यादें
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स्वाती नक्षत्र मे सीप में बस जाती
रंगीन पलों के इंद्रधनुष में रच जाती
सावन की फुहार , फुलों की बहार
रोम रोम में यादें रच बस जाती ।
रोज उगता सूरज सुनहरी यादें लिए
रोज नींद की आगोश मे सोती है यादें
सुहाने ख्वाबों की सुरदीर्घिका मे
दुधीया रोशनी मे जगमगाती है यादें ।
बेहद प्रिय सभी यादों के हिरे मोती
याद नहीं , यादों का खजाना है
दिल में संजोये है हर पल को
यादों के संग संग ही जीना है ।
रचना : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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