निर्माण : भाग - १८
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आज सुबह कुछ धूप खिली थी.. सूर्य भगवान के दर्शन तो नहीं हो रहे थे , पर उजाला जरूर था.. बारिश भी थम गयी थी.. हल्की बूॅंदा बॉंदी हो रही थी.. सब ने राहत की सॉंस ली . बाढ़ का जलस्तर भी धीरे धीरे कम होने लगा . खदान के सडक का पुलिया दिख रहा था . हालांकि अभी भी पानी उस के ऊपर से बह रहा था.. हमारे ड्रायव्हर ने पानी में जीप उतारी और साइट की ओर आने लगा . साइट आ कर पहले उस ने रकम मेरे हवाले की.. मैने कुछ रुपये अपने पास रखें और बाकी अकाऊंटंट को सौंपे..
मै ड्रायव्हर के साथ शहर आया , जहॉं मजदूर अस्पताल में भर्ति था . डॉक्टर से मिल कर हिसाब किताब किया . कुछ रकम मजदूर की पत्नी को दी . तब तक ड्रायव्हर एक टैक्सी ले कर आया . मजदूर और उस के परिवार को उन के गांव रवाना किया . फिर मेरी क्लासमेट के घर जा कर उन के पैसे दिये .
' चलो , आता हूं.. बहुत बहुत धन्यवाद अंकल.. ' मैने क्लासमेट के पापा से कहा .
' अरे बेटा , खाना खा कर जाओ.. बडी मुसीबत से बचे हो आप लोग.. और कोई कारण से आना होता है.. ना मत कहो..' अंकल ने आग्रह किया..
खाना खा कर हम साइट पर आये . सभी ठेकेदारों का हिसाब किया और पेमेंट की . सभी मजदूर नदी की बाढ़ देखने गये थे .
हम भी वहॉं पहुंचे.. दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें थी . सडक किनारे अस्थाई रेस्टॉरंट खुल गये थे . यहॉं तो मेले का माहौल बन गया था !
नदी किनारे उॅंचे उॅंचे बबूल के पेडों पर कुछ मृत तो कुछ मुर्छित सांप लटके थे.. बाढ़ के रौद्र रूप को देख कर बदन में झुरझुरी - सी दौड गयी.. जीप बाढ़ के पानी से नजदीक ही थी.. बाढ़ का मंजर देख ही रहे थे की सुपरवाइझर चीखा .
' साहब , यहॉं सांप है..' उसने कहा .
' कहॉं है ?' मैने पूछा .
' जीप के टायर पर..' उस ने दूर से दिखाते हुए कहा .
' ये कब आया ? ' ड्रायव्हर ने आश्चर्य से कहा .
अब जीप के पास भीड इकठ्ठा हो गयी . बेचारे उस सांप में ताकत ही नही बची थी.. मजदूरों ने लंबी लंबी लकडियों से उसे दूर फेंका .
हम वापस साइट आये .
कल यहॉं से निकलना था .
' मै परसो ट्रक भेजूगा.. सारा सामान लोड करना . बचेगा तो और ट्रक बुलाना . ट्रैक्टर के साथ पहले टैंकर भेज दो और बाद मे मिक्सर मशीन भेजना . ' मैने कहा .
' ठीक है साहब..' साइट इंजिनिअर ने कहा .
' और जिन्हें घर जाना है , वे अभी छुट्टी ले लो.. कौन कितने दिन के लिए जा रहा है _ यह अभी बताना..' मैने कहा .
_ एक साइट का काम इस तरह खत्म हुआ था... !!! खौफ और हादसों से...!! ( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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