अजब गजब - ९९ : जलालखेडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
नागपुर पासीन ८० कि.मी. दूर काटोल क आघ नरखेड तहसील म स जलालखेडो . मालवो आन् दक्खन क मंझार या जागा खास स . येनअ मोक्का क जागा प वरधा आन् जाम्ब नदी को संगम स . या संगम की जागा हेर कन् इ.स. ४०० क आघ पासअ वाकाटक राज्या न यहान भुईकोट किल्लो बांध्यो . किल्ला की मांडन असी क वो क मोक्का पर तीन गाव को तिरकोन बनस . तिरकोन क तीन कोन बिंदू पर तीन गाव _ १. आमनेर २. मुक्तापुर ३. जलालखेडो . ( तेकन च इतिहास म कयी जागा प येला ' आमनेर ' किल्लो बी कव्हस . )
* आबअ येनअ किल्ला की ' सोमेस्वर देवस्थान किल्लो ' असी वरख पडीस .
* इतिहास : # इ.स. ४०० क आसपास वाकाटक राज्या न इ किल्लो बांध्ये .
# वाकाटक राज क बाद रास्ट्रकूट राज आयो .
# इ.स. १२०० वरी यहान राजो सोमेस्वर तिरिभुवमल राज करत होतो .
# सोमेस्वर राज्या क बास्त देवगिरी क यादव राज्या क हात खलतअ इ किल्लो आयो .
# मुघल का मांडलिक देवगढ का गोंड राज्याना को राज आयो .
# अल्लाउद्दिन खिलजी पासीन यहान मुसलमानी राज आयो . ( जलालखेडा को नाव पह्यलअ दुसरो होयेन , मुसलमानी राज म येनअ गाव को नाव जलालखेडो धरे होयेन , असो म ला वाटस . )
# इ.स. १७३८ म नागपुर को राज्यो रघुजी भोसले न गोंड राज्या ला हाराय कन् इ किल्लो जित्यो आन् तब पासीन यहान मराठी राज सुरू भयो .
# इ.स. १८२० म यहान अंगरेजी अंमल चालू भयो , ती इ.स. १९४७ वरी !
# इ.स. १९७० म यहान क ' सोमेस्वर देऊर ' को नवो बांधकाम भयो .
# आमनेर ( जलालखेडा ) को किल्लो आन् भोयर : इ किल्लो मालवो आन् दक्खन क मंझार स . बेपार पानी येनअ रस्ता कन् होत होतो . मुसलमानी राज क कह्यर म येनअ किल्ला न भोयर वंस ला आसरो देये . येनअ किल्ला क दक्सीन बाजू किथीन भोयर समाज का गावना चालू होस ती सीधा कारंजा - भोरगड - जामगड वरी . गोंड राज आन् भोसला राज क बेरा म भोयर समाज येनअ पट्टी म बसे . तेकन भोयर संस्कृति म ' आमनेर - जलालखेडा किल्ला ' को महत्त्व बेगरो च स . येनअ किल्ला क फऊज म काम कऱ्यो आन् वकी भेटी जमीन पर कास्तकारी करी . कयी भोयर लोगना ला मालगुजारी बी भेटी .
* रचना :
# वाकाटक राज्या क इंजिनियर न या भौगोलिक , आर्थिक आन् बचाव क हिसाब कन् मोक्का की जागा किल्ला साठी खोजी .
वरधा - जाम्ब नदी क संगम कन् दुय आंग को बचाव आपरंग च होतो . वून न संगम पर की २५ येकड जागा हिंद्यानी आन् येक मोठ्ठो नालो ( खंदक ) खंद कन् दुय नदीना जोड देयी . आबअ या २५ येकड की जागा येक असो टापू बन्यो , जेकअ चारी आंग नदी बाहात होती . बचाव को येतरो पुख्ता इंतजाम भयो . सूर्व्यामुखी किल्ला को मुख्य दरुजो स . दरुजा पर गनेसपट्टी दिसस . बाकी साजरपन सिमिट पलस्तर क खलअ दब गयेस . येनअ दरुजा पासीन दुय बाजू किल्ला की दीवाल ( भीत ) नदी क काठ काठ कन् बनीस . येनअ दीवाल म ८ बुरुज स . बुरुज ५५ हाथ उच्ची आन् २० हाथ चवडा स . बुरुज ला कारअ पास्यानी दगड कन् बांध्येस . हर दगड म खोबन स , जेमअ लोहा की पट्टी स . या पट्टी वरतअ क आन् खलतअ क दगुड ला कप्पी पकड कन् धरस . येतरअ बरस क पानी - बाढ की मार झेल कन् बी वूभो रह्यो इ बुरुज मानुस की मार नी झेल सक्या ! येनअ किल्ला म लोग खेती करन लाग्या आन् इतिहास क सोना क पत्ता कातर - कातर कन् खाय गया . सारो किल्लो बरबाद कर डायेस .
* किल्ला पर सोमेस्वर देऊर क आघ हत्तीखानो होतो ... मोठो बांध्यो तलाव होतो , वो ला सिमिट कन् मयदान बनायेस . बालेकिल्ला पर चेंगन क बेरा डाखअ हाथ प भीर दिसस . नान्ह मुंडा की येनअ भीर ला आब बी पानी स . यासीन पानी की पाइपलाइन दिसस , ज्या खपरैल क पाइप कन बनीती .
* सोमेस्वर महादेव को देऊर जुनोच होयेन पर आब जी सिवलिंग दिसस ती चिमाजी अप्पा भोसला न नेपाल परीन ल्याईती , असी मान्यता स . पुरानअ जमाना म यहान सोना को सिवलिंग होतो , असी बी मान्यता स .
* यहान क काली मंदिर को दिवो आस्टी गाव परीन दिसस .
# उत्सव : नवरातरी , रिसीपंचमी , सरावन मह्यनो , महासिवरातरी ला यहान मेलो भरस .
* इलाखा का लोगना यहान च दसवो करस .
_ भोयर की कर्मभूमी रही येनअ किल्ला आन् सोमेस्वर महादेव ला नमन !!
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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