Tuesday, June 29, 2021

महाराणी अजबदे बाई पंवार. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाराणी अजबदे बाई पंवार को जलम मेवाड क बिजौलिया ठिकाना म इ.स. १५४२ म भयो . अजबदे बाई क माय को नाव हंसाबाई अन् पिताजी को नाव राव मामरख ( रामरख ) सिंह पंवार होतो . अजबदे बाई का गुरू मथुरा का विठ्ठल राय होता . 
अजबदे बाई को बिह्या इ.स. १५५७ म भयो . अजबदे बाई वीर महाराणा प्रताप जी ला परन्याईती . बिह्या क बखत अजबदे बाई की उमर १५ बरस अन् महाराणा प्रताप जी की उमर १७ बरस होती . 
१६ मार्च १५५९ इसवी सन  म अजबदे बाई न भंवर अमरसिंह ला जलम देयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह क पिताजी को नाव महाराणा उदयसिंह अन् माय को नाव जयवंता बाई होतो . 
महाराणा प्रतापसिंह ला अजबदे बाई म आपली माय जयवंता बाई की च छाया दिसत होती . अजबदे बाई महाराणी जयवंता बाई क मोठऽ लाड की होती . 
महाराणा प्रतापसिंह जी का अनखिन् १० बिह्या भया . पर हर घडी वून ला अजबदे बाई को कप्पो साथ होतो . घर पासिन राजकारन वरी अजबदे बाई महाराणा प्रतापसिंह जी क खांदा ला खांदो लगायकन् उभी रही . 
इ.स. १५६७ म अकबर न चितौडगढ पर हमलो कऱ्यो . तब ४ मह्यना अजबदे बाई राजपिपला रही . 
इ.स. १५७२ म महाराणा उदय सिंह जी को स्वर्गवास भयो . तब महाराणा प्रतापसिंह को राजतिलक भयो अन् अजबदे बाई महाराणी / पटरानी बनी . 
इ.स. १५७२ पासिन १५७६ वरी महाराणी अजबदे बाई गोगुन्दा म रही . 
इ.स. १५७६ म परसिध्द हल्दिघाटी की लढाई भयी . येन लढाई म महाराणी अजबदे बाई का पिताजी महाराजा रामरख पंवार , भाई कुंवर डुंगरसिंह पंवार अन् दुसरो भाई पहाड सिंह पंवार ला वीरमरण आयो . 
महाराणा प्रतापसिंह जी न आब जंगल म रह्यकन् छापामार लढाई करन को बिचार कऱ्यो . आपलऽ राज ला दुसमान क येढा मिन निकारन को होतो... इ मुसकिल अन् तकलिफ वालो फयसलो होतो . 
महाराणी अजबदे बाई न कह्ये क , ' जसी सीता माय भगवान राम संग १४ बरस बनवास म रही ... जसी दरोपदी माय पांडव संग १२ बरस बनवास म रही , उसी च मु बी तुमारऽ संग जंगल म च रवून . जहान तुमी रवजेन , वहान च मु बी संग रवून .' 
महाराणा प्रतापसिंह जी न महाराणी अजबदे बाई ला लय समझाये , पर महाराणी अजबदे बाई आपलऽ फयसला पर अटल रही . महाराणी को भाई ' शुभकरण पंवार ' आखरी वरी संग रह्यो . 
धन्य वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , धन्य महाराणी अजबदे बाई अन् धन्य महाराणी अजबदे बाई का भाईना न् पिताजी ! 
जब  राजपुतानो दुसमान क घर पानी भर रहेतो , तब वीर महाराणा प्रतापसिंह जी , महाराणी अजबदे बाई , भाई शुभकरण पंवार दुसमान ला आपली तलवार - भाला - तिरकमठा कन् पानी पाज रह्याता . आपल ऽ जलमभूमी पर आई पापी बिपदा ला जवर खतम नी करून तवर मु जमीन पर च सोवून , असी आन आपलऽ जलमभूमी का सपुत वीर महाराणा प्रतापसिंह जी न लेयीती . 
इ.स. १५८५ म महाराणा प्रतापसिंह जी न ' चावंड ' ला आपली राजधानी बनाई . 
इ.स. १५९० म वीर महाराणा प्रतापसिंह जी की पटरानी अजबदे बाई को चावंड म च देहांत भयो . 
वीर महाराणा प्रतापसिंह जी अन् महाराणी अजबदे बाई पंवार ला कोटी कोटी प्रणाम 🙏🙏.

