Thursday, July 8, 2021

अजब गजब - ६९ : राजगढ़ रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ६९ : राजगढ़
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मध्यप्रदेस म नेवाज अन् पारबती नदी क मंझार , मान्यागढ़ पहाडी क तलहटी बसेस राजगढ़ को किल्लो . छतरपुर पासिन राजगढ़ ५९ कि.मी. दूर स . 
१. इतिहास : * राजगढ़ को पुरानो नाव झंझनीपुर / झंडेपुर होतो . वोला उमाठवारा बी कव्हत होता . राजगढ़ ला इ.स. १६४० म  रावत मोहन सिंह क कार म बसायतो . तब वकी आबादी ३००० होती . 
* रावत छतरसिंह को वंस परमार अन् उपवंस उमठ होतो . उमठ परमार को पहलो राज ' उमावाडा ' होतो . इ.स. १४८८ म इन ला रावत उपाधी भेटीती . 
* राजधानी पह्यले दुपारिया ( शाजापुर जिलो )  , बाद म डुंगरपुर , बाद म रतनपुर अन् बाद म राजगढ़ बनी . 
रावत छतरसिंह ला मोहन सिंह अन् परसरामजी असा दुय पोटुना होता . ( कयी जागा प तीन पोटुना जिकर आवस . 
* इ.स. १६४५ म राजमाता ( रावत छतरसिंह जी की रानी ) क अनुमती कन् दीवान अजबसिंह महाल बनायो , जेला पाच दरुजा होता . इतवारिया , भुडवारिया , सूरज पोल , पनराडिया , नवो दरवाजो ; असा नाव का इ पाच दरुजा . राजगढ़ म राजेश्वर मंदिर , चतुर्भुज नाथजी मंदिर अन् नरसिंह मंदिर असा तीन पुराना देऊर स . 
* राजगढ़ का दुय हिस्सा स , येक ला बडामहल अन् दुसरा ला राजमहल कोस . बडा महल को बांधकाम इ.स. १६४५ म चालू भयो त् राजमहाल को बांधकाम इ.. १९३१ म चालू भयो . 
* ३०० बरस पुरानऽ राजगढ़ किला की राजपुर , मुगल , मालवा ' शैली ' स !
* रावत छतरसिंह क बाद रावत मोहन सिंह ( मोठो पोरग्यो ) राजो बन्यो . रावत मोहन सिंह को राज इ.स. १६३८ पासिन १६९७ वरी होतो . इ.स. १६८१ म  रावत मोहन सिंह ला राजगढ़ रियासत अन् रावत परसराम ला नरसिंगगढ़ रियासत भेटी . 
* १ जनवरी १८८६ , रावत बलभद्र सिंह क जमाना म , " राजा " या उपाधी भेटी . 
* रावत विरेंद्र सिंह को सर्गवास २६ अक्तुबर १९३६ म भयो . वून क बाद राजा विक्रमादित्य न १४ जनवरी १९३७ पासिन राज कऱ्यो . 
* इ.स. १९४८ म राजगढ़ रियासत को भारत देस म विलय भयो . वोन बेरा राजगढ़ की आबादी  ८८ , ३७६ होती . ११ तोफ की सलामी होती . राजस्व रु . ४५०००० अन् प्रिवीपर्स  रु. १४०००० होतो . 

( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढा जी , जोधपुर )

लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments:

  1. अद्भुत इतिहासिक जानकारी

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    1. धन्यवाद नन्दलाल जी 🙏

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