Sunday, August 14, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ९. Hindi language _ हिंदी भाषा

यादें _ सवाल की !
भाग - ९
Hindi language _ हिंदी भाषा

कुछ सवाल मीठे , प्यारे , भोले होते है... जवाब देना भी जरूरी होता है.. क्यों की सवाल सपनों की दुनिया से आते है अपेक्षाओं के बादल होते हुए... गलत जवाब से बादल गरज सकते है.. बरस सकते हैं या फट भी सकते है... !! 
संचार कौशल , समयसूचकता , दूरदर्शीता , वक्त की नजाकत भॉंपने की क्षमता , मृदूता , स्तुति करने और सफेद झूठ बोलने की क्षमता , तर्क शक्ति के बलबूते ऐसे सवाल की वैतरनी पार कर सकते है...
भूमिका बहुत हुई.. असल मुद्दा है , कौनसा सवाल ! 
तो सवाल हाजिर है _ 
' कैसे लग रही हूं मै ? '
हमारे पास ३ degrees की सीमित अभिव्यक्ती होती  है _ positive , comparative & superlative ! 
सवाल कर्ता के खजाने और अपेक्षा में कम से कम ३० !!!
हमारी ऑंखें तीन चार रंग देख कर भी पढ़ाई अनुसार सात रंग का इंद्रधनुष्य मानते है . सवाल कर्ता उसी इंद्रधनुष्य 🌈 में ७० रंग देखने की क्षमता रखता है !!! ३ primary और ‌३ secondary रंग तक हमारा ज्ञान और चक्षु क्षमता !! सवाल कर्ता का रंग ज्ञान अनंत !!!!!!
सवाल जवाब का यह मुकाबला एकतरफा है . लेकीन अभ्यास से इस की बीच की दूरी को थोडाबहुत कम कर सकते है . जवाब देते समय अचरज भरी body language और बोलने में उद्गार वाचक शब्दों का आधिक्य अनिवार्य है . 
अब आप ने सवाल कर्ता को जान लिया होगा !
यह चक्रव्यूह सा सवाल आता है बहन , सखी , सहकर्मी और अर्धांगिनी से...
सबसे घातक सवाल अर्धांगिनी का मानते है... 
मेरी राय पूछ रहे हो...  जाओ , मैने नही बताना !
व्यंग की बात छोड दे तो , सभी अच्छी ही लगती है . हर भेष में.. हर रूप में ! 
Degree पूछ रहे हो.. superlative से भी ऊपर !!!!!! ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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