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, June 27, 2021

भया आउट डेटेड. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भया आउट डेटेड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भया आउट डेटेड
गाव खेडा खेती माती
खसे गावगाडो चाक
कितऽ ढुंढू बाडी खाती ।१।

भया आउट डेटेड
जुनऽ बिचार का मोती
न्हाय पानी को भरोसो 
लाग जायेन सवाती ।२।

भयी आउट डेटेड
पुरखा की ग्यानजोती
जुना ला लाग्या रुन्या
आब गूगल सोबती ।३।

भयी आउट डेटेड
सांज की बी दिवाबाती
दिन रात येकसार
मनऽ फयली भरांती ।४।

भया आउट डेटेड
नेग दस्तुर आरती
देखा देखी दुनिया की
तिराईत की किरती ।५।

भया आउट डेटेड
पहाडा की बी गिनती
मोबाइल , ल्यापटाप
इचकस नानी पाती ।६।

भयी आउट डेटेड
फेटो टोपी बांडी धोती
उपी चोरी लुगडा की
आंगभर की महती ।७।

भयी आउट डेटेड
बोलचाल की संगती
डाये कान म गा ठेपू
असी भयी भानामती ।८।

भयी आउट डेटेड
माय बाप की जी मती
बंद मुंडो पोटू आघ
उरफाटी काल गती ।९।

भयी आउट डेटेड
उमर की साडेसाती
दान जवानी को मांगे
बुजरुक जी ययाती ।१०।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, June 26, 2021

अजब गजब - ६७ : हडबू जी सांखला. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६७ : हडबूजी सांखला
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान म नागौर जिलो स . नागौर जवर च भूंडेल गाव का मेहराज सांखला जागिरदार होता . राजा मेहराज सांखला क घर ' हडबूजी ' न जलम लेयो . माय को नाव ' सौभाग ' . 
स्यंख की पूंजा करनीवाली पवार राजपूत की येक पाती ला ' सांखला ' कोस .  
मेहराज सांखला भाटी राणगदे क संग कोडमदे क लढाई म काम आयो . बाबा हडबू जी आपलो गाव भूंडेल ला सोडकन् ' हरभमजाळ ' म आया . बाबा हडबू जी को येक नाव ' हरभम ' बी स . जाळ / जाल येक परकार क झाड को नाव स . यहान आयकन् बाबा हडबू जी जाळ क झाड खलतऽ घोर तपस्या करी . तेकन येनऽ गाव / जागा को नाव ' हरभनजाळ पड्यो , आन् परसिध्द भयो ! 
जालौर गाव को नाव बी जाळ / जाल झाड परीन च पड्यो !
बाबा हडबू जी सगुन ( शकुन ) विचारक , दयालु , संत अन् रणबांकुरा होता . राजस्थान क परसिध्द बाबा रामदेव का बाबा हडबू जी मावस भाई होय . बाबा रामदेव क गुरू न बाबा हडबू जी ला गंडो बांध्यो . बाबा रामदेव अन् वून क गुरू क परभाव कन् बाबा हडबू जी न अवजार - हत्यार को त्याग कऱ्यो . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * राव जोधा जी क राज पर दुसरऽ राजा न कब्जो करेतो . राव जोधा जी इतऽ उतऽ सहारा साठी घूम रह्याता . येक दिन राव जोधा जी बाबा हडबू जी ला भेटन ला आया . बाबा हडबू जी न रात क खाना प राव जोधा जी संगच आपलो भासो ' जैसा भाटी ' ला बी बलायो . जैसा भाटी जैसलमेर को राजो रावल केहर क येक राजकुमार , कलिकरन को पोरग्यो होतो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला आसिरवाद देयो क , तुमारो राज तुमाला वापिस भेटेन . पर तुमी म्हरो भासो जैसा भाटी ला संग लेयकन् जावो . तुमाला वकी मदद होयेन . 
बाबा हडबू जी न जसो कह्येतो , वूसोच भयो . राव जोधा जी ला आपलो राजपाट भेट्यो . जोधपुर म जैसा भाटी को वून ला घाडो सहारो भेट्यो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला कट्यार देयीती . राव जोधा जी न बी बाबा हडबू जी ला बावन बीघा जमीन दान करी . येलाच ' बावनी जागीर ' कोस . बाबा हडबू जी न यहान ' बैंगहटी ' गाव बसाड्यो , जी जोधपुर जिला म स . बैंगहटी म बाबा हडबू जी को मुख्य देऊर स . पर येनऽ देऊर म बाबा हडबू जी क मूरती की पूंजा नी होत . यहान बाबा हडबू जी को मोठो गाडो स . येनऽ गाडा म बाजरो , कडबा अन् दुसरो अनाज लेकन बाबा हडबू जी गाव गाव क गरीबगुदाला बाटत होता . कोनी बी  मानूस , जनावर भुको नी निज्या पायजे , तेक साठी वूई येन गाडा कन् अनाज , चारो बाटत होता . वू गाडो आब बी देऊर म धरेस आन् वकीच पूंजा करस ! येन गाडा को नाव ' सिया ' स . यहान का पुजारी सांखला राजपूत स . 

