Saturday, June 26, 2021

अजब गजब - ६७ : हडबू जी सांखला. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६७ : हडबूजी सांखला
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान म नागौर जिलो स . नागौर जवर च भूंडेल गाव का मेहराज सांखला जागिरदार होता . राजा मेहराज सांखला क घर ' हडबूजी ' न जलम लेयो . माय को नाव ' सौभाग ' . 
स्यंख की पूंजा करनीवाली पवार राजपूत की येक पाती ला ' सांखला ' कोस .  
मेहराज सांखला भाटी राणगदे क संग कोडमदे क लढाई म काम आयो . बाबा हडबू जी आपलो गाव भूंडेल ला सोडकन् ' हरभमजाळ ' म आया . बाबा हडबू जी को येक नाव ' हरभम ' बी स . जाळ / जाल येक परकार क झाड को नाव स . यहान आयकन् बाबा हडबू जी जाळ क झाड खलतऽ घोर तपस्या करी . तेकन येनऽ गाव / जागा को नाव ' हरभनजाळ पड्यो , आन् परसिध्द भयो ! 
जालौर गाव को नाव बी जाळ / जाल झाड परीन च पड्यो !
बाबा हडबू जी सगुन ( शकुन ) विचारक , दयालु , संत अन् रणबांकुरा होता . राजस्थान क परसिध्द बाबा रामदेव का बाबा हडबू जी मावस भाई होय . बाबा रामदेव क गुरू न बाबा हडबू जी ला गंडो बांध्यो . बाबा रामदेव अन् वून क गुरू क परभाव कन् बाबा हडबू जी न अवजार - हत्यार को त्याग कऱ्यो . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * राव जोधा जी क राज पर दुसरऽ राजा न कब्जो करेतो . राव जोधा जी इतऽ उतऽ सहारा साठी घूम रह्याता . येक दिन राव जोधा जी बाबा हडबू जी ला भेटन ला आया . बाबा हडबू जी न रात क खाना प राव जोधा जी संगच आपलो भासो ' जैसा भाटी ' ला बी बलायो . जैसा भाटी जैसलमेर को राजो रावल केहर क येक राजकुमार , कलिकरन को पोरग्यो होतो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला आसिरवाद देयो क , तुमारो राज तुमाला वापिस भेटेन . पर तुमी म्हरो भासो जैसा भाटी ला संग लेयकन् जावो . तुमाला वकी मदद होयेन . 
बाबा हडबू जी न जसो कह्येतो , वूसोच भयो . राव जोधा जी ला आपलो राजपाट भेट्यो . जोधपुर म जैसा भाटी को वून ला घाडो सहारो भेट्यो . 
बाबा हडबू जी न राव जोधा जी ला कट्यार देयीती . राव जोधा जी न बी बाबा हडबू जी ला बावन बीघा जमीन दान करी . येलाच ' बावनी जागीर ' कोस . बाबा हडबू जी न यहान ' बैंगहटी ' गाव बसाड्यो , जी जोधपुर जिला म स . बैंगहटी म बाबा हडबू जी को मुख्य देऊर स . पर येनऽ देऊर म बाबा हडबू जी क मूरती की पूंजा नी होत . यहान बाबा हडबू जी को मोठो गाडो स . येनऽ गाडा म बाजरो , कडबा अन् दुसरो अनाज लेकन बाबा हडबू जी गाव गाव क गरीबगुदाला बाटत होता . कोनी बी  मानूस , जनावर भुको नी निज्या पायजे , तेक साठी वूई येन गाडा कन् अनाज , चारो बाटत होता . वू गाडो आब बी देऊर म धरेस आन् वकीच पूंजा करस ! येन गाडा को नाव ' सिया ' स . यहान का पुजारी सांखला राजपूत स . 

* येक डाव बाबा हडबू जी दुसरऽ कितऽ गयाता . तबच वून क पोटी ला पोटी भयी . जोतिस न वोन पोटी ला असुभ सांगे . घरवाला न वोनऽ नानसऽ जीव ला जंगल म मरन साठी फेक्यो . बाबा हडबू जी जंगल मिनि घर कितऽ आय रह्याता तब वून ला पोटू क रोवन की आवाज आई . बाबा हडबू जी न वोला घर ल्यायो आन् रावळा म ( ठाकुर को जनाना आवास ) देयो . वोन पोटी ला देख कन् रावळा म कोहराम मच्यो . बाबा हडबू जी ला सारी करमकहानी मालुम भयी . बाबा हडबू जी न भविस्यबानी करी क , म्हरी नातीन ' राजरानी ' बनेन ! वून न आपलऽ नातीन को बिह्या राव जोधा को पोरग्यो ' राजकुमार सूजा ' संग कऱ्यो . राव जोधा जी क बास्त राजकुमार सूजा ( सुजान ) को राजतिलक भयो . अन् नातीन लिखमी ( लकसुमी ) राजरानी बनी . 

# बाबा हडबू जी को येक देऊर मंडोर ( जोधपुर ) म स , जहान बाबा हडबू जी की मुरती स . इ देऊर राजा अजितसिंह न वि.सं. १७७१ म बनायो . 

दूजा पीर सांखला हडबू , नही किसी के आया काबू ।
भूखों को भोजन पहुंचाता , उसे बांटने घर - घर जाता ।
उन के मंदिर में वह गाडा , पूजा करने जन - जन आता ।
सांखला हडबू लोक देवता , ' दयालुता ' जग आज सेवता ।।

( सहयोग : इंजि . जालमसिंह सोढा जी , जोधपुर )
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

4 comments:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी अभिनंदन

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  2. मुरलीघर टोपले पुणे

    सुरेश देशमुखजी को अभीनंदन करुसं कारण की भोयर संसक्रती चांगली लीखीस. आणखी पुन्हा अभीनंदन.

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    1. धन्यवाद मुरलीधर टोपले साहेब 🙏

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