तुम हो तो ही हम है
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यह अनंत दुनिया
अजब भूलभुलैया
कुछ कुछ वहम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
रिश्तें - नाते अनगढ़
कुछ भ्रांतियां सुघड़
कुछ मीठे भरम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
श्रध्दा रहित बंदगी
बेतरतीब जिंदगी
तुम्हारे ही करम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
कुछ अनकहे बोल
प्रीत सदा अनमोल
बाहु झुला क्या कम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
कंकन किंकिनि धुन
पैंजनी की रुनझुन
बातों में सरगम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
समर्पण की आहुति
अद्वैत की परिणति
साथ हर जनम है
_ तुम हो तो ही हम है ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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