Thursday, March 31, 2022

मांडवस ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मांडवस ( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

गयो कोरोना दयीत
आयी दादा मांडवस
देखो साल की आयीस
आज आखरी अवस ।

अवस क गरभ म
नवअ साल की जी आस
कठान म फुलारस
जसी जांभरी जवस ।

साजवनी मोह्यतूर
नवअ साल को दिवस
उम्मीद क तोरन ला
पत्ता आम्बा का च खास ।

माय धरती की पूंजा
दस्तूर का पाच तास
झूल पांघऱ्या बयील
राजा वानी झलारस ।

बखरवाही की घाई
तन मन म उल्लास
तकदीर की किरना
उब म जी तपावस ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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