माय त् माय रव्हस
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
माय त् माय रव्हस , केती आरती गावनो
देस जलम वा माय , केती किरती गावनो
पर रिवाज ला देखो , बिह्या म बदले नाव
माय बनन साठी वा , सोडस आपलो गाव ।धृ।
माय त् माय रव्हस , जीव को कुप रव्हस
आतो , भाऊज , मावसी , सास , चुलती , मामी , जीजी
बू , लाडी न् सेजारीन , माय को रूप रव्हस
गार आमारऽ मुंडा की , वोमऽ काह्ये माय को नाव ? ।१।
जास लेकन दायजो , घर को मानसन्मान
सोनो नानो खानो पेनो , येमऽ स का माय को मान
वोको चित मन देखो , काहे लगावो जी भाव ।२।
रात दिन मरमर , वोला किंमत नहाय
वोकऽ काम की गिनती , पैसा म कही नहाय
वोकी सास - आस देखो , वोला बी लागस झाव ।३।
तोरी धन दवलत , वोको मोठो अभिमान
माय जिमिन की माती , भारी तुरसी को पान
दुय बोल स्यहद का , तुमी बोलो येक डाव ।४।
नको करू पूंजापाती , वा तऽ दिवा की बाती
येक कोरा दुय डोरा , रस्तो दिखाडस जोती
तुमारी तकलिफ करे , वोकऽ हिरदा म घाव ।५।
रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
माय की महिमा निराली है। खूब साजरी रचना जी 🙏
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏
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