Wednesday, November 23, 2022

अजब गजब - ९९ : जलालखेडो ( किल्लो ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ९९ : जलालखेडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति 
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नागपुर पासीन ८० कि.मी. दूर काटोल क आघ नरखेड तहसील म स जलालखेडो . मालवो आन् दक्खन क मंझार या जागा खास स . येनअ मोक्का क जागा प वरधा आन् जाम्ब नदी को संगम स . या संगम की जागा हेर कन् इ.स. ४०० क आघ पासअ वाकाटक राज्या न यहान भुईकोट किल्लो बांध्यो . किल्ला की मांडन असी क वो क मोक्का पर तीन गाव को तिरकोन बनस . तिरकोन क तीन कोन बिंदू पर तीन गाव _ १. आमनेर २. मुक्तापुर ३. जलालखेडो . ( तेकन च इतिहास म कयी जागा प येला ' आमनेर ' किल्लो बी कव्हस . ) 
* आबअ येनअ किल्ला की ' सोमेस्वर देवस्थान किल्लो ' असी वरख पडीस . 
* इतिहास : # इ.स. ४०० क आसपास वाकाटक राज्या न इ किल्लो बांध्ये . 
# वाकाटक राज क बाद रास्ट्रकूट राज आयो .
# इ.स. १२०० वरी यहान राजो सोमेस्वर तिरिभुवमल राज करत होतो . 
# सोमेस्वर राज्या क बास्त देवगिरी क यादव राज्या क हात खलतअ इ किल्लो आयो . 
# मुघल का मांडलिक देवगढ का गोंड राज्याना को राज आयो . 
# अल्लाउद्दिन खिलजी पासीन यहान मुसलमानी राज आयो . ( जलालखेडा को नाव पह्यलअ दुसरो होयेन , मुसलमानी राज म येनअ गाव को नाव जलालखेडो धरे होयेन , असो म ला वाटस . ) 
# इ.स. १७३८ म नागपुर को राज्यो रघुजी भोसले न गोंड राज्या ला हाराय कन् इ किल्लो जित्यो आन् तब पासीन यहान मराठी राज सुरू भयो . 
# इ.स. १८२० म यहान अंगरेजी अंमल चालू भयो , ती इ.स. १९४७ वरी !
# इ.स. १९७० म यहान क ' सोमेस्वर देऊर ' को नवो बांधकाम भयो . 
# आमनेर ( जलालखेडा ) को किल्लो आन् भोयर : इ किल्लो मालवो आन् दक्खन क मंझार स . बेपार पानी येनअ रस्ता कन् होत होतो . मुसलमानी राज क कह्यर म येनअ किल्ला न भोयर वंस ला आसरो देये . येनअ किल्ला क दक्सीन बाजू किथीन भोयर समाज का गावना चालू होस ती सीधा कारंजा - भोरगड - जामगड वरी . गोंड राज आन् भोसला राज क बेरा म भोयर समाज येनअ पट्टी म बसे . तेकन भोयर संस्कृति म ' आमनेर - जलालखेडा किल्ला ' को महत्त्व बेगरो च स . येनअ किल्ला क फऊज म काम कऱ्यो आन् वकी भेटी जमीन पर कास्तकारी करी . कयी भोयर लोगना ला मालगुजारी बी भेटी . 

