Friday, March 18, 2022

रंग धुड्डी को निरालो. ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रंग धुड्डी को निरालो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रंग धुड्डी को निरालो 
आयो मोसम रंगीलो
राधा संग कान्हा खेले
रुत बसंत को खेलो ।१।

रंग धुड्डी को निरालो
नान्हा मोठा को होहल्लो
हर आंगना म धुड्डी
रंगी गल्ली न मोहोल्लो ।२।

रंग धुड्डी को निरालो
इतअ उतअ भायी कल्लो
पोती गुलाल की लाली
तन मन चीप वोलो ।३।

रंग धुड्डी को निरालो
झगडो होरी म घालो
हासी खुसी मान पान
मन का दरुजा खोलो ।४।

रंग धुड्डी को निरालो
रंग म उम्मीद घोलो
बत्तासा सी गोड मीठी
बोली हिरदा की बोलो ।५। 

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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