Tuesday, August 30, 2022

यादें _ सवाल की !

यादें _ सवाल की ! 
भाग - १२

दुनिया में अल्पसंतुष्ट लोगों की तादाद नगण्य है... पृथ्वी के समस्त जीव जंतू में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है , जिस की अभिलाषा असीमित होती है . 
६ लाख का पैकेज मिला.. _ इतने से क्या होगा ? 
९० प्रतिशत अंक मिले.... _ इतने से क्या होगा ? 
१००० रुपये चंदा मिला... _ इतने से क्या होगा ?
१० लाख रुपये दहेज दिया.. _ इतने से क्या होगा ? 
१२० रुपये किलो सब्जी को दाम मिला... _ इतने से क्या होगा ? 
दो हाथ को काम मिला...... _ इतने से क्या होगा ? 
७५ % एडवांस पेमेंट मिला..._ इतने से क्या होगा ? 
२ बेडरूम का घर मिला......._ इतने से क्या होगा ?
२ समय का खाना मिला....   _ इतने से क्या होगा ? 
' इतने से क्या होगा ?' यह सवाल चिंता निर्माण करता है और सकारात्मक दृष्टि से विचार करें तो " और " के लिए प्रोत्साहित भी करता है . कभी कभी यह ' और ' खोजता है शॉर्ट कट ! येन केन प्रकारेण लालच की पगडंडी पर दौडते है... कुछ पाते अथाह संपत्ती और कुछ खो जाते लोभ तृष्णा के मृगमरीचिका में ! 
' इतने से क्या होगा ? ' यह सवाल पाता है भिन्न भिन्न आयाम.. सकारात्मक भी और नकारात्मक भी ! 
सुदामा के मुठ्ठी भर चावल प्रतीक थे दोस्ती के... यहॉं ' भाव ' ही महत्त्वपूर्ण था . 
छत्रपती शिवाजी महाराज के भरण पोषण के लिए पुणे और चाकण की जागीर थी . लेकीन उन के बाल मन में प्रश्न कौंधा... ' इतने से क्या होगा ?' अब प्रश्न केवल उन के भरण पोषण का नही था... प्रश्न भारत जितना विशाल और स्वराज्य का था... प्रजा के मानसम्मान का था . 
आम इन्सान के पीछे भी यह सवाल दौडते रहता है . 
एक याचक पर भगवान प्रसन्न हुए.. बोले , ' तुम सुबह तक जितनी जमीन पर चलोगो , वह तुम्हारी हो जाएगी.. तथास्तु ! 
याचक दौडता रहा.. सोचता रहा , ' इतने से क्या होगा ?' और दौडता रहा सुबह तक अविराम ! सुबह होते होते अतिश्रम से उसकी मृत्यू हुई ... 
' इतने से क्या होगा ?' इसका कौन सा आयाम हमें चुनना है , यह हमारे विवेक पर निर्भर है . वैयक्तिक चुनाव और सार्वजनिक चुनाव यह भी एक महत्वपूर्ण भेद है .  अंतहीन जरूरतों और चाहत का सिलसिला तो थमने से रहा ! ( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Friday, August 26, 2022

हिरवळली धरणी. Marathi language _ मराठी भाषा

हिरवळली धरणी
Marathi language _ मराठी भाषा

खेळ उन सावलीचा
हिरवळली धरणी
अडखळत्या मेघांत
विद्युल्लतेची हरिणी ।१।

सुमधुर कलरव
वाहे खळखळ पाणी
बासरीवर भैरवी
आळवतो चक्रपाणि ।२।

सळसळणारा वारा
रानभूल ही करणी
घुटमळती कंपने
दव भिजल्या चरणी ।३।

मृदू निर्मळ तरळ
परिमळते त्रिवेणी
आभाळाच्या पाठीवर
इंद्रधनुष्याची वेणी ।४।

प्रतिबिंब हे स्वप्नांचे
नितळ आरसपानी
रुणझुणती पैंजण
स्तब्ध अवखळ चानी ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, August 24, 2022

भाव पस्तुरीले आला. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

भाव पस्तुरीले आला
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

माल मोंड्याचा बजारी
वाया दलालीत गेला
जुगाडाच्या तंतरानं
भाव पस्तुरीले आला ।१।

सारा उरफाटा न्याव
साव जेलामंदी गेला
चोट्ट्यायले हार तुरे
भाव पस्तुरीले आला ।२।

सीध्या सरख्याले भेव
जीव टांगनी लागला
उसवून भरवसा
भाव पस्तुरीले आला ।३।

सेक चुलीच्या भोगाले
उल मारते गा डल्ला
कल्ला गल्ली गल्लीतून
भाव पस्तुरीले आला ।४।

कापराच्या बट्टीवानी
जीव उपवून गेला
अधरयेलाच्या गुनानं
भाव पस्तुरीले आला ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, August 23, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ११. Hindi language _ हिंदी भाषा

