Sunday, August 1, 2021

ध्वज. Hindi language _ हिंदी भाषा

ध्वज
Hindi language _ हिंदी भाषा

सुवर्णमयी धूप खिली सुबह की ठंड में
बच्चों की चहचहाहट गौरेय्या जैसी...
ध्वज के चबुतरे का सूर्ख रंग भी ताजा !
चबुतरे के चारों ओर सजाई रंगोली ; 
महकते फुलों से....
भुरे मैदान में सफेद चुनें की लकिरें
कंकड पत्थर , कचरा सब साफ
घर के आंगन जैसा... अपना सा ! 
ध्वज के पिछे शिक्षक वृंद , 
लेकिन पी.टी. के शिक्षक ध्वज के समीप...
सब बच्चें खडे कतार में . 
हेडमास्टर जी ने खोली ध्वज की धवल रस्सी 
तिरंगा सर सर चढा़ आसमाॅं पर 
और लहरा समुंदर के लहरों की तरह....
वहॉं से हुई पुष्पवृष्टी !
निले आसमॉं मे फैला तिरंगे का इंद्रधनुष !!
बहती हवा ने पकडा सूर..
... जन गण मन अधिनायक जय हे...
अब तिरंगे पर राष्ट्रगीत की धुन बह रही थी , 
गंगा समान पावन !
अपने परिवार की ओर देखा तिरंगे ने , 
अशोक चक्र की आंख से...
फडऽ..... फडऽ... फडऽऽ.....
ध्वज फडफडाने लगा जोरशोर से , 
अपने बच्चों के सर पर हाथ फेरने के लिए !
तिरंगे से निकले सारे रंग और , 
हरेक के सांसों में घुल गये , 
माटी की खुशबू जैसे !
विश्वास के अंतरिक्ष से आवाज गुंजा...
जय हेऽ.... जय हेऽ... जय हेऽ....
तिरंगे का हृदय भर आया ममता से 
उस की लहर से निले आकाश का समुंदर झलका...
टप्... टप्.... टप्.....!!

रचना : इंजि . सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


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