अजब गजब - ७८ : बीसहथ माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
यदुचितमत्र भवत्युररी कुरुतादुरुता पमपाकुरुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।
राजस्थान क जालौर किल्ला को नाव ' स्वर्णगिरी ' , अन् यहान परमार वंस को राज रह्ये . तब येन किल्ला म बीसहथ माता की थापना भयी . या बात स ८४३ बरस पह्यले की !
बीसहथ माता जैन समाज म कोचर , राजपूत समाज म परमार अन् राजपुरोहित समाज म सेवड़ गोत्र की कुलदेवी स .
आब बीसहथ माता की ( जालौर किल्ला वाली ) मूरती जोधपुर क भैरूबाग जैन तीर्थ परिसर म बिराजमान स .
बीसहथ माता सिंव्ह पर बसी स आन् दुय आंग भयरव की मूरतीना स . जेवनहाथ प पांढरो ( गोरो ) भयरव न डाख हाथ प कारो भयरव स .
बीसहथ माता ला बीस हाथ स , तेकन नाव पड्यो , " बीसहथ माय " ! बीसहथ माय क हाथ म अक्षमाला , कुऱ्हाड , गदा , बाण , वज्र , कमल फुल , धनुस , कुंडिका , दंडस्यक्ति , तलवार , ढाल , स्यंख , घंटा , मधुपात्र , शूल , पाश , चक्र स .
बीसहथ माय की सेवा - पूंजा पुजारी करस . पर माय को आंग धोवन को , कपडा पेहरवन को काम बाई लोग च करस .
१. इतिहास अन् मान्यता : * जालौर पर परमार राज होतो . परमार राजो मदन ब्रम्हदेव न बि . संवत् १२३५ ( इ.स. ११७८ ) म किल्ला पर " बीसहथ माय " की थापना करी . परमार राज क बास्त यहान चौहान वंस को राज आयो .
* इ.स. १३११ म जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी न हमलो कऱ्यो . तब वहान कान्हडदेव राजो होतो . राजा कान्हडदेव को पोरग्यो वीरमदेव रावल मोठो बाह्यदूर होतो . वीरमदेव ला बीसहथ माय को वरदान भेटेत्यो . जब लढाई होयेन तब वोका अस्तर स्यस्तर कब बी खतम नी होयेन ! माय बीसहथ वोला तलवार देती रहेन . पर येम येक बचन होतो.... वीरमदेव कब बी पास बीसहथ माय ला नी देखेन . आरपार की लढाई चाल रहीथी . वीरमदेव जीतन क काठा पर च होतो... तब वोन पास देख लियो... बस , बचनभंग भयो ! बीसहथ माय गुप्त भयी . अन् वीरमदेव ला वीरगति भेटी .
* पृथ्वीराज रासो पोथी म बीसहथ माय को जिकर स . सम्राट पृथ्वीराज चौहान को परसिध्द दरबारी कवि चंद वरदाई न बीसहथ माय क सम्मान म स्तुति छंद लिख्यो स .
* चौहान वंस क बास्त यहान राठौड वंस को राज आयो . बि. संवत् १८६० म राजा मानसिंग ला जोधपुर को राज भेट्यो . तब वून को सहयोगी मूथा सवाईराम कोचर न जालौर परीन बीसहथ माय की मूरती जोधपुर ला ल्याई . इ.स. १९३० म बीसहथ माय की जोधपुर म दुनन थापना भयी .
२. पर्व : * नवरात म रोज माय को खास अभिसेक होस .
* हरेक चयीत चांदनी ( उजरी ) अस्टमी ला हवन पूजन होस .
* जेठ चांदनी ( उजरी ) पंचमी ला अभिसेक होस आन् झ्यंडो चढस .
' जय जय बीसहथ माय '
( सहयोग : इंजि. जालम सिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
जय माता दी
ReplyDeleteअद्भुत इतिहासिक जानकारी
धन्यवाद जी 🙏🙏
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