* येक डाव बाबा हडबू जी दुसरऽ कितऽ गयाता . तबच वून क पोटी ला पोटी भयी . जोतिस न वोन पोटी ला असुभ सांगे . घरवाला न वोनऽ नानसऽ जीव ला जंगल म मरन साठी फेक्यो . बाबा हडबू जी जंगल मिनि घर कितऽ आय रह्याता तब वून ला पोटू क रोवन की आवाज आई . बाबा हडबू जी न वोला घर ल्यायो आन् रावळा म ( ठाकुर को जनाना आवास ) देयो . वोन पोटी ला देख कन् रावळा म कोहराम मच्यो . बाबा हडबू जी ला सारी करमकहानी मालुम भयी . बाबा हडबू जी न भविस्यबानी करी क , म्हरी नातीन ' राजरानी ' बनेन ! वून न आपलऽ नातीन को बिह्या राव जोधा को पोरग्यो ' राजकुमार सूजा ' संग कऱ्यो . राव जोधा जी क बास्त राजकुमार सूजा ( सुजान ) को राजतिलक भयो . अन् नातीन लिखमी ( लकसुमी ) राजरानी बनी . 

# बाबा हडबू जी को येक देऊर मंडोर ( जोधपुर ) म स , जहान बाबा हडबू जी की मुरती स . इ देऊर राजा अजितसिंह न वि.सं. १७७१ म बनायो . 

दूजा पीर सांखला हडबू , नही किसी के आया काबू ।
भूखों को भोजन पहुंचाता , उसे बांटने घर - घर जाता ।
उन के मंदिर में वह गाडा , पूजा करने जन - जन आता ।
सांखला हडबू लोक देवता , ' दयालुता ' जग आज सेवता ।।

( सहयोग : इंजि . जालमसिंह सोढा जी , जोधपुर )
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, June 24, 2021

बड सावितरी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बड सावितरी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आई बड सावितरी
म्हरो भरतार सावरो
घात बाई बोवाई की
गाव सिवार हिवरो ।१।

माती माय को भगत
जुत्यो डुपन डवरो
वोक संग जिंदगानी
मला वको च मावरो ।२।

म्हरो कुकू को किसनो
गुनी सत्यवान वानी
दिसे कडक ढेकुल
मन मंझार म लोनी ।३।

भोरो सदासिव म्हरो
गरसोरी को जी मनी
झुल्ये कारलो डोरलो
हिरदा म घरधनी ।४।

पोटी सावितरी की मु 
पुंजू बड सयीबाई
सात जलम कमाई
म्हरऽ कुकू की पुन्याई ।५।

कच्चऽ धागा क येढा म
गुफू पक्को नातो बाई
कुकू हरद को सोनो
माथा प चमक आई ।६।

सुख दुख संगमंग
आवबिचार बी येक
येवहार पानी म बी
धनी साफदिल नेक ।७।

मोठो कुटुम्ब खटलो
बड वानी जी पसारो
म्हरऽ राजा की मु रानी
गाव सिव आसकारो ।८।

राग लोभ का झटका
सवंसार को रायतो
मनधरनी कारन
मिरस च जी आयतो ।९।

असो जलम जलम
पुऱ्यो कुकू कन् नातो 
म्हरऽ कच्चऽ इमला को
पक्को करजेन जोतो ।१०।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर




Sunday, June 20, 2021

बाप त् बाप रव्हस. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बाप त् बाप रव्हस
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Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

