आखिरी बार
आखिरी बार देखा गया था
आसमान से टूटता तारा
टूटे प्यार के कसमे - वादें
डूब गया प्रीति का सितारा ।
आखिरी बार देखा गया था
बुझता सिसकता अंगारा
राख मे खोजता फिरता
स्मृति अवशेष का जखीरा ।
आखिरी बार देखा गया था
शुभ्र दुपट्टे का उजियारा
मजबूरी का आलम देखो
चारों ओर फैला अंधियारा ।
आखिरी बार देखा गया था
टूटे पंख का नादान भौरा
जलना उसकी फितरत
सांसों का बन गया धुंवारा ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख, नागपूर
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