यादें _ सवाल की ! 
भाग - ११
Hindi language _ हिंदी भाषा

पहली कक्षा से बारहवी कक्षा तक एक सवाल , कुछ अपवाद छोड , सभी के लिए तक़लीफ़देह साबित होता है . अच्छा , इस सवाल को स्थल - काल बंधन नही है... उलटा यह सवाल पूछने वाले के लिए आनंददायी और औपचारिक होता है . उत्तरदाता इस सवाल से बचने की कोशिश करें तो करें कैसे ? प्रश्नकर्ता वरीष्ठ , रिश्तेदार , पहचान वाले और प्रश्न पूछने में माहिर होते है . प्रश्नकर्ता सोचता है की , इस प्रश्न द्वारा वह ब्रम्हांड के राज खोलने की क्षमता रखता है . 
प्रश्नकर्ता के सवाल से ज्यादा खतरनाक होता है उनके तुलनात्मक अध्ययन से चिरफाड करने की कुशलता ! तथा प्रकाश गति से इस राज का प्रसार ! 
माता पिता के लिए यह प्रश्न गौरव का कम और अपमान का ज्यादा लगता है . अंतिम सांस तक संग्राम की तर्ज पर दो - चार सबल कारण बता कर , हीन भावना से उबरने की भरकस कोशिश करते है ....
इस प्रश्न का उत्तर वैयक्तिक न रह कर कौटुंबिक इज्जत का परचम बन जाता है . 
' सवाल कौन सा है ? ' ....
रुको जरा , सबर करो.... 
यह जानलेवा सवाल है , " और , कितने परसेंट ( प्रतिशत ) मार्क्स मिले ? ' 
जिनका रिझल्ट आया है , उनके हिसाब से कम से कम ५ से १० % कम मिले है . ९२ % पाने वाले की अपेक्षा रहती है कम से कम ९८ - ९९ % की ! और ९० % के नीचे वालों की हालत तो इन से भी खराब . 
घर में आये मेहमान , परिचित का यह सवाल प्रथम कर्तव्य जैसा होता है .  और मॉं भी पानी ले कर हमें ही भेजती है . रणांगण में रचित चक्रव्यूह के आज  अभिमन्यू बन जाते है हम ! पहले हम चक्रव्यूह में फंसते है... अपराधबोध से ग्रस्त हम हथियार डाल देते है . हमारे संपूर्ण पराजय के बाद परिचर्चा प्रारंभ होती है , जिस में हमारे पालक मजबूरन सामील होते है . हमारे प्राप्त अंको पर मंथन चालू होता है . चर्चा में प्रश्न कर्ता का तुलनात्मक अध्ययन इतना गहरा होता है की , माता पिता की दलीलें उसे पाट नही सकती . हम अपराध बोध से इतने ग्रसित हो जाते हैं की , लगता है _ हे धरती मॉं मुझे भी समा ले सीता माता की तरह अपने भीतर ! 
सवाल कर्ता के जाने के बाद घर की आबोहवा में तुरंत परिवर्तन होता है . ऐसे लगता मानो हमें सब हेय दृष्टि से देख रहे है ....
फिर सत्संग और प्रवचन प्रारंभ होता है , जिसे सुनने या सहने की ताकत ही नही बचती . हम अपने कमरे में जा कर तकीये से दोस्ती कर उसे ऑंसूओं से भिगो देते है . 
अभी इस सवाल का , भोथरा ही सही , लेकीन हमले को कुछ देर तक रोकने की क्षमता वाला हथियार हमारे पास उपलब्ध है .... और वह है , जवाब में CGPA or percentile बताना !!!
करते रहो calculations ...... ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर




Wednesday, August 17, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग १०

यादें _ सवाल की ! 
भाग - १० 
Hindi language _ हिंदी भाषा

हर कोई अपने - अपने तरीके से , ढंग से जीवन यापन करता है . जीवन के हर पडाव पर जीवन यापन का परिमाण और सोच भिन्न भिन्न होती है . बालक अबोध होते है . विद्यार्थी जीवन पढ़ाई में व्यतीत होता है . फिर करीअर की दौड शुरू ! यह दौड कैसे न कैसे पूर्ण करने पर विवाह... बच्चे ... बच्चों की शिक्षा - दिक्षा.. उनका करीअर.. उनका विवाह.. नाती - पोती... जीवन का संध्या काल ! 
यहॉं जीवन प्रवाह के हर मोड के अलग ढंग - अलग रंग ! 
लेकीन _ इस जीवन प्रवाह में एक चिरपरिचित सवाल हर परिचित से आता है आपकी ओर ! लेकीन जीवन अंत तक इस चिरपरिचित सवाल का सही सही जवाब क्या दे , यह समझ में नहीं आता है ! और यह सवाल है , " और , क्या चल रहा है ? "
यह सवाल औपचारिकता , आत्मियता , सद्भावना और दुर्भावना के तडके के साथ प्रस्तुत होता है . उसका हल्का सा स्वाद भी महसूस होता है . पर जवाब तो औपचारिक ही देना है . नही तो अनचाही डिग्री और खिताब गले पडने को तैयार ! 
विद्यार्थिओं से यह सवाल टकराये तो , ' पढाई ' यह जवाब देना अटपटा लगता है.. गरदन झुकाए रुक रुक कर जवाब आता है , ' जी , स्कूल / कालेज चल रहा है .' 
बेरोजगार को यह सवाल इतना चुभता है की , उनका दर्द वही जानते है . चलने - चलाने की कोशिश जारी है भाई ! अब ऐसी स्थिती में क्या जवाब दे ? आप क्या सोच रहे है , इसे प्रमाणित करने का रास्ता नही . और सोच या प्रयास को , इस सवाल के जवाब में अपेक्षित नही ....
नौकरी या व्यवसाय / व्यापार में करीअर बनाने के बाद झिझकते ही सही , लेकीन जवाब आता है _ बस् , चल रहा है... 
विवाहित स्त्री - पुरुष इस सवाल के जवाब में , अपनी बात छोड कर बच्चों का हालचाल बताते है... यहॉं से मै गुप्त / लुप्त हो जाता है . जो भी चल रहा है _ वह बच्चों का ही चल रहा है ! और आगे इस सवाल के जवाब में बच्चों के विस्तारित परिवार का चलना आता है . 
' और , क्या चल रहा है ? ' इस सवाल की बडी महिमा है . हर घर में विराजमान छोटे screen ( TV ) की विज्ञापन दुनिया में भी इस सवाल का वाणिज्यिक उपयोग हुआ है . याद आया वह विज्ञापन .... तणाव भरी सीमा पर तैनात दो फौजी.. एक फौजी का दूसरे फौजी को अलग तडके में यही सवाल पूछता है , " और, क्या चल रहा है ? " 
_ तो दोस्तों , क्या चल रहा है ? यह सवाल जिंदगी भर आपसे टकराता रहेगा . अब मैने आपको आगाह कर दिया हैं . जनाब , तैयार रखिए अपने सतरंगी  - अतरंगी जवाब हर तडके के जवाब के लिए ! 
_ और , क्या चल रहा है ???????