बाप त् बाप रव्हस
देव को जाप रव्हस ।धृ.।

माय बाप मावली को
नातो आपोआप रव्हस
तन मन प आपलऽ
वून की च छाप रव्हस ।१।

वावसाड म आसरो
झांजी की झाप रव्हस
ठंडी म ठाठऱ्या पर
आग्टी को ताप रव्हस ।२।

पाड्डो भारी ममता को
अनाप सनाप रव्हस
अगास म उडान को
बाप च नाप रव्हस ।३।

इर भर कस्टऽ म बी 
वू आडमाप रव्हस
रात भर डोरा म बी
पोटू को माप रव्हस ।४।

बाप कन् जिंदगानी
अगो टिपटाप रव्हस
गावो कोनतो बी सूर
बाप की आलाप रव्हस ।५।

माय पराटी की वर
तोर वानी बाप रव्हस
माय खेत की जिमिन
धुरो त् बाप रव्हस ।६।

रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, June 18, 2021

अजब गजब ६८ : बोली भास्या की गती अन् महती. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब ६८ : बोली भास्या 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भारत क बोली भास्या को पह्यलो सर्व्हे अंगरेज क जमाना म जॉर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन क हात खलतऽ भयो . इ.स. १८९८ पासिन १९२८ पावतर , ३० बरस लाग्या येन काम साठी ! यको सारो खरचो अंगरेज सरकार न उठायतो .
आब इ.स. २०११ पासिन दुय बरस बडोदा क डॉ . गणेश देवी न टाटा कंपनी क सहारा कन् आन् लोगना न देई वोन वरगनी कन् बोली को सर्व्हे करेस . ( सरकारी अनुदान नही भेट्ये . ) 
ग्रिअर्सन क ३० बरस क सर्व्हे म ' भोयरी ' बोली की घाडी जानकारी स . पर डॉ. गणेश देवी क सर्व्हे म भोयरी बोली की जानकारी च नयीती . मु न वून क संग बात करी , पत्र पठाया तब , वून न कह्ये क तुमी भोयरी बोली की जानकारी पठावो ; आघ क किताब म वोला जोडून . 
डॉ. गणेश देवी क सर्व्हे म लिखेस क , भारत म की ३०० बोली खतम भयीस आन् १९० बोली खतम होन क रस्ता प स . 
इ.स. १९३१ क सिरगनती म वरधा जिला म १४,०८५ , छिंदवाडा जिला म १७,००० आन् बयतूल जिला म १८,००० लोगना ' भोयरी बोली ' बोलस , असो लिख्यो स . 
इ.स. १९५४ म भोयरी बोली ला हिंदी क बोली को दरजो भेट्यो . 
इ.स. १९६१ क सिरगनती म महाराष्ट्र म सिरफ ५,३८८ लोगना न भोयरी बोली बोलूस , असो कह्ये . येन च सिरगनती म भोयरी बोली  मालवी की बोली स , असो कह्येस . 
येन च सिरगनती म असो बी लिख्येस क , भारत म क १६५२ बोली भास्या मिन सिरफ १३६५ च बाचीस . 
* येन ५० बरस म दुनिया की २०% बोली भास्या खतम भयी . 
* भास्या क जानकार लोगना को कवनो स क , इ.स. २०५० पावतर दुनिया की ९६% बोली भास्या अन् लिपी खतम होय जायेन . 
# भास्या को इतिहास ७०,००० बरस पुरानो स . भास्या की अवधारना १०,००० बरस पुरानी स . लिखित भास्या को इतिहास ४,००० बरस पुरानो स . 
# भारत म १ लाख सिन जास्त लोगना २२ अनुसूचित भास्या अन् १०० गयीर अनुसूचित भास्या बोलस . 
४२ बोली भास्या असी स , जेला १० हजार सिन कम लोगना बोलस . आन् असऽ बोली भास्या ला ' लुप्तप्राय ' बोली कव्हस . 
# दुनिया की २० % आबादी भारत देस म रव्हस . तेकन भारत म बोली भास्या बी जास्त होती . युनेस्को क इ.स. २०१८ क रपट म , बोली भास्या ला भूलन म भारत देस येक ( अव्वल ) नंबर पर स , असो लिख्येस !
# इ.स. १९७१ ला भारत सरकार न १०८ भास्या की सूची बनाइस . आन् भास्या सम्बन्धी सरकारी निति असी स क , सूची म आवन साठी कोनतऽ बी बोली भास्या का  कम स कम १०,००० लोगना वोला बोलनी वाला लागस . 
# आब तुमी कह्येन क भयी खतम बोली त भयी .... वोकन का फरक पडस ?
* बोली खतम होन को परिनाम :
➡️ बोली सिरफ बोलन को च माध्यम नहाय . बोली या ' ग्यान साखरी ' ( ज्ञान शृंखला ) रव्हस . बोली म हजारो बरस पासिन को लोकसाहित्य , घरगुती दवाई स्यास्तर , ढोर डंगर क तब्येत पानी की जानकारी , खेती किसानी की जानकारी , हवा पानी की जानकारी , पुरानो ग्यान , संस्कार , नेग दस्तुर , खान पान , सन तिवार , रितभात की बात रव्हस . आन् बोली सप्या कन् ... खतम भया कन् इ हजारो बरस को ग्यान बी येक झटका म खतम होय जास . संस्कृति की वरख , पह्यच्यान खतम होय जास .... 
... येको आमाला ना पस्तावो आवस , ना दुख होस ! 
* बोली भास्या खतम होन को कारन : 
➡️ बोली भास्या कन् हीन भावना को सिकार होनो .
➡️ बोली भास्या को स्यब्द कोस अन् व्याकरन नी रव्हनो .
➡️ बोली भास्या लिखित रूप म नी रव्हनो . वको साहित्य नी रव्हनो . ( किताब , कवितासंग्रह , कथासंग्रह , लेख , कादंबरी नी रव्हनो .)
➡️ बोलचाल म बोली भास्या को बापर नी करनो . 
➡️ कोनी न लिखे बी त वोला नी बाचनो . कोनी न किताब छपाये त वोला नी खरीदनो आन् नी बाचनो . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, June 17, 2021

अजब गजब ६७ : मितन्नी. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब ६७ : मितन्नी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी संस्कृति

