Monday, May 25, 2020

राग लोभ भोयरी कविता

⚜ राग लोभ ⚜

मन खाकस को दानो
मन पहाड कं वानी
राग लोभ झुलापर
वोकी बदले कहानी

        असो माया को जंजार
        नही उखलत ग्यानी
        बुने जारो कातिन को
        वोतरीच जिनगानी

कबं इतं कब उतं
झलकस चित् पानी
खेल देवाजी को न्यारो
निरी आपलीच बानी

        सुदं सादं बिचार ला
        लय कंगोरा की अनी
        धरे जोगड्या को फेर
        मन बायंडर वानी

सत् असत् झगडो
दुय दिन जिनगानी
उटारेटा कं माट्यानं
करी येतरी धूरधानी

✒©️ सुरेश महादेवराव
           देशमुख , नागपूर

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