Tuesday, March 22, 2022

पदर ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पदर ( भोयरी कविता ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय की माया बाप की छाया
भेटस त कदर नी होत
भारी पेहऱ्या कपडालत्ता
माय को त पदर नी होत ।१।

दुय बात समझदारी की
कान टोच्या गदर नी होत
आयक ले सुदा पन कन्
हाल दरबदर नी होत ।२।

सोला क झाड प चेंग कन्
कोनी च अकादर नी होत
चींटी माकोडा को हर घर
सरप को च दर नी होत ।३।

मुंडा पर मानपान कन्
खरो सच आदर नी होत
पीठ पासअ की चुगली कन्
आपरो अनादर नी होत ।४।

जुगनू केतरा बी झलारे
अगास का चंदर नी होत
जुलूम जबरदस्ती कन्
कोनी देव इंदर नी होत ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

4 comments:

  1. बहुत ही मार्मिक रचना अभिनंदन जी

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    1. हृदय से आभार जी 🙏🙏

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