बड सावितरी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
आई बड सावितरी
म्हरो भरतार सावरो
घात बाई बोवाई की
गाव सिवार हिवरो ।१।
माती माय को भगत
जुत्यो डुपन डवरो
वोक संग जिंदगानी
मला वको च मावरो ।२।
म्हरो कुकू को किसनो
गुनी सत्यवान वानी
दिसे कडक ढेकुल
मन मंझार म लोनी ।३।
भोरो सदासिव म्हरो
गरसोरी को जी मनी
झुल्ये कारलो डोरलो
हिरदा म घरधनी ।४।
पोटी सावितरी की मु
पुंजू बड सयीबाई
सात जलम कमाई
म्हरऽ कुकू की पुन्याई ।५।
कच्चऽ धागा क येढा म
गुफू पक्को नातो बाई
कुकू हरद को सोनो
माथा प चमक आई ।६।
सुख दुख संगमंग
आवबिचार बी येक
येवहार पानी म बी
धनी साफदिल नेक ।७।
मोठो कुटुम्ब खटलो
बड वानी जी पसारो
म्हरऽ राजा की मु रानी
गाव सिव आसकारो ।८।
राग लोभ का झटका
सवंसार को रायतो
मनधरनी कारन
मिरस च जी आयतो ।९।
असो जलम जलम
पुऱ्यो कुकू कन् नातो
म्हरऽ कच्चऽ इमला को
पक्को करजेन जोतो ।१०।
रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
वड साविञी ।।।अप्रतिम रचना ।।।वाह वाह ।।
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर..🙏
Deleteवड साविञी ।।अप्रतिम रचना ।।वाह वाह ।।
ReplyDeleteधन्यवाद नागेश सर..🙏
Deleteबहुत ही सुंदर रचना हमारी परंपरा और धर्म संस्कृति के अनुसार आपका लेख बहुत अच्छा है
ReplyDeleteधन्यवाद नन्दलाल जी 🙏..
Deleteआपके स्नेह तथा सहकार्य से ही यह संभव हुआ है..