अजब गजब - ९८ : वीरांगना तीलू रौतेली
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
धन धन छै तु गढ़ की नारी
जै जै हवेली तेरी तीलू रौतेली ।
उत्तराखंड क गढ़वाल प पवार / परमार को राज रह्यो आन् कुमाऊँ प कत्यूरी को राज रह्यो . येनअ दुइ राज म सरप - नेवला सरीखी दुसमनी रही .
' गोरला रावत ' इ.स. ७६० म गुजरात परीन गढवाल क पवार / परमार राजपुत क स्यरन म आया . गढवाल क पौडी जिला क चांदकोट इलाखा क गुरार ( गुराड ) गांव म वूई बस्या . गांव क नाम परीन गुजरात क येनअ पवार पाती को नाव पड्यो ' गुरला / गोरला ' . रावत या उपाधी भेटी तेकन भया गोरला रावत !
गोरला रावत कित गढ राज की सूर्व्यामुखी आन् राकसमुखी हद की जिम्मेदारी होती . गोरला रावत भूपसिंह जी गढवाल नरेश राज का परमुख सभासद होता . गोरला रावत भूपसिंह ला दुइ पोटुना क बास्त ८ अगस्त १६६१ म पोटी भयी . आदिमाया को रूप येनअ पोटी को नाव , ' तीलू रौतेली ( तिलोत्तमा देवी ) ' ! भगतु ( भगतसिंह ) आन् पत्वा ( फतहसिंह ) इ दुइ तीलू रौतेली का वीर भाई . येनअ दुइ भाईना न कत्युरी फऊज क सरदार ला जंग म हाराये . दुइ भाईना ला जंग म ४२ - ४२ घाव लाग्या . राजा न दुइ भाईना ला ४२ - ४२ गांव की जागीर देयी . फतहसिंह न परसोली / पडसोली ( पट्टी गुजडू ) आन् भगतसिंह न सिसई ( पट्टी खाटली ) ला आपरो ठिकानो बनायो .
तीलू रौतेली की सगाई १५ बरस क उमर भयी . इडा गांव का सिपाही नेगी भुप्पासिंह को पोरग्यो भवानी नेगी तीलू रौतेली को मंगेतर .
कत्युरी को अनखिन हमलो भयो . इ हमलो घातक ठह्यऱ्यो . तीलू रौतेली क पिताजी ला येनअ जंग म वीरगति भेटी . मंगेतर आन् दुइ भाईना न बलिदान देयो .
तीलू रौतेली नान्हीसी होती . वोनअ माय जवर कांडा क कौथिग मेला म जान की बात कही . माय न वोला कह्ये क मेला म जाय कन् का करेन ? कही जान को होयेन त , आपलअ दादा ( पिताजी ) आन् दुइ भाईना को बदलो लेन ला जा ! नान्हीसी तीलू रौतेली क जीव ला या बात लागी . वा मरदानी होती . गुरु शीबू पोखरियाल न वोला जंग का , राज का सारा तंतर मंतर पढायाता . वोनअ १५ बरस क उमर म राजपाट संभाल्यो . गुरु शीबू पोखरियाल आन् बेल्लु - देवकी सोबतीनना ला संग लेयो . फऊज की कमान मराठा सेनापती गुरू गौरीनाथ क हाथ म दी .
तीलू रौतेली क आंग म आग लागीती . वोकी तलवार इज सरीखी बरस पडी दुस्मन प ! येक क बाद येक गढ - किल्ला जीतत गयी . खैरागढ , उमटागढी , सल्ड महादेव पासीन चवखुटिया वरी गढ राज की हद बनाई . देघाट परीन वापस आवता बेरा कालिंका खाल म मोठी जंग भयी . सराईखेत म कत्युरी फऊज ला हाराय कन् वोनअ आपलअ भाईना क बलिदान को बदलो लेयो . यहान वोला येक नुकसान भयो . जेकअ पाठ पर बस कन् इज ( बिजली ) की फूरती कन येतरी जंग जितीती , वा बिंदुली घोडी घायल भयी . आन् थोडी बेरा ( समय ) म वोनअ साथ सोड्यो . रनरागिनी तीलू रौतेली उमर क १५ बरस पासीन २२ बरस वरी खतम करत रही येक येक बैरी ला ! गढ राज म हर जागा पर तीलू रौतेली को जयजयकार होत होतो . ७ साल म नान्हीसी तीलू रौतेली न खैरागढ , टकौलीगढ , इंदियाकोट , भौंखल , उमरागढी , सल्ड महादेव , मसीगढ , सरायखेत , उकरयीखल , कालिंकाखल , दुमैलगढ , भालंगभौन , चवखुटिया असा १३ गढ फते कऱ्या .
पवार की पोटी न गढवाल राज को मान बढायो . जंग जित कर वापस आवन क बेरा तीलू रौतेली कांडा गांव क खलतअ क नयार नदी प पानी पेन ला थांबी . दुइ तलवार खलअ धर कन् वा पानी पेन लागी . येकदम पाठ पासीन कत्युरी को फऊजी रामू रजवार न हमलो कऱ्यो . वीर तीलू रौतेली न तलवार खलअ धरीती . दुस्मन की तलवार आरपार भयी . वीर तीलू रौतेली न कम्बर ला हाथ लगायो आन् कट्यार काढ कन् पासअ पलटी . येक घाव कन् दुस्मान की गरदन काटी . १५ मई १६८३ ला नान्हीसी वीर तीलू रौतेली वीरगति पाई .
लोकनायिका तीलू रौतेली ( तिलोत्तमा देवी ) का थड्या गीत आबअ बी गढवाल म गावस....
वो कांडा का कौथिग उर्यो
वो तीलू कौथिग बोला
धकीं धे धे तीलू रौतेली धकीं धे धे
द्वी वीर मेरा रणशूर व्हेन
भगतु पत्ता को बदला लेक कौथिग खेलला
धकीं धे धे तीलू रौतेली धकीं धे धे....
कालिका की देवी , लंगूरिया भैरो
तडासर देव , अमर तीलू सिंगनी शार्दुला
जब तक भूमि , सूरज आसमान
तीलू रौतेली की तब तक याद रैली
धकां धै धै तीलू रौतेली धकां धै धै.....
_ दुनिया क इतिहास म आज वरी तीलू रौतेली जसी वीर सिंगनी नी भयी .
कुर की लाज राखी , गढवाल को राजपाट संभाल्यो , १५ बरस क उमर पासीन २२ बरस की उमर वरी १३ गढ जित्या , पिताजी - भाई - मंगेतर क बलिदान को बदलो लेयो .. असी उमर कन् नान्ही पर सारी दुनिया म जेकअ वीरता ला तोड नहाय , असी पवार / परमार की पोटी तीलू रौतेली माय ला बारम्बार नमन ..
( सहयोग : इंजि. जालमसिंह जी सोढा , बिकानेर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर