Sunday, May 9, 2021

माय त् माय रव्हस. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय त् माय रव्हस 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

माय त् माय रव्हस , केती आरती गावनो
देस जलम वा माय , केती किरती गावनो 
पर रिवाज ला देखो , बिह्या म बदले नाव
माय बनन साठी वा , सोडस आपलो गाव ।धृ।

माय त् माय रव्हस , जीव को कुप रव्हस 
आतो , भाऊज , मावसी , सास , चुलती , मामी , जीजी
बू , लाडी न् सेजारीन , माय को रूप रव्हस 
गार आमारऽ मुंडा की , वोमऽ काह्ये माय को नाव ? ।१।

जास लेकन दायजो , घर को मानसन्मान
सोनो नानो खानो पेनो , येमऽ स का माय को मान
वोको चित मन देखो , काहे लगावो जी भाव ।२।

रात दिन मरमर , वोला किंमत नहाय
वोकऽ काम की गिनती , पैसा म कही नहाय 
वोकी सास - आस देखो , वोला बी लागस झाव ।३।

तोरी धन दवलत , वोको मोठो अभिमान
माय जिमिन की माती , भारी तुरसी को पान 
दुय बोल स्यहद का , तुमी बोलो येक डाव ।४।

नको करू पूंजापाती , वा तऽ दिवा की बाती 
येक कोरा दुय डोरा , रस्तो दिखाडस जोती
तुमारी तकलिफ करे , वोकऽ हिरदा म घाव ।५।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. माय की महिमा निराली है। खूब साजरी रचना जी 🙏

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