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, August 16, 2022

निर्माण : भाग १३

निर्माण : भाग १३
Hindi language _ हिंदी भाषा

खदान के उपरी मुंहाने पर सेंटर लाईन और लेवल की मार्किंग थी . और इस मार्किंग के ऊपर से पटरी जा रही थी . मैने कुछ सोचा और साइट इंजिनिअर को बुलाया . थिअओडोलाइट , रेंजिंग रॉड , स्टाफ , पेंट , टेप साइट पर लाने को कहा . पटरी के नीचे के सेंटर प्वाइंट को दोनों तरफ १.५ मीटर शिफ्ट किया . थिओडोलाइट से ९० ° पर मार्किंग की , और पेंट से पटरी के दोनों तरफ लाइन खिंची . गणन कर के , उस लाइन से RCC box का outer मार्क किया . 
' सर , यह बात मेरे दिमाग मे ही नही आई . ' साइट इंजिनिअर ने कहा . 
' कोई बात नहीं.. ठेकेदार को बुलाओ . ' मैने कहा . 
सब साइट पर आए . उन्हें समझा दिया और मै नाश्ता करने  गया . 
' दो दिन में raft का लोहा बांधना है ... तीसरे दिन कंक्रिटिंग करना है... समझे ? '  मैने ठेकेदार और साइट इंजिनिअर से कहा . 
' दो दिन में कैसे होगा साहब ... कम से कम ५ दिन तो लगेंगे..' ठेकेदार ने कहा . 
' नही , इतना समय नही है मेरे पास . दिन रात काम करना होगा . ढलाई ( casting ) काम करने वाले ठेकेदार के आदमी खाली है , उन्हें भी काम पर लगाओ . ' मैने कहा . 
' उन मजदूरों को लोहे का काम नही आता . और उनका ठेकेदार अपने मजदूर देगा ? ' लोहा ठेकेदार ने कहा . 
' उन्हें लोहा ढुलाई और बाइंडिंग के काम में लगाओ . बाइंडिंग का काम समझा दो , सब हो जाएगा . उनके ठेकेदार से मै बात करता हूं . ' मैने कहा . 
सुपरवाइझर को ठेकेदार को बुलाने के लिए कहा . ठेकेदार को सारी बातें समझायी . 
अब युद्ध स्तर पर काम चल रहा था . ५ महिला मजदूर को केवल नाश्ता , चाय , खाना बनाने के लिए कहा . साइट पर काम और उत्साह की बयार बह रही थी . काम की गति देख कर डिपार्टमेंट के इंजिनिअर खूश हुएं ! 
' सर , काया पलट दी आप ने साइट की ! यह साइट आप ही पूर्ण किजीए..' डिपार्टमेंट के इंजिनिअर ने कहा . 
' ऐसा कुछ नहीं सर , हमारा काम ही है यह . बाकी साइट भी देखनी होती है , इस लिए एक साइट पर एक हफ्ते से ज्यादा नही रुक सकता , लेकीन आना - जाना रहेगा . आप को काम में कोई शिकायत का मौका नही मिलेगा . ' मैने कहा . 
आखिर RCC ढलाई का दिन आया . पूजा पाठ के बाद  कंक्रिट मिक्सर मशिन की आवाज जंगल मे गूॅंज रही थी , साथ में मजदूरों का कोलाहल भी ! आज साइट पर उत्सव का माहोल था . सिमेंट लदे दो ट्रक साइट पर खडे थे . दुसरे साइट से मैने और एक मिक्सर मशिन बुलाई थी . खदान की दोनों बाजू से कंक्रिट ढलाई का काम चल रहा था . 
दो दिन और दो रात में raft casting का काम पूर्ण हुआ . आगे का काम समझा कर मै जीप मे बैठा . सभी मजदूर , ठेकेदार , स्टाफ जीप को घेरे खडे थे . 
' मै हर हफ्ते  visit करूंगा ... दिल से काम करो...' मैने कहा . 
' जरूर आते रहना साहब...' सभी कह रहे थे...
' चलो..' मैने ड्रायव्हर को कहा . 
धूल मिट्टी उडाते हुंए जीप जंगल के रास्ते निकल पडी . ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


गंगा वावरी नाचली. varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

गंगा वावरी नाचली
Varhadi dialect _ वऱ्हाडी बोली

काकरात हिरवाई
गंगा वावरी नाचली
बुचकडून पान्यात
मान मालानं टाकली ।१।

दोन सिरव्याची आस
फासी झडीची लागली
कास कुंदा तनकट
करे फुकाची चुगली ।२।

मुऱ्या बूड कुइजले
पानं पिवरी फिफोली
पीकपान्याच्या जुव्यात
भाऊ जिंदगी हारली ।३।

मातीतल्या फसलीची
खूसी पान्यानं इरली
झर्र पाझरा वावरी
माती उनाले झुरली ।४।

कवा येईन वरानी
आता उम्मीद सरली
वावरातली गा गंगा
डोऱ्यातून बी झरली ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, August 14, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ९. Hindi language _ हिंदी भाषा

यादें _ सवाल की !
भाग - ९
Hindi language _ हिंदी भाषा

कुछ सवाल मीठे , प्यारे , भोले होते है... जवाब देना भी जरूरी होता है.. क्यों की सवाल सपनों की दुनिया से आते है अपेक्षाओं के बादल होते हुए... गलत जवाब से बादल गरज सकते है.. बरस सकते हैं या फट भी सकते है... !! 
संचार कौशल , समयसूचकता , दूरदर्शीता , वक्त की नजाकत भॉंपने की क्षमता , मृदूता , स्तुति करने और सफेद झूठ बोलने की क्षमता , तर्क शक्ति के बलबूते ऐसे सवाल की वैतरनी पार कर सकते है...
भूमिका बहुत हुई.. असल मुद्दा है , कौनसा सवाल ! 
तो सवाल हाजिर है _ 
' कैसे लग रही हूं मै ? '
हमारे पास ३ degrees की सीमित अभिव्यक्ती होती  है _ positive , comparative & superlative ! 
सवाल कर्ता के खजाने और अपेक्षा में कम से कम ३० !!!
हमारी ऑंखें तीन चार रंग देख कर भी पढ़ाई अनुसार सात रंग का इंद्रधनुष्य मानते है . सवाल कर्ता उसी इंद्रधनुष्य 🌈 में ७० रंग देखने की क्षमता रखता है !!! ३ primary और ‌३ secondary रंग तक हमारा ज्ञान और चक्षु क्षमता !! सवाल कर्ता का रंग ज्ञान अनंत !!!!!!
सवाल जवाब का यह मुकाबला एकतरफा है . लेकीन अभ्यास से इस की बीच की दूरी को थोडाबहुत कम कर सकते है . जवाब देते समय अचरज भरी body language और बोलने में उद्गार वाचक शब्दों का आधिक्य अनिवार्य है . 
अब आप ने सवाल कर्ता को जान लिया होगा !
यह चक्रव्यूह सा सवाल आता है बहन , सखी , सहकर्मी और अर्धांगिनी से...
सबसे घातक सवाल अर्धांगिनी का मानते है... 
मेरी राय पूछ रहे हो...  जाओ , मैने नही बताना !
व्यंग की बात छोड दे तो , सभी अच्छी ही लगती है . हर भेष में.. हर रूप में ! 
Degree पूछ रहे हो.. superlative से भी ऊपर !!!!!! ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Wednesday, August 10, 2022

निर्माण : भाग १२

निर्माण : भाग १२
 Hindi language _ हिंदी भाषा

आज साइट पर रौनक थी . मै खदान के मुंहाने के पास कुर्सी लेकर बैठा . सब अपने अपने काम में जुटे थे . मै drawings देख कर इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रहा था . लोहा ठेकेदार को कटिंग समझाई और कुछ हिदायतें दी . साइट इंजिनिअर से dumpy level मंगाया . ५ - ५ मीटर की मार्किंग करवा कर gradient के point दिए और ठेकेदार को उस हिसाब से dressing करने के लिए कहा . Safety manager आया . 
' सर , आपके मजदूर के पास कोई भी safety का इंतजाम नही है . Helmet , gumboot भी नहीं . मै ऐसी हालत में इन्हें काम करने की इजाजत नही दे सकता . Mine's manager साहब आए तो , मुझे notice देंगे.. आप काम रोक दिजीए ..' safety manager ने कहा . 
' सर आज शाम तक सभी सामान आ जाएगा.. बडी मुश्किल से आज काम शुरू किया है , उसे ना रोकिए.. manager साहब आए तो मै बात कर लूंगा ..' मैने उन्हें समझाते हुए कहा . 
ड्रायव्हर को आवाज लगाई . उसे सामान की सूचि और पैसे दे कर रवाना किया . स्टोर से कुछ पुराने हेल्मेट और गमबूट मंगाए और dressing कर रहे मजदूर को देने के लिए कहा . 
कुछ समय बाद department के इंजिनिअर आए . 
' पडे पडे इस लोहे की सरियों में बहुत जंग लगा है.. इन का diameter और वजन भी कम हुआ होगा . आप ने इसकी कटिंग भी शुरू कर दी . ऐसे नही चलेगा . इसे वापस कर आप नया लोहा लाए.. ' इंजिनिअर ने आते ही अपना रौब झाडा . 
' सर , एक महिना पहले मैने लोहा तो नया ही भिजवाया था . और हर lot का एक एक मीटर का सैम्पल भी टेस्ट होगा , जिस में strength , diameter , wt per metre भी आएगा . आप टेस्ट में आए weight के हिसाब से calculation किजीए.. क्या दिक्कत है.. काम रोकना बहुत आसान है , काम करना और करवाना मुश्किल है . आप सहयोग और मार्गदर्शन नही करेंगे तो काम कैसे चलेगा ? ' मैने कहा . 
' बडे साहब ने बोला था , मैने केवल आप को बताया .' उन्होंने कहा . 
' मै बात कर लूंगा साहब से.. आप निश्चिंत रहे..' मैने कहा . 
तब तक चाय आई.. 
' कल PCC होगा . जरा जल्दी आइएगा .' मैने कहा . 
' ठीक है..' उन्होंने चाय पीते हुए कहा . 
शाम को ठेकेदार को बुलाया . 
' आज आधा हिस्सा dressing हुआ है ,  कल उसकी PCC करनी है . लेकीन काम सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक करना है . दिन भर में ४ घंटे खदान की वजह से बरबाद होते है . उन्हें कव्हर करना जरूरी है . ' मैने कहा .
' ठीक है साहब .' ठेकेदार ने कहा . 
दुसरे दिन आधे हिस्से का PCC ( प्लेन सिमेंट कंक्रिट ) हुआ . बाद में बचे हिस्से का dressing और PCC हुआ . 
Gradient तो सही था , लेकीन size random था . Steel binders को accurate marking लगती है . अब इसकी सेंटर लाईन कैसे मार्क करे , यह समस्या थी . क्यो की बीच में trestle पर पटरी बिछी हुई थी . कल किसी भी तरह सेंटर लाईन मार्क करनी ही है , यह ठान लिया . 
खदान से खडखड की आवाज आ रही थी.. ( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, August 8, 2022

अजब गजब - ९८ : वीरांगना तीलू रौतेली. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ९८ : वीरांगना तीलू रौतेली
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
धन धन छै तु गढ़ की नारी
जै जै हवेली तेरी तीलू रौतेली ।

उत्तराखंड क गढ़वाल प पवार / परमार को राज रह्यो आन् कुमाऊँ प कत्यूरी को राज रह्यो . येनअ दुइ राज म सरप - नेवला सरीखी दुसमनी रही . 
' गोरला रावत ' इ.स. ७६० म गुजरात परीन गढवाल क पवार / परमार राजपुत क स्यरन म आया . गढवाल क पौडी जिला क चांदकोट इलाखा क गुरार ( गुराड ) गांव म वूई बस्या . गांव क नाम परीन गुजरात क येनअ पवार पाती को नाव पड्यो ' गुरला / गोरला ' . रावत या उपाधी भेटी तेकन भया गोरला रावत ! 
गोरला रावत कित गढ राज की सूर्व्यामुखी आन् राकसमुखी हद की जिम्मेदारी होती . गोरला रावत भूपसिंह जी गढवाल नरेश राज का परमुख सभासद होता . गोरला रावत भूपसिंह ला दुइ पोटुना क बास्त ८ अगस्त १६६१ म पोटी भयी . आदिमाया को रूप येनअ पोटी को नाव , ' तीलू रौतेली ( तिलोत्तमा देवी ) ' ! भगतु ( भगतसिंह ) आन् पत्वा ( फतहसिंह ) इ दुइ तीलू रौतेली का वीर भाई ‌. येनअ दुइ भाईना न कत्युरी फऊज क सरदार ला जंग म हाराये . दुइ भाईना ला जंग म ४२ - ४२ घाव लाग्या . राजा न दुइ भाईना ला ४२ - ४२ गांव की जागीर देयी . फतहसिंह न परसोली / पडसोली ( पट्टी गुजडू ) आन् भगतसिंह न सिसई ( पट्टी खाटली ) ला आपरो ठिकानो बनायो . 
तीलू रौतेली की सगाई १५ बरस क उमर भयी . इडा गांव का सिपाही नेगी भुप्पासिंह को पोरग्यो भवानी नेगी तीलू रौतेली को मंगेतर . 
कत्युरी को अनखिन हमलो भयो . इ हमलो घातक ठह्यऱ्यो . तीलू रौतेली क पिताजी ला येनअ जंग म वीरगति भेटी . मंगेतर आन् दुइ भाईना न बलिदान देयो .
 तीलू रौतेली नान्हीसी होती . वोनअ माय जवर कांडा क कौथिग मेला म जान की बात कही . माय न वोला कह्ये क मेला म जाय कन् का करेन ? कही जान को होयेन त , आपलअ दादा ( पिताजी ) आन् दुइ भाईना को बदलो लेन ला जा ! नान्हीसी तीलू रौतेली क जीव ला या बात लागी . वा मरदानी होती . गुरु शीबू पोखरियाल न वोला जंग का , राज का सारा तंतर मंतर पढायाता . वोनअ १५ बरस क उमर म राजपाट संभाल्यो . गुरु शीबू पोखरियाल आन् बेल्लु - देवकी सोबतीनना ला संग लेयो . फऊज की कमान मराठा सेनापती गुरू गौरीनाथ क हाथ म दी . 
तीलू रौतेली क आंग म आग लागीती . वोकी तलवार इज सरीखी बरस पडी दुस्मन प ! येक क बाद येक गढ - किल्ला जीतत गयी . खैरागढ , उमटागढी , सल्ड महादेव पासीन चवखुटिया वरी गढ राज की हद बनाई . देघाट परीन वापस आवता बेरा कालिंका खाल म मोठी जंग भयी . सराईखेत म कत्युरी फऊज ला हाराय कन् वोनअ आपलअ भाईना क बलिदान को बदलो लेयो . यहान वोला येक नुकसान भयो . जेकअ पाठ पर बस कन् इज ( बिजली ) की फूरती कन येतरी जंग जितीती , वा बिंदुली घोडी घायल भयी . आन् थोडी बेरा ( समय ) म वोनअ साथ सोड्यो . रनरागिनी तीलू रौतेली उमर क १५ बरस पासीन २२ बरस वरी खतम करत रही येक येक बैरी ला ! गढ राज म हर जागा पर तीलू रौतेली को जयजयकार होत होतो . ७ साल म नान्हीसी तीलू रौतेली न खैरागढ , टकौलीगढ , इंदियाकोट , भौंखल , उमरागढी , सल्ड महादेव , मसीगढ , सरायखेत , उकरयीखल , कालिंकाखल , दुमैलगढ , भालंगभौन , चवखुटिया असा १३ गढ फते कऱ्या . 
पवार की पोटी न गढवाल राज को मान बढायो . जंग जित कर वापस आवन क बेरा तीलू रौतेली कांडा गांव क खलतअ क नयार नदी प पानी पेन ला थांबी . दुइ तलवार खलअ धर कन् वा पानी पेन लागी . येकदम पाठ पासीन कत्युरी को फऊजी रामू रजवार न हमलो कऱ्यो . वीर तीलू रौतेली न तलवार खलअ धरीती . दुस्मन की तलवार आरपार भयी . वीर तीलू रौतेली न कम्बर ला हाथ लगायो आन् कट्यार काढ कन् पासअ पलटी . येक घाव कन् दुस्मान की गरदन काटी . १५ मई १६८३ ला नान्हीसी वीर तीलू रौतेली वीरगति पाई . 
लोकनायिका तीलू रौतेली ( तिलोत्तमा देवी ) का थड्या गीत आबअ बी गढवाल म गावस....
वो कांडा का कौथिग उर्यो
वो तीलू कौथिग बोला
धकीं धे धे तीलू रौतेली धकीं धे धे
द्वी वीर मेरा रणशूर व्हेन
भगतु पत्ता को बदला लेक कौथिग खेलला
धकीं धे धे तीलू रौतेली धकीं धे धे....
कालिका की देवी , लंगूरिया भैरो
तडासर देव , अमर तीलू सिंगनी शार्दुला
जब तक भूमि , सूरज आसमान
तीलू रौतेली की तब तक याद रैली
धकां धै धै तीलू रौतेली धकां धै धै.....
_ दुनिया क इतिहास म आज वरी तीलू रौतेली जसी वीर सिंगनी नी भयी . 
कुर की लाज राखी , गढवाल को राजपाट संभाल्यो , १५ बरस क उमर पासीन २२ बरस की उमर वरी १३ गढ जित्या , पिताजी - भाई - मंगेतर क बलिदान को बदलो लेयो .. असी उमर कन् नान्ही पर सारी दुनिया म जेकअ वीरता ला तोड नहाय , असी पवार / परमार की पोटी तीलू रौतेली माय ला बारम्बार नमन ..

( सहयोग :  इंजि. जालमसिंह जी सोढा , बिकानेर ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Sunday, August 7, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ८

यादें _ सवाल की !
भाग - ८
Hindi language _ हिंदी भाषा

कुछ सवाल मानसिक और सामाजिक तौर पर विचलित करते है . क्रोध विनय को निगल लेता है और हम असहाय से दर्शक या भुक्तभोगी बन कर रह जाते है . 
ऐसे ही एक अनुचित सवाल से हर किसी का पाला पडता है , और वह सवाल है  _ ' दिखता नही क्या ?' 
एक ' T point ' से मै दाये मुडने लगा... इंडिकेटर जलाया.. लेकीन ट्रैफिक देख कर मै रुक गया ... दो कारें निकल गयी.. पीछे से स्कूटी आ रही थी.. मै रुका हुआ ही था... स्कूटी पर सवार लडकी मेरे कार के आगे से क्रॉस करने लगी.. पता नहीं क्या हुआ , वह स्कूटी ले कर कार के आगे गिर गयी.. मै अपनी जगह पर रुका हुआ.. वह स्कूटी को वैसी ही छोड कर मेरे पास आई . मैने कांच नीचे की . 
' दिखता नही क्या ? ' लडकी ने तमतमाते हुए कहा . 
' क्या देखना है मैम ? मै तो रुका हूं.. आप ही आए और कार के आगे गिर गए..' मैने कहा . 
' पहले नीचे उतर.. ' लडकी ने गुस्से से कहा . 
मुझ से ८ - १० साल छोटी उस लडकी की बात सुन कर मेरा माथा ठनका . चौक से दो - चार लडके दौड कर आए और स्कूटी को उठाया . उसकी बात सुन कर मै नही उतरा...लडकों ने स्कूटी हटाई और मै निकल गया . कानों से सांय सांय की आवाज आने लगी . दिमाग सुन्न हो गया . क्या बिना वजह अपरिचित से ऐसी बात करना उचित है ? दिन भर दिमाग मे वही सवाल गूॅंजता रहा , ' दिखता नही क्या ? ' 
सिग्नल लाल था . मुझे बाए जाना था . कार डिव्हाडर से दुसरी पंक्ति में थी . मेरे बाए टू व्हीलर्स खडी थी . एक बुजुर्ग व्यक्ति सायकल पर थे . पीछे से मस्ती करते हुए दो बाइक स्वार आए . उनकी सायकल वाले बुजुर्ग व्यक्ति से कुछ कहासुनी हुई . वे बाइक खडी कर उस बुजुर्ग से हाथापाई करने लगे . गालीगलौच के बीच केवल एक ही वाक्य समझ आ रहा था , ' दिखता नही क्या ?' 
सिग्नल हरा हुआ . वाहनों का रेला आगे बढ़ा . उस रेलें मे मै भी ! रुकने के लिए जगह कहा ! 
दिन भर उन लडकों की उदंडता और कुकृत्य के बारे में सोचता रहा . घर के बाहर की दुनिया इतनी शुष्क भावना और विचार से ! 
रात के ग्यारह बज रहे थे . बारिश का मौसम ! झमाझम बारिश हो रही थी .  सडक बहते नाले में तब्दील ! मेट्रो स्टेशन के नीचे तो तालाब.. आगे एक बाइक पर लडका और लडकी सवार . उनके आगे और एक कार . संभवतः जितनी कम गति से कार चल सकती है , उस गति से चल रहा था . बाइक को जैसे ही क्रॉस किया , लडकी के चिखने की आवाज आई . शायद उन पर कुछ ना कुछ पानी उडा होगा . आगे की कार के पीछे पीछे मै चल रहा था . अचानक कार के पीछे से कुछ टकराने की आवाज आई . मिरर में देखा तो वह बाइक कार और डिव्हाडर की बीच की संकरी जगह से आ रही थी .. वह बाइक सवार हाथ से कार को मार रहा था और वही सवाल उग्र रूप में पीछा कर रहा था , ' दिखता नही क्या ?' 
कुछ आगे जाने पर वही बाइक बाए बाजू से बराबर में आई . 
' xxxxx दिखता नही क्या... xxxxx दिखता नही क्या ?? ' गालियों की पूंछ बन कर वही सवाल बारिश की आधी रात में तांडव कर रहा था . कालोनी के लिए मुडने तक बाइक सवार और वह सवाल पीछा करता रहा...
_ यह तीन वाकये केवल प्रातिनिधिक तौर पर बताए.. इस सवाल की शृंखला अनंत है..... ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Monday, August 1, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ७. Hindi language _ हिंदी भाषा

यादें _ सवाल की ! 
भाग - ७
Hindi language _ हिंदी भाषा

महाराष्ट्र एक सॅन्डविच स्टेट है . उत्तर भारत की नैसर्गिक सीमा विंध्याचल / नर्मदा नदी तक मानी जाती है . नीचे दक्षिण पथ ! दक्षिण भारतीय की हिसाब से महाराष्ट्र दक्षिण भारत में नही आता . हां दिशा की हिसाब से महाराष्ट्र पश्चिमी राज्य है . लेकीन उत्तर - दक्षिण में कहॉं ? यह प्रश्न है . और यह सवाल हर जगह पीछे पीछे आता है ! 
महाराष्ट्र के सुदूर तेलंगणा की सीमा के नजदीक काम करते हुए यह सवाल पीछे से आगे आ कर खडा होता और मुझे विचित्र परिस्थिती का सामना करना पडता था . 
मै स्टाफ और ड्रायव्हर के साथ रोड किनारे एक घरनुमा रेस्टॉरंट मे लंच के लिए रुका . यह रेस्टॉरंट एक तेलुगू परिवार चलाता था . आदमी काउंटर पर और सर्विस के लिए उसकी पत्नी और बच्चे ....
मै एक टेबल पर बैठा और बाकी स्टाफ दुसरे टेबल पर ....कोई जल्दबाजी नही थी ... सब इत्मिनान से भोजन का आनंद ले रहे थे . वह महिला कुछ परोसने के लिए मेरे टेबल आई . परोसते परोसते वह बहुत ही धीमी आवाज में मुझे कुछ पूछ रही थी या बता रही थी . मैने बहुत गौर से सुनने की कोशिश की , लेकीन सफल नही हुआ . इसके दो कारण थे : एक तो बहुत धीमी आवाज और दुसरा वह शायद तेलुगू में बोल रही थी . वैसे यह इलाका नक्षलग्रस्त था . अनजान व्यक्ति से दूरी रखते थे . एक अजीब डर दिमाग पर छाया रहता था . वह महिला जितनी बार परोसने आती , कुछ न कुछ बोलती ही थी , लेकीन मेरे पल्ले कुछ नहीं पड रहा था . अंत मे जब वह बिल लेकर आई तब हिंदी मे पूछा गया सवाल मुझे समझ आया . 
दक्षिण भाषा के टोन में उसने पूछा , ' तुम्म साऊथ इंडियन है ? ' 
अब हडबडाने की बारी मेरी थी और जवाब का दायित्व भी ! 
' मै महाराष्ट्र का ही हूं.... लेकीन जब से आप कुछ बोल रहे थे , मेरी समझ में कुछ नही आया... क्या बोल रहे थे आप ? ' मैने कहा एक सवाल के साथ ! 
उसके चेहरा निर्विकार हो गया . जुबान को ताला ! उसने झट् से प्लेट उठाई और बिना कुछ बोले तेजी से चली गयी . 
आख़िर समस्या क्या थी _ मेरा साऊथ इंडियन न होना , मुझे तेलुगू भाषा नही आना , मेरा महाराष्ट्र का होना !!!!!!!
मै मुंबई मे कॉटन ग्रीन एरिया में एक टेंडर के सिलसिलें में गया था . दोपहर को ऑफिस का लंच टाईम हुआ . मै भी ऑफिस से निकल कर सडक पर आया और एक रेस्टॉरंट देख कर लंच करने गया . चार पाच टेबल का छोटासा रेस्टॉरंट था . एक सज्जन लंच कर रहे थे . मैने लंच ऑर्डर दिया और आराम से निरिक्षण करने लगा . यथावकाश लंच आया . मै अपनी ही धून में था . 
' Excuse me , तुम्म साऊथ इंडियन है ? ' उस सज्जन ने मेरी टेबल के पास आ कर पूछा . 
मेरे हाथ रुक गये.. दिमाग दौडने लगा ... इस सवाल का और मेरा रिश्ता समझने की कोशिश करने लगा .. औचित्य समझने की चेष्टा करने लगा . फिर खुद को ही बोला , '  ज्यादा सोचा मत कर... कुछ बातें बिना सोचे ही अच्छी होती है...' 
' Sorry bro... I am Maharashtrian....' मैने हंसते हुए कहा ...
विदेश यात्रा में यह सवाल लुप्त हो जाता है... अपने आप ही !!!
वहॉं जब कोई भी हंस कर पूछ लेता है , ' Indian ? ' 
मै विस्तारित मुस्कान के साथ जवाब देता हूं , ' Yes sis / bro.... I am Indian !