३५०० बरस पह्यले पसचिम आसिया क सीरिया पासीन भूमध्य संमुदर पावतर येक साम्राज्य होतो , जेको नाव होतो , " मितन्नी "! मितन्नी राजवंस इ संस्कृत भास्या बोलनीवालो सनातन धरम का होतो . यूफ्रेटस अन् टिगरिस नदी  घाटी क ( इराक ) वरतऽ को इलाखो , जी आब उत्तर इराक , सीरिया अन् दकसिन पूरबी तुरकी म आवस , इ इलाखो मितन्नी राज को होतो . 
मितन्नी राज क राजधानी को नाव ' वस्सुकन्नि ( वसुखनि ) ' होतो . वसुखनि को मतलब सोना चांदी की खदान ! 
मितन्नी राज क पसचिम म हित्ती राज होतो . येन दुय राज म हरदम च लढाई झगडो होत होतो . ३५०० बरस पह्यले मितन्नी राजो मतिऊअजा आन् हित्ती राजो शुब्बिलिमा क मंझार समझोतो भयो . समझोता म साक्स्यदार क रूप म वयदिक देवता इंदर , वरुण , मित्र , नासत्य ( अस्विनीकुमार ) को नाव स . यको अभिलेख सापडेस , जेला बोगाजकोई मितन्नी अभिलेख कोस ! 
मितन्नी राजाना को नाव बी संस्कृत म , हिंदू देवता क नाव परिन च रवत होतो , जसो पुरुष , दुश्रत्त ( दशरथ ) , सुवरदत्त , इंद्रोता , सुबंधु , आर्त्ततम . 
आर्य इ स्यब्द मितन्नी संस्कृती , अनातोलिया क हित्ती भास्या अन् इरान क कस्साइट अभिलेख म सापडस . 
लढाई म क रनबांकुरा साठी मितन्नी संस्कृती म '  मर्य ' इ स्यब्द सापडस . रुगवेद म इंदर भगवान क सहयोगी योध्दा साठी बी ' मर्य ' इ च स्यब्द स . 
हर्रियन यहान की स्थानिक भास्या होती . 
लढाई म हिंदू देवता सरखो च रथ आन् घोडा को बापर मितन्नी संस्कृती म होत होतो . 
* संस्कृत ' प्रोटो इंडो युरोपियन ' भास्या परिवार की आदिम भास्या स . येनऽ परिवार मिन ' प्रोटो इंडो इरानियन ' भास्या कुर निकरे , जेकी उन्नती भारत अन् इरान म भयी . ४००० बरस पह्यले भारत म '  रुगवेद '  येनऽ ( संस्कृत की पह्यली लिखित रचना ) संस्कृत पोथी की रचना भयी . इरान म ' अवेस्ता ' की रचना भयी . दुय पोथीना की भास्या मिरती जुरती स . 
४००० बरस पह्यले पासिन पुरऽ आसिया म वयदिक संस्कृती आन् धरम होतो . हिंदू आन् पारसी धरम येका उदाहरन स . 
* अजब गजब ५८ म , मु न पाकिस्तान आन् अफगानिस्तान म क ' परीस्तान ' को लिख्योतो , वू इलाखो बी हिंदू धरम ला माननी वालाना को च होतो . 
* अजब गजब ६१ म , मु न जी यजिदी धरम को लिख्योतो , वू आब बी यहान च स . यजिदी धरम की मान्यता , देऊर अन् परंपरा हिंदू धरम सरिखी च स . 
* अजब गजब ६४ म , अझरबैजान देस ज्वाला मंदिर क रूप आब बी वयदिक धरम की निस्यानी स. 
* आसिया क मंझार मिन युरोप पावतर जी रेसम मारग होतो , वोकन हिंदू / वयदिक धरम आसिया भर फयलेतो . 
* ८ व सदी पासिन अरब लोग आन् मुस्लिम धरम को असो माट्यो आयो क , मारकाट कर कर कन् कई को धरम भरस्ट कऱ्यो . नाव , गाव , भास्या , पेहराव , खानपान पासिन सबन बदल गयो . 
* आपली बोली , संस्कृती , परंपरा , को जतन आपन ला च करनो पडस . आन् यको जतन आमी करबोन , असो म ला भरोसो स . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, June 15, 2021

चुल. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

चुल
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आब रान्नी मिन उपे
लाल पिवरो उबारो
ठंडी भयी चुल वूल
घास अगिन आसरो ।१।

धुव्वो धुपट गायब
निवा राखड धूपारो
भयी फुकनी बी मुकी
काहे फुकन गा वारो ।२।

जोत निरी निरी जरे
ग्यास सेगडी को तोरो
बिना तकलीफ आग
मोठो वको आसकारो ।३।

खेस खोखलो ठसको
रोज गरतो गा डोरो
हाल भया जी खतम
काडी इंधन को भारो ।४।

चाले बखत क संग
खेल दुनिया को सारो 
धुप बारन ला निवो
तरी लागस च खरो ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, June 10, 2021

सवातीचा मोती. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

सवातीचा मोती
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

जप तब्येत पान्याले
सोड जादू भानामती
आखाड्यातल्या मातीले
भिडव रे तुही छाती ।१।

दान देवाजीचं तन
सोड साऱ्या कुरापती
कर कुडीचं जतन
नको आनू रे आफती ।२।

जीव देहात वसला
जसा सवातीचा मोती
असा रेसमी कोसला
नको करू त्याची माती ।३।

नव खिडकी दरुजे
दोन डोऱ्याचिया जोती
आंगी देवबाप्पा रुजे
कर त्याचीच आरती ।४।

धन दवलत सारी
हाये तुह्यावाल्या हाती
योग देहाची तिजोरी
पाह्य अनमोल किती ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, June 7, 2021

भूई अगास ला ब्याही ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भूई अगास ला ब्याही
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पड्या रोयनी सिरवा
चाली गा बखरवाही
कऱ्यो आगाज मिरुग
सरी लगनसराई ।१।

भया आम्बा का पाव्हना
आब नी निचनताई
ढोल बजावस ढग
भूई अगास ला ब्याही ।२।

सारो सिवार बराती
पडी बोवन की घाई
संग घोल्लर को नाद
टार झांजना बजाई ।३।

भूई कुस उजयेन
माय सपना म खोई
अरदडा की घागर
देवाजी न झलकाई ।४।

बडसावितरी सन
धट्टी हिवरी पेहराई
धागो गुंडारे बड ला
सात जलम कमाई ।५।

आयो आघ पास पुक
आब निंदन की घाई
आयी अखाडी ला पोटी
वोकी च सरबराई ।६।

जोड्यो डवरो डुपन
जीवती ला चिपकाई
नागपंचमी निवद
घर सिवार म लाही ।७।

बोयो बहुड्डो माय न
सजी भाई की कलाई
जल्मास्टमी को उपास
देऊर म दही लाही ।८।

खांदसेकनी को मान
पिठोरो कबुली बाई
महादेव गवरा ला
भायी आवाज लगाई ।९।

गुन बखरवाही को
बात फसल न कही
अनाज क पालखी का
आमी अन्नदाता भोई ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, June 4, 2021

अजब गजब - ६६ : हिंगलाज माता मंदिर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६६ : हिंगलाज माता मंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पाकिस्तान क कब्जावालऽ बलूचिस्तान इलाखा म हिंगोल नदी जवर क पहाड प हिंगलाज माता को मंदिर स . इ स्थान हिंदू भगत क आस्था आन् ५१ स्यक्तिपीठ म को येक तीरथ स . कराची परीन पक्की सडक स . पह्यलऽ क जमाना म सडक को नामोनिशान नी होतो , तब उट परीन यातरा करत होता . 
कराची परीन ६/७ मयील प हाव नदी आवस , यासीन हिंगलाज की यातरा चालू होस . यहान आन ( शपथ ) लेन की विधी होस . यासीन हिंगलाज यातरा अन् वासीन वापिस यहान आवत वरी संन्यास लेनो लागस . यहान च छडी पूजन होस . रात भर आराम कर कन् झुंझुरका च ' हिंगलाज माता की जय ' बोल कन् यातरा चालू होस . हिंगोल यातरा करनी वाला हजामत कर कन् पूंजा करस अन् जनेऊ पेहरस . 
कराची परीन हिंगलाज १२० कि.मी. दूर स अन् पक्की सडक बी आब बनीस , तेकन मोटारगाडी , बस , जीप कन् यातरा करन की सुबिधा भयीस . 
येन इलाखा की हिंगोल सबसीन मोठी नदी स . नदी पासीन १५ मयील प चंदरकूप पहाड ( mud volcano ) स . रस्ता म आसापुरा नाव को तीरथ आवस . यहान यातरा का कपडा काहाडकन् गरीबगुदा ला बाटस , आन् आंग धोय कन् साफ कपडा पेहरस . यासीन आघ २००० बरस पुरानो काली माय को देऊर लागस . काली माय की पूंजा कर कन् भगत हिंगलाज माता साठी रवाना होस . पहाड म चेंगन क बेरा रस्ता म गोड पानी की ३ भीर स . आघ पहाड क गुफा म हिंगलाज माता को ठानो स . गुफा सेलमेल स , जेकऽ दुसरऽ मुंडा प गुरू गोरखनाथ कुंड स . हिंगलाज माय येन च कुंड म न्हावस , असी मान्यता स . 
१. मंदिर को स्वरूप : उच्ची पहाड क गुफा म माय को ' विग्रह रूप ' बिराजमान स . ( इ रूप वैस्नो देवी क रूप सरिखो दिसस .) यहान माता सती कोटटरी रूप म आन् भगवान सिव भीमलोचन भयरव क रूप म स . यहान सिरी गनेस , कालिका माता की मूरती स आन् बरमकुंड , तीरकुंड नाव कख का तीरथ स . 
२. इतिहास अन् मान्यता : * पुरान क अनुसार जब भगवान भोलेनाथ  मयत सती माय ला लेकन तांडव करन ला लाग्यो , तब दुनिया ला बाचाडन साठी भगवान बिस्नु देव न सुदरस्यन चक्कर कन् सती माय क आंग का ५१ टुकडा कऱ्या . हिंगलाज मंदिर म सती माय को डोकसो पड्यो , असी मान्यता स . 
* रावन वध को पाप धोवन साठी भगवान सिरी राम न हिंगलाज माता की पूंजा करीती . 
* पुरान क अनुसार भगवान परसुराम क दाआजी महरसी जमदगनी न यहान घोर तप कऱ्योतो , जेला आब आसापुरा स्थान कोस . 
* हिंगलाज माय क पूंजा - आराधना साठी गुरू गोरखनाथ , गुरू नानक देव , दादा मखान सरीखा महान संत महात्मा यहान आयाता . 
* अंगरेज क जमाना म बलूचिस्तान का ३ टुकडा भयाता . येक अंगरेज बलूचिस्तान , दुसरो करद राज म होतो अन् तीसरा प ईरान को अंमल होतो . आब येक भाग ईरान आन् दुय भाग पाकिस्तान क कब्जा म स . बटवारा क पह्यले भारत की हद अफगानिस्तान अन् ईरान वरी होती . वोन बेरा हिंदू को हिंगलाज माय को ठिकानो मुख्य तीरथ होतो . बलूचिस्तान का मुसलमान हिंगलाज माय की पूंजा ' नानी पीर ' कह्य कन् करस . वूई लाल कपडो , उदबत्ती , इतर , सिरनी चढावस . हिंदू को हिंगलाज माय आन् मुसलमान को नानी पीर , असो इ दुय धरम को महातीरथ स . 
* जब जब मुस्लिम हमलावर न यहान हमलो कऱ्यो तब तब बलूचिस्तान क हिंदू मुसलमान न मंदिर ला बाचाडे . 
* हर रात यहान तमाम स्यक्ति येक होय कन् रास रचस आन् दिन उग्या बास्त हिंगलाज माय म समावस , असी मान्यता स . 
* हिंगलाज माय को दरस्यन कऱ्या बिगर चारी धाम अन् कासी यातरा को पून्य नी भेटत , असी मान्यता स . जी बाईलोग हिंगलाज माय को दरस्यन लेसि , वून ला ' हाजियानी ' कोस , आन् हर तीरथ प वून ला सनमान भेटस . 
३. माता  का चूल : येक डाव माय न परगट होय कन् वरदान देये क , जी भगत म्हरो चूल चालेन , वोकी हर मनोकामना पूरी होयेन . १० फिट लंबऽ जगरा परीन भगत देऊर म जात होता . ( आब या परथा मुडी .)
# साल भर हिंगलाज माय क दरबार म भगत लोगना की चहल पहल रवस . पर नवरातरी म लाखो लोगना माय क दरस्यन साठी आवस .
" हिंगलाज माय की जय ऽ"

