Wednesday, April 14, 2021

अजब गजब - ५७ : हिंदू स्याही. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ५७ : हिंदू स्याही
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महाभारत काल क पह्यलऽ पासिन त ७ व सदी पावतर अफगानिस्तान भारत देस ( हिंदू राज ) को भाग होतो . १७ व सदी पावतर ' अफगानिस्तान ' नाव को देस च नी होतो . पुरानऽ जमाना पासिन वोला आर्याना , आर्या नुम्र वीजू , पख्तिया , खुरासान , पश्तूनख्वाह , रोह येनऽ नाव कन् वरखत होता , जेमऽ गांधार , कम्बोज , कुंभा , वर्नु , सुवास्तु असा इलाखा होता . 
गांधार क राजा सुबल की पोटी गांधारी , व्याकरणाचार्य पाणिनी , गुरू गोरखनाथ यहान का च होय . 
२६ मई १७३९ म दिल्ली को बादस्या अकबर न इराण क नादिरस्या ला इ इलाखो देयो . तब पासिन वको नाव ' अफगानिस्तान ' पड्यो . 
काबुलीस्तान अन् गांधार क इलाखा ला अफगानिस्तान कोस . तीसरऽ सदी पावतर यहान कुषान वंस को राज होतो . येनऽ वंस क पतन क बाद काबुलस्याही राज आये . ( इ.स. ५६५ - ८७९ ) . येला तुरकस्याही बी कोस . तुरकस्याही को राजो लगर्तुमान ला हारायकन काबुल म इ.स. ८७९ म  हिंदू स्याही राज की थापना भयी . लगर्तुमान को बामन मंत्री कल्लार न इ इतिहास रचेतो . यकी जानकारी ' राज तरंगिनी ' म सापडस . 
हिंदू स्याही राज की राजधानी काबुल , कपिसा , उदभंदपुर , हुंद , पुरुषपुर ( पेशावर ) म होती . 
हिंदू स्याही क सिक्का प बयील , हत्ती , घोडसवार , भगवान सिव जी को ठप्पो रवत होतो . 
हिंदू स्याही म ग्यान सिकस्यन का तकसिला , कटासराज अन् शारदापीठ इ तीन जगपरसिध्द ठिकान होता . ' शारदा लिपी ' नाव की बेगरी लिपी होती . पुरऽ राज म मोठमोठा देऊरना बी होता . नमक कोह म साकेसर परबत सबसिन उच्ची स . वहान को अंब मंदिर परसिध्द स . दुय नंबर क उच्ची पहाडी प इ.स. पह्यलऽ १०० बरस पासिन गुरू गोरखनाथ को हिंदू मठ स , जेला टिल्ला जोगियां कोस . हिर - रांझा की कथा सबन ला च मालूम स. जब प्यार म रांझा परेस्यान भयो तब मन क स्यांती साठी वू टिल्ला जोगियां क गुरू गोरखनाथ मठ म आयो आन् वहान दिकस्या लेयी . स्वात घाटी म आब बी भगवान बिस्नु देव को देऊर स . पुरऽ हिंदू स्याही राज म देऊर च देऊर होता . 
हिंदू स्याही राज म आमू ( वक्षु ) , काबुल ( कुभा ) , कुर्रम ( कुरम ), रंगा ( रसा ) , गोमल ( गोमती ), हरिरुद ( हर्यू / सर्यू ) अन् सिंधू नदी होती . 
हिंदू स्याही राज म काबुल ( कुभा / कुहका ) , कंधार ( गंधार ) , बल्ख ( बाल्हिक ) , वाखान ( वोक्कान ) , बगराम ( कपिसा ) , पामीर ( मेरू ) , बदख्शां ( कम्बोज ) , पेशावर ( पुरुषपुर ) , स्वात ( सुवास्तु ) चारसद्दा ( पुष्कलावती ) इ इलाखा होता . 
* हिंदू स्याही वंस : 
- खिंगल ( ७ वी सदी )
- सुरेंद्र गिलगित का ( ६ - ७ वी सदी )
- कल्लार काबुल ( इ.स. ८९० - ८९५)
- कमलुक काबुल ( ८९५ - ९२१ )
- भीम _ कमलुक पुत्र ( ९२१ - ९६४)
- जयपाल ( ९६४ - १००१)
- आनंदपाल ( १००१- १०१०)
- तिरीलोचन ( १०१०- १०२१)
- भीमपाल - धरमपाल ( १०२१- १०२६)
७ व सदी पासिन ११ सदी पावतर हिंदू स्याही राज रह्ये...
मुहम्मद गजनवी संग जयपाल की लढाई भयी . येनऽ लढाई म जयपाल जी हाऱ्यो . हारन क बाद वून न अगनीसमाधी लेई . 
मुहम्मद गजनवी संग आनंदपाल की लढाई भयी . येमऽ राजो आनंदपाल जित्यो . 
हिंदू स्याही को आखरी राजो भीमपाल / धरमपाल मुहम्मद गजनवी संग हाऱ्यो आन् वून न अगनीसमाधी लेई . 

लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

No comments:

Post a Comment