* रचना :
# वाकाटक राज्या क इंजिनियर न या भौगोलिक , आर्थिक आन् बचाव क हिसाब कन् मोक्का की जागा किल्ला साठी खोजी . 
वरधा - जाम्ब नदी क संगम कन् दुय आंग को बचाव आपरंग च होतो . वून न संगम पर की २५ येकड  जागा हिंद्यानी आन् येक मोठ्ठो नालो ( खंदक ) खंद कन् दुय नदीना जोड देयी . आबअ या २५ येकड की जागा येक असो टापू बन्यो , जेकअ चारी आंग नदी बाहात होती . बचाव को येतरो पुख्ता इंतजाम भयो . सूर्व्यामुखी किल्ला को मुख्य दरुजो स . दरुजा पर गनेसपट्टी दिसस . बाकी साजरपन सिमिट  पलस्तर क खलअ दब गयेस . येनअ दरुजा पासीन दुय बाजू किल्ला की दीवाल ( भीत ) नदी क काठ काठ कन् बनीस . येनअ दीवाल म ८ बुरुज स . बुरुज ५५ हाथ उच्ची आन् २० हाथ चवडा स .  बुरुज ला कारअ पास्यानी दगड कन् बांध्येस . हर दगड म खोबन स , जेमअ लोहा की पट्टी स . या पट्टी वरतअ क आन् खलतअ क दगुड ला कप्पी पकड कन् धरस . येतरअ बरस क पानी - बाढ की मार झेल कन् बी वूभो रह्यो इ बुरुज मानुस की मार नी झेल सक्या ! येनअ किल्ला म लोग खेती करन लाग्या आन् इतिहास क सोना क पत्ता कातर - कातर कन् खाय गया . सारो किल्लो बरबाद कर डायेस . 
* किल्ला पर सोमेस्वर देऊर क आघ हत्तीखानो होतो ... मोठो बांध्यो तलाव होतो , वो ला सिमिट कन् मयदान बनायेस . बालेकिल्ला पर चेंगन क बेरा डाखअ हाथ प भीर दिसस . नान्ह मुंडा की येनअ भीर ला आब बी पानी स . यासीन पानी की पाइपलाइन दिसस , ज्या खपरैल क पाइप कन बनीती . 
* सोमेस्वर महादेव को देऊर जुनोच होयेन पर आब जी सिवलिंग दिसस ती चिमाजी अप्पा भोसला न नेपाल परीन ल्याईती , असी मान्यता स . पुरानअ जमाना म यहान सोना को सिवलिंग होतो , असी बी मान्यता स .
* यहान क काली मंदिर को दिवो आस्टी गाव परीन दिसस . 

# उत्सव : नवरातरी , रिसीपंचमी , सरावन मह्यनो , महासिवरातरी ला यहान मेलो भरस . 
* इलाखा का लोगना यहान च दसवो करस . 

_ भोयर की कर्मभूमी रही येनअ किल्ला आन् सोमेस्वर महादेव ला नमन !!

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, November 17, 2022

तरंग ( मराठी कविता ). Marathi language _ मराठी भाषा

तरंग
Marathi language _ मराठी भाषा

हिरण्यगर्भाची अक्षय्य उर्जा
लेवून पंखात
घेतली भरारी
नील आकाशात
शशांक वर्तुळ
दृष्टीपथात
विचरतो आहे मन विहंग ।

शांत अथांग सागराची चकाकी
घेऊन डोळ्यात
नवीन उभारी
रोमारोमात
आकाशगंगा
पूर्ण कह्यात
लहरती आहे जल तरंग ।

वास्तवाची दाहक सत्यं
रेखून डोक्यात
आणी शिसारी
घन अंधारात
केशरी उषा
गुलाबी स्वप्नात
विखुरली आहे रात्र अभंग ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Saturday, November 12, 2022

आवर्त ( मराठी कविता ). Marathi language _ मराठी भाषा

आवर्त
Marathi language _ मराठी भाषा

झळाळते मृगजळ
झाकोळते भोळे डोळे
चित्त पंकमय तळे
कसा यशस्वी मी पार्थ ?

गुंफून हावरा कोळी
काळे पातकाचे जाळे
आत स्वतः तळमळे
कसा सफळ मी सार्थ ?

नात्या - नात्यांमध्ये जाळ
सत्य - असत्य हे खुळे
रक्त एकच साकळे
कसा मनी धारातीर्थ ?

अपुरे हे गंगाजळ
अधांतरी दीप जळे
चहुबाजू ढग काळे
कसा पावन मी तीर्थ ?

झाले स्वप्नांचे आभाळ
छळे सौदामिनी जाळे
मार्ग दिशांना ना कळे
कसा भेदू मी आवर्त ?