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, June 2, 2021

माया ( अभंग ). varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

माया ( अभंग ) 
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

तरहातावर , फाडली गा कीर
लोभाचं उकीर , तनी मनी ।१।

सरली उमर , खपे इर इर
भवसागर तीर , गवसेना ।२।

स्यायना बह्याड , लकीर फकीर
दिसे ना सुकीर , अगासात ।३।

जुगाड तंतर , पाय दोनी तीर
डोरे भिरभिर फिफोलीचे ।४।

इपदाचा पूर , डगमगे धीर
मेढ गाडे वीर , मधातच ।५।

भेदले असार , हिंद्यानाचा तीर
मारे नेम मीर , भल्यासाठी ।६।

नजर भरम , गरीब अमीर
मेंडक्या विहीर , दुनिया जी ।७।

मायाच्या पूरात , वाहे मिठ्ठू कीर
गाठते गा तीर , ग्यानवंत ।८।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

माया ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माया ( भोयरी अभंग ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तरहात पर , फाडी धन कीर
लोभ को उकीर , तन मन ऽ ।१।

सरी जी उमर , खप्या इर इर
भवसागर तीर , नी गवसे ।२।

स्यायनो बह्याड , लकीर को फकीर
दिसे नी सुकीर , अगास म ।३।

जुगाड तंतर , पाय दुई तीर
डोरा भिरभिर , फिफोली प ।४।

इपदा को पूर , डगमग्यो धीर 
मेढ गाड्यो बीर , मंझार म ।५।

भेदे जी असार , निस्याना प तीर
माऱ्यो नेम मीर , भला साठी ।६।

नजर भरम , गरीब अमीर
मेंडका की भीर , दुनिया जी ।७।

माया क लोंढा म , बह्या मिठ्ठू कीर 
लाग्या काठऽ तीर , ग्यानवंत ।८।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, June 1, 2021

