यादें _ सवाल की !
भाग - १०
Hindi language _ हिंदी भाषा
हर कोई अपने - अपने तरीके से , ढंग से जीवन यापन करता है . जीवन के हर पडाव पर जीवन यापन का परिमाण और सोच भिन्न भिन्न होती है . बालक अबोध होते है . विद्यार्थी जीवन पढ़ाई में व्यतीत होता है . फिर करीअर की दौड शुरू ! यह दौड कैसे न कैसे पूर्ण करने पर विवाह... बच्चे ... बच्चों की शिक्षा - दिक्षा.. उनका करीअर.. उनका विवाह.. नाती - पोती... जीवन का संध्या काल !
यहॉं जीवन प्रवाह के हर मोड के अलग ढंग - अलग रंग !
लेकीन _ इस जीवन प्रवाह में एक चिरपरिचित सवाल हर परिचित से आता है आपकी ओर ! लेकीन जीवन अंत तक इस चिरपरिचित सवाल का सही सही जवाब क्या दे , यह समझ में नहीं आता है ! और यह सवाल है , " और , क्या चल रहा है ? "
यह सवाल औपचारिकता , आत्मियता , सद्भावना और दुर्भावना के तडके के साथ प्रस्तुत होता है . उसका हल्का सा स्वाद भी महसूस होता है . पर जवाब तो औपचारिक ही देना है . नही तो अनचाही डिग्री और खिताब गले पडने को तैयार !
विद्यार्थिओं से यह सवाल टकराये तो , ' पढाई ' यह जवाब देना अटपटा लगता है.. गरदन झुकाए रुक रुक कर जवाब आता है , ' जी , स्कूल / कालेज चल रहा है .'
बेरोजगार को यह सवाल इतना चुभता है की , उनका दर्द वही जानते है . चलने - चलाने की कोशिश जारी है भाई ! अब ऐसी स्थिती में क्या जवाब दे ? आप क्या सोच रहे है , इसे प्रमाणित करने का रास्ता नही . और सोच या प्रयास को , इस सवाल के जवाब में अपेक्षित नही ....
नौकरी या व्यवसाय / व्यापार में करीअर बनाने के बाद झिझकते ही सही , लेकीन जवाब आता है _ बस् , चल रहा है...
विवाहित स्त्री - पुरुष इस सवाल के जवाब में , अपनी बात छोड कर बच्चों का हालचाल बताते है... यहॉं से मै गुप्त / लुप्त हो जाता है . जो भी चल रहा है _ वह बच्चों का ही चल रहा है ! और आगे इस सवाल के जवाब में बच्चों के विस्तारित परिवार का चलना आता है .
' और , क्या चल रहा है ? ' इस सवाल की बडी महिमा है . हर घर में विराजमान छोटे screen ( TV ) की विज्ञापन दुनिया में भी इस सवाल का वाणिज्यिक उपयोग हुआ है . याद आया वह विज्ञापन .... तणाव भरी सीमा पर तैनात दो फौजी.. एक फौजी का दूसरे फौजी को अलग तडके में यही सवाल पूछता है , " और, क्या चल रहा है ? "
_ तो दोस्तों , क्या चल रहा है ? यह सवाल जिंदगी भर आपसे टकराता रहेगा . अब मैने आपको आगाह कर दिया हैं . जनाब , तैयार रखिए अपने सतरंगी - अतरंगी जवाब हर तडके के जवाब के लिए !
_ और , क्या चल रहा है ???????
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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