निर्माण - भाग ३
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साइट से ५ कि.मी. दूर जंगल मे ही एक छोटासा गांव था . लेकीन विशिष्ट इलाका होने से वहाॅं पुलिस थाना भी था . मोटरसाइकिल चर्च के बगल से गल्ली मे मुडी . इस घने जंगल के इस छोटेसे गांव मे चर्च भी ! मुझे अचरज हुआ . गहरे रंग से पुते हुएं घर के आंगन मे मोटरसाइकिल रुकी . उसके पीछे हम भी रुके . ड्रायव्हर को जीप मोड कर लाने को कहा और मै उतरा . चाय के साथ मुखिया से बातें हो रही थी . मुखिया मेरे व्यक्तिगत जीवन के उत्खनन मे लगा था . मै गोल मोल परतें चढ़ा रहा था . आखिरकार बात लेन देन की पटरी पर आई . वह बोले की महिने का ५०,००० रुपया लगेगा . मैने साफ इन्कार किया . जोड तोड होता रहा . अंत मे ५,००० रुपये मे बात तय हुई .
मै वापिस साइट आया . स्टाफ , ठेकेदार सभी साइट ऑफिस मे इकठ्ठा हुएं .
' क्या हुआ साहब ?' स्टाफ ने पूछा .
' कुछ नहीं.... उसे हर महिने कुछ रकम देनी होगी.. बस् !' मैने पानी पिते हुए कहा .
' अजीब बात है..' ठेकेदार ने कहा .
' जैसा देश वैसा भेष ! तेज रफ्तार से काम करो और यहाँ से निकलो , यही एक उपाय है .' मैने कहा .
अब साइट तणावमुक्त थी . डिपार्टमेंट को इस बात के बारें मे अवगत कराया . वैसे तो डिपार्टमेंट के स्टाफ भी यहाँ खूश नही थे . वे भी इसी कोशिश मे रहते थे की , जल्द से जल्द यहाँ से ट्रान्स्फर हो .
पानी के बोरवेल खुदवाई . काम के लिए गढ्ढे का पानी इस्तेमाल करने लगे . बिजली की सप्लाई भी आई . अब दो शिफ्ट मे काम होने लगा . साइट के बीच पानी के लिए तीन टंकियां बनवाई . गांव के मजदूर भी काम पर आने लगे . जंगल मे निर्माण पर्व चल रहा था .
लेकीन बिना बाधा कोई पर्व संपन्न हो , ऐसा तो हो नही सकता ! मै साइट से ५० कि.मी. दूर शहर मे डिपार्टमेंट के ऑफिस गया था . इंजिनिअर से बातचीत ही कर रहा था की सुपरवाइझर मुझे खोजते हुएं वहॉं पहुंचा .
' साहब , जल्दी साइट पर चलिएं . फॉरेस्ट के साहब ने काम बंद करवाया है , और आपको तुरंत बुलाया है .' सुपरवाइझर ने कहा .
' ठीक है , तुम चलो , मै आ रहा हू .' मैने कहा .
अब यह कौनसा नया पंगा खडा हुआ है ? , मै मन ही मन बुदबुदाया .
मैने इस बारें मे कार्यपालक इंजिनिअर से बात की . उन्हे साथ लेकर मै साइट पहुंचा . फॉरेस्ट ऑफिसर गुस्से मे था .
' किस की इजाजत से यहाँ काम चल रहा है ? आप सभी को अभी के अभी अंदर करवा सकता हूं .' फॉरेस्ट ऑफिसर ने आते ही धमकी भरे लहजे मे कहा .
' साहब , यह जगह हमारे प्रोजेक्ट के लिए अलॉट हुई है . ' कार्यपालक इंजिनिअर ने कहा .
' कहॉं है डिमार्केशन , अलॉटमेंट लेटर ?' फॉरेस्ट ऑफिसर ने पूछा .
' साहब , लेटर तो ऑफिस मे है , अभी मंगाते है . और लेटर के अनुसार ही डिमार्केशन हुआ था , वह सफाई कर के कल आपको दिखाता हूं .' कार्यपालक इंजिनिअर ने कहा .
' यह काम तो आपको पहले करना चाहिए था . काम बंद रखो . अब यहाँ बाहर से ना कोई मटेरियल आएगा , ना ही बाहर जाएगा . मै दो दिन का समय देता हूं . तब तक पूरी कार्यवाही हो जानी चाहिए . नही तो यहाँ का सामान , मटेरियल , मशिनरी सब जब्त होगा और आप लोगों पर मुकदमा दायर होगा .' फॉरेस्ट ऑफिसर ने कहा .
फॉरेस्ट ऑफिसर गया . काम बंद हो गया .
' मै ऑफिस से लेटर , ड्रॉइंग , इंजिनिअर भेजता हूं . डिमार्केशन के कुछ प्वॉइंट तो मिल ही जाएंगे . आप चिंता न करें .' कार्यपालक इंजिनिअर ने कहा .
जीप उन्हे लेकर गयी और हमारा पुराने डिमार्केशन प्वॉइंट खोजने का अभियान शुरू हुआ . ( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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