Friday, April 1, 2022

डायरी - २०२२. पंडुक पक्षी - भाग १

डायरी - २०२२

पंडुक पक्षी - भाग १

आज सुबह सुबह बेसिन मे कचरे का ढ़ेर दिखा तो माथा ठनका . कौन यहॉं इन छोटी छोटी लकडियों को जमा करता होगा ? मैने वह फेंक दी . दोपहर मे इस बारे में बात की तो रहस्य से परदा उठा ! यह काम था पंडुक पक्षी का , जिसे भोरी भी कहते है . पंडुक यह कबूतर जैसा दिखने वाला छोटा सा पंछी . पंडुक को मराठी भाषा मे भोवरी कहते है . 
दोपहर को देखा तो डस्टबिन से वह कचरा गायब ! अरे , यह करिष्मा कैसे हुआ ! इधर उधर देखा तो राज खुल गया . ए.सी. के बाहर निकले पाइप पर रबड की स्पंजनुमा मोटी पाइप इन्सुलेशन के लिए लगाई थी , वहॉं पंडुक पक्षी ने अपना नया आशियाना बनाया था . बेतरतीब ढ़ंग से रखी छोटी छोटी लकडियों का वह उनका घोंसला था . ' अब यह कचरा , जो घोंसले मे तब्दिल हो चुका था , उसे नही निकालना है...' ऐसा मैने मन ही मन सोचा . 
शाम को घर आया तो देखा , एक पक्षी युगल हमारे घर दाखिल हो चुका था . उन्होंने अपनी छोटी सी दुनिया बना ली थी , ( बिना किराया दिए !) नन्हे जीव के आगमन के लिए ! एक पक्षी घोंसले मे ( यह मादा होगी .) और दुसरा लोहे की सीढीयों पर बैठा था . भूर्रऽऽऽ.... मेरी आवाज आते ही सीढीयों पर बैठा पक्षी उड गया . लेकीन घोंसले मे बैठा पक्षी हिम्मत से वही बैठा रहा . गर्दन टेढ़ी कर वह छोटी सी ऑंखों से मुझे देख रहा था...  मैने भी उसे छेड़ना उचित नही समझा . 
मैने स्टडी रुम मे जा कर ए.सी. ऑन किया और पढ़ने लगा . 
' खाना बन गया है , नीचे आओ...' किचन से आवाज आई . 
मैने टेरेस का बल्ब ऑफ किया... वह पक्षी अभी भी घोंसले मे बैठ कर मुझे घूर रहा था.... ( क्रमशः ) 

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