भोयरी संस्कृती - ४१ : खानपान
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भोयरी संस्कृती म खानपान पर भौगोलिक रह्यन सह्यन , उनारो - हिवारो - बरसाद इ रितू की घात , फसलपानी , स्थलांतर , पूंजा पाठ , नेम नियम को घाडो च असर स . मानुस जहान जास वहान क माती - पानी क गुन रंग म मिसर जास . पर येतरो बदलाव होन क बाद बी कई मुर खानपान आन् सवाद टिककन् रव्हस , आन् याच कोनत् बी संस्कृती की वरख बनस .
* पुरानऽ जमाना म कोनी पाव्हनो घर आवतो त् पह्यले वको स्वागत पानी संग गुर को खडो देकन करत होता . आबऽ पानी संग चाहा रव्हस .
* भोयर को परसिध्द नास्तो मनजे भुंज्या पापड ( ताक का पापड नी त् धापोडा ) आन् भुईमूंग का भुंज्या दाना . ताक का पापड त् भोयर की पह्यच्यान स .
* दिवारी क मह्यना म लाडू , सेव , चिवडो , अनारसा , सक्करपारा , चकली क फरार की धूम रव्हस . दिवारी क दुयच्यार दिन सकारी सकारी च दूध सेवरी ( सी ) नी त् दही सेवरी ( सी ) को नास्तो पक्कोच रव्हस .
* देवपूंजा ( सेंदरे देव अन् मानिनी की पूंजा ) क दिन तरन साठी कढय चुल्हा पर रव्हस च ! सुवारी , बडा , वरन भात , कढी , तऱ्या पापड , गोड ( बासुंदी , सिरो , सिरीखंड ) आन् कढाई म बनाई बडी की सुखी भाजी असो पाची पकवान सयपाक करस . देवपूंजा सोडकन् बाकी तिवार ला बी असोच रांधनो रव्हस .
अखाडी , जिवती , नागपंचमी , बहुड्डो , पोरो , आठवी , गायगोंधन , लक्षुमी पूंजा , तुरसी को बिह्या , नागदिवा , देवमाई , पाचपावली , मांडोस , साजवनी , पितरपख , अखरपख , अखजी , मांडो उजवन क दिन असा पकवान बनस .
* पुरन , आमटी , भज्या , भात , तऱ्या पापड , भाजी , गोड असा पकवान पोह्यती , खांदसेकनी , दसरो , सिमगो , मांडोस येनऽ तिवार ला हमखास बनस .
( घर घर क रिवाज म थोडोबूत फरक पडत होयेन .)
# नेम , खासियत अन् रिवाज : * जल्मास्टमी ला गोड पुरी करस . ( हलवा की पुरी , सांजा की पुरी .)
* खांदसेकनी - येनऽ दिन कुम्बडो , काकडी , दोडक्यो , मूंग बरबटी की सेंग यमीन कोनती बी येक भाजी करस .
* पोरो - पोरा ला जब बयीलजोडी तोरन म जास तब ठोम्बरा को मान रव्हस . कुटी जवारी , दूध , इलायची , गुर / साखर कन् ठोम्बरो बनावस . रात म सुवारी बडा , वरन भात , भाजी , लाडू , अनारसा करस .
* रिसी पंचमी ला कुम्बडो , मको , पोथी / धोपा का पान , बाल की सेंग , बटाना , भेंडी येम की कोनती येक भाजी करस . येनऽ भाजी ला तूप की बघारनी देस . भाजी संग देवचऊर को भात नी त् मक्या का कन्या करस . चाहा साठी गाय को दूध नी चलत पर मयीस को चलस .
* पडन - दसरा क पह्यलऽ दिन ला पडन कोस . येनऽ दिन कोनतीच सातरनी नी चलत . बस वरन भात , रोटी पर काम चलावनो लागस .
* माडी - माडी ला बोफोडी ( मूंग की ) , कढी आन् अटाये दूध रव्हस .
* आठवी - आठवी ला आंबिल , कनिक का गोड अंगार भंगार ( चटुरा बटुरा ) को मान रव्हस . पूंजा साठी जी चंदर सूर्व्य बनावस ती सिरफ मानुस अन् पोटुना ला च खावता आवस . बाई , पोटीना ला इ खानो वरजिक स .
* नागपंचमी , नागदिवा अन् पाचपावली क तिवार ला कढय ( रवा को सिरो ) करनु च लागस .
* नागपंचमी ला लाही फुटाना आन् सातू को मान रव्हस . कई कुटुंब म फुलोरा की सुवारी बडा ला नातगोत क घर पठावन को रिवाज स .
* पोरा की कर ( तान्हो पोरो ) अन धुड्डी ला खानीवाला मासमच्छी खास . मासमच्छी खानीवाला आरबाडी ( सरप बिचू का मंतर जाननी वाला , बारी गावनी वाला ) होयेन त् उन ला पोरा क कर ला मासमच्छी नी खाता आवत . उई रुसीपंचमी क बास्त खाय सकस .
* संगरात क पह्यलऽ दिन ' लाडू पेंडी ' करस . तिरगुर का लाडू अन् पेंडी ( येक कंद ) को निवद चवरी जवर धरस उसोच देऊर अन् खेत म बी पठावस . लाडू पेंडी क दिन हुड्डा ( जवारी का ) की गोड घुगरी , बाल क सेंग की भाजी करस .
* पुस्या इतवार ला उपास धरस . पर इ उपास दिन बुडन क पह्यले च सोडनो पडस . कोनी कोनी खेत म च रांधकन् उपास सोडस , वोला वनभोजन कव्हस . उपास सोड्या बास्त सकारी वरी चाहा , पानी बी वरजिक रव्हस .
* रथसप्तमी ला आंगना म तुरसी जवर खीर को निवद महादेव मुख नी त् सूर्व्या मुख ऊतू जान देस .
* साजवनी - साजवनी क दिन , मेढ ला बांधी संजी की उंबीना क गहू ला दरकन् , वोनऽ नवऽ गहू की गुर / साखर डायकन् गोड रोटी बनावस आन् वको निवद बयीलना ला देस . साजवनी क दिन पूंजा भया बाद मालक , गडीमानुसना , पोटुबाटु खेत म च जेवस . आमरस , कुरोडी , सी ( सेवरी ) , दोयपुडी रोटी , भाजी असा पकवान रव्हस . पूंजा अन् जेवन भया बाद सबन घर म आवस . आबऽ घर म ' दारपान ' को कार्यक्रम रव्हस . सातऱ्या सोला , बतासा सबन ला देस . रात म तिवार करस .
* अखरपख - सुवारी काहाडन क सलाक म सुवारी बडा वोयकन् वोला , पितर जेनऽ दिवालसिन काढ्यास , वोनऽ दिवाल म खोसस . वोकऽ खलतऽ निवा पर सुवारी बडा परीन तूप की धार सोडस , जी निवा पर पड्या पाह्यजेन . येनऽ पूंजा ला ' पितर की सिदोरी ' कव्हस .
* अखजी ला सुवारी बडा , सी ( सेवरी ) , कुरोडी , आमरस , लाडू , करंजी , गोड पापडी , टिखट पापडी करस .
* बिह्या साठी पोटी , पोटू देखन क बेरा आबऽ आलू पोहो आन् चाहा पक्को रव्हस .
* दुय तीन पीढी पह्यलऽ पावतर बिह्या म सुवारी बडा नी त् पुरन को जेवन बी कयी झना देत होता .
* पुरानऽ जमाना म नानपन च बिह्या होत होतो . तब खास सनतिवार ला बू ला ल्यावत होता . पोरा क बास्त १० दिन का धागा भया पर ल्यावन ला जात होता . २१ करंजी ( गुजिया ) , गुना की सिदोरी बेरु क हारा म धुर पर बांधकन् लिजात होता . धुरकरी बू क घर अरधो खोबरा को डोल देत होता . जब बू धुरकरी संग आपलऽ ससुराल म आवत होती तब वकी माय बी २० करंजी , गुना की सिदोरी देत होती . या सिदोरी मंग येटार म पाच घर बाटत होता .
जब स्यांतीक होत होतो तब धागा का रोठ बनावत होता .
* ढोंढ्या को मह्यनो सप्या बाद दार क सांजा नी त् सिरा का ' ढोंडफल ' ( मोदक सरखा ) बनावस .
* कुम्बडा का कोरोडा - पिके कुम्बडा ला किसकन् वोमऽ उडिद की दार भिजायकन् मिसरावस . येनऽ मिसरा का कोरोडा बनायकन् सुखावस . कुम्बडा क कोरोडा की बडी क भाजी सरखी भाजी बनस .
* उनारा म बयंगन , भेदरा , बाल की सेंगना की ' उसरी / खुली ' बनावस . बरसाद म भाजी साठी इ काम म आवस .
* उनारा म आम्बा पिक्या पर ' आम्बा का पाव्हना ' को रिवाज भोयरी संस्कृति म स . गनगोत , सगा सोयरा ला आम्बा को रस , सी ( सेवरी ) , कुरोडी , पापड , मांडा रोटी / सुवारी असा पकवान को पाहुनचार करस .
* चयीत मह्यना पासिन बयसाख मह्यना पावतर गाव / परगाव क देऊर / स्थान पर रोठ , वरन भात , भाजी को सयपाक करस . सबन कुटुम्ब कबिलो , संगी साथी येमऽ संग रव्हस .
* नागपंचमी , जल्मास्टमी , गनपती , महालक्षुमी , नवरातरी ला फुलोरो करन को रिवाज स . कोनी कोनी आठवी ला नवस को फुलोरो धरस .
* जवारी का आयता - सिमगा पासिन दुय मह्यना ( आम्बा खावन की घात आवत पावतर ) जवारी का आयता खूब चलस . गोड आमसुल सवाद का आयता कुम्बडा / दूध को गोड / आमरस संग मोठा सुरुस लागस .
* पानगा पारटी - हिवारा म कठान क घातऽ खेत म ' पानगा पारटी ' की धूम रव्हस . पानगा पारटी साठी सबन कुटुम्ब कबिलो खेत म जास . गवरी क जगरा प पानगा सेकस . वोनऽ जगरा म च खेत म क बाडी का बयंगन भडीत साठी भुंजन ला डावस , आन् दार बी वोपर च सिजवस . पानगा क पीठ म खेत म का च भेदरा , मिरची , कांदा / लसून को पालो मिसरावस . सीवन क ( नी त् वोक सरख च दुसरऽ झाड काइ पत्ता ) पत्ता ला तेल लगायकन् वोपर पानगो थापस . वोपर उलटो पत्तो धरकन् वोला जगरा म डावस . पोटुबाटुना की खेत भर धिंगामस्ती चालू रव्हस . गरम गरम पानगा , दार , भडीत , हिवरऽ मिरची को ठेसो , कुसलो अन् भीर को गोड पानी असो साजरो लागस क साल भर वकी याद आवस .
* मोह फुल - मोह फुल क घातऽ वून ला जमा करकन् सुखावस . येनऽ संगराये मोह फुल का बरसाद म , झड म नाना तरीका का पकवान बनावस .
१. पुरन - मोहा फुल ला चांगला लाल आवत वरी सिजवस . वोमऽ सोला की दार अन् गुर बी डावस . येनऽ मिसरा की पुरन बनावस . या पुरन खान क तेल संग खास .
२. डोंबरी - मोहा फुल ला भुंजकन् , धोयकन् सिजवस . येमऽ सोला की दार मिसरवस .
३. बोफोडी - मोहा फुल भुंजकन् सिजवस न वोला बारीक बाटस . वोमऽ थोडी सी कनिक बी डावस . मंग वकी बोफोडीना भाप पर उकडस . इन ला तेल संग खास .
४. पानोरी - मोहा फुल ला तेल डायकन् भुंजस . संगच सोला बी भुंजस .
* उनारा म उसरी , ताक का पापड , धापोडा , कुरोडी , सी ( सेवरी ) , मूंग बडी , खारवडी , साबुदाना का पापड , सरगुंडा , आलू चिप करकन् धरस .
* चून , आम्बाडी की भाजी , पानबडा , चुनबडी , पाटोडी , कढी म का पानबडा , बडी की भाजी अन् असी कयी भाजी की लंबी लाईन स .
* जेनऽ कुर म ' वाघोबा ' होयेन वूई पोरग्यो भया पर बकरा अन् पोटी भया पर खुकडा की बली देस .
( सहयोग : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर