निर्माण : भाग १३
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खदान के उपरी मुंहाने पर सेंटर लाईन और लेवल की मार्किंग थी . और इस मार्किंग के ऊपर से पटरी जा रही थी . मैने कुछ सोचा और साइट इंजिनिअर को बुलाया . थिअओडोलाइट , रेंजिंग रॉड , स्टाफ , पेंट , टेप साइट पर लाने को कहा . पटरी के नीचे के सेंटर प्वाइंट को दोनों तरफ १.५ मीटर शिफ्ट किया . थिओडोलाइट से ९० ° पर मार्किंग की , और पेंट से पटरी के दोनों तरफ लाइन खिंची . गणन कर के , उस लाइन से RCC box का outer मार्क किया .
' सर , यह बात मेरे दिमाग मे ही नही आई . ' साइट इंजिनिअर ने कहा .
' कोई बात नहीं.. ठेकेदार को बुलाओ . ' मैने कहा .
सब साइट पर आए . उन्हें समझा दिया और मै नाश्ता करने गया .
' दो दिन में raft का लोहा बांधना है ... तीसरे दिन कंक्रिटिंग करना है... समझे ? ' मैने ठेकेदार और साइट इंजिनिअर से कहा .
' दो दिन में कैसे होगा साहब ... कम से कम ५ दिन तो लगेंगे..' ठेकेदार ने कहा .
' नही , इतना समय नही है मेरे पास . दिन रात काम करना होगा . ढलाई ( casting ) काम करने वाले ठेकेदार के आदमी खाली है , उन्हें भी काम पर लगाओ . ' मैने कहा .
' उन मजदूरों को लोहे का काम नही आता . और उनका ठेकेदार अपने मजदूर देगा ? ' लोहा ठेकेदार ने कहा .
' उन्हें लोहा ढुलाई और बाइंडिंग के काम में लगाओ . बाइंडिंग का काम समझा दो , सब हो जाएगा . उनके ठेकेदार से मै बात करता हूं . ' मैने कहा .
सुपरवाइझर को ठेकेदार को बुलाने के लिए कहा . ठेकेदार को सारी बातें समझायी .
अब युद्ध स्तर पर काम चल रहा था . ५ महिला मजदूर को केवल नाश्ता , चाय , खाना बनाने के लिए कहा . साइट पर काम और उत्साह की बयार बह रही थी . काम की गति देख कर डिपार्टमेंट के इंजिनिअर खूश हुएं !
' सर , काया पलट दी आप ने साइट की ! यह साइट आप ही पूर्ण किजीए..' डिपार्टमेंट के इंजिनिअर ने कहा .
' ऐसा कुछ नहीं सर , हमारा काम ही है यह . बाकी साइट भी देखनी होती है , इस लिए एक साइट पर एक हफ्ते से ज्यादा नही रुक सकता , लेकीन आना - जाना रहेगा . आप को काम में कोई शिकायत का मौका नही मिलेगा . ' मैने कहा .
आखिर RCC ढलाई का दिन आया . पूजा पाठ के बाद कंक्रिट मिक्सर मशिन की आवाज जंगल मे गूॅंज रही थी , साथ में मजदूरों का कोलाहल भी ! आज साइट पर उत्सव का माहोल था . सिमेंट लदे दो ट्रक साइट पर खडे थे . दुसरे साइट से मैने और एक मिक्सर मशिन बुलाई थी . खदान की दोनों बाजू से कंक्रिट ढलाई का काम चल रहा था .
दो दिन और दो रात में raft casting का काम पूर्ण हुआ . आगे का काम समझा कर मै जीप मे बैठा . सभी मजदूर , ठेकेदार , स्टाफ जीप को घेरे खडे थे .
' मै हर हफ्ते visit करूंगा ... दिल से काम करो...' मैने कहा .
' जरूर आते रहना साहब...' सभी कह रहे थे...
' चलो..' मैने ड्रायव्हर को कहा .
धूल मिट्टी उडाते हुंए जीप जंगल के रास्ते निकल पडी . ( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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