निर्माण - भाग ४
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अनिश्चितता के बादल साइट पर मंडरा रहे थे . एक कदम आगे जाना और दो कदम पीछे आना , ऐसी हालत लग रही थी . फिर भी चलती का नाम गाडी ! अब हमारी एक साइट के लिए संपूर्ण प्रोजेक्ट का ' डिमार्केशन प्वॉइंट खोजो अभियान ' प्रारंभ हुआ . सभी मजदूर , स्टाफ काम मे जुट गये . निर्माण कार्य के schedule and specifications में ऐसे काम का कही भी जिकर नही होता है , लेकीन करना ही पडता है.. और ऐसे छूपे खर्च के कारण समय और धन का बहुत नुकसान होता है . और यह तो केवल झॉंकी थी !
प्रोजेक्ट ड्रॉइंग के अनुसार प्वॉइंट खोजे गये . और जो प्वॉइंट नदारद थे , उन्हे स्थापित किया .
' सर , कल फॉरेस्ट ऑफिसर को साथ लेकर आइए .' मैने कार्यपालक इंजिनिअर से कहा .
' हां , उन्हे तो लाना ही होगा . आप चिंता न करें .' कार्यपालक इंजिनिअर ने कहा .
दुसरे दिन सुबह डिपार्टमेंट के सभी इंजिनिअर , प्रोजेक्ट मॅनेजर , फॉरेस्ट ऑफिसर और उन का स्टाफ साइट पर पहुंचे . किसी उत्सव जैसा माहौल लग रहा था .
चाय पिते हुए इंजिनिअर फॉरेस्ट ऑफिसर को ड्रॉइंग समझा रहे थे . फॉरेस्ट ऑफिसर को ड्रॉइंग कितनी समझ में आई , यह तो यक्षप्रश्न था !
थिओडोलाइट यंत्र , लेवल स्टाफ , मेजरिंग टेप , रेंजिंग रॉड , चुना , कुल्हाडी , फावडे लेकर सभी सीमा दर्शन के लिए निकल पडे जंगल मे ! दोपहर तक आधा कार्य हुआ . खानसामा ने सहायता के लिए कुछ मजदूरों को साथ लेकर सभी के लिए खाना तैयार किया था . कैम्प आ कर सभी ने भोजन किया और फिर जुट गये अपने अभियान मे ! अंधेरा छाने लगा था . अभी भी कुछ प्वॉइंट देखना और चेक करना बचा था .
' बाकी प्वॉइंट कल चेक कर लेंगे सर ...' कार्यपालक इंजिनिअर ने फॉरेस्ट ऑफिसर से कहा .
' ठीक है.. अभी तक तो आपकी सीमाएं ठीकठाक ही दिख रही है.. आप मुझे प्रोजेक्ट ड्रॉइंग , अलॉटमेंट लेटर , सैंक्शन लेटर की एक - एक कापी दे दिजीए..' फॉरेस्ट ऑफिसर ने कहा .
' कल से कार्य शुरू कर सकते है ना ? ' कार्यपालक इंजिनिअर ने पूछा .
' हां , कोई दिक्कत नही है सर ... देखिएं , हमें जांच - पडताल तो करना जरूरी है.. आप अन्यथा न ले.. ' फॉरेस्ट ऑफिसर ने कहा .
' जी सर.. यह तो ड्युटी का हिस्सा है.. आपके सहयोग के लिए आभार ! ' कार्यपालक इंजिनिअर ने हाथ मिलाते हुए कहा .
सभी ने राहत की सांस ली .
चांदनी रात की दुधिया रोशनी में जंगल नहा रहा था . लेबर कैम्प के आगे चुल्हें जल रहे थे . चुल्हों की लाल - पीली लहराती रोशनी मॉं अन्नपूर्णा की आरती कर रही थी . कैम्प के मैदान मे लगे हैलोजन बल्ब के उजाले में कुछ युवक डफ बजा कर गा रहे थे छत्तीसगढी लोकगीत !
आज अध - रतिहा
मोर फूल बगिया मा
आज अध - रतिहा हो....
चन्दा के डोली मा
तोला संग लेगिहव
बादर के सुग्घर
चुनरिया मा रानी
आज अध - रतिहा
मोर फूल बगिया मा....
चन्दा के डोली मा
बड ड - र लागे
बड निक लागे
तोर गलबहियां मे
बड़ निक लागे
तोर गलबहियां मे
आज अध - रतिहा
मोर फूल बगिया मा
आज अध - रतिहा हो.....
( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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