Saturday, May 10, 2025

सिंव्ह अन् उन्दरो। bhoyari dialect _ भोयरी बोली

सिंव्ह अन् उन्दरो 
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली 

उन्हारा का दिन होता अन् येक सिंव्ह आपलअ गुफा म सोयेतो। अचानक येक उन्दरो गलती कन वोकअ नाक पर चेंग्यो अन् सिंव्ह सरीखअ खतरनाक जनावर ला चेतो करें। सिंव्ह ला घाडो राग आये। सिंव्ह आपलअ पंजा खलतअ उन्दरा ला रगडनार होतो। तब नान्हो सो उन्दरो आपलअ जीव की भीख मांगन लाग्यो। सिंव्ह ला उन्दरा की दया आयी अन् वोला जान देये। 
कयी दिन क बाद सिंव्ह जंगल म  फिरतानी सिकारी क जारा म फंस गयो। वू जारा क दोरीना म असो गुत्यो क वोला थोड़ी सी बी हालचाल करता नी आवत होती। सिंव्ह जमीन पर लोर गयो अन् लाचार होय कन अड्डावन लाग्यो। वोकी दहाड़ सारअ जंगल म घूमी अन् उन्दरा क कान वरी गयी। उन्दरो भाग कन मोक्का पर गयो अन् जारा की दोरीना टुकड़ा टुकड़ा म कातरी। येनअ परकार कन सिंव्ह को जीव बाच्यो। 
सीख : हर जीव की आपली किम्मत रव्हस।