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Thursday, November 10, 2022

किसना सुदामा. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

किसना सुदामा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लिख्या पढ्या संग संग
अवंतिका महाधामा
गुरू सांदिपनी का चेला
दोस्त किसना सुदामा ।१।

देव किसना की रानी
रुखमनी सत्यभामा
राजो येनअ दुनिया को
दोस्त किसना सुदामा ।२।

नांदो लगायो सुसीला
जावो दवारका धामा
संग देया दही पोहा
दोस्त किसना सुदामा ।३।

धरी पयदल बाट
कलपी अंतरातमा
गयो कोचम सोबती
दोस्त किसना सुदामा ।४।

खायो पोहो परसाद
नहीं रिस्ता ला उपमा
करी वरसार देव
दोस्त किसना सुदामा ।५।

भयो अखजी क दिन
चमत्कार अनुपमा
मांग्या बिगर किरपा
दोस्त किसना सुदामा ।६।

असो दोसती को नातो
भारी न्यारी च महिमा
गंगा वानी निरमल
दोस्त किसना सुदामा ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

Tuesday, November 8, 2022

निर्माण : भाग - १८

निर्माण : भाग - १८
Hindi language _ हिंदी भाषा

आज सुबह कुछ धूप खिली थी.. सूर्य भगवान के दर्शन तो नहीं हो रहे थे , पर उजाला जरूर था.. बारिश भी थम गयी थी.. हल्की बूॅंदा बॉंदी हो रही थी.. सब ने राहत की सॉंस ली . बाढ़ का जलस्तर भी धीरे धीरे कम होने लगा . खदान के सडक का पुलिया दिख रहा था . हालांकि अभी भी पानी उस के ऊपर से बह रहा था.. हमारे ड्रायव्हर ने पानी में जीप उतारी और साइट की ओर आने लगा . साइट आ कर पहले उस ने रकम मेरे हवाले की.. मैने कुछ रुपये अपने पास रखें और बाकी अकाऊंटंट को सौंपे.. 
मै ड्रायव्हर के साथ शहर आया , जहॉं मजदूर अस्पताल में भर्ति था . डॉक्टर से मिल कर हिसाब किताब किया . कुछ रकम मजदूर की पत्नी को दी . तब तक ड्रायव्हर एक टैक्सी ले कर आया . मजदूर और उस के परिवार को उन के गांव रवाना किया . फिर मेरी क्लासमेट के घर जा कर उन के पैसे दिये . 
' चलो , आता हूं.. बहुत बहुत धन्यवाद अंकल.. ' मैने क्लासमेट के पापा से कहा . 
' अरे बेटा , खाना खा कर जाओ.. बडी मुसीबत से बचे हो आप लोग.. और कोई कारण से आना होता है.. ना मत कहो..' अंकल ने आग्रह किया..
खाना खा कर हम साइट पर आये . सभी ठेकेदारों का हिसाब किया और पेमेंट की . सभी मजदूर नदी की बाढ़ देखने गये थे . 
हम भी वहॉं पहुंचे.. दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें थी . सडक किनारे अस्थाई रेस्टॉरंट खुल गये थे . यहॉं तो मेले का माहौल बन गया था ! 
नदी किनारे  उॅंचे उॅंचे बबूल के पेडों पर कुछ मृत तो कुछ मुर्छित सांप लटके थे.. बाढ़ के रौद्र रूप को देख कर बदन में झुरझुरी - सी दौड गयी.. जीप बाढ़ के पानी से नजदीक ही थी.. बाढ़ का मंजर देख ही रहे थे की सुपरवाइझर चीखा . 
' साहब , यहॉं सांप है..' उसने कहा . 
' कहॉं है ?' मैने पूछा . 
' जीप के टायर पर..' उस ने दूर से दिखाते हुए कहा . 
' ये कब आया ? ' ड्रायव्हर ने आश्चर्य से कहा . 
अब जीप के पास भीड इकठ्ठा हो गयी . बेचारे उस सांप में ताकत ही नही बची थी.. मजदूरों ने लंबी लंबी लकडियों से उसे दूर फेंका . 
हम वापस साइट आये . 
कल यहॉं से निकलना था . 
' मै परसो ट्रक भेजूगा.. सारा सामान लोड करना . बचेगा तो और ट्रक बुलाना . ट्रैक्टर के साथ पहले टैंकर भेज दो और बाद मे मिक्सर मशीन भेजना . ' मैने कहा . 
' ठीक है साहब..' साइट इंजिनिअर ने कहा . 
' और जिन्हें घर जाना है , वे अभी छुट्टी ले लो.. कौन कितने दिन के लिए जा रहा है _ यह अभी बताना..' मैने कहा . 
_ एक साइट का काम इस तरह खत्म हुआ था... !!! खौफ और हादसों से...!! ( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर