Friday, September 3, 2021

अजब गजब - ७६ : लोद्रवा. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ७६ : लोद्रवा
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

काली रे काली काजळिये रे रीख दूर
ओ जी रे कोई मोरिये रे बाखर में चमके बिजली रे
ढोले रे मूमल हाजी रे पिया रे प्यारे रे मूमल
हाले हाले रे ले चालू ओन्दा थारे देस में ।

हा दो टेड मूमल रा आडा मियल रे
ओ जी रे कोई होठ मूमल रा कसमूल डोर रा
ढोले रे मूमल हाजी रे पिया रे प्यारे रे मूमल
हाले हाले रे ले चालू ओन्दा थारे देस में ।

लोद्रवा क इलाखा ला मांढ ( मांड ) कव्हत होता , आन् मांढ इलाखा क बोली ला बी मांढ बोली च कव्हत होता . जयसलमेर क येन इलाखा क गाव गाव म गुंजस लोद्रवा की राजकुमारी ' मूमल ' अन् अमरकोट क राजकुमार ' महेंद्र ' की अमर प्रेम कथा लोकगीत मिन !
राजस्थान म जयसलमेर पासिन १५ कि.मी. दूर स लोद्रवा गाव , जहान कबऽ नांदत होतो परमार वंस को वयभवस्याली राज !!
सरस्वती नदी की उपनदी ' काक ' नदी , आन् वोक काठा प बसेतो लोद्रवा ! लोद्रवा पुरानऽ बेपारी रस्ता पर को मुख्य ठानो होतो. १० मयील फयलाव वालऽ येन नगर ला १२ दरुजा होता .वोन जमाना म  खेती कास्तकारी कन् पुरो इलाखो हिवरो हिवरो होतो . आब रेत क खलतऽ दबे इ लोद्रवापुर  ,  वोन बेरा को मोठो धनसंपन राज होतो . जब जयसलमेर बने बी नी होतो , वोक पह्यले पासिन लोद्रवा को मोठो आसकारो होतो !
१. इतिहास अन् मान्यता : * धारानगरी क परमार राजा धंधमार को पोरग्यो ' राजा भाण ' ( नृपभान / भानुप्रताप ) न बिकरम संवत् ६७५ म ' लोद्रवा नगर अन् राज ' की थापना करीती . या परमार वंस की लोढा / लोद्रवा पाती बनी .  तब जयसलमेर को नावनिस्यान बी नी होतो . 
* आघ क पीढी म राजा लोद्र भयो . वोन लोद्रवा म सिवमंदिर बांध्ये . 
राजा लोद्र ला चार पोटूना होता . सागर , परताप , राज अन् लोद्र ( दुसरो ). राजा लोद्र क बास्त , मोठो पोरग्यो सागर राजो बन्यो . 
* राजा सागर परमार ला ११ पोटूना भया . पर बयीद क पकड नी आवनी वाली बिमारी कन् वोम का ८ पोटूना देव घर गया . बाच्या तीन पोटूना की तब्येत बी तोरा मासा च होती , वूई बाचेन क नी बाचेन यको भरोसो नी होतो . 
तेकन राजा सागर परमार हरदम दुखी रवत होता . तब राजधानी म जैन संत सिरी जिनदत्त सूरी आपलऽ दलबादल सगट आया . येन संत की मोठी महिमा गाज रयीती . राजा न बिचार करे क , संत क आसिरवाद कन् बाच्या तीन पोटूना की तब्येत ठीक होय जायेन . संत न कह्ये क तुमारा पोटूना बिमारी काहाडूस परि तुमाला जैन धरम लेनो पडेन . पोटूना की तब्येत आन् राज साठी राजो राजी भये . संत न आपलऽ स्यक्ति कन् सबन पोटूना की तब्येत चांगली करी . राजा सागर परमार न मोठो पोरग्यो कुलधर ला राजपाट देये आन् सिरीधर , राजधर येन पोटूना संग जैन धरम लेयो . लोद्रवा म जैन देऊर बांध्या . 
* आघ क पीढी म राजो नृपभानु सिंह बन्यो . वोपर यदु वंसी देवराज भाटी न धोखा कन् हमलो कऱ्यो , आन् परमार वंस क राज ला खतम कऱ्यो . बाद म लोद्रवा प मुसलमान का हमला बी भया . येन दुय हमला कन् लोढा / लोद्रवा वंस ला राजस्थान सोडनो पड्यो . वून न आपरी पह्यच्यान / वरख लुकावन साठी दलवी ( दलपति ) इ नाव धऱ्यो . वासिन वूई गुजरात , महाराष्ट्र अन् मध्य परदेस म फयल्या . 
* १२ व सदी म दलवी देवगीरी क यादव राज म दलपति ( सेनाप्रमुख ) बन्या . 
* १३ व सदी म यादव राज को मुसलमान हमलावर न नास करे . तब दलवी बहामनी राज घोडादल का परमुख बन्या . 
* १७ व सदी म दलवी छत्रपती सिवाजी महाराज क फऊज म भरती भया . येन कार म वून ला ' देसमुखी ' भेटी . तब पासिन वून की वरख ' दलवी देशमुख ' पडी . 

( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर




2 comments:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी अभिनंदन

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏🙏

      Delete