Monday, October 18, 2021

रोज सूर्व्यदेव नवो ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रोज सूर्व्यदेव नवो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पत्तो सकारकन को
पुसे नी कोनी ला कोनी
गड्या मुर्दाना उखाडे
पास जावन की बानी ।१।

नाव कुर को गुताडो
वोकी रमाईस धुनी
धुव्वो फुक फुक कन
डोरा चुरचुऱ्या ग्यानी ।२।

खंती खांद खांद कन
काय भेटे कोनजानी
घाव कुरुप बाहाडे
होस आमारी च हानी ।३।

भागादौडी देस देस
भरनला पेटपानी
सपी केतरी पीढीना
सरी गनती निस्यानी ।४।

गयो उनारो हिवारो
बरसाद को गा पानी
मन सदसद्यो असो
कब आयेन बरानी ।५।

जीव आये जीव जाये
दुय दिन जिंदगानी
रागलोभ को झमेलो
सतावस मनमानी ।६।

रोज सूर्व्यदेव नवो
रोज नवीन कहानी
लिखो खुद क पाना प 
गीता रामायन मानी ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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