भारतीय रेल
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ना थकती कभी ना थमती
रेल हमारी सदा चलती
रोजगार का विशाल स्त्रोत
दिलों को ये दिलों से जोडती ।
देश के हर कोने को जोडे
यात्री को गंतव्य तक छोडे
रात - दिन अविराम दौडे
फर्ज से कभी मुंह ना मोडे ।
सामग्री , खनिज पहुंचाए
प्यासे के लिए ढ़ोती पानी
चैतन्य वाहिका भारत की
जनता की जीवनदायिनी ।
सेवा में लोहपथगामिनी
सुरक्षित सफर सुहाना
हर दिल अजीज दुलारी
गुनगुनाए कौमी गाना ।
कर्मचारी , अफसर तत्पर
हर मौसम में करते काम
रेल परिवार की सेवा को
देशवासी करते सलाम ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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