Sunday, May 2, 2021

अजब गजब - ६३ : जगनेर गढ़. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६३ : जगनेर गढ़ 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पसचिमी उत्तर परदेस म आगरा परीन ५० किमी. दूर राजस्थान क हद ला सट कन् राजा जगन को जगनेर गढ़ स . अरावली क उच्ची पहाडी प लाल पत्थर कन् बने येनऽ गढ़ ला पह्यले ' उंचाखेडा ' कवत होता .
जगनेर गढ़ की बनावट चितौडगढ़ सरीखी स . जगनेर क भवताल धौलपुर , भरतपुर , आगरा पट्टा म १४६८ परमार गाव स . 
१. इतिहास अन् मान्यता : * जगनेर किल्ला ला १० वी सदी म आल्हा उदल क सग्गऽ मामा न बनायेस , असी मान्यता स . आल्हा उदल मनजे आल्हा सिंह अन् उदय सिंह . वूई मोठा पराक्रमी वीर होता . आल्हा उदल को मामो महोबा नरेस राजा जयपाल सिंह होतो . येक डाव सिकार खेलन साठी राजा जयपाल सिंह ग्वालियर परीन आगरा जवर आयेतो . वोला यहान की आबोहवा घाडी रुची . आन् वोनऽ जगनेर ला किल्लो बांध्ये , जेला जयगढ़ कोत होता . 
* जगनेर गढ़ ला समराट विक्रमादित्य न बनाये , असी बी मान्यता स . 
* १३ व सदी म मालवा पर मुसलमान लोगना को कब्जो भया कन् वहान का परमार चार कितऽ फयल्या . वोम की येक पाती का बंसज असोक मेवाड म आया . वून की च येक पाती न जगनेर पर राज कऱ्यो . महाराणा सांगा न येक परमार पाती ला बिजौलिया की जागीर देयी , असी मान्यता स . 
* असोक को नानो भाई स्यंभू सिंह महाराष्ट्र म पूना , अहमदनगर इलाखा म आयो . 
* यादव बंस , चंदेल बंस क बाद यहान परमार बंस को राज रह्ये .  ' आल्हा खंड ' का रचयिता , राजा जगन सिंह न राज करे . वोकऽ राज म येनऽ गढ़ आन् बसती को नाव ' जगनेर '  पड्यो . जगनेर क सिवमंदिर म जगन राजो हररोज पूंजापाती करत होतो . 
* जगन सिंह राजा को राज मोठो आसकाऱ्योतो . इ.स. १६०३ म जगनेर पर मुसलमान राज्या को हमलो भयो . येनऽ लढाई म राजा जगन सिंह ला वीरगती भेटी . तब रानी जमुना कंवर न सती जान को हठ धरे . पर दरबार क लोगना न कह्ये क , तुमी पेटसीन स . तुमी सती गया त गरभ क जीव क हत्या को पाप लागेन . लढाई चालूच रही . जब आखरी म कोनतो च रस्तो नी बाच्ये त रानी जमुना कंवर न आपलो धरम बाचाडन साठी पेट म खंजर खुपसकन् जीव देयो . 
* राजो जगन सिंह ग्वालियर क गुरू रिसी गालव को मोठो भगत होतो . रिसी गालव ला जब राजा जगन सिंह क लढाई की खबर मालूम पडी त वूई गायकी को रूप धर कन् जगनेर ला आया . वून न जगनेर ला च आपलो ठानो बनायो आन् मरत पावतर वहान च रह्या . जगनेर गढ़ म वून को देऊर स . वूई गायकी का रूप धर कन् आयाता , तेकन लोगना म वूई ' ग्वाल बाबा ' क नाव कन् परसिध्द भया . साल म येक डाव पुनव ला जगनेर म यातरा भरस , जेला लखी मेला कोस . हर पुनव आन् इतवार ला ग्वाल बाबा क देऊर म मोठी पूंजा रवस . 

( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढा जी , जोधपुर ) 
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

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