अजब गजब - ८८ : सूर्व्य मंदिर , भाटुन्द
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
आदित्य : सविता सूर्य : खग: पूषा गभस्तिमान् ।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ।।
राजस्थान म पाली जिला क बाली तहसील म भाटुन्द गाव स . बाली पासीन २१ कि.मी. दूर येनअ गाव की आबादी ६/७ हजार की स . भाटुन्द गाव पह्यले सिरोही रियासत म होतो . इ गाव सिरोही दरबार किथीन ३६०० बिघा जमीन दान क रूप म सिरी आदोरजी महाराज ला भेटीती . गाव को नाव धरन साठी आदोरजी महाराज न येक भाट ला बलायो . भाट न महाराज क मुंडा मिन बार बार वोकअ जात को नाव लेन क कारन , वोनअ ' भाटुन ' नाव सुझायो . बाद म भाटुन को भाटुन्द नाव पड्यो .
भाटुन्द देवी - देवताना का मोठा मोठा देऊर स . तेकन भाटुन्द ला ' देव की नगरी ' बी कव्हस .
भाटुन्द गाव अरावली पहाडी क पच्चीम अन् जवाई बॉंध क पूरब म स .
भाटुन्द गाव म खेमकरण माता , सीतला माता , पोरी ढार हनुमान जी , चेतन बालाजी , लक्षुमी नारायण , भदरेस्वर महादेव , परसुराम , वाराई माता , रामदेव बाबा , आसापुरा माता , सिरी बाला हनुमान , बरमा जी , कालभयरव का परसिध्द देऊर स . सती माता की छतरी , आदोरजी महाराज की छतरी स .
६ व सदी वरी सूर्व्य पूंजा को घाडो रिवाज होतो . इ.स. ६०० पासीन १४०० वरी सिरोही रियासत क हर गाव म सूर्व्य मंदिर होता .
भाटुन्द म बी परसिध्द सूर्व्य मंदिर स .
इतिहास अन् मान्यता : * ११ वी सदी म , भाटुन्द गाव म चक्रवर्ती राजा भोज देव न येक मोठो तलाव खांद कन् वोकअ काठा प परसिध्द सूर्व्य मंदिर बांध्यो .
* कई सदी पह्यले यहान येक राकस को उबद्रो होतो . वोकअ भेव कन् गाव म येक बी बिह्या नी होत होतो . बिह्या म फेरा क बखत वू लाडा ( वर ) ला खाय डावतो . तेकन यहान क पोटी संग कोनी बी बिह्या करन साठी राजी नी होत होता . इ हाल देख कन् पंडित लोगना न सीतला माय की घोर तपस्या करी . सीतला माय परसन्न भयी . माय न कह्ये क , तुमी बिह्या की तयारी करो , मु तुमाला बाचाडून . फेरा क बखत जसो राकस आयो , उसो च सीतला माय न तिरसूल कन् वको वध कऱ्यो . मरन क बेरा राकस न कह्ये , माय म्हरी खान - पेन की इच्छा स . सीतला माय न राकस ला वरदान देयो क , साल म दुय डाव तोला अन - पानी भेटेन . तेकन हर साल चयीत मह्यना क उजरी ( चांदनी ) सपतमी ( सीतला सपतमी ) अन् जेठ पुनव ला यहान सीतला माय को मोठो मेलो भरस . सीतला माय क आघअ येक फिट गहऱ्यो दगडी उखर ( ऊखली ) स . पुरो गाव वोमअ घडा कन् पानी डावस , पर वू भरत नी . येतरो पानी कहान जास , यको पत्तो नहाय ! इ पुरो पानी राकस पेस , असी मान्यता स . आबअ वरी वोमअ ५० लाख लिटर परस जास्त पानी डावना म आयेस .
* १३ वी सदी म अलाउद्दीन खिलजी को कहर बरप्यो . चित्तोडगढ जितन क बास्त वोनअ जालौर रियासत पर हमलो कऱ्यो . जालौर जान क बेरा अलाउद्दीन खिलजी भाटुन्द गाव परीन च गयो . तब आपरो धरम बाचाडन साठी आदोरजी महाराज न १८ परिवार सहित लाखा जौहर कऱ्यो . या घटना रानी पद्मिनी क जौहर क बास्त ६ मह्यना बाद की स .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
ओम भास्कराय नमः
ReplyDeleteअद्भुत जानकारी जय हो
धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏
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