लक्ष्य ( कविता )
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जिंदगी का लक्ष्य सामने
रास्तें नित नये आजमाना ।
तपना श्रम की भट्टी मे
व कुंदनसा चमकना ।
धर्म अर्थ काम मोक्ष के
चारों पुरुषार्थ निभाना ।
खोज लेना अपने हिस्से की
जमीं , आसमां , आशियाना ।
काल के भाल पट पर
कुछ निशान छोड जाना ।
रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बहुत ही अच्छी कविता जी 🙏
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