मांडवस ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
गयो कोरोना दयीत
आयी दादा मांडवस
देखो साल की आयीस
आज आखरी अवस ।
अवस क गरभ म
नवअ साल की जी आस
कठान म फुलारस
जसी जांभरी जवस ।
साजवनी मोह्यतूर
नवअ साल को दिवस
उम्मीद क तोरन ला
पत्ता आम्बा का च खास ।
माय धरती की पूंजा
दस्तूर का पाच तास
झूल पांघऱ्या बयील
राजा वानी झलारस ।
बखरवाही की घाई
तन मन म उल्लास
तकदीर की किरना
उब म जी तपावस ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
धन्यवाद जी 🙏
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