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

निर्माण : भाग ११. hindi language _ हिंदी भाषा

निर्माण : भाग ११
Hindi language _ हिंदी भाषा

वेस्टर्न कोल इंडिया का और एक टेंडर मिला था . जंगल मे एक नई भूमिगत कोयला खदान शुरू हुई थी . जमीन स्तर से खदान के मुंह तक incline RCC box structure का काम था . साइट कैम्प , मजदूर , ठेकेदार , स्टाफ , मशिनरीज् , मटेरियल पहुंच गया था . एक महिना हो गया , काम का श्रीगणेशा नही हुआ था . 
एक दिन मै ड्रायव्हर को साथ लिए उस साइट पर पहुंचा . डिपार्टमेंट के इंजिनिअर शिकायत करने लगे . काम टर्मिनेट करने की धमकी देने लगे . मैने उन्हें जैसे तैसे समझाया और कैम्प पहुंचा . साइट पर पहुंचते ही सभी ने घेर लिया .. शिकायत पर शिकायत ! मै ऑफिस मे बैठा और एक एक ठेकेदार को बुलाने ने लिए कहा . पहले ढलाई काम वाला ठेकेदार आया . 
' साहब , हमें दुसरे साइट पर भेज दिजीए... एक महिना हो गया . घर से लाया चावल भी खत्म हो गया . यहॉं कोई काम धाम है नही . कितने दिन बैठ के खाएगे साहब .....' ठेकेदार ने कहा .
' मै साइट चालू कर के ही जाऊंगा... टेन्शन मत लो..' मैने कहा . 
एक एक सभी ठेकेदार आए और वही बात दोहराई . 
अब स्टाफ की बारी थी . 
' काम चालू क्यो नही किया अब तक.. यहॉं क्या खाने और सोने के लिए आए हो ? ' मैने साइट इंजिनिअर से पूछा . 
' साहब , खदान का खुदाई कार्य शुरू है . हमें जहॉं काम करना है , उस के बीच में से मिट्टी ढुलाई के लिए पटरी बिछाई है . हर आधे - एक घंटे में मिट्टी के डिब्बे खदान से उपर आते है . सेफ्टी ऑफिसर डिब्बे उपर आने के बीस मिनट पहले सब मजदूर को बाहर निकालता है . फिर डिब्बे खदान के भीतर जाने तक मजदूर बिना काम के बैठे रहते है . डिपार्टमेंट के इंजिनिअर भी co operate नही करते . काम कैसे करें साहब ? ' मेरे सवाल पर साइट इंजिनिअर ने प्रश्न चिन्ह लगाया . 
मै साइट पर गया . मुआवना किया . और कुछ समय बाद डिपार्टमेंट के ऑफिस गया . इस काम के लिए नियुक्त ज्युनिअर इंजिनिअर थे . मैने साइट की समस्या बताई . उन्होंने हाथ खडे कर दिए . खदान की खुदाई का काम एक सेमी गवर्नमेंट कंपनी कर रही थी . उनका नियंत्रण कंपनी के मायनिंग डिपार्टमेंट के हाथ में था . कंपनी मे मायनिंग डिपार्टमेंट और सिविल डिपार्टमेंट का रिश्ता सास - बहू का ! 
' आपकी सब बातें सही है ... लेकीन आपके सहकार्य के बिना यह काम नही हो सकता .. मै आया हूं और काम प्रारंभ कर के ही जाऊंगा... धन्यवाद .' मैने कहा . 
कैम्प ऑफिस आ कर work chart बनाया . सुपरवाइझर को सुबह से शाम तक कितनी बार और कितने समय के लिए मिट्टी के डिब्बे आते है , इसका निरिक्षण करने के लिए कहा . साइट इंजिनिअर को raft और wall steel की मेजरमेंट निकालने के लिए कहा . ठेकेदार को बुला कर कंक्रिट मिक्सर मशीन उचित जगह पर शिफ्ट करने लगाया . Steel ठेकेदार को लोहा सीधा करने बताया . शटरिंग ठेकेदार को शटरिंग की सफाई और मेकिंग के लिए बोला . 
कैम्प में आज थोडी रौनक लग रही थी . मुझे नींद नही आ रही थी . मिट्टी ढोने वाले डिब्बे , पटरी की खडखड की आवाज दिमाग मे हथौडे के माफ़िक़ गूॅंज रहे थे . 
तभी मंदरहा की थाप सुनाई दी . 
मजदूर के कैम्प के आगे अलाव के चारों ओर मजदूर बैठे थे . एक मंदरहा बजाने लगा . बाकी कुछ मजदूर छत्तीसगढी लोकगीत गाने लगे ....
खुनुर खुनुर सुर में बाजे , चुटकी चटक बोले रे...
बैरी पैरी ल छी , बैरी पैरी ल चिटको
सरम नइ लागे , पैरी ल चिटको
सरम नइ लागे , खुनुर खुनुर सुर में बाजे.....

रुनझुन रुनझुन सुनगुन सुनगुन
थिरक थिरक के बोले , थिरक थिरक के बोले
रुनझुन रुनझुन सुनगुन सुनगुन
थिरक थिरक के बोले , थिरक थिरक के बोले
मांदर  थाप थाप सुन नाचे , मांदर थाप
मांदर थाप थाप सुन नाचे , मांदर थाप
नवरस नवरंग घोले रे बैरी पैरी ल छी
खुनुर खुनुर सुर में बाजे.. खुनुर खुनुर....

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर