Monday, April 25, 2022

अज्ञात..

अज्ञात

कुछ खास नर्म अहसास
खट्टे मीठे अनमोल पल
ज्ञात रोशनी में धुंधले से
राह रोके उत्तुंग अचल ।

सीमारेखा मद्धिम मद्धिम
भ्रम आभास जैसा अतल
आती रहस्यमय आवाज
धीरगंभीर सी कलकल ।

चेहरा छप न सका और
स्मृति के हुएं बंद पटल
गूढ़ता का लबादा भी स्याह
भरमाना तो है ही अटल ।

भावना कुछ संवेदनाएं
खिल रही कोमल कोंपल
अज्ञात व्यक्ति भी दृश्यमान
स्नेहबंध में झूमा कमल ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

No comments:

Post a Comment