Sunday, September 26, 2021

अजब गजब - ७७ : माय माल्हण बाई. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७७ : माल्हण बाई
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

देवी दूलाईह , सुरराई शग त्यां शिरै ।
मालण मंहमाईह , वसै विराई विसहय ।।
( डिंगळ बोली - दोहा )
राजपूतां मां राजवी प्रबल वंश परमार 
म्हालण धरा माड री आय लियो अवतार ।
धिन हो परमारां धीवडी , रंग हो जानरै राय 
वेरू घर वीस हाथी , अवतरी म्हालण माय ।

राजस्थान क जयसलमेर वालऽ इलाखा ला पह्यल ' माड देस ' कवत होता . १२ व सदी क सुरवात पासिन यहान राजा वेरू ( बेरीसाल ) परमार को राज होतो . आन् माड देस क राज की राजधानी होती ' जानरा '!
* उसो त जानरा कयी नाव कन् परसिध्द स : जानरागढ़ , जानरा पाटण , जूना जानरा , जूनागढ़ . 
* बेरीसाल परमार राजा का दुय पोटूना परसिध्द भया . १. जागा २. वरण . 
जागाजी का वंसज जानरा का राज संभालता आन् वरण जी का वंसज वरणागांव का राज संभालत होता . जागाजी का वंसज हरया जागाजी न वि.स. १४५५ म धाट ( पाकिस्तान ) म ' हरयार ' नाव की जागीर की स्थापना करी . 
हरयो हरयाणै , अमराणै अवतार 
दो घर धज बंधी , पृथ्वी बडा परमार ।
* असा राजा वेरू ( बेरीसाल ) क  कुर म म्हालण बाई क रूप म माय जगदम्बा न अवतार लेयो . जागा , वरण की बहिन ' माय म्हालण बाई '! म्हालण स्यबद डिंगल बोली को होय . म्हालण को मतलब होस :  खुसी , बरकत , मंगल !
* म्हालण बाई का कयी नाव परचलित स : मालू म्हालण बाई , म्हालण आई , वेराई म्हालण माई , मुगटाली , माडेची , तलैरी धणियाली , चंवरै री धणियाणी , पटोला परमार , नवलाख लोहडीयाली , हरयारराय , म्हालण सरराय , जानरैराय , धोळा मढ़ धणियाणी . हरयार धाम ( पाकिस्तान ) म म्हालण बाई की पूंजा म्हालण आई क नाव कन् करस . 
* म्हालण बाई का मूलधाम : १. जानरागढ़ २. हरयार धाट ( पाकिस्तान ) ३. धोळा मढ़ ( वरणा ) . 
* जगदम्बा अवतार म्हालण बाई न नाना लीला अन् आसिरवाद  कन्  लोगना को उध्दार करे आन् समाज म धरम नीति , न्याव की थापना करी . लोगना को भरम आन् भेव निकार कन् धरम उन को धरम म बिसवास पयदा करे . म्हालण बाई क वंसजना को भक्तिभाव म झुकाव जास्त स . 
* राजा वेरू ( बेरीसाल ) का वंसज राज करन साठी जहान बी गया , वहान वून न म्हालण बाई ला कुर देवी मान कन् पह्यल माय का ठाना  बनाया  ! 
* म्हालण बाई क गवरव गाथा को यसगान जयसलमेर , बाढ़मेर , बिकानेर , जोधपुर , गुजरात , धाट ( सिंध ) आन् कयी इलाखा म गावस . हर जागा प म्हालण बाई का भव्य देवरा ( देऊर ) , मंदिर स . येकऽ बास्त रोहिडाला ( हरसाणी ) , हरसाणी , मगरा ( कोठाधाम ) , दवाडा , म्हालणसर ( बिकानेर ) , संतोसनगर ( बिकानेर ) , जयसलमेर , बाडमेर , जोधपुर , झिनझिनयाली , लापूदडा यहान बी म्हालण बाई का परसिध्द देऊर स . 
१. मेलो : * जानरागढ़ : भादवा सुदी १४ , हरयार : माघ सुदी १४ . 
२. पेई की महिमा : हरयार धाट ( पाकिस्तान ) क धाम म आब बी म्हालण बाई को भाई जागाजी का वंसज सेवा करस . म्हालण बाई माताजी की मूरती चंवरा ( झोपडा ) म येक काठ ( लकडी ) क संदूक म बिराजस . संदूक ( पेटी ) ला सिंधी भास्या म " पेई " कोस ! या पेई ( पेटी ) हर तीसरऽ साल खुलस , तब च मातेस्वरी का दरस्यन होस . येन संदूक ला तालो लाग्येस पर वोकी चाबी ( किल्ली ) नहाय . तीन बरस बाद इ तालो ( कुलूप ) आपरंग च उघडस . येला ' पेई खुलना ' कोस . 
* या बंद पेटी जगा कुम्भार ला सापडी . तब पासिन ( ९०० बरस पासिन ) या परंपरा स . 
३. म्हालण बाई की ओरण : म्हालण बाई का जहान जहान देऊरना ( ठाना ) स , वहान देऊर क भवताल मोठो पडित ( गायरान )  अन् जंगल स . ( महाराष्ट्र म जसी देऊर की ' देवराई ' रव्हस उसी .) येन गायरान ( गोचर भूमि ) अन् रमनिक रान ला ' ओरण ' कोस . यहान गाय , बकरी , ढोर डंगर संगच हरन , ससा , सांबर , निलगाय सरखा जीव जनावर आन् मोर , बगला , चिरैय्या असा केतरा क पाखरूना रव्हस / चरस . येन देऊर क ओरण ला चवकीदार नी रवत . माय माल्हण बाई क नाव क महिमा कन् च झाड झडुला , ढोर जनावर , जीव जंतू , पाखरूना को बचाव होस . 
* मुख्य ओरण : जानरा , हरयार धाट ( पाकिस्तान ) , रोहिडाला , मगरा ओरण .
🚩 माता म्हालण बाई की जय .🚩

( सहयोग : इंजि. जालिमसिंह जी सोढा जोधपुर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


2 comments:

  1. खूब साजरी जानकारी अभिनंदन

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