कार्य जारी था . उसके आगे बडा सा खेल का मैदान था . जब वहॉं से खुदाई चालू की तो आगे ऊॅंची जगह पर खुदाई बहुत गहरी जा रही थी . दोनों ओर क्वार्टर होने से बीच में काफी कम जगह बच रही थी , जो माटी फेंकने के लिए अपर्याप्त थी .
काली मिट्टी में खुदाई होते ही धूप , हवा से नाली की दिवारों में दरारे आ रही थी . सभी मजदूर थोडी थोडी दूरी पर जोडी से काम कर रहे थे . ऊॅंचाई वाली जगह पर एक बुजुर्ग पति - पत्नि खुदाई कर रहे थे . दोपहर की खाना खाने की छुट्टी हुई लेकीन वृध्द दम्पत्ति अभी भी काम कर रहे थे .
हम लोग ऑफिस मे भोजन कर रहे थे की , एक मजदूर हमारे पास आया और बोला की , ' साहब , जल्दी साइट पर चलिएं.
' क्या बात है ? ' मैने पूछा .
' साहब , डोकरा - डोकरी मन नाली मे दब गये है...' मजदूर ने कहा .
भोजन कर रहे बाकी स्टाफ भी सकते मे आ गये . हम दौड कर घटनास्थल पर गये . दिल दहला देने वाला नजारा था ! वृध्दा गले तक मिट्टी में दबी थी और उन के पति का नामोनिशान नही था .
' पहले हमारे आदमी को निकालो जी...' वृध्दा ने रोते हुएं कहा .
' कहॉं है वे ? ' मैने चिंता व्यक्त कर पूछा .
' मेरे सामने ही माटी में गडे है ...' वृध्दा ने रोते - रोते बताया .
फावडा तो चला नही सकते थे.. मजदूरों ने हाथों से ही मिट्टी निकाली . थोडी देर बाद उस बुजुर्ग की पीठ दिखी . असल मे वह टोकरी मे मिट्टी भर कर दे रहा था और वृध्दा उसे किनारें पर फेंकती थी .वह बुजुर्ग मजदूर मिट्टी भर ही रहा था की भरभरा के नाली की दिवार ढह गयी . और किनारे पर फेंकी हुई मिट्टी ने नाली को पाट दिया . मजदूर तेजी से मिट्टी निकाल रहे थे , इस कारण और मै किसी अनुचित की आशंका की वजह से पसीने से तरबतर हो गये...
वह बुजुर्ग मजदूर जीवित है की मृत ? यह यक्षप्रश्न था..... ( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर