अजब गजब - ६२ : वीर कुॅंवर सिंह
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
कहें राम कवित जैसे गरुढ़ गरब गहिअहिकुल दंडिमेटत घमंड है ।
वैसे ही कुॅंवर सिंह कीटत अमर मंडिफौज फिरंगिन की करी खंड - खंड है ।।
_ कवी रामकवि
उज्जैनिया परमार घराना को भोजपुर इ मोठो गढ़ रह्ये . राजा भोज क बंस क येनऽ घराना को नाव दुनिया भर म परसिध्द स .
बिहार क भोजपुर जिला म जगदीसपुर ला वीर कुॅंवर सिंह को १३ नवंबर १७७७ म जलम भये . कुॅंवर सिंह क दाआजी को नाव साहबजादा सिंह अन् माय को नाव पंचरतन कुंवर होतो . कुॅंवर सिंह का अमर सिंह , दयालु सिंह , राजपति सिंह इ नाना भाई होय . इ घरानो स्याहाबाद ( आब को भोजपुर ) क मोठऽ जागीर का मालक होता .
येन च खानदान का बाबू उदवंत सिंह , उमराव सिंह , गजराज सिंह बी नामी जागीरदार होता .
वीर कुॅंवर सिंह को बिह्या राजा फतेह नारियां सिंह क पोटी संग भयोतो .
हिंदुस्थान म पह्यली स्वतंत्रता की लढाई को आगाज इ.स. १८५७ म भयो . येकी चिनगारी बहादुर मंगल पांडे न सुलगायीती . वोनऽ बखत वीर कुॅंवर सिंह की उमर ८० बरस होती , पर हिम्मत नवजवान की आन् कलेजो सिंव्ह को होतो . इंगरज फऊज ला वीर कुॅंवर सिंह की ताकद को अंदाजो होतोच . वीर कुॅंवर सिंह आपली सेना , सेनापती मैकु सिंह आन् हिंदुस्थानी फऊज का मुखिया होता .
२७ येप्रिल १८५७ ला दानापुर का सिपाई अन् भोजपुरी जवान संग लेय कन् वीर कुॅंवर सिंह न आरा प हमलो कऱ्ये . इंगरज को झ्यंडो काहाडकन आरा म आपलो झ्यंडो फडकाये . अंगरेज ला या हार खूब झोंबी . वून न खूब मोठो लावलस्कर लेय कन् जगदीसपु प हमलो कऱ्यो . वीर कुॅंवर सिंह अन् अमर सिंह ला आपली जलमभूमी सोडनी पडी .
रामगढ़ का सिपाई संग लेकन वीर कुॅंवर सिंह जी न बांदा , रीवा , आजमगढ़ , बनारस , बलिया , गांजीपुर , गोरखपुर म इंगरज फऊज सिन लढाई कर कन् वून ला दानोफान कर डाये .
आजमगढ़ परीन बिहार ला जान क बेरा वीर कुॅंवर सिंह जी गंगा नदी पार कर रह्याता . येकी भनक इंगरजना ला लागी आन् येक दल वहान पठाये . नाव म बस्या वीर कुॅंवर सिंह जी ला येक इंगरज सिपाई की गोली हात प लागी . वीर कुॅंवर सिंह जी न तुरुत वू हात तलवार कन् काटे अन् कट्या हात ला गंगा मि बहाये .
२३ येप्रिल १८५८ ला जगदीसपुर जवर वून की इंगरज संग आखरी लढाई भयी . वा लढाई वीर कुॅंवर सिंह जी न जिती अन् वोन दिन च राजो मून वून को राज्याभिसेक भये . पर काटे वोनऽ हात म सेप्टिक भये .
८० बरस उमर को इ रनबांकुरो २६ येप्रिल १८५८ ला येन दुनिया ला सोड कन् गयो .
वीर कुॅंवर सिंह जी का समकालीन कवि ' रामकवि ' न वून की अद्भुत गाथा ला ' कुॅंवर विलास ' नाव क पुस्तक म लिख कन् राखेस .
कवि तोफाराय न वीर कुॅंवर सिंह जी को ' कुॅंवर पचासा ' लिख्येस .
२३ येप्रिल १९६६ म भारत सरकार न वीर कुॅंवर सिंह जी क नाव की डाक टिकिट निकारी .
बिहार सरकार २३ येप्रिल ला ' विजय दिवस ' क नाव कन् मनावस .
( सहयोग : इंजि . जालमसिंग सोढा जी , जोधपुर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
साजरी इतिहासिक जानकारी
ReplyDeleteधन्य हो वीर कुवरसिंह. आपलो पराक्रम इतिहासमं अजरामर भयेस.
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
Deletekhub sajri jankari
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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