अज्ञात
कुछ खास नर्म अहसास
खट्टे मीठे अनमोल पल
ज्ञात रोशनी में धुंधले से
राह रोके उत्तुंग अचल ।
सीमारेखा मद्धिम मद्धिम
भ्रम आभास जैसा अतल
आती रहस्यमय आवाज
धीरगंभीर सी कलकल ।
चेहरा छप न सका और
स्मृति के हुएं बंद पटल
गूढ़ता का लबादा भी स्याह
भरमाना तो है ही अटल ।
भावना कुछ संवेदनाएं
खिल रही कोमल कोंपल
अज्ञात व्यक्ति भी दृश्यमान
स्नेहबंध में झूमा कमल ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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