Monday, June 7, 2021

भूई अगास ला ब्याही ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भूई अगास ला ब्याही
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पड्या रोयनी सिरवा
चाली गा बखरवाही
कऱ्यो आगाज मिरुग
सरी लगनसराई ।१।

भया आम्बा का पाव्हना
आब नी निचनताई
ढोल बजावस ढग
भूई अगास ला ब्याही ।२।

सारो सिवार बराती
पडी बोवन की घाई
संग घोल्लर को नाद
टार झांजना बजाई ।३।

भूई कुस उजयेन
माय सपना म खोई
अरदडा की घागर
देवाजी न झलकाई ।४।

बडसावितरी सन
धट्टी हिवरी पेहराई
धागो गुंडारे बड ला
सात जलम कमाई ।५।

आयो आघ पास पुक
आब निंदन की घाई
आयी अखाडी ला पोटी
वोकी च सरबराई ।६।

जोड्यो डवरो डुपन
जीवती ला चिपकाई
नागपंचमी निवद
घर सिवार म लाही ।७।

बोयो बहुड्डो माय न
सजी भाई की कलाई
जल्मास्टमी को उपास
देऊर म दही लाही ।८।

खांदसेकनी को मान
पिठोरो कबुली बाई
महादेव गवरा ला
भायी आवाज लगाई ।९।

गुन बखरवाही को
बात फसल न कही
अनाज क पालखी का
आमी अन्नदाता भोई ।१०।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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