फायदा को कायदो , भाग - ३. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

फायदा को कायदो , भाग - ३
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गुनवंता  आब येक दिन म ६ मानुस की रोजी कमावन ला लाग्यो . वोनऽ  रोजी कन् येक  मजूर ला काम पर धऱ्यो. मजूर पानी की नाली को ध्यान राखतो आन् कुनी दरन लेय कन् आया वको दरन दरकन् देतो . गुनवंता न अनखिन नवऽ आयडिया म डोकसो खपाये . वोकऽ जवर जेतरो साधन होतो , वोमिन अनखिन नवो जुगाड वू सोचन ला लाग्यो . गरज या खोज की माय स ! 
गुनवंता क गाव म बिजली नी आयीती . माती क तेल की सिमनी , दिवालगीरी , कंदील कन् काम चालत होतो . बिह्या स्यादी म भाडा की ग्यासबत्ती ल्यावत होता . कई लोगना जवर सेल को रेडू होतो . रात कन् गाव म घुप अंधारो रवत होतो , तेकन बिचूकाटा को भेव बी रवत होतो . 
गुनवंतो मोठऽ गाव क मसीन क दुकान म गयो . दुकानदार संग बिजली क बारा म बात करी . दुकानदार न बी बिजली क मसीन को सिरफ आयकेतोच ! वको खरचो केतरो आयेन , यकी वोला बी जानकारी नी होती . दुकानदार न गुनवंता ला जिल्हा क स्यहर म चवकसी करन की सला दी . गुनवंता को येक सोबती वहान सरकारी नवकरी म होतो . दुसरऽ हप्ता म येक कमीज पायजामा को जोड संग लेयकन् गुनवंतो जिल्हा क स्यहर ला गयो . दिनबुड्या वू दोस्त क घर प पुग्यो . इत वूत की गोस्टी माता भयी . जेया बास्त गुनवंता न बिजली मसीन की गोस्ट काहाडी . दोस्त न कह्ये क सकारकन् आफिस स ,  परोगदिन मला सुट्टी स , तब आपन चवकसी करबोन . दुसरऽ दिन गुनवंता न भाऊज ला दातरो मांगे अन् क्यारी , गमला म क झाडना ला खोयर खायर करन ला लागे . भाऊज न मनाई करी पन् गुनवंता न नी आयके . दिन भर खोयर खायर , छ्याट छुट कर कन् वोनऽ आंगना को चितरंग च पलटाय डाये . रात कन् दुय जना न खूब गोस्टी माता करी . दुसरऽ दिन वूई मारकिट भर हिंड्या . येक दुकानदार ला येनऽ मसीन की थोडीबुत जानकारी होती . वोनऽ वोक वरख क कंपनी म चवकसी कर कन् मसीन क बारा म पुसे . या मसीन दुसरऽ राज्य क स्यहर म बनस , यकी वोला मालूमात भयी . वोनऽ कंपनी म चवकसी कर कन् दुकानदार न मोलभाव पुसे ,  मंग गुनवंता ला सांगे . गुनवंता न संगरे अनाज को हिसाब लगाये . वूई पयसा मसीन साठी पुरत नी होता . गुनवंता न या बात दोस्त ला सांगी . दोस्त न ब्याज क पयसा को इलाज सांगे . गुनवंता ला दोस्त की गोस्ट पटी . गुनवंतो वापिस गाव आयो . 
वोनऽ दरन क भाव ला आब पायली हिसाब कन् करे . आपलऽ गडी ला वोनऽ अगलबगल क गाव म पठायकन् मसीन क घटी की जानकारी देयी . आब वोकऽ चक्की पर गाव क बाहिर को बी दरन आवन ला लाग्यो . वोकी चक्की दिन भर चालन ला लागी . गुनवंता की कमाई बी बाहाडी . 
येक दिन भाडा क बंडी म वोन अनाज भऱ्यो आन् मारकिट म बिक्यो . वूई पयसा लेयकन् गुनवंतो जिल्हा क स्यहर म आयो . दोस्त ला पयसा देया आन वूई दुकान म गया . बिजली मसीन को अडवांस देय कन् बुक करी . बाकी का पयसा ब्याज कन्  दोस्त ल्यावनी वालो होतो . गुनवंता ला वोनऽ पयसा की हर मह्यना की किस्त भरनो लागत होती . येक दिन टेंपू म वकी बिजली मसीन गाव म आयी . मसीन क फिटिंग साठी लागनारो सामान गुनवंता न लाय कन् धरेतो . टेंपू संग च मिस्तरी बी आयेतो . गुनवंता न दुय मजूर येन काम साठी थांबाड्याता . वोका सोबती खाती न बाडी बी आया . सबन न मिरकन् काम कऱ्ये . तीन दिन म वा मसीन पुरी फिट भयी . आपलऽ घर आन् आवार म बिजली फिटिंग करकन् बलब लगाया . जसी वोनऽ मसीन चालू करी , वूसो वको घर - आवार झगझग झलाऱ्यो . गाववालाना न येतरो उजिड गाव म कबच नी देख्योतो . पह्यले गुनवंता ला बह्याड कवनी वाला लोगना आब वोकी तारीफ करन ला लाग्या . 
गुनवंता न गाववालाना ला कह्ये क , तुमी अरधऽ घंटा क रोजी को अनाज देयेन त मु तुमी ला येक येक बलब देऊन . पुरा त नी पर कई लोगना तयार भया . 
गुनवंता न आब रात साठी बी येक नवकर धऱ्यो . 
आब गुनवंता ला रोज १२ पासीन २० मानुस की रोजी भेटन ला लागी . वोमिन वू हर मह्यना की किस्त बी भरत होतो . ( क्रमशः ) 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर