Saturday, October 9, 2021

उपहार. Hindi Language _ हिंदी भाषा

उपहार 
Hindi language _ हिंदी भाषा

रास्ता भटक जाऊ मै
राह सही दिखलाना
भूल जाऊ धर्म कर्म
याद बलात् दिलाना ।

टूट कर बिखरा तो
कण कण जोड देना
हारे तन मन जब
उर्जा कृपा बरसाना ।

जिस कर्म से हो ग्लानि
दूर उससे रखना
घेर ले तम निराशा
आशा के दीप जलाना ।

जाऊ किसी भी दिशा में
पैर माटी के रखना
रहे लिखती कलम
यही उपहार देना ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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