Tuesday, May 18, 2021

मन ला भरांती ( भोयरी अभंग ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मन ला भरांती
( भोयरी अभंग )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

घुप अंधारा म , बिघड्यो तंतर  
उजिड मंतर , जीव साठी ।१।

राग तम माया , जीव को जंजार
पावन घंगार , न्हावन ला ।२।

गाडो जिंदगानी , जोड को जंतर 
सास को अंतर , वोकऽ पाई ।३।

चित की च बानी , नहाय गंतर 
रोवस अंतर , हरमेस ।४।

मन ला भरांती , दिसस संतर 
लिंबू को अंतर , चिन्हे नही ।५।

ताल बिघडेस , डोरा म अंगार
सपना भंगार , वांझोटा च ।६।

आस को अकाल , उपाव खंगार 
अडी को अंबार , काटा कुटा ।७।

धाय धाय कन् , हारपी मातर 
सुख क खातर , भागादौडी ।८।

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

2 comments:

  1. मोरो तोरो सब मन को भरम। खूब साजरी रचना

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